शनिवार, 7 अप्रैल 2012

क्या आप सोशल मीडिया यानी ब्लॉग, ट्विटर, फ़ेसबुक में मनमर्जी कुछ भी लिख देते हैं?

तो जरा सावधान हो जाइए.

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लन्दन की एक अदालत द्वारा ललित मोदी के खिलाफ दिया गया फैसला सोशल मीडिया के अतिरेकियों के लिए कड़ी चेतावनी है। आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी ने वर्ष 2010 में टि्वटर पर न्यूजीलैंड के क्रिकेटर क्रिस केयन्र्स पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया था। तेज गेंदबाज केयन्र्स ने ललित मोदी पर लन्दन में मानहानि का मुकदमा दर्ज कर दिया, जिसका निर्णय 27 मार्च 2012 को आया है। लन्दन के उच्च न्यायालय ने क्रिस केयन्र्स की दलील को स्वीकार करते हुए ललित मोदी को चार लाख नब्बे हजार पौंड का मुआवजा अदा करने का आदेश दिया।

वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ व प्राचार्य प्रोफेसर हरबंश दीक्षित का लिखा पूरा आलेख पत्रिका में यहाँ  http://www.patrika.com/article.aspx?id=33266 पढ़ें

7 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. इसई लिये भाई अपन बहुत डर-डर के लिखते हैं। :)

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  2. लोगों के लिखने में कुछ तो लगाम लगेगी।

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  3. ashlil pustak aur rupawati waishya kabhi sammaan
    ke patra nahin hote .isliye gandi bat likhane ke jagah kuchha na likhen kewal paden tab bhi bura nahin.

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  4. अच्छी जानकारी है.लोगों को अब सोच समझकर ही लिखना चाहिए.

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  5. विभिन्‍न अखबारों में यह समाचार विस्‍तार से पढा था। स्‍वनियमन के लिए सोचनेपर मजबूर करेगा यह निर्णय।

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  6. परम स्वतंत्र न सर पर कोहू...यह भाव रख कर मनमाने ढंग से लिखने वालों पर लगाम तो लगना ही चाहिए।

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