बुधवार, 23 मई 2012

कहाँ से चला था और मैं ये कहाँ आ गया!

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और भी कुछ कहना बाकी रह गया है क्या?

8 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. ब्लाग पर आना सार्थक हुआ । काबिलेतारीफ़ है प्रस्तुति । बहुत सुन्दर बहुत खूब...बेहतरीन प्रस्‍तुति
    हम आपका स्वागत करते है..vpsrajput.in..
    क्रांतिवीर क्यों पथ में सोया?

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  2. मै तो आपके ब्‍लाग पर ही आना चाहता था और वही आया हू
    तकनीकी जानकारीयो का ब्‍लाग युनिक

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  3. सच में, बहुत लम्बी थी यह यात्रा और अभी शेष है।

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  4. अवाक् तो मैं भी हूँ किन्‍तु इसलिए कि बात पल्‍ले नहीं पडी।

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  5. chareveti chareveti kshitij ke aagebhi path hoga

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  6. It was a good experience to read the articles and contents on this site.
    http://www.deccansojourn.com

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