टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

सॉफ़्टवेयर समीक्षा : हिंदी टैक्स्ट टू स्पीच प्रोग्राम - श्रुतलेखन राजभाषा

पहले पहली बात.

स्पीच टू टैक्स्ट प्रोग्राम के बारे में अकसर लोग मुझसे पूछते रहते हैं और इसी बात के मद्देनजर मैंने आरंभिक जानकारी युक्त एक पोस्ट श्रुतलेखन राजभाषा पर यहाँ लिखा था. और उस प्रोग्राम को स्वयं के उपयोग के लिए ऑनलाइन खरीदी से मंगवाया भी था, चूंकि एक-दो नहीं, बल्कि कई स्रोतों से यह जानकारी पुख्ता हुई थी कि सीडैक द्वारा जारी किया गया श्रुतलेखन राजभाषा नामक सॉफ़्टवेयर 90 प्रतिशत से अधिक शुद्धता के साथ आपके द्वारा माइक्रोफ़ोन में बोली गई वाणी को हिंदी यूनिकोड में टाइप करता है.

 

परंतु जब मेरे पास यह सॉफ़्टवेयर आया और मैंने इसके हेल्प फ़ाइल में दिए अनुसार सेटिंग कर प्रयोग किया तो पाया कि यह तो कुछ का कुछ आउटपुट देता है जिसे आप संपादन कर भी प्रयोग में नहीं ला सकते.

 

अपने इस अनुभव को मैंने अपनी टिप्पणी में दर्ज किया था क्योंकि पाठकों ने पूछा था कि यह वास्तव में काम का है भी या नहीं. और चूंकि यह मेरे काम में नहीं आ रहा था तो मैंने लिखा था - मेरे रुपए 6 हजार गए पानी में!

 

अब असल बात

जब आप इंटरनेट पर ब्लॉग और ट्विटर जैसे दमदार माध्यमों में अपनी बात कहते हैं, तो उसकी अनुगूंज दूर तक सुनाई देती है. जब श्रुतलेखन राजभाषा मेरे काम का नहीं प्रतीत हुआ और उलटे सीधे आउटपुट देने लगा था तो मैंने सोचा कि यह भी सीडैक के चित्रांकन जैसे ओसीआर सॉफ़्टवेयर की तरह है जो काम का नहीं है. और इसी बात को ध्यान में रख कर मैंने न तो सीडैक को कोई कम्प्लेन किया और न ही कोई तकनीकी सहायता मांगी, चूंकि सॉफ़्टवेयर में दिए अनुसार तमाम सेटिंग कर मैं इसका प्रयोग कर चुका था. और मुझे लगा कि सीडैक को कम्प्लेन करना या वहाँ से सहायता मांगना अर्थहीन ही होगा.

 

परंतु आज अचानक सुबह सीडैक पुणे से फोन आया. वहाँ सॉफ़्टवेयर आर्कीटेक्ट पर्सन पल्लवी जी ने मुझसे समस्या पूछी कि श्रुतलेखन राजभाषा में मुझे क्या समस्या आ रही है.

मुझे आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता हुई कि मैंने तो कोई कम्प्लेन सीडैक में दर्ज नहीं की थी, सिर्फ अपने ब्लॉग पर टिप्पणी की थी, और उसे लीना महेन्दले जी ने पुनर्प्रकाशित किया था.  जाहिर है, इंटरनेट पर घूमता हुआ यह शिकायत सीडैक तक पहुंच ही गया. और इस बात पर अधिक आश्चर्य हुआ कि इंटरनेट पर की गई शिकायत नुमा पोस्ट के आधार पर मुझे तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई गई, और मेरी शिकायत दूर की गई!

 

पल्लवी जी का धन्यवाद.

श्रुतलेखन राजभाषा हिंदी टैक्स्ट टू स्पीच प्रोग्राम के ठीक ठीक  काम करने के लिए विंडोज 7 हेतु पल्लवी जी ने मुझे कुछ अतिरिक्त सेटिंग करने को कहा, जिसे अपनाने पर मेरा यह प्रोग्राम बढ़िया काम करने लगा. मैंने कुछ पाठ में तो स्वचालित टंकण में शुद्धता का प्रतिशत 95 से 98 प्रतिशत तक पाया. यह पूर्ण विराम और अन्य विराम चिह्नों को नहीं लगाता है, तथा एकाध शब्दों में हेराफेरी कर देता है, जिसे लगता है कि सही उच्चारण से दूर भी किया जा सकता है.

 

मैंने रचनाकार की इस पोस्ट की सामग्री को ब्रोशर में दिए गए पाठ को श्रुतलेखन राजभाषा में बोल कर ही स्वचालित टंकित किया है, और प्रति लाइन गलती की संख्या एक से भी कम रही!

 

और यह है पल्लवी जी द्वारा सुझाए गए अतिरिक्त सेटिंग - विंडोज 7 के लिए (विंडोज एक्सपी में थोड़ा अलग हो सकता है, पर इसे करना होगा) :

    • कंट्रोल पैनल में जाएं और हार्डवेयर एंड साउंड पर क्लिक करें
    • जो विंडो खुलेगा उसमें बोल्ड अक्षरों में लिखे साउंड पर क्लिक करें
    • अब जो विंडो प्रकट होगा उसमें रेकार्डिंग टैब पर क्लिक करें
    • डिफ़ॉल्ट माइक्रोफ़ोन डिवाइस को चुन कर नीचे दिए गए प्रॉपर्टीज बटन पर क्लिक करें
    • माइक्रोफ़ोन प्रॉपर्टीज विंडो खुलेगा जिसमें लेवल्स टैब पर क्लिक करें
    • अब जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है, माइक्रोफ़ोन और माइक्रोफ़ोन बूस्ट के स्लाइडर को पूरी तरह दाईं ओर खींच कर ले आएं और माइक्रोफ़ोन 100 पर और माइक्रोफ़ोन बूस्ट 30डीबी पर सेट करें और एप्लाई पर क्लिक करें. ओके पर क्लिक करें. श्रुतलेखन राजभाषा अब आपका डिक्टेशन लेने को तैयार है.

image

सी-डैक का और पल्लवी जी का धन्यवाद. सी-डैक के ही श्री दीपक मोतीरमानी जी का भी धन्यवाद जिन्होंने भी आरंभिक सहायता मुहैया करवाई.

इस सॉफ़्टवेयर को मैं सभी को, जिन्हें इस तरह के सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता है, खरीदने की सलाह दूंगा. परंतु वे इसका यूएसबी डांगल संस्करण ही खरीदें, इंटरनेट से एक्टिवेट होने वाला नहीं (क्योंकि उसमें सिर्फ 10 एक्टीवेशन की सीमा है).

 

और, अब मैंने अपनी टिप्पणी अद्यतन की है - यह प्रोग्राम तो है पूरा पैसा वसूल!

--

एक टिप्पणी भेजें

रवि जी
यह तो हिंदी के लिए एक महत्वपुर्ण उपलब्धि है। आपको हार्दिक धन्यवाद क्योंकि आपने वह सॉफ्टवेयर खरीदा था लेकिन आपने निरंतर प्रयास करके उसे सफल बनाया ।

रवि जी,
इस महत्वपूर्ण सूचना को सार्वजनिक करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.
मुझे भी कुछ समय पूर्व सीडैक के श्रुतलेखन का डेमो देखने का मौका मिला था और मैंने इसे तुरंत खरीद लेने का मन भी बना लिया था. परंतु 6,000 रुपए कहीं पानी में न चले जाएँ, इसलिए आपके जैसे किसी पुराने परिचित से उनकी राय जानने के लिए मैंने उनसे फ़ोन पर इसके बारे में पूछा तो उन्होंने कोई उत्साहजनक उत्तर नहीं दिया. शायद वे भी आपकी तरह इसकी समस्याओं से पार नहीं पा रहे होंगे; और शिकायत भी नहीं कर पा रहे होंगे क्योंकि वे सरकारी नियमों से बंधे हुए हैं.
अब मैं श्री दीपक मोतीरमानी से संपर्क करके इसे शीघ्र ही खरीद लूंगा.
पर आश्चर्य तो इस बात का है कि इसे बेचने वाली टीम के लोग पहले ही इसके इस्तेमाल का सही तरीका क्यों नहीं बता देते ताकि इस सॉफ़्टवेयर के संतुष्ट ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ इसकी बिक्री भी बढ़ती चली जाए.

आभार सहित,

चन्द्र मोहन रावल

महत्वपूर्ण जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद्

यह मैक के लिये मिल जाये तो बोल बोल कर लिखना प्रारम्भ किया जाये।

रवि जी,
राजभाषा श्रुतलेखन(स्पीच टू टैक्स्ट प्रोग्राम) के बारे में तथा विशेषताओं के संबंध में अनेक बार सुना था। आपने उसको प्रयोग में लाकर तथा उसकी उपयोगिता प्रमाणित कर दी। इस महत्‍वपूर्ण जानकारी के लिए धन्‍यवाद। यह सॉफ्टवेयर निश्चित रूप से हिंदी जगत में मील का पत्‍थर सिद्ध होगा।

क्या लिनेक्स में चलेगा?

लिनक्स के लिए तो इसे बनाया नहीं गया है, और यदि इसे वाइन के जरिए कोशिश किया जाए तो शायद वह परिणाम न आए. फिर भी, समय मिला तो इसकी जांच परख कभी कर बताता हूँ.

रवि जी,
हम हिंदी-प्रेमियों के लिए बहुत ही उपयोगी जानकारी दी हॆ आपने.धन्यवाद!

यह नई सूचना पाकर मन प्रसन्न हो गया। अब हम भी इसे खरीदने की हिम्मत कर सकेंगे।

सी-डैक को उपर्युक्त सैटिंग की जानकारी इसके मैनुअल में ही दे देनी चाहिये ताकि उपयोक्ता को परेशान न हो। कृपया पल्लवी जी और दूसरे अधिकारियों से इसके लिये कहें।

साथ ही सी-डैक को इस सॉफ्टवेयर को ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर उपलब्ध करवाना चाहिये ताकि यह जनता को सुलभ हो और आम कम्प्यूटर उपयोक्ता तक पहुँचे। आम तौर पर सी-डैक के सॉफ्टवेयर आम जनता तक पहुँच ही नहीं पाते।

इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है. -

क्या बात है! खरीद लिया जाये?

एक बार इन्हीं सैटिंग को रख के स्काईपी आदि द्वारा वॉइप काल कर के देखें, इस तरह माइक्रोफोन का लेवल बढ़ा देने से सांस की आवाज़ भी बहुत ज़ोर से दूसरे के कान में गूंजेगी क्योंकि माइक्रोफोन की आवाज़ और साउंड डेसिबल दोनो ही तीन गुणा बढ़वा दिए गए हैं। परिणाम जानने को उत्सुक। :)

इस नायाब साझे के लिए बहुत शुक्रिया रवि जी...

हिन्दी टैक्स टू स्पीच प्रोग्राम को सभी के लिए फ्री कर देना चाहिए। यदि यह सम्भव नहीं हो तो भारत सरकार को इसे खरीद कर हिन्दी भाषा के विकास के लिए इण्टरनेट पर दान दे देना चाहिए। यह डोगल सिस्टम नहीं होना चाहिए। कल्पना करें यदि माइक्रोसाफ्ट के साफ्टवेयर पाईरेटड न होते तो कभी भी इतने पापुलर न होते और आम जन के लिए सर्वसुलभ न होते। एक बार इस्तेमाल करने के बाद लोग खुद ब खुद लाईसेन्स वर्जन खरीदने के लिए उत्सुक होंगे। हिन्दी के विकास के लिए अंग्रेजी सोंच बदलनी होगी। जब तक काले अंग्रेजों के हाथ में हिन्दी रहेगी तब तक वह गुलाम रहेगी। अब आजादी के काफी साल बीत चुके हैं। एक न एक दिन हिन्दी काले अंग्रेजों से आजाद होते हुए इण्टरनेट पर अपना वचसर््व स्थापित कर ही लेगी।
अनिरूद्ध सिंह हिन्दी आशुलिपिक

हिन्दी टैक्स टू स्पीच प्रोग्राम को सभी के लिए फ्री कर देना चाहिए। यदि यह सम्भव नहीं हो तो भारत सरकार को इसे खरीद कर हिन्दी भाषा के विकास के लिए इण्टरनेट पर दान दे देना चाहिए। यह डोगल सिस्टम नहीं होना चाहिए। कल्पना करें यदि माइक्रोसाफ्ट के साफ्टवेयर पाईरेटड न होते तो कभी भी इतने पापुलर न होते और आम जन के लिए सर्वसुलभ न होते। एक बार इस्तेमाल करने के बाद लोग खुद ब खुद लाईसेन्स वर्जन खरीदने के लिए उत्सुक होंगे। हिन्दी के विकास के लिए अंग्रेजी सोंच बदलनी होगी। जब तक काले अंग्रेजों के हाथ में हिन्दी रहेगी तब तक वह गुलाम रहेगी। अब आजादी के काफी साल बीत चुके हैं। एक न एक दिन हिन्दी काले अंग्रेजों से आजाद होते हुए इण्टरनेट पर अपना वचसर््व स्थापित कर ही लेगी।
अनिरूद्ध सिंह हिन्दी आशुलिपिक

श्रुतलेखन का मेरा अनुभव बहुत खराब रहा है बहुत बार जब मेने इसे डिक्टेशन दिया कुछ का कुछ छापता है. यानी आउटपुट काम में लेने लायक भी नहीं रहता.कई बार सी डेक को फ़ोन तथा मेल कर चुका हु मगर एसा लगता है एक बार बेच देने के बाद सी डेक का व्यवहार पुरानी इस्ट इण्डिया कंपनी की तरह भारतीय नोकर शाही कंपनी की तरह ही है कोई समस्या सुलझाना का प्रयास नही किया जाता है वरन कुछ की कुछ अलग अलग सलाह देते रहते है एक बात तय है की इस्ट इण्डिया कंपनी के वंशजो की सरकारी कंपनीयो से अगर आप कुछ भी खरिदो तो मान लो पैसा गया पानी मे

श्रुतलेखन का मेरा अनुभव बहुत खराब रहा है बहुत बार जब मेने इसे डिक्टेशन दिया कुछ का कुछ छापता है. यानी आउटपुट काम में लेने लायक भी नहीं रहता.कई बार सी डेक को फ़ोन तथा मेल कर चुका हु मगर एसा लगता है एक बार बेच देने के बाद सी डेक का व्यवहार पुरानी इस्ट इण्डिया कंपनी की तरह भारतीय नोकर शाही कंपनी की तरह ही है कोई समस्या सुलझाना का प्रयास नही किया जाता है वरन कुछ की कुछ अलग अलग सलाह देते रहते है एक बात तय है की इस्ट इण्डिया कंपनी के वंशजो की सरकारी कंपनीयो से अगर आप कुछ भी खरिदो तो मान लो पैसा गया पानी मे

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