टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

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हमने बोलन बन्‍द कर दिया है और हम इसी की सजा भुगत रहे हैं। न्‍यायालय ने कहा तो हम खुश हो गए। हम बोल देते तो नौबत यहॉं तक नहीं आती।

उत्‍तर प्रदेश में तो जो हो जाए, कम है। हॉं, संकाय सदस्‍यों की भर्ती में मुश्किल आएगी। असंख्‍य 'योग्‍य' उम्‍मीदवार सामने आऍंगे।

पहला तो जोरदार रहा. दूसरा पढने में नहीं आ रहा है. शायद मेरी उम्र का दोष हो.

नहीं, मैंने जानबूझ कर ही चित्र छोटा लगाया है. समाचार में कोई मसाला नहीं है. मात्र शीर्षक ही उपयोगी लगा था मुझे.

सबके लिये पढ़ाई लिखाई आवश्यक है।

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