शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 79

 

sunil handa story book stories from here and there in Hindi

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

395

ईश्वर ने हमें पलकें भी दी हैं

जब गुरूजी का एक शिष्य गंभीर गलती करते हुए पकड़ा गया तो सभी लोगों को गुरूजी से यह अपेक्षा हुई कि वे उसे कठोरतम दंड देंगे। जब एक माह गुजरने के बाद भी गुरूजी ने उसे कोई दंड नहीं दिया तो किसी ने यह कहते हुए अपनी आपत्ति व्यक्त की - "जो कुछ भी घटित हुआ है, हम उसे भूल नहीं सकते आखिर ईश्वर ने हमें आँखें दी हैं।"

गुरूजी ने उत्तर दिया - "तुमने बिल्कुल सही कहा। परंतु ईश्वर ने हमें पलकें भी दी हैं।"

--

396

जीत का बिंदु

यह उस समय की बात है जब अब्राहम लिंकन वकालत करते थे। एक व्यक्ति उनके पास अपना मुकदमा सौंपने गया। लिंकन ने उसकी फाइल को पढ़ा और कहा - "कानूनी दाँवपेंच के हिसाब से तुम यह मुकदमा जीत सकते हो।"

यह कहने के तुरंत बाद उन्होंन उसकी फाइल को लौटा दिया और कहा - "सत्य के आधार पर तुम्हारा मुकदमा जीतना असंभव है। बेहतर होगा तुम कोई दूसरा वकील तलाश लो। यदि मैं तुम्हारा मुकदमा लड़ूंगा तो मेरे मन में हर समय यह दबाब बना रहेगा कि मैं अदालत में झूठ बोल रहा हूँ। और यह भी हो सकता है कि ज्यादा दबाब के चलते मैं अदालत में सब कुछ सत्य बोल दूं और तुम मुकदमा हार जाओ।"

--

135

श्रीनिवास रामानुजन – भागफल

गुरुजी गणित के सवाल पढ़ा रहे थे. गुरुजी ने एक प्रश्न पूछा “यदि हमारे पास 3 केले हों, और तीन छात्र हों और इन केले को सबको बराबर बराबर बांटना हो तो हर छात्र को कितने केले मिलेंगे?”

पहली पंक्ति में बैठे एक बुद्धिमान छात्र ने उत्तर दिया – “हर एक को एक केला मिलेगा.”

“बहुत सही.” गुरूजी ने कहा और वे भाग व भागफल के बारे में विस्तार से बताने लगे.

परंतु एक छात्र से रहा नहीं गया और उठ खड़ा होकर उसने पूछा “गुरूजी, यदि कोई भी छात्र को को कोई भी केला नहीं दिया जाए तो क्या इनमें से हरेक को एक केला मिलेगा?”

इस मूर्खता भरे प्रश्न को सुन सारे छात्र हो हो कर हंस पड़े.

मगर गुरूजी गंभीर हो गए. उन्होंने छात्रों से कहा – इसमें हंसने जैसी कोई बात नहीं है. यह वह प्रश्न है, जिसका उत्तर ढूंढने के लिए गणितज्ञों को सौ साल लग गए. यह छात्र पूछ रहा है कि शून्य को यदि शून्य से भाग दे दिया जाए तो परिणाम क्या होगा?

यह प्रश्न पूछने वाले छात्र थे श्रीनिवास रामानुजन जो आगे चलकर महान गणितज्ञ बने.

--

136

मछली रानी जीवन दायिनी

नसरूद्दीन यात्रा पर थे. रास्ते में उन्हें एक योगी मिला. योगी समाधिस्थ थे और ध्यान कर रहे थे. नसरूद्दीन ने सोचा कि इस योगी से कुछ सीखने को मिलेगा और वहीं इंतजार करने लगे. योगी की समाधि टूटी तो मुल्ला को सामने बैठे देख योगी ने प्रश्न किया – “तुम कौन हो और क्या चाहते हो?”

नसरूद्दीन ने कहा – “महात्मा, मैं दूर देश से आया हूँ. ज्ञान की तलाश में. आपके पास जो ज्ञान है वह मुझ अज्ञानी को भी दे दें तो बड़ी कृपा होगी”

योगी ने अपना ज्ञान बांटा – “मैं विश्वास करता हूँ कि प्रत्येक जीव जंतु में आत्मा होती है. यहाँ तक कि पशुओं में भी और कीट पतंगों में भी. जो उन्हें उनके जीवन में अच्छा बुरा करने की शक्ति प्रदान करती है.”

“आपका बिलकुल सही कहना है,” मुल्ला ने कहा – “एक बार जब मैं मर रहा था तो मछली ने मेरा जीवन बचाया था.”

“अच्छा!,” योगी ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा – “यह तो सचमुच आश्चर्यजनक है. तुम तो सचमुच ईश्वरीय दुआ प्राप्त व्यक्ति प्रतीत होते हो. मैंने आज तक ऐसा नहीं सुना कि किसी की जान मछली ने बचाई हो. खैर, आखिर वो किस्सा क्या था?”

“ओह, किस्सा कुछ यूँ है,” मुल्ला ने विस्तार से बताया – “एक बार मैं दूर देश की यात्रा पर था. जंगल में मैं भटक गया. भूख प्यास से मेरी हालत खराब हो गई. कई दिनों तक न तो खाना मिला न पीने को पानी. आखिर में चलते चलते मुझे एक तालाब दिखा. मैंने पानी पीने के लिए दौड़ लगा दी.”

“अच्छा, तो तुम बेध्यानी और जल्दबाजी में कुंड में गिर गए होगे और कोई ईश्वरीय चमत्कार हुआ होगा, और दैवीय शक्ति संपन्न मछली ने तुम्हें तालाब से निकाला होगा..” योगी के स्वर में आतुरता थी.

“नहीं, जैसे ही मैं तालाब में कूदा, मेरे पैर के नीचे एक बड़ी सी मछली फंस गई. मैंने उसे पकड़ लिया और वहीं भून कर खा गया. भूख के मारे मैं तो मरा जा रहा था. उस मछली ने सचमुच मेरा जीवन बचाया. ईश्वर उसकी आत्मा को शांति प्रदान करें!” नसरूद्दीन ने खुलासा किया.

--

(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

1 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

----

नया! छींटे और बौछारें का आनंद अपने स्मार्टफ़ोन पर बेहतर तरीके से लें. गूगल प्ले स्टोर से छींटे और बौछारें एंड्रायड ऐप्प image इंस्टाल करें. ---