टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 51

 

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ
संकलन – सुनील हांडा
अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी
 
335

दूसरा गधा लाना

"ठीक है नसरुद्दीन कि तुम अपने गधे के मर जाने पर दुःखी हो रहे हो। पर इतना दुःख तो तुमने अपनी पहली बीवी के मर जाने पर भी व्यक्त नहीं किया था।"
"तुम्हें यह याद होगा कि जब मेरी पहली बीवी मरी थी तो सारे गांव वालों ने मुझे यह सांत्वना दी थी कि वे मेरे लिए दूसरी बीवी तलाश करेंगे। पर अब तक किसी गांव वाले ने मुझे दूसरा गधा देने की बात नहीं की है।"
 
336

कौन तुम्हारा सबसे अच्छा मित्र है
कौन तुम्हारा सबसे बड़ा शत्रु है

जब एक नए शिष्य ने मठ में प्रवेश लिया तो गुरू जी ने उससे सबसे पहले यह प्रश्न किया -
"क्या तुम ऐसे व्यक्ति को जानते हो जो सारी उम्र तुम्हारा साथ नहीं छोड़ेगा?"
"वह कौन है गुरूजी?"
"सिर्फ तुम"
"और क्या तुम ऐसे व्यक्ति को जानते हो जिसके पास तुम्हारे सभी प्रश्नों का उत्तर हो?"
"वह कौन है गुरूजी?"
"सिर्फ तुम"
"और क्या तुम अपनी सभी समस्याओं का उत्तर जानते हो?"
"मैं नहीं जानता गुरूजी।"
"सिर्फ तुम"
--
 
88
लीना साराभाई के तीन किस्से
लीना साराभाई, विश्वविख्यात वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की बहन हैं. लीना साराभाई ने मैडम मारिया मांटेसरी के साथ मिलकर बच्चों के लिए श्रेयस नामक एक स्कूल खोला, जो विश्व में बच्चों के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में से एक रहा है.
सुनील हांडा एक बार लीना साराभाई से मिलने पहुँचे. सुनील के हाथों में एक किताब थी. सुनील ने स्मरण के उद्देश्य से किताब के एक पन्ने को मोड़कर दबाया हुआ था. लीना साराभाई ने सुनील के हाथों से वह किताब लिया, उस पन्ने को प्यार से सीधा किया और सुनील से कहा – “पन्नों को ऐसा मोड़ने पर उन्हें दर्द होता होगा. है ना?”
एक बार बातचीत के दौरान लीना साराभाई ने सुनील से कहा – “सुनील भाई, कोई शिक्षक कैसे अपने छात्रों को खुद जोर से चिल्लाकर उन्हें चुप बैठने को बोल सकता है!”
सुनील हांडा कुछ जानकारियों के लिए लीना साराभाई के साथ श्रेयस का भ्रमण कर रहे थे. एक जगह उन्होंने एक लकड़ी की तख्ती देखी जिस पर अक्षरमाला – 1 से 10, 2 से 20 .. 100 तक लिखी हुई थी. उस पर बहुत सी धूल जमी हुई थी, जो यह इंगित करती थी कि उसका उपयोग लंबे समय से नहीं हो रहा है जो कि वहाँ के लिहाज से थोड़ी सी अजीब प्रतीत हो रही थी. सुनील ने जिज्ञासा दर्ज की कि इस तख्ते का प्रयोग क्यों नहीं किया जा रहा है? जवाब में लीना ने कहा – तुमने देखा नहीं कि यह तख्ती वर्गाकार होने के बजाए आयताकार है?
लीना के इस जवाब को प्रारंभ में सुनील समझ नहीं पाए. अचानक दिमाग की बत्ती जली. जब आप बच्चों को पढ़ाते हैं, तब अक्षर माला 1 से 10, 2 से 20 .. 100 माट्रिक्स के लिए वर्गाकार तख्ते का प्रयोग उचित है नहीं तो बच्चों के दिमाग में आड़े में लिखे 1 से 10 तथा खड़े में लिखे 1 से 10 की अलग-2 इमेज बन सकती है, और वे इसे भिन्न समझ सकते हैं!
--
 
89
हनुमान चालीसा -2
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं  दिखावा
विकट रूप धरि लंक जरावा ।

 
हनुमान जब सीता से मिले तो उन्होंने अपना छोटा, प्रिय रूप दिखाया. और जब लंका जलाने लगे तो विराट, भयानक रूप धरा.
 
पवित्र उद्देश्यों के लिए, भले लोगों व वरिष्ठों के सामने लघु, प्रिय, नम्र रुप धरें. और सामाजिक बुराइयों से लड़ते समय विशाल, रौद्र, भयानक रूप धरें.
 

(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

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ये कहानियां वाकई में जीवन दर्शन हैं...

चकाचक अनुवाद। लीना साराभाई के संस्मरण अच्छे लगे।

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