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आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

तब और अब - 30 वर्ष पहले का सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट क्या था?

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पर हो सकता है कि आप पहले पूछ लें कि भई आखिर वो कौन सा गॅजेट है जो अभी सर्वाधिक बिक रहा है?वर्तमान में गरमा-गरम पकौड़ों की तरह बिक रहे आई-फ़ोन5 के बारे में बताया जा रहा है कि यह अब तक के इतिहास में सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट बनने जा रहा है.पर, आप बता सकते हैं कि आज से 30 साल पहले उस वक्त तक के इतिहास के हिसाब से सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट क्या था?आपका अनुमान कुछ कुछ सही है. उस वक्त रेडियो कॅसेट रेकॉर्डर ही सबसे ज्यादा बिकते थे.अपने भारत में बुश कंपनी का रेडियो कॅसेट रेकॉर्डर सबसे ज्यादा बिकता था. हाथ कंगन को आरसी क्या? ये देखिए 30 वर्ष पहले छपा इसका विज्ञापन - जो सरिता पत्रिका के 1980 के किसी अंक में छपा था -इन तीस वर्षों में दुनिया बहुत बदल गई है, मगर गॅजेट के प्रति मनुष्यों की दीवानगी अभी भी नहीं बदली है!

हमें न्याय चाहिए!

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                 हमें चाहिये देश भर में बलात्कारों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट

चित्र के लिए श्री काजल कुमार व श्री गिरिजेश राव का शुक्रिया.
 विवरण के लिए यहाँ देखें - http://girijeshrao.blogspot.in/2012/12/blog-post_28.html 

आर्ची, ये तूने क्या किया!

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आर्ची तो मुझे आज भी पसंद है. उन्मुक्त जी को भी यह पसंद है. आपको पसंद है या नहीं? कुछ अरसा पहले आर्ची के हिंदी में आने की खबर सुनी थी तो बड़ी उत्सुकता बनी हुई थी. परंतु उस खबर के बाद लंबे समय हिंदी आर्ची तक आस-पास के न्यूज-स्टैंड पर दिखाई नहीं दिया और न ही इसके किसी ऑनलाइन खरीदी-बिक्री का लिंक मिला तो यह फिर दिमाग से एक तरह से उतर ही गया था.अभी कुछ दिनों पूर्व पुस्तक मेले में एक स्टाल पर यह दिख गया. उत्सुकतावश इसके भाग 5 के कुल 7 अंकों में से तीन खरीद लिए.परंतु हिंदी-आर्ची ने मुझे पूरी तरह निराश कर दिया. एक तरह से पूरा पैसा बरबाद!अब आपको कुछेक कारण तो गिनाने ही होंगे.लीजिए -अनुवाद - अनुवाद और भाषा सामान्य है. अनुवाद का स्तर और भाषा प्रवाह थोड़ा सा और युवा केंद्रित और बेहतर हो सकता था. एक अंक की कीमत है तीस रुपए. जो बहुत ही ज्यादा है. 30 रुपए और वह भी ज्यादा? जी हाँ. तीस रुपए में आपको मिलते हैं सिर्फ 2 - 3 छोटी छोटी कहानियाँ. छोटे-छोटे 11 पन्ने (22 पृष्ठ) की कीमत 30 रुपए! यह तो सरासर लूट है. और, शायद इसीलिए, कहानी के किसी भी पन्ने पर पृष्ठ संख्या नहीं लिखी है. और शायद इसीलिए एक अंक में…

लिनक्स के रेमिंगटन हिंदी की-बोर्ड में 'ई तथा ऊ' कैसे लिखें / ई तथा ऊ लिखने का समाधान

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मुझे एक ईमेल प्राप्त हुआ  -
Dear Raviji,
I am management consultant at Indore and very much intersted in research in computer how ever I am not having any formal computer training. Now a days I am trying to work on Ubuntu and able to install it, and also installed Ibus keyboard for remington keyboard, however I am not able to write बडी इ using the same. As evident hear. I am now well conversant with webdunia's indic IME in windows.
I would be very grateful to if you can spare your some time and provide me solutions.

मुझे लगा कि ये कौन सी बड़ी बात है, कहीं पर ई की कुंजी छुपी होगी, और बस खोज कर बता दूंगा.
आमतौर पर रेमिंगट की-बोर्ड में ई लिखने के लिए bZ कुंजियों का कॉम्बीनेशन प्रयोग में लेना होता है. परंतु यहाँ इस कॉम्बीनेशन से इर् लिखा जा रहा था.

फिर मैंने यहाँ दिए गए रेमिंगटन कुंजीपट का लेआउट देखा.

जरा आप भी देखें - और जरा ध्यान से!

हे भगवान! ये कैसा की-बोर्ड है?
आप देखेंगे कि इस पूरे की-बोर्ड में ई तथा ऊ लिखने के लिए कोई भी कुंजी आबंटित नहीं है!
तो यदि आप लिनक्स में रेमिं…

क्या आप भी 'हरित' होना नहीं चाहेंगे?

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सड़क पर चलते चलते एक पेड़ के तने पर रखे इस उपकरण ने मेरा ध्यान खींचा -यह एक सोलर पैनल था जिसे बड़े तरतीब से पेड़ के तने पर इस तरह से रखा गया था कि दिन भर उस पर धूप पड़ती रहे.उसे देख मैं रुका. पास ही एक पान का ठेला था. सोलर पैनल से तार का कनेक्शन पान के ठेले तक जा रहा था जहाँ पर एक बैटरी व चार्जर जुड़े थे.और पान के ठेले पर मौजूद था - घनश्याम साहू. 'हरित पुरुष' - घनश्याम साहू -पेड़ के तने पर रखे सोलर पैनल को लेकर मेरी जिज्ञासा बढ़ी तो घनश्याम साहू ने बताया -पहले वो आस पास से वैध-अवैध कनेक्शन लेकर और इमर्जेंसी लाइट जैसे साधनों से अपनी गुमटी को रात में रौशन रखता था. परंतु एक बार कहीं से पता चला कि 3 हजार रुपए (किसी गुमटी धारक के लिए यह रकम बड़ी है) में यह सोलर पैनल मिलता है जिससे इन सबकी जरूरत नहीं रहती तो पैसे जमा कर यह खरीद लिया और अब उसे अपनी गुमटी को रौशन करने के लिए किसी चीज के लिए एक पैसा भी खर्च करने की जरूरत नहीं रहती. उसने गुमटी को रौशन करने के लिए बेहद कम खपत करने वाले एलईडी लैंप की पट्टी भी लगवा ली है. उसका सोलर पैनल बरसात के दिनों में भी उसकी गुमटी को 5 घंटे तक भरपूर र…

90% हिन्दी ब्लॉगों व 60% हिन्दी वेबसाइटों में हिन्दी की ढेरों वर्तनी की गलतियाँ होती हैं...

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अब यह बात मैं नहीं कर रहा हूँ. नहीं तो लोग मुझ पर पिल पड़ेंगे और मेरी खुद की पोस्टों में से वर्तनी की सैकड़ों गलतियाँ निकाल कर दिखा देंगे. भई, यह बात मैं नहीं, स्पेलगुरू कह रहे हैं. और यदि वे स्पेलगुरू हैं, तो जरूर सही ही कह रहे होंगे. यह स्क्रीनशॉट देखें -

न्यू मीडिया – इंटरनेट की भाषायी चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ

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जो पारम्परिक मीडिया पंडित यह मान बैठे थे कि इंटरनेट के नए मीडिया की पैठ और असर कभी भी अख़बार या टीवी जितनी नहीं हो सकते, उनकी खुशफहमी अब टूटने लगी है। जो स्वर पहले नए मीडिया को नामंजूर करने के लिए उठ रहे थे, अब वे उसे समझने के लिए सवाल पूछ रहे हैं. जो लोग नए मीडिया को खाए-पिए-अघाए, प्रतिक्रियावादी, उपभोक्तावादी, ‘साइबर नागरिकों’ का शगल कहते थे वे अपनी इस राय पर दोबारा सोच रहे हैं. कल तक नए मीडिया को नामंजूर करने वाला पारम्परिक मीडिया भी अब नए मीडिया से कंटेंट ले रहा है, यहाँ तक कि उसकी मौजूदगी को महत्वपूर्ण खबर बना रहा है. ब्लॉग पोस्ट करने या घटनाओं को रिकार्ड करने वाले किसी भी दर्शक का मोबाइल फोन जैसा छोटा उपकरण अब समाचार पत्रों और चैनलों का स्रोत बन रहा है.आर. अनुराधा द्वारा संपादित, 'न्यू मीडिया – इंटरनेट की भाषायी चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ' नामक पुस्तक के बैक कवर पर छपा यह संक्षिप्त उद्धरण साबित करता है कि पुस्तक में विषय वस्तु को वर्णित करने में कहीं कोई कोर कसर छोड़ी नहीं गई है. इस पुस्तक में नौ अलग अलग शोधपूर्ण आलेखों को समायोजित किया गया है – 1. नए संचार माध्यम – एक परिच…

आपकी फ़ाइल में हिंदी टैक्स्ट के बजाए डब्बे दिखते हैं? कुछ समाधान हाजिर हैं...

यूनिकोड हिंदी डिस्प्ले की समस्या यदा कदा मुंह मारते ही रहती है. हाल ही में एक पाठक ने अपनी समस्या रखी -आदरणीय रतलामी जी ,
सादर सप्रेम प्रणाम ।

जब जीमेल पृष्ठ पर टाइप मैटर एम एस वर्ड पर पेस्ट करता हूँ तो सिर्फ
डिब्बे दिखाई पड़ते हैं ।

मैं चाहता हूँ कि आज तक जीमेल में संरक्षित समस्त रचनाएँ एम एस वर्ड में
पेस्ट कर मेमॉरीकार्ड में रख लूँ ।

कृपया अवगत कराएँ कम्प्यूटर में कौन-सा फॉन्ट होना जरूरी होगा ।उसकी कोई
लिंक हो तो बेहतर ।

कृपया आपके अति व्यस्त समय में विघ्न डालने का अपराध माफ कीजिएगा ।

आपका स्नेहाकांक्षी
****यह एक बड़ी समस्या है. वैसे आमतौर पर ऐसी समस्या तब आती है जब यूनिकोड सामग्री का फ़ॉन्ट सिस्टम में इंस्टाल न हो. मगर यहाँ ऊपर दी गई समस्या में यह बात नहीं है. आप कोई यूनिकोड टैक्स्ट कॉपी पेस्ट करते हैं तो पाते हैं कि गंतव्य में तो डब्बा दिख रहा है. लगता है यह सारा मैटर कूड़ा हो गया. परंतु ऐसा नहीं होता, दरअसल पाठ तो मौजूद रहता है, बस डिस्प्ले में समस्या के कारण डिब्बे दिखते हैं.ये डिब्बे आमतौर पर एमएस वर्ड 2007 तथा कुछ एमएस वर्ड 2010 की फ़ाइलों में होता है. इसके लिए कुछ सरल से उपाय हैं -1 - ऐ…

माई लाइफ़ विथ पाई

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पर, ये वो कहानी नहीं है जिसमें शेर है. अलबत्ता कंप्यूटरी दुनिया का एक ऐसा शेर है जो चहुंओर तहलका मचा रहा है, दहाड़ें मार रहा है. मैंने पहले भी थोड़ी सी झलकी इस बारे में दिखाई थी. पर, पहले पहली बात. मैंने अपना सबसे पहला कंप्यूटर, कोई 18 वर्ष पहले, 1994 में खरीदा था, 40 हजार रुपयों में, अपने जीपीएफ़ के पैसे से लोन लेकर. उसका स्पेसिफ़िकेशन था – 486 प्रोसेसर 433 मे. हर्त्ज, 8 मे.बा. रैम, 1 जीबी हार्ड-डिस्क. चूंकि यह रतलाम में उस वक्त उपलब्ध नहीं था, तो इसे मुंबई से मंगवाया गया था – पूरे पैसे एक हफ़्ते पहले एडवांस में देकर. यह मिनि-टॉवर केबिनेट विशाल आकार में आता था, जो नया नया चला था. चलते समय यह गर्म हो जाता था और इसके पावर सप्लाई का पंखा बड़ी आवाजें करता था.  कुल पॉवर खपत था - 80 वॉट से अधिक (मॉनीटर का अलग) और, अभी हाल ही में मैंने अपना नया कंप्यूटर खरीदा. क्रेडिट कार्ड के आकार का. महज 2400 रुपयों में. (वैसे तो इसकी असली कीमत 1200 रुपए (25 डॉलर) है, परंतु तमाम टैक्स और शिपिंग खर्चे मिलाकर यह मुझे दो-गुनी कीमत में मिला).  अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि टेक्नोलॉजी कहाँ से कहाँ पहुँच गई …

एमट्यून्स एचडी - भारत का पहला एचडी म्यूज़िक चैनल : देखा क्या?

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और यदि अब तक नहीं देखा है तो कभी देखिएगा भी मत!ठंड रखिए. जल्द ही बताता हूँ कि क्यों.जब से भारत का पहला एचडी म्यूजिक चैनल एमट्यून्स एचडी चालू हुआ था, तब से बड़ी इच्छा थी कि इसे देखा जाए. मेरे टाटा स्काई एचडी में यह बंडल नहीं था, और कहीं और इसे देखने का सौभाग्य भी नहीं मिला था. मैंने एमट्यून्स और टाटा स्काई में विशलिस्ट में भी लिखा कि इसे जल्द ही टाटास्काई में बंडल किया जाए.और, मेरी मुंह मांगी मुराद दो दिन पहले पूरी भी हो गई.टाटा स्काई एचडी चैनल में एमट्यून्स एचडी आने लगा.मैं तो मारे खुशी के उछल पड़ा और जल्द ही एमट्यून्स एचडी लगाया. एचडी ऑडियो-वीडियो के साथ संगीत के आनंद का अपना अलग ही मजा है. मैं आसन जमा कर अपने टीवी स्क्रीन के सामने बैठ गया.परंतु यह क्या? जैसे ही एमट्यून्स एचडी चालू हुआ मुझे लगा कि मैं ठगा गया. घंटे भर में तो मेरी सारी आशाएं धूल धूसरित हो गईं और दूसरे घंटे से मैंने उस चैनल को अपने पसंदीदा से हटा लिया.लगा कि मन में फालतू ही इच्छा पाले बैठे थे एमट्यून्स एचडी देखने को.अगर आपके मन में भी इस एचडी म्यूजिक चैनल को देखने की इच्छा हो, तो बिलकुल त्याग दीजिए.कारण?कोई एक हो तो बत…

अंबानीज़, वाड्राज़ भोजन कहाँ उपलब्ध है?

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यहाँ जनता भोजन उपलब्ध है - वह भी आदेशानुसार. भोजन फ़ॉर मैंगो पीपुल?जरा और दरयाफ़्त किया तो पता चला कि सिर्फ देखने-दिखाने के लिए छाप कर चिपकाया गया है. यानी भोजन नदारद! जनता भोजन आप सिर्फ देख सकते हैं, खा नहीं सकते.तो अब सवाल ये है कि अंबानीज़, वाड्राज़ भोजन कहाँ मिलता होगा?खा तो ख़ैर, मैं इसे भी नहीं सकता, मगर देख तो सकता हूँ. यदि कोई बताए (चित्रादि के लिंक भी चलेंगे!) कि कहां मिलता है तो दर्शन लाभ लेने की कोशिश करूंगा!

दीपावली पर आपके लिए कुछ अहार्दिक किस्म की अबधाईयाँ!

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दीपावली आता है और हमारे आपके लिए तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ ले आता है. और मैं घर की रँगाई-पुताई से लेकर नए लिबास-जूतों या इसी तरह के दीगर खर्चों की बात नहीं कर रहा. मैं तो बधाईयों की बात कर रहा हूँ!
अब देखिए ना, अपना मेल बॉक्स दीपावली के सप्ताह भर पहले से जेनुइन क़िस्म के (कतई स्पैम नहीं!) ईमेलों से भरने लग जाता है. और नित्य कोई तीन-चार गुना ज्यादा ईमेल चला आता है इन दिनों. सबमें घुमा-फिरा कर एक ही बात कही जाती है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ! लफ़्जों के खेल, चित्रों के अखाड़ों, मल्टीमीडिया ऑडियो-वीडियो संलग्नकों के सर्कसों - सबका सार यही होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ!

एक भारी मुसीबत और है. वो है अलादीन के जिन्न की तरह आपके आगे पीछे लगा हुआ आपका मोबाइल फोन. अभी पता नहीं किसने और किसलिए यह अजीब तुलनात्मक गिनती कर डाली कि भारत में जितने तो शौचालय नहीं हैं उससे कई गुना मोबाइल फ़ोन हैं – नंबर डायल करो और बात करने के लिए, सॉरी – बधाई देने के लिए जिन्न की तरह बंदा हाजिर! बहरहाल, बात बधाईयों की हो रही थी. तो आपका मोबाइल भी हर दूसरे मिनट कालर ट्यून बजा कर टां टूं करता है और इसका इनबॉक्स प…

वर्ष 2012 के सर्वाधिक लोकप्रिय 15 ब्लॉग - Top 15 Hindi Blogs of year 2012

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तकनीक दृष्टा विनय प्रजापति ने बड़ी मेहनत से  वर्ष 2012 के टॉप 15 हिन्दी ब्लॉगों की एक सूची जारी की है. इस सूची में छींटे और बौछारें 7 वें क्रम पर है. इससे पूर्व एक आलसी का चिट्ठा और परिकल्पना में भी आपके इस चहेते ब्लॉग को इसी वर्ष शीर्ष रैंकिंग मिल चुकी है. यह इस ब्लॉग के प्रति आप सभी के प्यार व उत्साहवर्धन का नतीजा है. आप सभी पाठकों व प्रशंसकों का हार्दिक धन्यवाद.मैं कोशिश करूंगा कि आने वाले समय में अपने ब्लॉग लेखन में थोड़ी सी और नियमितता लाऊं - जो अभी हाल ही में थोड़ी अनियमित सी हो चली थी.आप सभी को दीप-पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!

दाऊद इब्राहीम और आइंस्टाइन एक बराबर?

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ये आईक्यू का फंडा बड़ा अजीब है. हो सकता है कि आपका आईक्यू ओसामा या अल-जवाहिरी के बरोबर हो! बहरहाल, ये आईक्यू का मामला गर्म इसलिए हुआ है कि भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी के मुताबिक स्वामी विवेकानंद और भाई दाऊद आईक्यू के मामले में एक समान हैं!"...यह कहा था गडकरी ने -
गडकरी ने रविवार को भोपाल में ओजस्विनी समारोह में स्वामी विवेकानंद के आईक्यू की तुलना आतंकी दाऊद इब्राहिम से कर डाली। उन्होंने कहा कि दाऊद ने अपने आईक्यू का उपयोग अपराध के क्षेत्र में किया तो वह अपराधी बन गया, जबकि विवेकानंद ने समाज,देश के हित में अपने आईक्यू का इस्तेमाल किया तो वे महान बन गए। आईक्यू दोनों जगह समान है, पर महत्वपूर्ण ये है कि बुद्धिमत्ता, कौशल का उपयोग किस तरह होता है...."समाचार स्रोत - पत्रिकाजो भी हो, इस वक्तव्य से तो नितिन गडकरी के आईक्यू का पता पूरी तरह से लग जाता है!कुछ इस तरह जैसे कि बहुत से फेसबुकिए, ट्विटरिए, ब्लॉगरिये के पोस्टों-टिप्पणियों और स्टेटस अपडेट से उनके आई-क्यू का पता पूरी तरह से लग जाता है.पर, अब जरा आप भी  अपनी पड़ताल कर लें कि आपका अपना आईक्यू कितना है, और किसके बराबर है!

स्पेलगुरू : हिंदी वर्तनी जाँच हेतु बेहतरीन सुविधाओं युक्त एक शानदार नया प्रोग्राम

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अपनी हिंदी सुधारने के लिए अब आपके पास विकल्पों की कमी नहीं रही.

हाल ही में भाषागिरी.कॉम ने हिंदी सुधारने - यानी हिंदी वर्तनी जाँच के लिए एक बेहतरीन प्रोग्राम जारी किया है - स्पेलगुरू.

आरंभिक जांच पड़ताल में यह प्रोग्राम उम्दा लग रहा है. इसका शब्द-भंडार भी विशाल है.

और, जो चीज इसे विशिष्ट बनाती है वह है इसका इंटेलिजेंट वर्तनी जांच सिस्टम जो आपके कर्सर पोजीशन और क्लिक के आधार पर आपको वर्तनी जांच की अलग अलग सुविधा प्रदान करता है.

जैसे कि यदि आप गलत वर्तनी वाले शब्द के शुरू में बायां क्लिक करेंगे तो शुरुआती अक्षर को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक शब्द का सुझाव देगा, और यदि आप शब्द के आखिर में दायां क्लिक करेंगे तो शब्द के अंतिम अक्षरों को ध्यान में रखते हुए शब्द का सुझाव देगा. यह आखिरी अक्षरों वाला सुझाव तुकांत कविता लिखने वालों के लिए शायद काम आये.

मैंने रचनाकार में प्रकाशित एक आलेख का वर्तनी जांच इस प्रोग्राम के जरिए किया - जिसका स्क्रीनशॉट नीचे है -
(चित्र को पूरे आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)

तो आप देखेंगे कि इसका शब्द भंडार काफी विस्त़त है और यह कुछ नाम और अंग्रेज़ी के शब्दों …

अपने पायरेटेड विंडोज़ इंस्टालेशन को सिर्फ 699 रु. में बनाएं जेनुइन

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लगता है कि माइक्रोसॉफ़्ट अपने नए ताजातरीन विंडोज 8 ऑपरेटिंग सिस्टम को हर किसी के गले में एक तरह से मुफ़्त में ठूंसना चाहता है ताकि चहुँ ओर विंडोज का ही साम्राज्य बना रहे. और इसीलिए विंडोज 8 के संस्करण बेहद सस्ते में बेचे जा रहे हैं.यदि आपके कंप्यूटर विक्रेता ने आपके कंप्यूटर में पायरेटेड विंडोज एक्सपी, विंडोज 7 या ऐसा ही कोई अन्य संस्करण डाला हुआ है और आपको गाहे बगाहे इसके जेनुइन नहीं होने की चेतावनी मिलती रहती है और इसके अपग्रेड इत्यादि की सुविधा नहीं मिलती है तो आप सिर्फ 699 रुपए (14.99 डॉलर)  खर्च कर अपने विंडोज को जेनुइन बनाने की सुविधा पा सकते हैं. खासतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप के उपयोगकर्ताओं के लिए तो यह सुविधा अभी भी उपलब्ध है.दरअसल (जिसे डेलिबरेट लूप-होल - यानी जान बूझ कर छोड़ी गई कमी बताया जा रहा है) आपके वर्तमान विंडोज एक्सपी या विंडोज 7  इंस्टालेशन को सिर्फ 699 रुपए में विंडोज 8 से अपग्रेड करने के लिए एक विकल्प माइक्रोसॉफ़्ट ने दिया है , यदि आपने अपना कंप्यूटर 2 जून 2012 से 31 जनवरी 2013 के बीच खरीदा है. और इसकी पुष्टि के लिए आपसे ऑनलाइन सिर्फ कुछ मूलभूत जानकारियाँ और एक डिक…

चोरों के लिए, क्या राम और क्या रावण!

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मेरे लिए तो राम भी तू और रावण भी तू!(समाचार कतरन - साभार : पत्रिका)

मरने के लिए देश में सबसे शानदार जगह कौन सी है?

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कल अखबार था रवि,आज हो गया है रद्दी।सर्टिफ़िकेट जारी हो गया है कि पैदा होने के लिए अपना एमपी पूरे देश में सबसे खराब, सबसे रद्दी जगह है. अब एमपी में पैदा तो हो लिए, जिस पर अपना कोई दखल नहीं था. सोचते हैं कि मामले को कम्पनसेट करने के लिहाज से अब कम से कम मरने के लिए तो सबसे शानदार जगह का जुगाड़ पहले से क्यों न कर लें!जैसे 'नेता' शब्द एक गाली के रूप में प्रचलित हो गया है, उसी तरह से एमपी वाला के भी बदलने के खतरे हैं. किसी को बताओ कि भोपाल, एमपी से हूँ, तो वो दन्न से पूछेगा - क्या पैदा भी वहीं हुए थे? या नहीं भी पूछेगा तो मन में कहेगा ही - साला यहीं, इस सबसे खराब जगह में पैदा भी हुआ होगा!इस खतरे से बचने के लिए संभावित माता-पिताओं को डिलीवरी के समय एमपी से अन्यत्र कहीं ले जाना चाहिए. भले ही एमपी का बार्डर शामगढ़ क्यों न हो. रद्दी जगह में पैदा होने के ताउम्र मलाल या लांछन से तो बच सकेंगे. माता पिताओं को यह संतुष्टि रहेगी कि उन्होंने अपने बच्चे के लिए इतना कुछ किया और बच्चे भी अपने माता-पिता का अहसान मानेंगे कि उन्होंने रद्दी जगह पैदा होने से बचाया.पर, जो आलरेडी रद्दी एमपी में पैदा हो…

थैंक गॉड! मैं कलेक्टर हुआ न नेता!!

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क्या कभी आपके मन में ये अफसोस हुआ है कि आप या आपके पति/पत्नी कलेक्टर क्यों न हुए?क्या आप या आपके बच्चे कलेक्टर बनने का सपना पाले हुए हैं?यदि हाँ, तो अफसोस भूल जाएं, और उस तुच्छ सपने को त्याग दें - अभी, तुरंत.आधुनिक भारत के दो प्रमुख, टॉप प्रोफ़ेशनों - कलेक्टरी और नेतागिरी के बीच अंतरंग संबंध की है ये बानगी !पेश है (आमतौर पर होने वाले?) बेहद मनोरंजक वार्तालाप के मुख्य अंश जो दैनिक भास्कर में 9 अक्तूबर 2012 को छपे:"गुड्डू और भूरिया बोले- हमें समझा रहे हो कलेक्टर
रतलाम जिला सतर्कता समिति की बैठक में कलेक्टर के देरी से पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया व सांसद प्रेमचंद गुड्डू नाराज हुए। उनके बीच कुछ इस तरह से वार्तालाप हुआ- अंदर आते ही सांसद कांतिलाल भूरिया- कहां है कलेक्टर। गुड्डू- ये कोई तरीका है। कलेक्टर अभी तक नहीं पहुंचे। मजाक बना रखा है। (इसी बीच कलेक्टर अंदर पहुंचते हैं।) गुड्डू- तुम हो कलेक्टर, तमीज है तेरे को? कलेक्टर- बैठिए, बैठिए। गुड्डू- क्या बैठिए, बैठिए भूरिया- आप अफसर हैं और समिति के सेक्रेटरी हैं। अध्यक्ष आ गया है सांसद आ गए। आपके पते नहीं हैं। ऐसे प्र…

टायलेट मंदिर दोऊ सामने जाऊं काके बताय, बलिहारी प्रेशर आपनो जल्दी टायलेट जाय

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टायलेट मंदिर दोऊ सामने जाऊं काके बताय बलिहारी प्रेशर आपनो जल्दी टायलेट जायवैसे, समस्त ब्रह्मांड में किसी मंत्री का सर्वकालिक सत्यवचन इसे माना जाना चाहिए. या ये भी कहा जा सकता है कि भारत के किसी मंत्री ने पहली बार सत्यवचन कहे हैं. सवाल ये है कि टायलेट (शौचालय से गरीबी की बू आती है, जबकि टायलेट से अमीरी की खुशबू, इसीलिए हम इसी शब्द का प्रयोग करेंगे) मंदिर से ज्यादा पवित्र क्यों है. आइए, जरा पड़ताल करें. तो पहले ये देखें कि आप मंदिर क्यों जाते हैं? (मंदिर की जगह आप गिरिजाघर, मस्जिद, गुरुद्वारा कुछ भी प्रतिस्थापित करने को स्वतंत्र हैं) · मंदिर में आप अपने पिछले कर्मों के पाप धोने जाते हैं. · मंदिर आप शांति की तलाश में जाते हैं · मंदिर आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर की पूजा प्रार्थना करने जाते हैं · मंदिर आप मृत्युपरांत स्वर्ग प्राप्ति के लिए जाते हैं · मंदिर आप अपने अगले जन्म में शानदार जीवन प्राप्ति के लिए जाते हैंअब जरा देखें कि आप टायलेट क्यों जाते हैं. · टायलेट में आप पिछले दिन का पाप धोने जाते हैं. चाहे वो मूली के पराँठे हों या केएफसी का बर्गर सब कुछ धुलता है, और आपके किए गए पाप (ख…

अपने सामान्य टीवी को बेहद सस्ते में बनाएं कंप्यूटर

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टेक्नोलॉज़ी दिनोंदिन कितना छलांग मार रही है यह इसका अप्रतिम उदाहरण है. क्रेडिट कार्ड साइज के एक संपूर्ण एचडी सक्षम कंप्यूटर – रास्पबेरी पाई की कीमत महज ढाई हजार रुपए है, और इसकी मांग इतनी अधिक है कि पिछले छः महीने से लगातार यह मांग पर उपलब्ध ही नहीं है (आरएस कंपोनेंट पर आज की स्थिति में, ऑर्डर करने के बाद दो महीने का इंतजार करना होगा). यानी इसे खरीदने के लिए आपको प्रीऑर्डर कर बुक करना होता है. आप पूछेंगे कि इसके पीछे कारण क्या है, तो उत्तर है – क्रेडिट कार्ड के आकार के, इस डर्ट-चीप – बेहद सस्ते संपूर्ण कंप्यूटर सिस्टम जिसमें आप एसडी कार्ड या यूएसबी ड्राइव से लिनक्स का विशिष्ट संस्करण चला सकते हैं, जिसके उपयोग की अनंत संभावनाएं हैं! और यही इसके अत्यधिक मांग की वजह है. महज ढाई हजार रुपए के रास्पबेरी पाई को अपने एचडी टीवी से जोड़ कर उसे न सिर्फ स्मार्ट टीवी बना सकते हैं बल्कि उसे पूरे कंप्यूटर में बदल सकते हैं. परंतु इसके लिए आपको थोड़ा सा टैकी होना पड़ेगा. और अब इसी लाइन पर चलते हुए आम जनता के उपयोग के लिेए टीवी और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक कंपनी अकाई ने ६,९९० रुपये की कीमत का एक स्मार्ट बॉ…

www.polycola.com एक अनोखा सर्च इंजन

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(शामिख फराज) पॉलीकोला एक नये तरीके का सर्च इंजन है. इसको अनोखा कहने के पीछे भी एक कारण है. इसकी विशेषता यह है कि इसमें जो भी जानकारी आप चाहते है, वो दो सर्च इंजन में एक साथ देखी जा सकती है. इसका इतिहास भी थोड़ा अजीब है. इसकी शुरूआत 2005 में हुई. शुरू में इसका नाम "गाहूयूगल.कॉम" रखा गया लेकिन कुछ विवादों के कारण इसका नाम बदलना पड़ा फिर "पॉलीकोला" रखा गया. यह दूसरे सर्च इंजन के मुकाबले तीव्र है और कोई भी जानकारी खोजते समय 70% तक समय की बचत करता है. यह अमेरिकी और यूरोपी देशों में प्रसिद्ध है और बहुत प्रयोग किया जाता है. इसमें कोई भी खोज एक साथ दो सर्च इंजन में तो देखी ही जा सकती है, इसके साथ ही इसमें सर्च इंजन चुनने की भी आज़ादी है. दरअसल यह पांच सर्च इंजन को सपोर्ट करता है. GOOGLE.com, YAHOO.com, AOL.com, ASK.com & BING.com. इन पांच सर्च इंजन में से आप जो भी चाहे दो सर्च इंजन चुन सकते है और इन दोनों सर्च इंजन में आपको वो लिंक दिखाई देंगे जो आप खोजना चाहते थे. इसमें सर्च बार के नीचे पांच सर्च इंजन की लिस्ट दिखाई देती है और इसी के बराबर दूसरी ओर भी पांच सर्च इंजन क…

क्या आप भी डिजिटल हो रहे हैं?

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पेश है डिजिटल सर्वाइवल गाइड. 31 अक्तूबर से पहले महानगरों को डिजिटल होना है, और अप्रैल आते आते भोपाल इंदौर सरीखे बड़े नगरों को भी. यानी यदि आप केबल से टीवी देखते हैं तो आपको सेटटॉप बॉक्स लगाना अनिवार्य होगा. ठीक है, आपने सेटटॉप बॉक्स लगवाने का निर्णय ले लिया है. परंतु सवाल है कि कौन सा लगवाएं? क्या वो सड़ा वाला लगवा लें जो आपका केबल ऑपरेटर आपके माथे पर थोप कर चला जाएगा? भगवान के लिए, नहीं! ये हैं कुछ चेक लिस्ट जिनके जरिए आप अपने मुताबिक सेटटॉप बॉक्स चुन सकते हैं या अपने केबल ऑपरेटर को बाध्य कर सकते हैं कि वो ऐसी सुविधाओं वाला सेटटॉप बॉक्स उपलब्ध करवाए. सीआरटी टीवी के लिएसीआरटी – यानी कैथोड रे ट्यूब वाले पुराने जमाने के भारी भरकम टीवी के लिए आप कोई सा भी सेट टॉप बॉक्स लगवा सकते हैं, क्योंकि इन पुराने जमाने के टीवी में आधुनिक टेक्नोलॉजी की टीवी – एचडी टीवी को दिखाने की सुविधा नहीं होती. यदि आपको आधुनिक टेक्नोलॉजी की एचडी टीवी और साथ ही 5.1 सराउंड सिस्टम युक्त होम थिएटर जैसा आनंद अपने टीवी से चाहिए तो जल्द ही ऐसे टीवी सेटों से छुटकारा पाएं और फ्लेट स्क्रीन, पतले एलसीडी, एलईडी या प्लाज…

लीजिए पेश है हिंदी स्पेल चेक सहित एक शानदार, संपूर्ण हिंदी ऑफिस सूट - बिलकुल मुफ़्त!

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यूँ तो ओपनऑफ़िस के नवीनतम संस्करण इंस्टाल कर आप सेटिंग में जाकर हिंदी स्पेल चेक एक्सटेंशन जोड़कर उसमें भी हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा जोड़ सकते हैं, मगर उसका वर्तनी जांच का शब्द संग्रह 85 हजार शब्दों का ही है और बहुत सारा उसमें गलत शब्द भी संग्रहित है. ऊपर से शब्दों का सुझाव देते समय उसमें डब्बे नजर आते हैं और समस्या बनी रहती है.इस समस्या का समाधान उपलब्ध है. आपको  लिब्रे ऑफ़िस पोर्टेबल एडीशन का नवीनतम संस्करण डाउनलोड कर इंस्टाल करना होगा. परंतु इसमें भी हिंदी वर्तनी हेतु महज 15 हजार शब्द ही हैं. तो इसे हम वृहद, पौने दो लाख शब्दों के शब्द संग्रह से बदल कर बढ़िया हिंदी वर्तनी जांच युक्त ऑफ़िस सूट में बदल लेंगे. यह महज 2 आसान चरणों में संभव है.1लिब्रे ऑफिस पोर्टेबल एडीशन डाउनलोड कर किसी फ़ोल्डर में इंस्टाल करें. पोर्टेबल एडीशन की खासियत यह है कि आप इसे पेन ड्राइव में कॉपी कर या किसी भी अन्य डिरेक्ट्री या फ़ोल्डर में कॉपी कर कहीं पर भी चला सकते हैं. बार बार इंस्टाल करने की जरूरत नहीं.पोर्टेबल एडीशन यहाँ से डाउनलोड करें. लिब्रे ऑफ़िस आप विंडोज, मैक या लिनक्स किसी के लिए भी डाउनलोड कर सकते…

लीजिए, पेश है विंडोज़, लिनक्स, मैक, एण्ड्रायड सभी के लिए ब्राउज़र आधारित उन्नत हिंदी वर्तनी जांच सुविधा

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पिछली पोस्ट पर उन्मुक्त जी ने दुखी होकर कहा - ये तो लिनक्स में नहीं चलेगा. प्रवीण पाण्डेय जी ने मैक पर नहीं चला पाने का अफसोस जताया.

तो पेश है ब्राउजर आधारित हिंदी वर्तनी जांच का नया, अपडेटेड संस्करण, जिसमें पौने दो लाख हिंदी शब्दों का संग्रह युक्त शब्दकोश है.

इसके लिए आपको फायरफाक्स ब्राउज़र ही प्रयोग करना होगा. यदि आप फायरफ़ाक्स ब्राउजर प्रयोग करते हैं तब तो यह आपके बेहद काम का है. नहीं करते हैं तब भी फायरफाक्स का प्रयोग करना प्रारंभ कर दीजिए. क्योंकि अभी तो इससे उत्तम हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा, वह भी लिखते-लिखते (ऑन-द-फ़्लाई) और किसी ब्राउजर में उपलब्ध भी नहीं है. गूगल क्रोम में है, परंतु उसमें भी हिंदी शब्द भंडार बेहद कम है.

इसके लिए आपको क्या करना होगा?

आसान  है, यदि आप फायरफाक्स ब्राउजर का प्रयोग करते हैं तो.

नीचे दी गई कड़ी से फायरफाक्स हिंदी वर्तनी जांच प्लगइन डाउनलोड करें और फायरफाक्स के फ़ाइल ओपन डायलाग से खोल कर इंस्टाल करें. फायरफाक्स रीस्टार्ट करें और फायरफाक्स ब्राउजर के इनपुट बक्से में  जहाँ भी आप हिंदी लिखते हैं - जैसे कि इस ब्लॉगर डैशबोर्ड पर मैं यह पोस्ट लिख रहा ह…

विंडोज लाइव राइटर में लगाएं हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा

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यदि आप हिंदी ब्लॉग लिखने के लिए विंडोज लाइव राइटर का प्रयोग करते हैं, तब तो यह आपके लिए ही है. यदि आप लाइव राइटर का प्रयोग नहीं करते हैं तो इसे एक बार आजमा कर जरूर देखें. कमल ने इस औजार के बारे में एक शानदार आलेख लिखा है - विंडोज लाइव राइटर चिट्ठाकारों के लिए वरदान - इसे जरूर पढ़ें.तो, यदि आप विंडोज लाइव राइटर प्रयोग करते हैं, वह भी एकदम नया ताजातरीन संस्करण (पुराने संस्करणों में यह ढंग से काम नहीं करेगा और बेहद धीमा चलेगा) तो सीधे चरण 2 में जाएं. यदि आपने अभी तक विंडोज लाइव राइटर नहीं आजमाया है, या इसका नया संस्करण इंस्टाल करना चाहते हैं तो इसे डाउनलोड करने व इंस्टाल करने की विधि ई-पण्डित के ब्लॉग से साभार नीचे दिया जा रहा है -चरण 1विण्डोज़ लाइव राइटर एक लोकप्रिय ब्लॉग क्लाइंट है जो कि चिट्ठा लिखना आसान एवं बेहतर बनाता है। इसमें चिट्ठा लिखना ब्लॉग के वेब ऍडीटर की तुलना में ज्यादा आनन्ददायक है। कई सुविधाओं से युक्त इसका ऍमऍस वर्ड जैसा ऍडीटर लिखने हेतु बेहतर वातावरण प्रदान करता है। पढ़ें – विण्डोज़ लाइव राइटर समीक्षा एवं डाउनलोडविण्डोज़ लाइव राइटर की तरह माइक्रोसॉफ्ट के कुछ दूसरे मुफ्त सॉ…

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