रविवार, 8 जुलाई 2012

हवाई जहाज में खाने का स्वाद क्यों उदासिन होता है?

यदि शीर्षक से आपको कुछ समझ में नहीं आए, तो कृपया मुझे कोसें नहीं.

यह पाठ संजीव कपूर के खाना खजाना के हिंदी पृष्ठों में से लिया गया है.

संजीव कपूर का खाना खजाना अंग्रेज़ी में लंबे समय से इंटरनेट पर उपलब्ध है, और यदा कदा अपनी जिव्हा को नया 'टेस्ट' देने वहाँ चक्कर लगाता रहता हूँ.

अभी उधर लंबे समय बाद जाना हुआ तो पाया कि हिंदी में पढ़ने का लिंक भी उपलब्ध हो गया है. जाहिर है उस लिंक पर तो जाना ही था.
परंतु वहाँ जाकर यह मिला -


ये भी मिला -


और ये भी :


आपके मुँह का स्वाद बिगड़ा या नहीं?

संजीव कपूर खाना खजाना  जैसे बड़े और स्थापित जाल स्थल से तो ये उम्मीद नहीं थी. जाहिर है, अंग्रेजी साइट का हिंदी में बेहद ही सड़ियल अनुवाद औने-पौने दामों में करवा दिया गया है. गनीमत, अर्थ का अनर्थ नहीं है नहीं तो कद्दू की सब्जी में करेले का स्वाद भी आ जाता!

12 blogger-facebook:

  1. ऐसी बहुत सारी साइटें मिल ही जाती हैं, जहाँ ऐसे अनुवाद रहते हैं।

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  2. एक बैंक में मुझे एक पोस्टर में यह पढने को मिला "सस्ते धन का प्रस्ताव हानिकारक हो सकता है".
    जहाँ तक मेरा अनुमान है, यहाँ cheap money की बात हो रही है जिसे गफलत में 'सस्ता धन' कहा जा रहा है. पता नहीं कौन ऐसे अनुवाद करता-कराता है!

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  3. यह बात संजीव कपूर साहब को शायद मालूम भी नहीं होगी। जिस बन्दे को इसके लिए ठेके पर लगाया होगा शायद उसका पेमेन्ट देना भूल गये होंगे।

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  4. संजीव कपूर एक बड़ा नाम है और ऐसे नामों को जानने मानने वाले ज्यादातर लोग हिन्दी को ऐसे ही बोलते हैं, शायद इसीलिये ऐसा लिखवाया होगा:)

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  5. अभी जाकर पढ़ते हैं, जीभ का सवाल है..

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  6. कई लोग ऐसी ही जुगत से चर्चा के फिराक में रहते हैं.

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  7. व्यंजन बनाने की विधि के लिए हिंदी में एक अच्छी साईट है आप उसे देख सकते है.
    www.nishamadhulika.com

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    1. जी हाँ, यह तो खान-पान विषयक हिंदी की सर्वश्रेष्ठ साइटों में से एक है.

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  8. हि‍न्‍दी वालों की कीमत पर पैसा बचाने वालों की लत बड़ी मुश्‍कि‍ल है छूटती

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  9. अपनी दुकान जमाने के लिए ये लोग हिन्‍दी का कबाडा कर रहे हैं। ऐसी मूर्खताओं का प्रतिकार कर इन्‍हें कैसे रोका जाए (या सुधारा जाए) - इस बाबत विचार किया जाना चाहिए। यदि ऐसी कोई कोशिश होती है तो मैं उसमें भागीदार बन कर कोई जिम्‍मेदारी लेना चाहूँगा।

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    1. इनकी मूर्खताओं की सार्वजनिक भर्त्सना, उपहास उपाय हो सकते हैं. वही मैंने किया भी है. :)

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  10. शायद लोग सीखें !

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