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119 आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there

 

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

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सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न

मेरे नर्सिंग स्कूल के दूसरे माह हमारे प्रोफेसर ने एक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की। मैं एक मेहनती विद्यार्थी था अतः मैंने एक ही बार में पूरा प्रश्नपत्र पढ़ लिया।

"रोज सुबह विद्यालय की सफाई करने वाली महिला का क्या नाम है?"

निश्चित रूप से मुझे यह प्रश्न एक तरह का मजाक लगा। मैंने विद्यालय साफ करने वाली उस महिला को कई बार देखा था। वह लंबी, काले बालों वाली एक अधेड़वय महिला थी। लेकिन मुझे उसका नाम कैसे पता होगा? उस प्रश्न को छोड़ मैंने पूरा प्रश्नपत्र हल कर दिया। कक्षा समाप्त होने के पहले एक सहपाठी ने पूछा कि क्या अंतिम प्रश्न को सामान्यज्ञान की श्रेणी में रखना उचित है?

प्रोफेसर ने उत्तर दिया - "निश्चित रूप से! अपने जीवन में तुम्हारी कई लोगों से मुलाकात होगी। वे सभी महत्त्वपूर्ण हैं। वे सभी तुमसे ध्यानाकर्षण और देखभाल चाहते हैं। उन्हें देख मुस्कराना और अभिवादन करना ही पर्याप्त होगा।"

और मैं यह सबक आज तक नहीं भूला हूं.....

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सिकंदर महान और डायोजिनीस

भारत आने से पूर्व सिकंदर डायोजिनीस नामक एक फकीर से मिलने गया। उसने डायोजिनीस के बारे में बहुत सी बातें सुनी हुयी थीं। प्रायः राजा-महाराजा भी फकीरों के प्रति ईर्ष्याभाव रखते हैं।

डायोजिनीस इसी तरह के फकीर थे। वह भगवान महावीर की ही तरह पूर्ण नग्न रहते थे। वे अद्वितीय फकीर थे। यहां तक कि वे अपने साथ भिक्षा मांगने वाला कटोरा भी नहीं रखते थे। शुरूआत में जब वे फकीर बने थे, तब अपने साथ एक कटोरा रखा करते थे लेकिन एक दिन उन्होंने एक कुत्ते को नदी से पानी पीते हुए देखा। उन्होंने सोचा - "जब एक कुत्ता बगैर कटोरे के पानी पी सकता है तो मैं अपने साथ कटोरा लिए क्यों घूमता हूं? इसका तात्पर्य यही हुआ कि यह कुत्ता मुझसे ज्यादा समझदार है। जब यह कुता बगैर कटोरे के गुजारा कर सकता है तो मैं क्यों नहीं?" और यह सोचते ही उन्होंने कटोरा फेंक दिया।

सिकंदर ने यह सुना हुआ था कि डायोजिनीस हमेशा परमानंद की अवस्था में रहते हैं, इसलिए वह उनसे मिलना चाहता था। सिकंदर को देखते ही डायोजिनीस ने पूछा -"तुम कहां जा रहे हो?"

सिकंदर ने उत्तर दिया - "मुझे पूरा एशिया महाद्वीप जीतना है।"

डायोजिनीस ने पूछा - "उसके बाद क्या करोगे? डायोजिनीस उस समय नदी के किनारे रेत पर लेटे हुए थे और धूप स्नान कर रहे थे। सिकंदर को देखकर भी वे उठकर नहीं बैठे। डायोजिनीस ने फिर पूछा - "उसके बाद क्या करोगे?

सिकंदर ने उत्तर दिया - "उसके बाद मुझे भारत जीतना है।"

डायोजिनीस ने पूछा - "उसके बाद?" सिकंदर ने कहा कि उसके बाद वह शेष दुनिया को जीतेगा।

डायोजिनीस ने पूछा - "और उसके बाद?"

सिकंदर ने खिसियाते हुए उत्तर दिया - "उसके बाद क्या? उसके बाद मैं आराम करूंगा।"

डायोजिनीस हँसने लगे और बोले - "जो आराम तुम इतने दिनों बाद करोगे, वह तो मैं अभी ही कर रहा हूं। यदि तुम आखिरकार आराम ही करना चाहते हो तो इतना कष्ट उठाने की क्या आवश्यकता है? मैं इस समय नदी के तट पर आराम कर रहा हूं। तुम भी यहाँ आराम कर सकते हो। यहाँ बहुत जगह खाली है। तुम्हें कहीं और जाने की क्या आवश्यकता है। तुम इसी वक्त आराम कर सकते हो।"

सिकंदर उनकी बात सुनकर बहुत प्रभावित हुआ। एक पल के लिए वह डायोजिनीस की सच्ची बात को सुनकर शर्मिंदा भी हुआ। यदि उसे अंततः आराम ही करना है तो अभी क्यों नहीं। वह आराम तो डायोजिनीस इसी समय कर रहे हैं और सिकंदर से ज्यादा संतुष्ट हैं। उनका चेहरा भी कमल के फूल की तरह खिला हुआ है।

सिकंदर के पास सबकुछ है पर मन में चैन नहीं। डायोजिनीस के पास कुछ नहीं है पर मन शांत है। यह सोचकर सिकंदर ने डायोजिनीस से कहा - "तुम्हें देखकर मुझे ईर्ष्या हो रही है। मैं ईश्वर से यही मांगूगा कि अगले जन्म में मुझे सिकंदर के बजाए डायोजिनीस बनाए।"

डायोजिनीस ने उत्तर दिया - " तुम फिर अपने आप को धोखा दे रहे हो। इस बात में तुम ईश्वर को क्यों बीच में ला रहे हो? यदि तुम डायोजिनीस ही बनना चाहते हो तो इसमें कौन सी कठिन बात है? मेरे लिए सिकंदर बनना कठिन है क्योंकि मैं शायद पूरा विश्व न जीत पाऊं। मैं शायद इतनी बड़ी सेना भी एकत्रित न कर पाऊं। लेकिन तुम्हारे लिए डायोजिनीस बनना सरल है। अपने कपड़ों को शरीर से अलग करो और आराम करो।"

सिकंदर ने कहा - "आप जो बात कह रहे हैं वह मुझे तो अपील कर रही है परंतु मेरी आशा को नहीं। आशा उसे प्राप्त करने का भ्रम है, जो आज मेरे पास नहीं। मैं जरूर वापस आऊंगा। लेकिन मुझे अभी जाना होगा क्योंकि मेरी यात्रा अभी पूरी नहीं हुयी है। लेकिन आप जो कह रहे हैं वह सौ फीसदी सच है।"

(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

टिप्पणियाँ

  1. अन्त में वही महत्वपूर्ण प्रश्न बन जाते हैं।

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