विंडोज़ 8 पर पहली हिंदीमयी नज़र

विंडोज़ 8 रिलीज प्रीव्यू आपके डाउनलोड व जांच परख के लिए अब उपलब्ध है. मैंने भी इसे हिंदी की उपलब्ध सुविधा की जांच परख के लिहाज से उतारा और अपने एक पुराने कंप्यूटर पर स्थापित किया.

इसकी स्थापना को न सिर्फ सुधारा गया है, बल्कि तेज भी बनाया गया है. बमुश्किल दस-पंद्रह मिनट में यह स्थापित हो गया. परंतु इसने पुराने विंडोज 7 की स्थापना को तो पहचान लिया - यानी आप विंडोज 7 के साथ ड्यूअल बूट मोड में इसे स्थापित कर सकते हैं - मगर मेरे हार्ड-डिस्क के अन्य पार्टीशन के लिनक्स को इसने फिर से पहचानने से इंकार कर दिया.

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हिंदी के लिए इसका इंटरफेस पैक हालांकि अभी जारी नहीं हुआ है, मगर विश्व की अन्य तमाम महत्वपूर्ण भाषाओं की तरह हिंदी भाषाई कंप्यूटिंग का खयाल इसमें रखा गया है. हिंदी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं - मसलन मराठी, गुजराती, तमिल, पंजाबी इत्यादि के कुंजीपट भी यहाँ अंतर्निर्मित उपलब्ध हैं. कुंजीपट का प्रीव्यू भी वहीं उपलब्ध है.

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लॉगिन स्क्रीन पर ही भाषा व कुंजीपट चुनने की सुविधा मिलती है - और आप बाकायदा हिंदी भाषा व कुंजीपट चुन सकते हैं. हिंदी भाषा चुनने पर आपके कैलेंडर व अंक इत्यादि हिंदी में उपलब्ध हो जाते हैं. हिंदी कुंजीपट डिफ़ॉल्ट रूप में इनस्क्रिप्ट - हिंदी ट्रेडिशनल के रूप में उपलब्ध है. मेरे विचार में डिफ़ॉल्ट रूप में दो अतिरिक्त हिंदी कुंजीपट रेमिंगटन तथा फ़ोनेटिक भी उपलब्ध रहना ही चाहिए. मगर अब यह बड़ा मुद्दा नहीं है. आप भाषाइंडिया.कॉम की साइट से विंडोज 7 का हिंदी आईएमई -2 इंस्टाल कर सकते हैं.

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यदि आपने लॉगिन स्क्रीन पर हिंदी भाषा नहीं चुना है तब भी आप कंट्रोल पैनल की सेटिंग में जाकर भाषाई वातावरण चुन कर हिंदी भाषा व हिंदी कुंजीपट जोड़ सकते हैं.

विंडोज 8 को आरंभ में प्रयोग करते समय मुझे थोड़ी सी परेशानी हुई और कुछ चीजों को नए सिरे से सीखना पड़ा. आप पूछेंगे कि क्यों? तो ऐसा इसके टैब्ड इंटरफ़ेस के कारण चीजों को ढूंढने में बड़ी मुश्किलें आईं. उदाहरण के लिए, जब मैंने इसके एक्सप्लोरर में जाकर एक चित्र को डबल क्लिक किया तो इसे दिखाने के बजाए यह मुझसे विंडोज एप्प का नया संस्करण इंस्टाल करने के लिए कहने लगा. थोड़ी देर बाद जब मैने इसके डिफ़ॉल्ट प्रोग्राम को फ़ोटो व्यूअर में सेट किया तब मैं उस चित्र को देखने में कामयाब हो पाया.

साथ ही, इसका स्टार्ट मेन्यू नजर नहीं आया. माउस को इधर उधर घुमाने पर एप्प दिखा जिसे क्लिक करने पर स्थापित प्रोग्राम दिखे. हाँ, यदि आपको प्रोग्रामों के नाम मालूम हों तो आप सर्च बक्से में जाकर उसके नाम के शुरूआती चंद अक्षर टाइप करने से प्रोग्राम की सूची दिख जाती है जिसे आप क्लिक कर खोल सकते हैं. परंतु यह सब सीखने के लिए थोड़ा समय चाहिए. रूपरंग में यह एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम सा आभास देता है.

इसके विपरीत मेरे पुत्र को इसे सीखने के लिए कोई परेशानी नहीं हुई. बल्कि उसे मजा आया और उसका फ़ोन इससे देखते देखते ही सिंक्रोनाइज हो गया. आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों? तो दरअसल उसके पास विंडोज फ़ोन ल्यूमिया है, जिसका प्रयोग वह कुछ अरसे से कर रहा है. विंडोज़ 8 का इंटरफ़ेस उसके विंडोज़ फ़ोन ल्यूमिया से मिलता जुलता है. तो उसे तो विंडोज के इस नए अवतार में मजा आया. इसमें विंडोज लाइव आईडी से इंटीग्रेट कर साइनइन करने की बढ़िया सुविधा है.

इसका क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि विंडोज 8 को खासतौर पर टैबलेट कंप्यूटिंग के लिए डिजाइन किया गया है. आने वाले समय में बाजार टैबलेट कंप्यूटरों का ही रहेगा यह मान कर चलें. आपके डेस्कटॉप, लैपटॉप, नेटटॉप, नेटबुक, नोटबुक सब कबाड़ हो जाएंगे. लोग या तो टैबलेट या फिर बड़े स्क्रीन के सेमसुंग नोट या गैलेक्सी एस-3 जैसे मोबाइलों का प्रयोग आमतौर पर अपनी कंप्यूटिंग जरूरतों के लिए करेंगे. इसी बात को ध्यान में रख कर विंडोज 8 को बनाया गया है. अलबत्ता आप इसकी सेटिंग क्लासिक के रूप में वापस सेट कर सकते हैं.

क्या आपको विंडोज 8 पर अपग्रेड के लिए जाना चाहिए?

यह बड़ा यक्ष प्रश्न है. यदि आप अभी भी विंडोज एक्सपी प्रयोग कर रहे हैं तब तो बिलकुल हाँ क्योंकि बहुत सी सुरक्षा खामियों को इसमें दूर किया गया है, और यदि आप विंजोज 7 प्रयोग कर रहे हों तो अभी तो नहीं. विंडोज 7 के मुकाबले इसमें  टैब्ड इंटरफेस और कुछ कॉस्मेटिक सर्जरी के अलावा हम हिंदी वालों के लिए कुछ खास नया नहीं है. हाँ, यदि आप नया कंप्यूटर लेने की सोच रहे हैं तब तो यही विकल्प होना चाहिए, और यदि टैबलेट लेने की सोच रहे हैं तो थोड़ा रुक कर विंडोज टैबलेट आने का इंतजार भी कर सकते हैं.

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एक टिप्पणी भेजें

mahatwapurna jankari ke liye aabhar.

रवि जी ,हम विन्डोज़-७ असली वाला प्रयोग कर रहे हैं,क्या अपग्रेड ठीक रहेगा या इंतज़ार कर लें...?

संतोष जी, मैंने ऊपर स्पष्ट किया है कि विंडोज़ 7 से 8 में अपग्रेड करने लायक ऐसा कुछ मुझे तो नहीं दिखा. बल्कि यदि आपके पास टचस्क्रीन डिवाइस नहीं है तो इसका डिफ़ॉल्ट इंटरफ़ेस भी आपको अटपटा लगेगा.

जी,यह तो मैंने पढ़ लिया था....आगे जब यह प्रयोग में आएगा,तभी पता चलेगा |
आभार

माइक्रोसाफट कुछ भी लाये हम तो उस पर जाने से रहे!

अपने दूसरे कम्प्यूटर पर स्थापित करूँगा, पर थोड़ा देखने के बाद..

इंस्टाल करके देख लिया...कुछ खास नहीं डेस्कटॉप वालों के लिए| वापस विन्दोव्स ७ पर :-)

जब इसका पूर्ण संस्करण आएगा, तो देखेंगे...

हाँ, बिना टचस्क्रीन विंडोज़ 7 ही ठीक!

अभी टाईम लगेगा देखते है कौनसा बेहतर होगा 7 या 8

मैंने प्रिव्यू को थोड़ा बहुत आजामाकर देखा है। पर मुझे यह बिल्कुल पसंद नही आया। विंडोज ८ टच के लिए बनाया गया है। ठीक है। पर फिर इसके सभी मुख्य अनुप्रयोग मेट्रो में होने चाहिए थे। वे सामान्य विंडो पर क्यों खुलते हैं? यानि जिसमें माउस का प्रयोग आसान लगता है।
फिर सबसे बड़ी बात ये कि क्या अन्य एप्लिकेशन जैसे, फोटोशॉप, माया, फ्लैश, ड्रीमवीवर, आदि तो टच के हिसाब से नही है। उसके लिए तो सामान्य कीबोर्ड और माउस ही चाहिए। तो फिर वहां तो मेट्रो किसी काम का नही आएगा।
स्टार्ट स्क्रीन पूरी तरह से डेस्कटॉप को पलट देती है। एकदम अलग दुनिया में आने का अनुभव होता है। जो कि ठीक नही लगता।
सच बताऊं मुझे यह विंडो ८ बिल्कुल भी पसंद नही आया।
यदि माइक्रोसॉफ्ट मेट्रो स्टार्ट स्क्रीन के साथ साथ स्टार्ट मेन्यू भी दे दे तो फिर कोई बुराई नही है। लेकिन स्टार्ट मेन्यू को हटाना ठीक नही है।

बेनामी

भाई मैं राज हु गुजरात से मुजे ये जानना है की कोई ऐसा फ्री सॉफ्टवेर है जिससे की वीडियो फ़ाइल के वोटेरमार्क और लोगो रिमूव हो सके ? और फ्री नहीं है तो मुजे विथ सिरियल की के साथ या फिर क्रेक के साथ कहा मिलेगा ?

वाकई महत्वपूर्ण जानकारी है

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एक नज़र में कुछ बेहतर लगा, आगे देखते हैं क्या मिलता है

विण्डोज़ ८ भी लिनक्स पार्टीशन नहीं पहचानता जानकर निराशा हुयी। हिन्दी समर्थन के मामले में दो ही सुधार हुये हैं, एक तो लॉगइन स्क्रीन से कुंजीपट जोड़ने की सुविधा दूसरा LIP विण्डोज़ के अन्दर से ही इंस्टाल कर सकते हैं, नेट पर ढूंढ कर डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है।

बाकी जैसे उबुंटू की यूनिटी पर जाने से लोकप्रियता कम हुयी वैसा ही कुछ विण्डोज़ ८ के साथ होगा। मैट्रो इंटरफेस को वैकल्पिक रूप में रखना तो सही तो परन्तु डैस्कटॉप इंटरफेस के स्टार्ट मैन्यू जैसे महत्वपूर्ण हिस्से हटाना सही नहीं। टैबलेट की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुये माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसा किया है। टैबलेट के लिये अलग इंटरफेस तो ठीक है पर डैस्कटॉप पर टैबलेट वाला इंटरफेस तो नहीं चल सकता न। आम उपयोक्ता तो शायद हजम कर भी लेगा पर प्रोफैशनल/ऍंटरप्राइज क्षेत्र में मैट्रो इंटरफेस और ऍप्स से काम थोड़ी न चलेगा। मेरी समझ से तो डैस्कटॉप इंटरफेस पूरी तरह बरकरार रखकर मैट्रो इंटरफेस को बिलकुल अलग वैकल्पिक रखना चाहिये था, दोनों का घालमेल सही नहीं। माइक्रोसॉफ्ट के लिये यह गलती हानिकारक होगी।

ईपंडित जी आपने बिल्कुल सही फरमाया

मुझे इस की बोहत जरुरत थी . abi हिंदी लिखना आसान हो चूका है............

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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