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July, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सॉफ़्टवेयर समीक्षा : हिंदी टैक्स्ट टू स्पीच प्रोग्राम - श्रुतलेखन राजभाषा

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पहले पहली बात.स्पीच टू टैक्स्ट प्रोग्राम के बारे में अकसर लोग मुझसे पूछते रहते हैं और इसी बात के मद्देनजर मैंने आरंभिक जानकारी युक्त एक पोस्ट श्रुतलेखन राजभाषा पर यहाँ लिखा था. और उस प्रोग्राम को स्वयं के उपयोग के लिए ऑनलाइन खरीदी से मंगवाया भी था, चूंकि एक-दो नहीं, बल्कि कई स्रोतों से यह जानकारी पुख्ता हुई थी कि सीडैक द्वारा जारी किया गया श्रुतलेखन राजभाषा नामक सॉफ़्टवेयर 90 प्रतिशत से अधिक शुद्धता के साथ आपके द्वारा माइक्रोफ़ोन में बोली गई वाणी को हिंदी यूनिकोड में टाइप करता है.परंतु जब मेरे पास यह सॉफ़्टवेयर आया और मैंने इसके हेल्प फ़ाइल में दिए अनुसार सेटिंग कर प्रयोग किया तो पाया कि यह तो कुछ का कुछ आउटपुट देता है जिसे आप संपादन कर भी प्रयोग में नहीं ला सकते.अपने इस अनुभव को मैंने अपनी टिप्पणी में दर्ज किया था क्योंकि पाठकों ने पूछा था कि यह वास्तव में काम का है भी या नहीं. और चूंकि यह मेरे काम में नहीं आ रहा था तो मैंने लिखा था - मेरे रुपए 6 हजार गए पानी में!अब असल बातजब आप इंटरनेट पर ब्लॉग और ट्विटर जैसे दमदार माध्यमों में अपनी बात कहते हैं, तो उसकी अनुगूंज दूर तक सुनाई देती है…

नेगेटिव एनर्जी से आपकी ऑनलाइन जीवनी आक्रांत है? जरा ये उपाय अपना देखें!

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वास्तु-शास्त्रियों के मुताबिक मैनिट – यानी मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉज़ी – संस्थान में एक फव्वारे को गलत दिशा में स्थापित किए जाने के कारण वहाँ नेगेटिव एनर्जी बह रही थी. और उस नेगेटिव एनर्जी को दूर भगाने के लिए उस खूबसूरत वाटर-फाउंटेन को ढहा दिया गया. दरअसल, मेनिट समस्याओं से लंबे समय से ग्रस्त है. एक पूर्व मेनिट डायरेक्टर अपने कार्यकाल में घपलों घोटालों और अपने नजदीकियों को उपकृत करने और मनमानी नियुक्तियां देने में समस्या ग्रस्त रहे, तो वर्तमान में मेनिट के कुछ प्रोफ़ेसर तकनीकी कॉलेजों को स्वीकृति देने के मामले में घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए. कुछ छात्रों के साथ भी समस्याएं आती रही हैं. और यह सब नेगेटिव एनर्जी की वजह से होता रहा है. फ़व्वारे को हटाने से शायद अब नेगेटिव इनर्जी का प्रवाह न हो, और संस्थान का भला हो! या फिर फ़व्वारे को नए सिरे से, जिस दिशा में स्थापित था उसकी उल्टी दिशा में स्थापित करें तो शायद पॉजिटिव एनर्जी बहने लगे, और समस्या ग्रस्त डायरेक्टर, प्रोफ़ेसरों और छात्रों का कल्याण हो! मेनिट ने तो अपना भला कर लिया. पर, क्या आपने अपने बारे में सोचा है?आप अ…

उबुन्टु लिनक्स 12.x में हिंदी इनस्क्रिप्ट / रेमिंगटन / फ़ोनेटिक कीबोर्ड इंस्टाल कैसे करें How to install Hindi remington keyboard in Ubuntu linux 12.x

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उबुन्टु लिनक्स 12.x (या किसी भी अन्य लिनक्स संस्करण में) में हिंदी इनस्क्रिप्ट / रेमिंगटन / फ़ोनेटिक कीबोर्ड इंस्टाल कैसे करेंआसान है. इसके लिए आपको उबुन्टु लिनक्स 12.x में एक छोटा सा पैकेज एड-ऑन इंस्टाल करना होगा. उबुन्टु में आई-बस नामक एक बढ़िया कुंजी इनपुट औजार आता है, परंतु उसमें डिफ़ॉल्ट में चीनी भाषा का ही विकल्प होता है. आपको हिंदी भाषा के कीबोर्ड जोड़ने के लिए उसका कीबोर्ड एड ऑन पैक इंस्टाल करना होता है.चरण दर चरण निम्न है -आप अपने उबुन्टु कंप्यूटर में इंटरनेट चालू कर लें.उबुन्टू स्टार्ट बटन पर क्लिक करें और सर्च बक्से में टाइप करें - terminalटर्मिनल का आइकन दिखेगा जैसे कि ऊपर के चित्र में दिख रहा है. उसे क्लिक करें. टर्मिनल यानी कमांड प्राम्प्ट विंडो जैसा कि नीचे के चित्र में दिख रहा है, खुलेगा.टर्मिनल पर जाकर यह कमांड दें - sudo apt-get install ibus-m17nयदि आपने कोई रूट पासवर्ड सेट किया होगा तो यह पासवर्ड के लिए पूछेगा नहीं तो इंस्टालेशन चालू हो जाएगा. जैसा कि नीचे के चित्र में दिया गया है, टर्मिनल के भीतर ही आपसे पूछा जाएगा कि फलां-फलां पैकेज इंस्टाल होंगे और इतनी जगह की आव…

दर्जनों आकार प्रकार के हिन्दी देवनागरी यूनिकोड फ़ॉन्ट डाउनलोड करें

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इंडलिनक्स विकि साइट पर भारतीय भाषाओं के लिए यूनिकोड फ़ॉन्टों को डाउनलोड करने के लिंक जुटाए गये हैं. इसमे दर्जनों हिंदी यूनिकोड फ़ॉन्टों को डाउनलोड करने के लिंक भी हैं, जिनमें बहुत से मुक्त स्रोत के भी  हैं जिनका आप बखूबी प्रयोग कर सकते हैं.लिंक है -http://www.indlinux.org/wiki/index.php/IndicFontsList#Devanagariफ़ॉन्ट को डाउनलोड करने के बाद इंस्टाल करने की विधि -विंडोज एक्स पी - विंडोज़>फ़ॉन्ट फ़ोल्डर खोलें और मेन्यू से इंस्टाल न्यू फ़ॉन्ट चुन कर डाउनलोड किया फ़ॉन्ट फ़ाइल चुनें.विंडोज 7 - डाउनलोड किए फ़ॉन्ट फ़ाइल में दायाँ क्लिक कर इंस्टाल विकल्प चुनेंलिनक्स - होम फ़ोल्डर में .font (यह छुपी फ़ाइल होती है) या यूजर फ़ॉन्ट फ़ोल्डर में फ़ॉन्ट कॉपी करें.

गूगल ट्रांसलेट व माइक्रोसॉफ़्ट बिंग ट्रांसलेट - स्वचालित मशीनी अंग्रेज़ी हिंदी अनुवाद की तुलना

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माइक्रोसॉफ़्ट बिंग अंग्रेज़ी-हिंदी मशीनी अनुवाद भी अब दिनों दिन बेहतर होता जा रहा है. खासकर छोटे वाक्यों और कंप्यूटिंग-आईटी संबंधी वाक्यांशों को यह बेहतर स्वचालित अनुवाद करता है.

मैंने गूगल ट्रांसलेट और माइक्रोसॉफ़्ट-बिंग ट्रांसलेट दोनों की मशीनी अनुवाद की तुलना करने के लिए एक पैराग्राफ कुछ यूँ रचा -

आप देखेंगे कि इसमें छोटा सा सामान्य आम बोलचाल वाला वाक्य है तो एक बड़ा जटिल सा वाक्य भी है. स्पाइस गर्ल के एलबम टू बिकम वन गीत का एक टुकड़ा है और अंत में केडीई कंप्यूटर अनुप्रयोग से एक छोटा कंप्यूटर मेन्यू / संदेश वाक्य.

My name is Ravi
I want to read blog posts written by my friends, but I hardly had time to read it as all my online time wastes in watching youtube videos!
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Spice Girls
2 Become 1
Candle light and soul forever
A dream of you and me together
Say you believe it
Say you believe it
Free your mind of doubt and danger
Be for real  Don't be a stranger
We can acheive it
We can acheive it
Come a little bit closer baby
Get it on
Get it on
Cuz tonight
Is the night
When 2 become…

ओह! तो मेरी चिंता, असुरक्षा की भावना के पीछे वो नहीं, ये हैं!

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एक शोध से पता चला है कि ब्लॉग, फ़ेसबुक और ट्विटर आपके दिल दिमाग में चिंता, असुरक्षा की भावनाएँ भरने का काम ज्यादा करते हैं. इसमें शोध की क्या जरूरत थी? जिस दिन से हम ब्लॉगिंग में घुसे हैं, ट्विटर पर खाता खोला है और फ़ेसबुक में पहला लाइक मारे हैं, कसम से दुनिया बदल गई है. चिंता के मारे हलाकान हो गए हैं. रात दो बजे भी ईमेल अलर्ट आता है तो उठ कर कमेंट एप्रूव करते हैं, एक ट्वीट मारते हैं और फेसबुक वाल में किसी को चिकोटी काट कर फिर दोबारा सोने की बेकार कोशिश करते हैं.दुनिया इतनी कमीनी कभी नहीं रही. फ़ेसबुक से पहले दुनिया कितनी शांत और आरामप्रद थी! है ना? न थी इस तरह रात दो बजे उठने की चिंता और न किसी तरह की ब्लॉग-ट्विटर-फ़ेसबुकिया असुरक्षा की भावना!!!--व्यंज़ल-----जितना ट्विटरिया रहा हूँ मैंउतना ही चिंतिया रहा हूँ मैंदुनिया में क्या कम गम थेऊपर से फ़ेसबुकिया रहा हूँ मैंलोग कहते बस फकत हैं झूठबहुत बड़ा ब्लॉगिया रहा हूँ मैंउठते बैठते सोते नहाते धोते कहां नहीं इंटरनेटिया रहा हूँ मैंजिंदगी में बचा क्या रविजब देखो गूगलिया रहा हूँ मैं--

हवाई जहाज में खाने का स्वाद क्यों उदासिन होता है?

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यदि शीर्षक से आपको कुछ समझ में नहीं आए, तो कृपया मुझे कोसें नहीं.

यह पाठ संजीव कपूर के खाना खजाना के हिंदी पृष्ठों में से लिया गया है.

संजीव कपूर का खाना खजाना अंग्रेज़ी में लंबे समय से इंटरनेट पर उपलब्ध है, और यदा कदा अपनी जिव्हा को नया 'टेस्ट' देने वहाँ चक्कर लगाता रहता हूँ.

अभी उधर लंबे समय बाद जाना हुआ तो पाया कि हिंदी में पढ़ने का लिंक भी उपलब्ध हो गया है. जाहिर है उस लिंक पर तो जाना ही था.
परंतु वहाँ जाकर यह मिला -

ये भी मिला -


और ये भी :


आपके मुँह का स्वाद बिगड़ा या नहीं?
संजीव कपूर खाना खजाना  जैसे बड़े और स्थापित जाल स्थल से तो ये उम्मीद नहीं थी. जाहिर है, अंग्रेजी साइट का हिंदी में बेहद ही सड़ियल अनुवाद औने-पौने दामों में करवा दिया गया है. गनीमत, अर्थ का अनर्थ नहीं है नहीं तो कद्दू की सब्जी में करेले का स्वाद भी आ जाता!

वायरसों के बाप 'स्टक्सनेट' के बाद आया वायरसों का दादा -'फ्लेम'

स्टक्सनेट जब पकड़ में आया तो इसे वायरसों का बाप कहा गया. स्टक्सनेट के बारे में कुछ जानकारी यहाँ है.तब अनुमान लगाए गए थे कि इसे अमरीकी-इजराइली सरकार द्वारा साइबर वार के रूप में ईरान के परमाणु संयंत्रों को बेकार करने के लिए जारी किया गया था. बाद में खुद अमरीकी राष्ट्रपति ने इस बात को स्वीकार किया. अभी हाल ही में स्टक्सनेट से भी भयंकर, मारक मालवेयर पकड़ा गया है जिसे नाम दिया गया है - फ्लेम. देखिए कि फ्लेम की क्या खासियतें हैं - 1. फ्लेम एक की-लॉगर और एक स्क्रीन-ग्रेबर है - 2. फ्लेम के निर्माण में SSH, SSL, और LUA जैसी सुरक्षा लाइब्रेरी का प्रयोग किया गया है 3. फ्लेम स्थानीय ड्राइव (हार्ड-डिस्क) और नेटवर्क ड्राइव पर सभी ऑफ़िस दस्तावेजों, पीडीएफ फाइलों, ऑटोडेस्क फ़ाइलों और फ़ाइलों को खोजता है. वहाँ दस्तावेजों से पाठ के तमाम अंश निकालने के लिए यह आई-फ़िल्टर्स का उपयोग करता है और फ़ाइलों से सिर्फ टैक्स्ट मैटर निकालता है, और उसे एक स्थानीय SQLLite डेटाबेस में संग्रहित करता है और फिर उसे मैलवेयर ऑपरेटरों को चुपके से भेजता है. इस तरह वे मैलवेयर को यह हिदायत दे सकते हैं कि वास्तव में दिलच…

इंडियन कार-यूजर्स-गाइड

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वैसे तो इस मार्गदर्शिका का शीर्षक भारतीय कार-उपयोगकर्ता-निर्देशिका बेहतर हो सकता था, मगर, फिर, ये पूरा इंडियन नहीं होता.

आप पूछेंगे कि ये इंडियन कार-यूजर्स-गाइड क्या ऑफ़ीशियल गाइड है और इसे क्या ट्रांसपोर्ट विभाग से जारी किया गया है.

तो बता दूं कि इसके ओरिजिन का तो पता नहीं क्योंकि यह मुझे एक दिन यूँ ही सड़क पर कार चलाते समय रास्ते में पड़ा हुआ मिल गया था. मगर इतना तय है कि इस गाइड को आप पढ़ेंगे और आत्मसात करेंगे तो भारतीय सड़कों में फर्राटे से कार दौड़ाने में एक्सपर्ट हो जाएंगे. इस गाइड को मोटा-मोटी आप पढ़ेंगे तो पाएंगे कि अधिकांश जनता इस खालिस इंडियन गाइडबुक का टू-द-पाइंट फालो करती है. अर्थ यह कि यदि आप इस मामले में निरक्षर हैं तो आगे पढ़ें, गुनें और अपनी कार-ड्राइविंग-लाइफ को बेहतर बनाएं.

1.    कार चलाना शुरू करने से पहले यह चेक कर लें कि आपके कार का हॉर्न ठीक से काम कर रहा है या नहीं. क्योंकि यही वह पुर्जा है जो इंडियन सड़कों में कार चलाते समय सबसे ज्यादा काम आता है. संशय हो तो दोबारा चेक कर लें और, हो सके तो इसकी आवाज भी जाँच लें कि समय के हिसाब से इसकी आवाज कम तो नहीं हो रही है…

आज के दैनिक भास्कर का स्कूप : पेन ड्राइव में पूरा कम्प्यूटर?

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वैसे तो यह मसाला बालेंदु दाधीच के वाह! मीडिया के लिए ज्यादा उचित था, परंतु चूंकि मामला कंप्यूटिंग से जुड़ा हुआ है, इसीलिए यहाँ छापने से अपने आप को रोक नहीं पाया.यह समाचार आज के दैनिक भास्कर के मुख्य पृष्ठ पर प्रमुखता से छपा है, और पूरे राष्ट्र के लगभग तमाम एडीशन में है.इस समाचार को पढ़ कर कोई भी तकनीकी जानकार हँस देगा कि दैनिक भास्कर जैसे बड़े अखबारों में भी समाचारों को चयन कर छापते समय पूरा चलताऊ एटीट्यूड दिखाते हैं.कुछ समय पूर्व फ़ेसबुक में तथाकथित एक महान लिक्खाड़ ने सरकार व माइक्रोसॉफ़्ट को श्रेय दिया था यूनिकोड हिंदी फ़ॉन्ट तैयार करने में. यह समाचार भी उसी श्रेणी का है.दरअसल समाचार में जो बताया गया है वो पेन ड्राइव से कंप्यूटर बूट करने का मामला है. यह काम कंप्यूटिंग के बाबा आदम के जमाने से होता आ रहा है. लिनक्स तंत्र के तमाम वेरिएंटों को आप यूएसबी पेन ड्राइव में इंस्टाल कर किसी भी कंपेटिबल कंप्यूटर को बूट कर सकते हैं. और जो बात लिखी  गई है वो कोई भी महज एक दो क्लिक से कर सकता है, आपके पास 128 मेबा या इससे अधिक का पेन ड्राइव होना चाहिए, और इसे तैयार करने के एक दो प्रोग्राम. कहने क…

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