टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

June 2012

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यदि आप घर में सर्वे करें या बाजारों में. एक चीज आम मिलेगी. बाजार भरे पड़े हैं स्त्रियों की पोशाकों की दूकानों से. मेले-ठेले में भी अधिकतर दुकानें साड़ी-सलवार-सूट-चुन्नी-लहंगा-चोली के ही होते हैं. साथ ही होता ये है कि कोई भद्र पुरुष अपनी धर्मपत्नी के साथ बाजार तेल लेने जाता है तो वो साथ में अनिवार्य रूप से दो जोड़ी सलवार सूट के भी ले आता है – धर्मपत्नी को कलर और फ्रैब्रिक और कीमत इतना आकर्षित करता है कि खरीदे बिना नहीं रहा जाता. और, घर की आलमारियाँ तो स्त्रियों की पोशाकों से इतनी भरी रहती हैं कि हर वर्ष प्रत्येक सुंदर-सुव्यवस्थित घर को एक अदद अतिरिक्त आलमारी की जरूरत पड़ती ही है.

अब जब घर में आलमारियाँ कपड़ों और ड्रेस से भरी पड़ी हों तो समस्या और भी बढ़ जाती है. क्या पहनें और क्या न पहनें. फिर ये भी बड़ा प्रश्न सामने आ जाता है कि इसे कब पहना था और इसकी बारी अभी तक आई या नहीं. और कभी कभी कोई ड्रेस देखकर लगता है कि अरे, इसे तो अब तक पहना ही नहीं. ये तो नया का नया ही रखा है. परंतु आज भी इसे नहीं पहन सकते – मुहूर्त नहीं है या ऐसा अवसर नहीं है. स्त्रियों के लिए भारी तकलीफ की बात ये होती है कि वर्ष में तो महज 365 दिन ही होते हैं, मगर उनकी आलमारी में इस संख्या से कई गुना अधिक संख्या में ड्रेस होते हैं, अब ऐसे में क्या पहना जाए और क्या तो छोड़ा जाए!

अब चिंता मत करें. आपकी सुविधा के लिए, और आपकी ड्रेस संबंधी तमाम दुविधाओं को दूर करने के लिए एक आई-फ़ोन एप्प आ चुका है. क्लॉथ नाम का यह एप्प आपको हर किस्म की मदद करने को तत्पर है. एक बार आप इसके डाटाबेस में आप अपने तमाम नए पुराने ड्रेस का फ़ोटो खींच कर डाल दें और उनमें टैगिंग कर दें बस. फिर यह एप्प आपको आपके मूड व वार-त्यौहार-मौसम-आयोजन के हिसाब से बताता जाएगा कि फलां आलमारी के फलां कोने में रखा ड्रेस आज-अभी के लिए सर्वोत्तम होगा.

यह एप्प एक कदम आगे जाकर आपको वंडरग्राउन्ड.कॉम के सहयोग से रीयल-टाइम में मौसम का पूर्वानुमान लगाकर आपको अपना ड्रेस चुनने में सहायता करेगा. नहीं तो अब तक होता ये था कि आप अभी की गरमी और सूखे मौसम के हिसाब से पोशाक पहन कर बाहर निकलती थीं और थोड़ी ही देर में अंधड़ के साथ आया पानी-बरसात आपके हजारों के ड्रेस का कबाड़ा कर देता था.

महिलाएँ इसे अच्छा खासा पसंद कर रही हैं. रेखा को तो यह पहली ही नजर में भा गया. परंतु जब मैंने इस एप्प को ठोंक बजाकर देखा तो मुझे ये खास जमा नहीं. मेरे विचार में इस एप्प में एक फ़ीचर की कमी है. यदि ये फ़ीचर जुड़ जाए तो फिर यह एप्प एकदम परफ़ेक्ट हो जाए. वह फ़ीचर है – इसका स्वचालित खरीदारी अलार्म. जब भी स्त्रियाँ कोई नया ड्रेस खरीदने का विचार करें तो यह अलार्म बजा कर उन्हें आगाह करे कि आलमारी में जगह नहीं है, कोई बारह सौ ड्रेसेस का पहनने का नंबर पिछले साल भर से नहीं आया है और उनमें भी तीन दर्जन तो पूरे नए-नकोरे हैं – इत्यादि.

स्त्रियों के लिए उनका अल्टीमेट एप्प तो आ गया. पुरुषों के लिए, आपके विचार में ऐसा कौन सा एप्प हो सकता है जो अल्टीमेट हो?

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एडॉप्टैक्स्ट एक कृत्रिम बुद्धि युक्त टैक्स्ट इनपुट औजार है जो आपकी लेखन शैली को जैसे जैसे आप टाइप करते जाते हैं, वैसा अपनाता जाता है और अपनी मेमोरी में रखता है. इसका सामान्य सा मतलब है - आपके द्वारा बारंबार टाइप किए जाने वाले शब्दों को यह पहले ही पहचान कर आपके लिए खुद ब खुद टाइप कर देता है. यही नहीं, इसमें स्वचालित त्रुटि सुधार सुविधा भी है जो संदर्भ के मुताबिक कार्य करता है. इसमें बहुत से शब्दकोश भी हैं. इसमें आप मराठी/हिंदी समेत अन्य 50 भाषाओं में भाषाई  एड आन जोड़कर  टाइप कर सकते हैं.

 

यह टचस्क्रीन और कीबोर्ड दोनों में ही कार्य के लिए ऑप्टीमाइज्ड है.

 

एडॉप्टैक्स्ट को गूगल प्ले की साइट से यहाँ से डाउनलोड कर इंस्टाल करें -

 

https://play.google.com/store/apps/details?id=com.kpt.adaptxt.beta

 

 

डाउनलोड के बाद Adaptxt को सक्रिय करने के चरण:

1) जाएं सेटिंग्स > "भाषा व कुंजीपटल"
2) स्क्रॉल कर नीचे जाएं और पाएं "Adaptxt Beta", चेक बॉक्स को टिक करें और चुनें "ठीक"
3) नीचे “Adaptxt Beta सेटिंग्स” पर टैप करें
4) "ऍड-ऑन प्रबंधक" पर टैप करें और सूची में से किसी भी ऍड-ऑन को चुनें
5) किसी भी पाठ अनुप्रयोग को खोलें
6) पाठ इनपुट क्षेत्र में जाकर स्पेस-बार को तब तक दबाकर रखें जब तक एक पॉप-अप मेन्यू न आ जाए
7) चुनें "Input Method" और "Adaptxt Beta"
8) Adaptxt कुंजीपटल आपके डिफ़ॉल्ट एण्ड्रॉयड कुंजीपटल की जगह ले लेगा

 

यदि आप कुछ पूछना चाहते हैं तो एडॉप्टैक्स्ट सपोर्ट फोरम पर जाएं:
www.adaptxt.com/adaptxtlive/support/android

या सामान्य सवालों के लिए बारंबार पूछे जाने वाले सवाल देखें:
www.adaptxt.com/adaptxtlive/FAQ/Android

 

एडॉप्टैक्स्ट में समर्थित भाषाएं:

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• एस्टोनियन - Eesti
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• फिन्निश - Suomi
• फ्रेंच (कनाडाई) - Français (CA)
• फ्रेंच (फ्रांसीसी)- Français
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ब्लॉगिंग को समर्पित ब्लॉग अड्डा में हिंदी ब्लॉगिंग पर त्रिदिवसीय विचार विमर्श प्रारंभ किया गया है. विचार-विमर्श शनिवार देर रात तक जीवंत चलता रहेगा. इस विचार-विमर्श में अपनी बात रखने के लिए आप भी आमंत्रित हैं.

 

विचार-विमर्श की सामग्री बाद में भी पठन-पाठन हेतु उपलब्ध रहेगी.

 

यदि आपके मन में कोई प्रश्न हों, कोई विचार हों या दूसरे हिंदी ब्लॉगिंग के बारे में क्या कह रहे हैं यह जानना चाहते हों तो ब्लॉग अड़्डा डिस्कशन फ़ोरम में हिंदी ब्लॉगिंग पर विचार विमर्श में यहाँ जाएँ.

क जमाना था जब गरमी की छुट्टियों में लोग बाग़ पहाड़ों की ओर जाते थे. परंतु धन्य है! गर्मियाँ भले ही अब कई मामलों में उससे ज्यादा पड़ रही हो, सोनू-मोनू के सेमेस्टर के कारण छुट्टियाँ जरा भी नहीं पड़ रहीं. और ऐन-केन-प्रकारेण अगर छुट्टियाँ मिल भी गईं तो भाई रेलवे के रिजर्वेशन का क्या होगा. तो कौन भला आदमी धक्के खाकर पहाड़ों की ओर जाएगा. और यदि आप ठान लें कि पहाड़ों पर जाना ही है तो महंगी हवाई यात्रा पकड़ लें, मगर वह भी टुकड़ों में होगी और फिर इन टुकड़ों में की गई यात्रा के अपने अलग दुखड़े होंगे.

इसीलिए, आज का मानव पहाड़ों के बजाए मॉल की ओर चला जाता है. तफरीह करने. जब भी जैसी भी जितनी भी छुट्टी मिलती है, वो मॉल की ओर दौड़ लेता है. सेंट्रलाइज्ड एयरकंडीशनिंग से उसे वहाँ का मौसम पहाड़ों जैसा ही ठंडा लगता है.

एक दिन जरा सी छुट्टी मिली तो अपने राम ने भी सोचा कि चलिए माल की तफरीह कर लें. इधर गर्मी बड़ी पड़ रही थी तो बिजली रानी भी बारंबार बंद हो रही थी. आदमी के साथ जब समस्या आती है तो एक तरफ से नहीं आती. वो कई तरफ से एक साथ आती है. गरमी आती है तो अपने साथ बिजली की कमी भी ले आती है. घरों की बिजली बारंबार गुल होती है – शेड्यूल-नॉन-शेड्यूल बिजली बंद होती है, मगर मॉलों की नहीं. वहाँ तो फेल-सेफ सिस्टम लगा रहता है. एक तरफ से बिजली बंद होती है तो दूसरे फीडर से मिलती है. वहाँ से भी नहीं मिलती तो जेनसेट चालू हो जाता है. यानी आप अपनी पूरी दोपहरी मॉल में बिना बिजली की चिंता किए सेंट्रल एसी की ठंडक में बिता सकते हैं.

तो मैं मॉल पहुँचा. वहाँ प्रवेश द्वार पर सुरक्षा गार्ड खड़े थे. प्रत्येक व्यक्ति की गहराई से सुरक्षा जांच कर रहे थे. लगता है अमरीकी भी भी इसी तरह जाँच करते होंगे इसीलिए शाहरूख को समस्या होती होगी. मेरी बारी आई तो मुझे भी बड़ी समस्या हुई कि मेरी खाली जेबों और पुराने कुर्ते पजामे में इन्हें क्या मिलेगा. एकबारगी लगा कि मॉल यात्रा की ऐसी की तैसी, चलो, वापस लौट चलें, मगर फिर लगा कि ऐसा किया तो शर्तिया पकड़े जाएंगे. सिक्योरिटी जाँच से बचकर जो बंदा भागेगा वो तो चोर की दाढ़ी में तिनका की तरह होगा. पर यह बड़ा अजीब था कि पुरुषों की तो जबरदस्त जाँच हो रही थी, मगर स्त्रियों की जाँच नहीं हो रही थी. बल्कि स्त्रियों के बैगों को खुलवा कर देखा जा रहा था. सही है. आज के जमाने में पुरुषों के जेब और स्त्रियों के बैग ही खतरनाक हो सकते हैं. बाकी की औकात क्या!

मॉल में घुसते ही मॉल कल्चर से मुकाबला हो गया. चारों और बड़ी बड़ी दुकानें. बीच में एक पियानो वादक कोई अंग्रेज़ी धुन बजा रहा था. परंतु उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा था. ऊपर से सब तरफ चिल्ल पों और दीगर शोरगुल था. इतने में एक छोटे से बच्चे को वह पियानो, पियानोवादक और संगीत जम गया तो वह अपनी माँ की गोद से मचल कर उतरा और पियानो वादक की के बाजू में जाकर बैठ गया और ताबड़तोड़ पियानो की कुंजियाँ दबाने लगा. इतने बड़े मॉल में एक वही संगीत की समझ और संगीत प्रेमी मिला. परंतु उसकी माता को अपने बच्चे का यह संगीत प्रेम पसंद नहीं आया और जबरन उस बच्चे को उठाकर ले जाने लगी. तब बच्चे ने शिव रूप धारण कर तांडव नृत्य मचाया जो वाकई दर्शनीय था. साथ में चल रही बच्चे की दादी माँ ने तब तुरुप का पत्ता चला और पास में खड़े एक गार्ड की ओर इशारा किया कि ज्यादा तांडव दिखाओगे तो उस पुलिस वाले को पकड़वा देंगे. भारतीयों के मन में इस तरह से पुलिस वालों का भय बचपन से ही बिठा दिया जाता है. भइए, बच के रहना नहीं तो पकड़वा देंगे. बच्चा शायद थोड़ा सा समझदार भी था. पुलिस का नाम आते ही शांत हो गया.

मैंने पियानो वादक से गुजारिश की कि क्या वो आनंद फ़िल्म का गाना – जिंदगी कैसी है पहेली बजा देगा. उसने पास में रखे सोफ़े की ओर इशारा किया और बोला बैठो, बजाता हूँ. मैं बैठ गया और उस शोरगुल में भी मैंने उस संगीत का आनंद लिया. मैंने अपने मोबाइल कैमरे से उसका वीडियो भी बना लिया. आप भी देखें –

 

मॉल की यात्रा अभी जारी है... (आप पाठकों की रुचि पर निर्भर – यदि आप चाहें...)

पुनश्च: आप सभी सुधी पाठकों ने इस ब्लॉग को परिकल्पना पुरस्कार तथा सर्बसे-प्रिय-ब्लॉग पुरस्कार हेतु सदाशयता से चुना. मैं आप सभी का दिल से आभारी हूँ. आप सभी का बहुत-2 धन्यवाद.

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जुलाई 2011 से प्रारंभ हुई साइट यूं कहिए कि अभी आकार ले रही है, और यदि ये गिज्मोडो की तरह नित्य 100-50 आलेख छापने लगे तो ये मानकर चलिए कि इसे लोकप्रिय होने से कोई नहीं रोक सकता.

वैसे भी यह साइट बहुभाषी है - यानी हिंदी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी है यह.

आलेख छोटे और जानकारी परक हैं. अच्छी गुणवत्ता के चित्रों सहित.

यदि आप टेक्नोलॉज़ी के दीवाने हैं तो आपको यह गिज़्बॉट साइट शर्तिया पसंद आएगा. इसकी एक बड़ी खूबी यह है कि आप इसका आरएसएस फ़ीड भी है जिसे आप सब्सक्राइब कर सकते हैं.

गिज्बॉट पर पिछले दिनों छपे आलेखों पर एक नजर -

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विंडोज़ 8 रिलीज प्रीव्यू आपके डाउनलोड व जांच परख के लिए अब उपलब्ध है. मैंने भी इसे हिंदी की उपलब्ध सुविधा की जांच परख के लिहाज से उतारा और अपने एक पुराने कंप्यूटर पर स्थापित किया.

इसकी स्थापना को न सिर्फ सुधारा गया है, बल्कि तेज भी बनाया गया है. बमुश्किल दस-पंद्रह मिनट में यह स्थापित हो गया. परंतु इसने पुराने विंडोज 7 की स्थापना को तो पहचान लिया - यानी आप विंडोज 7 के साथ ड्यूअल बूट मोड में इसे स्थापित कर सकते हैं - मगर मेरे हार्ड-डिस्क के अन्य पार्टीशन के लिनक्स को इसने फिर से पहचानने से इंकार कर दिया.

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हिंदी के लिए इसका इंटरफेस पैक हालांकि अभी जारी नहीं हुआ है, मगर विश्व की अन्य तमाम महत्वपूर्ण भाषाओं की तरह हिंदी भाषाई कंप्यूटिंग का खयाल इसमें रखा गया है. हिंदी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं - मसलन मराठी, गुजराती, तमिल, पंजाबी इत्यादि के कुंजीपट भी यहाँ अंतर्निर्मित उपलब्ध हैं. कुंजीपट का प्रीव्यू भी वहीं उपलब्ध है.

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लॉगिन स्क्रीन पर ही भाषा व कुंजीपट चुनने की सुविधा मिलती है - और आप बाकायदा हिंदी भाषा व कुंजीपट चुन सकते हैं. हिंदी भाषा चुनने पर आपके कैलेंडर व अंक इत्यादि हिंदी में उपलब्ध हो जाते हैं. हिंदी कुंजीपट डिफ़ॉल्ट रूप में इनस्क्रिप्ट - हिंदी ट्रेडिशनल के रूप में उपलब्ध है. मेरे विचार में डिफ़ॉल्ट रूप में दो अतिरिक्त हिंदी कुंजीपट रेमिंगटन तथा फ़ोनेटिक भी उपलब्ध रहना ही चाहिए. मगर अब यह बड़ा मुद्दा नहीं है. आप भाषाइंडिया.कॉम की साइट से विंडोज 7 का हिंदी आईएमई -2 इंस्टाल कर सकते हैं.

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यदि आपने लॉगिन स्क्रीन पर हिंदी भाषा नहीं चुना है तब भी आप कंट्रोल पैनल की सेटिंग में जाकर भाषाई वातावरण चुन कर हिंदी भाषा व हिंदी कुंजीपट जोड़ सकते हैं.

विंडोज 8 को आरंभ में प्रयोग करते समय मुझे थोड़ी सी परेशानी हुई और कुछ चीजों को नए सिरे से सीखना पड़ा. आप पूछेंगे कि क्यों? तो ऐसा इसके टैब्ड इंटरफ़ेस के कारण चीजों को ढूंढने में बड़ी मुश्किलें आईं. उदाहरण के लिए, जब मैंने इसके एक्सप्लोरर में जाकर एक चित्र को डबल क्लिक किया तो इसे दिखाने के बजाए यह मुझसे विंडोज एप्प का नया संस्करण इंस्टाल करने के लिए कहने लगा. थोड़ी देर बाद जब मैने इसके डिफ़ॉल्ट प्रोग्राम को फ़ोटो व्यूअर में सेट किया तब मैं उस चित्र को देखने में कामयाब हो पाया.

साथ ही, इसका स्टार्ट मेन्यू नजर नहीं आया. माउस को इधर उधर घुमाने पर एप्प दिखा जिसे क्लिक करने पर स्थापित प्रोग्राम दिखे. हाँ, यदि आपको प्रोग्रामों के नाम मालूम हों तो आप सर्च बक्से में जाकर उसके नाम के शुरूआती चंद अक्षर टाइप करने से प्रोग्राम की सूची दिख जाती है जिसे आप क्लिक कर खोल सकते हैं. परंतु यह सब सीखने के लिए थोड़ा समय चाहिए. रूपरंग में यह एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम सा आभास देता है.

इसके विपरीत मेरे पुत्र को इसे सीखने के लिए कोई परेशानी नहीं हुई. बल्कि उसे मजा आया और उसका फ़ोन इससे देखते देखते ही सिंक्रोनाइज हो गया. आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों? तो दरअसल उसके पास विंडोज फ़ोन ल्यूमिया है, जिसका प्रयोग वह कुछ अरसे से कर रहा है. विंडोज़ 8 का इंटरफ़ेस उसके विंडोज़ फ़ोन ल्यूमिया से मिलता जुलता है. तो उसे तो विंडोज के इस नए अवतार में मजा आया. इसमें विंडोज लाइव आईडी से इंटीग्रेट कर साइनइन करने की बढ़िया सुविधा है.

इसका क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि विंडोज 8 को खासतौर पर टैबलेट कंप्यूटिंग के लिए डिजाइन किया गया है. आने वाले समय में बाजार टैबलेट कंप्यूटरों का ही रहेगा यह मान कर चलें. आपके डेस्कटॉप, लैपटॉप, नेटटॉप, नेटबुक, नोटबुक सब कबाड़ हो जाएंगे. लोग या तो टैबलेट या फिर बड़े स्क्रीन के सेमसुंग नोट या गैलेक्सी एस-3 जैसे मोबाइलों का प्रयोग आमतौर पर अपनी कंप्यूटिंग जरूरतों के लिए करेंगे. इसी बात को ध्यान में रख कर विंडोज 8 को बनाया गया है. अलबत्ता आप इसकी सेटिंग क्लासिक के रूप में वापस सेट कर सकते हैं.

क्या आपको विंडोज 8 पर अपग्रेड के लिए जाना चाहिए?

यह बड़ा यक्ष प्रश्न है. यदि आप अभी भी विंडोज एक्सपी प्रयोग कर रहे हैं तब तो बिलकुल हाँ क्योंकि बहुत सी सुरक्षा खामियों को इसमें दूर किया गया है, और यदि आप विंजोज 7 प्रयोग कर रहे हों तो अभी तो नहीं. विंडोज 7 के मुकाबले इसमें  टैब्ड इंटरफेस और कुछ कॉस्मेटिक सर्जरी के अलावा हम हिंदी वालों के लिए कुछ खास नया नहीं है. हाँ, यदि आप नया कंप्यूटर लेने की सोच रहे हैं तब तो यही विकल्प होना चाहिए, और यदि टैबलेट लेने की सोच रहे हैं तो थोड़ा रुक कर विंडोज टैबलेट आने का इंतजार भी कर सकते हैं.

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35 लाख का टॉयलेट - भारतीय योजना आयोग - अमीरी की रेखा

भारतीय योजना आयोग के मुताबिक अमीरी की न्यूनतम रेखा - 35 लाख का शौचालय!

अच्छा, बताइए, इतने महंगे शौचालय में यदि कभी आपको मजबूरन जाना पड़ा तो क्या आपकी निकलेगी या ऊपर की ऊपर ही अटक जाएगी?

पूरी दुनिया ऑनलाइन होने की ओर भाग रही है. बची खुची कसर मेरे मोहल्ले के धोबी और नाई ने अभी हाल ही में पूरी कर दी. कल मैं प्रेस के लिए कपड़े डालने गया तो पाया कि उस दुकान का नया नामकरण हो गया है - सबसे-सफेद-धुलाई-डॉट-कॉम. बात दुकान के नए नामकरण की होती तो फिर भी ठीक था. काउंटर पर जहाँ अपने रामू काका कपड़े देते लेते थे और जिस होशियारी से हजारों की संख्या में एक जैसे कपड़ों में से प्रत्येक ग्राहक को उसके सही कपड़े निकाल देते थे, वहाँ एक अदद कंप्यूटर कब्जा जमाया बैठा था और सामने बैठा था एक ऑपरेटर.


मैंने उस ऑपरेटर से अपने कपड़े के बारे में पूछा. तो उसने मुझे ज्ञान दिया कि अब दुकान फुल्ली ऑनलाइन हो गई है और अब आप घर बैठे अपने कंप्यूटर से अपन कपड़े की वर्तमान स्थिति के बारे में पता कर सकते हैं कि वो धुल चुकी है, इस्तरी के लिए गई है या फिर अभी धोबी-घाट में पटखनी खा रही है. तो मैंने उससे पूछा कि भइए, जरा अपने कंप्यूटर में देख कर मेरे कपड़े की वर्तमान पोजीशन बताओ जो मैंने इस्तरी के लिए पिछले दिन दिए थे. वह पलट कर बोला घंटे भर बाद आना, अभी तो सर्वर डाउन है.


मोहल्ले के नाई की स्थिति भी कोई जुदा नहीं थी. जब सिर के चंद बचे खुचे बाल भी जब बीवी को लंबे लगने लगे और उन्होंने कई कई मर्तबा टोक दिया तो लगा कि अब तो कोई चारा बचा नहीं है तो नाई की दुकान की ओर रूख किया गया. महीने भर से नाई की दुकान की ओर झांका नहीं था और जब आज पहुंचा तो वहाँ मामला कायापलट सा था.


एक बड़े मॉनीटर के सामने बिल्लू बारबर व्यस्त था. वो मेरे मोहल्ले के ही एक मजनूँ टाइप बेरोजगार को स्क्रीन पर विभिन्न हेयरस्टाइल उसके चेहरे के चित्र पर जमा-जमा कर बता रहा था कि कैसे वो इस कंप्यूटर में डले इस लेटेस्ट सॉफ़्टवेयर के जरिए उसका लेटेस्ट टाइप का हेयरस्टाइल बना देगा जिससे वो मजनूँ मोहल्ले में और ज्यादा लेटेस्ट हो जाएगा. मजनूँ बड़ी ही दिलचस्पी से हर हेयरस्टाइल को दाँतों तले उंगली दबाए हुए देख रहा था और कल्पना कर रहा था कि यदि वो ये वाला नया हेयरस्टाइल अपना लेता है तो प्रतिमा और फातिमा और एंजलीना पर उसके इस नए रूप का क्या प्रभाव पड़ेगा.

बहरहाल, मुझे अपने बाल कटवाने थे. तो मैंने बिल्लू चाचा की ओर प्रश्नवाचक नजरों से देखा. इससे पहले बिल्लू काका मुझे देखते ही कुर्सी पेश करते थे और यदि व्यस्त रहते थे तो बोल देते थे कि घंटे आधे घंटे में वापस आ जाइए, तब तक वो लाइन में पहले से लगे ग्राहकों को निपटा लेगा. परंतु अभी बिल्लू काका का हिसाब बदला हुआ था. उन्होंने गर्व से बताया कि उनकी शॉप अब ऑनलाइन हो गई है. बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने, बाल रंगवाने और यहाँ तक कि चंपी करवाने के लिए भी पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी पड़ेगी, समय लेना होगा तब बात बनेगी. यदि मैं आपको अपना पुराना ग्राहक मान कर बाल काटने लगूं, और इतने में कोई ऑनलाइन बुकिंग इस समय की हो जाए और कोई ऑनलाइन बुकिंग धारी ग्राहक आ जाए तब तो मेरी बहुत भद पिटेगी. मैं ऐसा नहीं कर सकता. मामला ऑनलाइन का है.


मैंने विरोध किया कि काका, मेरे पास न तो कंप्यूटर है न मुझे कंप्यूटर चलाना आता है. मैं ऐसा कैसे करूंगा. बिल्लू काका को खूब पता था कि मैं झूठ बोल रहा हूँ. मगर फिर भी उन्होंने इस बात को गंभीरता से लिया और बात स्पष्ट किया - अब इस दुकान की सेवा लेनी होगी तो पहले ऑनलाइन बुकिंग तो करवानी ही होगी. यदि आपके पास कंप्यूटर नहीं है तो क्या हुआ. पास ही सुविधा केंद्र है, साइबर कैफे है, वहाँ जाइए और वहाँ से बुकिंग करिए.


तो मैंने सोचा कि चलो पास के साइबर कैफ़े से बिल्लू काका के सेलून में बाल काटने की बुकिंग कर लेते हैं. क्योंकि यदि आज बगैर बाल कटवाए वापस गए तो घर पर खैर नहीं. और, बीबी को यह बात बताएंगे कि अब ऑनलाइन बुक कर बाल कटवाने होंगे, जिसमें समय लगेगा तो वो किसी सूरत ये बात मानेगी ही नहीं और ऊपर से निश्चित ही अपना तकिया कलाम कहने से नहीं चूकेगी - क्या बेवकूफ बनाने के लिए मैं ही मिली थी!

साइबर कैफ़े में लंबी लाइन लगी थी. मैं भी कोई चारा न देख लाइन में लग गया. बड़ी देर बाद मेरा नंबर आया तो मैंने कैफ़े वाले से कहा कि वो बिल्लू बारबर के यहाँ बाल कटवाने की मेरी बुकिंग कर दे. उसने ढाई सौ रुपए मांगे. मैं यूं चिंहुका जैसे कि मेरे बाल विहीन सर पर ओले का कोई बड़ा टुकड़ा गिर गया हो. ढाई सौ रूपए? मैं चिल्लाया, और पूछा कि इतने पैसे किस बात के?

साइबर कैफ़े वाले ने मुझे अजीब तरह से घूरते हुए बताया कि पचास रुपए तो बिल्लू बारबर के यहाँ बाल कटवाने का दर है. बाकी दो सौ रुपए साइबर कैफ़े की आधिकारिक सुविधा शुल्क है.

मैं भुनभुनाने लगा और बोला कि यह तो सरासर लूट है. तो साइबर कैफ़े वाले ने कहा कि यदि बुक करवाना है तो जल्दी बोलो नहीं तो आगे बढ़ो. फालतू टाइम क्यों खराब करते हो. वैसे भी सुबह से बंद पड़ा सर्वर अभी चालू हुआ है और अटक फटक कर चल रहा है. मेरे पीछे लंबी लाइन में और भी दर्जनों लोग खड़े थे और वे जल्दी करो जल्दी करो का हल्ला मचा रहे थे. तमाम दुनिया ऑनलाइन हुई जा रही थी तो ये बवाल तो खैर मचना ही था.

सुबह का निकला शाम को जब बाल कटवा कर वापस घर लौट रहा था तो पड़ोस में रहने वाला एक छात्र बेहद खुश खुश आता दिखाई दिया. वो पढ़ने लिखने में बेहद फिसड्डी था और मैट्रिक में वो इस साल तीसरी कोशिश में पास हुआ था.
मैंने उससे पूछा कि भई क्या बात है बेहद खुश नजर आ रहे हो. तुम्हारा रिजल्ट निकले तो अरसा बीत गया मगर खुशी अभ भी उतनी ही है जैसे जश्न मनाने और लड्डू बांटने के दिन हैं...


अरे अंकल, आप भी क्या मजाक करते हैं. उसने मेरी बात काटी और आगे बोला - मुझे कॉलेज में एडमीशन लेना है और अब मुझे बढ़िया कॉलेज में अपने मनपसंद विषय में दाखिला मिल जाएगा.

मैंने कहा - वो कैसे? तुम्हारा तो थर्ड डिवीजन है.

तो क्या हुआ अंकल – वो खुशी से चिल्लाया - इस साल से कॉलेज मे एडमीशन ऑनलाइन हो गए हैं!
ओह, तो ये बात थी.

दुनिया ऑनलाइन हुए जा रही है. नर्सरी और केजी 1 के एडमीशन भी. सवाल ये है कि आप ऑनलाइन हुए या नहीं?

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आई वॉज़ बॉर्न इंटेलिजेंट, फ़ेसबुक रूईन्ड मी!

एंड दैट इज व्हाय आई एम हियर...?

(पचमढ़ी के एक चाय की गुमटी का चित्र )

अनुनाद जी ने तकनीकी हिंदी समूह में बताया :
मैंने वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा नेट पर उपलब्ध करायी गयी
शब्दावली का उपयोग करके 'सिम्पल डिक्शनरी अप्लिकेश' (SDA) के साथ उपयोग किये
जाने योग्य एक शब्दकोश तैयार किया है। यह आफलाइन उपयोग की दृष्टि से तैयार
किया गया है।
विशेषताएँ:
१) इसमें लगभग सभी विषयों की पारिभाषिक शब्द समाहित हैं।
२) इसमें लगभ्ग १ लाख ६६ हजार प्रविष्टियाँ हैं।
३) यह एक टेक्स्ट फाइल है जिसे 'सिम्पल डिक्शनरी अप्लिकेश' (SDA) के साथ काम
में लाया जा सकता है। किन्तु टेक्स्ट फाइल होने के कारण इसे किसी भी साधारण
टेक्स्ट एडिटर में भी खोला, देखा और परिवर्तित/परिवर्धित किया जा सकता है।
(ज्ञातव्य है कि SDA बहुत ही छोटे आकार का एक अत्यन्त उपयोगी शब्दकोश
अनुप्रयोग (डिक्शनरी अप्लिकेशन) है। )
४) गुणी लोग इसका किसी अन्य कार्यों के लिये 'कच्चे माल' की तरह भी उपयोग कर
सकते हैं।
 
अनुनाद जी को धन्यवाद.
मैंने उनके द्वारा अपलोड किए टैक्स्ट फ़ाइल का 'कच्चे माल की तरह' प्रयोग कर मुफ़्त उपलब्ध सरल शब्दकोश अनुप्रयोग (सिंपल डिक्शनरी एप्लीकेशन) के साथ ही डाउनलोड योग्य जिप फ़ाइल अपलोड किया है जिसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं -

http://goo.gl/d5ybi
 
यह technical-hindi-english-dictionary.zip नामक फ़ाइल के रूप में डाउनलोड होगा.
इसे किसी डिरेक्ट्री या फ़ोल्डर में अनजिप करें.
वहाँ आप उस फ़ोल्डर में जाएँगे तो आपको कुछ फ़ोल्डर के साथ तीन फ़ाइलें मिलेंगी -
sda_java.bat
sda_c#.exe
sda_java.jar
 
आप इन तीनों में से किसी को भी डबल क्लिक कर चला सकते हैं. ध्यान दें कि आपके कंप्यूटर में जावा या/अथवा डॉट.नेट  का संस्करण स्थापित होना आवश्यक है. यदि आपके पास विंडोज 7 है तब यह पहले से ही आपके कंप्यूटर में संस्थापित होता है.
जब आप इस प्रोग्राम को चलाएंगे तो यह कुछ इस तरह चलेगा
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ध्यान दें कि बाईं तरफ ड्राप-डाउन विंडो में डिक्शनरी के सामने दिए गए English-Hindi_dict_v1.0.txt को चुनना है. और फिर आप सर्च बक्से में अंग्रेज़ी या हिंदी किसी में भी सर्च कर शब्दकोश का लाभ ले सकते हैं. ऊपर हमने strong शब्द से सर्च किया है. नीचे के स्क्रीनशॉट में प्रबल सर्च करने पर दिया परिणाम दृष्टव्य है:
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यह एक वृहद शब्दकोश है जिसमें एक लाख साठ हजार से भी अधिक शब्दों के अर्थ दिए गए हैं.

कोई वाटर प्यूरीफ़ायर खरीदने की सोच रहे हैं? तो सबसे पहले यह देख लें कि कंपनी की आफ़्टर सेल्स सर्विस कैसी है.

आपने हेमामालिनी को यत्र तत्र सर्वत्र केंट वाटर प्यूरीफ़ायर के गुणों का बखान करते हुए उसे खरीदने की सलाह देते देखा-सुना होगा.

मगर ठहरिए! हेमामालिनी की बातों में मत जाइए! पहले मेरी आप-बीती सुनिए, फिर उसके बाद कोई निर्णय लीजिए.

मैं लंबे समय से यूरेका फ़ॉर्ब्स का सामान्य वाटर प्यूरीफ़ायर (क्लासिक मॉडल) प्रयोग करता रहा था. यह नगर निगम के जल प्रदाय से होने वाले पानी को साफ करने के लिए उपयुक्त है. इसमें मेंटेनेंस भी नहीं के बराबर होता है और बेहद किफायती भी है.

परंतु जब हम अपने नए घर में शिफ़्ट हुए तो यहाँ ट्यूबवेल का पानी पीने के लिए आता है जो कि स्वाद में कसैला है. तब आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) वाटर प्यूरीफ़ायर लगाने को सोचा गया क्योंकि यह सामान्य वाटर फ़िल्टर काम का नहीं रह गया था. आरओ फ़िल्टर पानी में घुले हुए स्वाद बिगाड़ने वाले सॉल्ट को फ़िल्टर कर उसे सुस्वादु बनाता है. मैंने कुछ विकल्पों के लिए खोजबीन शुरू की कि कौन सा मॉडल उपयुक्त खरीद और रखरखाव में किफायती होगा.

और, जैसा कि आपको अंदेशा हो रहा है, मैंने यहीं बहुत बड़ी भूल कर दी.

मैंने तमाम इंटरनेट से खंगाल कर रीव्यू इत्यादि देख पढ़ कर केंट वाटर प्यूरीफायर का ग्रैंड+ मॉडल लगवाया. यह पिछले अक्तूबर 2011 की बात है.

और उसी दिन से समस्या आने लगी.

वॉटरप्यूरीफ़ायर को प्रारंभिक रूप से लगाने के उपरांत उसके प्रचालन की जानकारी कंपनी के इंजीनियर ने दी और वह चला गया.

इंजीनियर के जाने के एकाध घंटे बाद ही मशीन ओवरफ्लो करने लगा. डीलर को खबर किया गया तो उसने बताया कि वो किसी मेकेनिक को भेजता है. परंतु मेकेनिक दूसरे दिन आया. तब तक मशीन मैन्युअल मोड में मजबूरी में चलाते रहे. मेकेनिक ने बताया कि कोई ओवरफ्लो स्विच काम नहीं कर रहा था, उसे दुरूस्त कर दिया है, अब कोई परेशानी नहीं होगी.

अभी इस मशीन को खरीदे छः महीने भी नहीं हुए कि इसमें फिर से समस्या आने लगी. पिछले दस बारह दिनों से यह मशीन कभी भी चालू हो जाती और कभी भी बंद हो जाती. फिर पिछले चार दिनों से यह एक मिनट में चार पाँच बार बंद-चालू होने लगी. इसके पानी फिल्टर करने की रफ़्तार भी बुरी तरह से घट गई. चूंकि मशीन के साथ एक वर्ष की गारंटी है अतः डीलर को फोन लगाया कि कृपया सुधार दें. हेल्प डेस्क में बैठे बंदे ने नाम पता व मशीन नंबर नोट किया और कहा कि जल्द ही ठीक करवा देंगे.

उस दिन मेकेनिक नहीं आया तो दूसरे दिन डीलर को फिर से फोन लगाया गया. मेकेनिक वह दूसरे दिन भी नहीं आया. शाम को बताया गया कि बहुत से पेंडिंग कम्प्लेन थे जिसे निपटाने में समय लग गया. ध्यान दीजिए – बहुत से पेंडिंग कम्प्लेन! यानी मशीनों में समस्या आती रहती है?

तो तीसरे दिन मैंने इंटरनेट से केंट की साइट से भोपाल हेल्प डेस्क से नंबर लिया और फ़ोन लगाया. सुबह सुबह फोन नहीं लगा. मैंने वहाँ बताए ईमेल पते पर व वेब फ़ॉर्म पर अपनी शिकायत दर्ज की. परंतु कंपनी से न तो ईमेल का जवाब आया न कंपनी से कोई संपर्क किया गया.

कोई ग्यारह बजे भोपाल हेल्प डेस्क नंबर से मुझसे संपर्क किया कि मामला क्या है. मैंने वस्तु स्थिति बताई. तो उसने मेरी आँखें खोलने वाली बात बताई.

उसने बताया कि केंट की सर्विस तो संबंधित डीलर ही देते हैं. [जबकि यूरेका फ़ॉर्ब्स के मशीनों की सर्विस कंपनी के अधिकृत फ्रेंचाइजी करते हैं, और बेहद प्रोफ़ेशनल तरीके से करते हैं. और पिछले बारह-पंद्रह वर्षों के उपयोग के दौरान मुझे कभी भी इस तरह की कोई समस्या नहीं आई] वह भी किसी दूसरे डीलर के यहाँ से बोल रहा था. और चूंकि मेरा मशीन गारंटी पीरियड में है तो जिस डीलर से खरीदा है वही सर्विस देगा. दूसरे को भेजने पर 250 रुपए सर्विस चार्ज देने होंगे. मैंने 250 रुपए देने से मना कर दिया क्योंकि मशीन तो वैसे भी गारंटी पीरियड में ही है.

चौथे दिन मैंने फिर सुबह सुबह डीलर के यहाँ फोन लगाया कि मशीन में समस्या की रिपोर्ट चार दिन पुरानी है और वाटर प्यूरीफ़ायर को अभी तक ठीक नहीं किया गया है. आश्वासन मिला कि जल्द से जल्द ठीक करवाते हैं क्योंकि अभी मेकेनिक उसी क्षेत्र में है.

मगर देर शाम तक न तो मेकेनिक आया और न ही उसकी कोई खबर. आज इन पंक्तियों के लिखे जाने तक समस्या बरकरार है.

शायद केंट के स्थानीय डीलर मेरी परीक्षा लेना चाहते हैं. मगर समस्या डीलर की नहीं है – केंट के मार्केटिंग व व्यवस्था प्रबंधन की समस्या है यह. बड़े शहरों में जहाँ ग्राहक बेस अधिक होते हैं, वहाँ सुधार इत्यादि के लिए सेंट्रलाइज्ड सिस्टम होना चाहिए ताकि मेनपॉवर का अधिकतम उपयोग हो सके. अभी तो हो यह रहा है कि एक ही क्षेत्र में तीन तीन डीलर के बंदे कंप्लेन ठीक करने घूम रहे होते हैं!

ऐसा नहीं है कि केंट मशीन में फ़िल्टर की कोई बड़ी समस्या है. मशीन पानी बढ़िया साफ कर रहा है. मशीन चूंकि मेकेनिकल पार्ट युक्त है, इसलिए इसे नियमित रखरखाव की जरूरत पड़ती है. और यही नियमित रखरखाव सही तरीके से कंपनी और उसके डीलर नहीं दे पा रहे हैं. सोचिए, गर्मी का दिन है और आपका पानी बंद है!

इस आलेख का उद्देश्य है संभावित ग्राहकों को वस्तुस्थिति के बारे में सचेत करना. उम्मीद है यह अपने उद्देश्य में सफल होगा.

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