October 2011

अंततः एक दिन यह तो होना ही था.

yahoo-mail

आज सुबह सुबह मेरे अपने ही जीमेल खाते में कई बाउंस हुए और कई समूहों में मेरे याहू ईमेल पते से भेजे गए रद्दी साइटों के लिंक युक्त ईमेल दिखे तो मुझे अंदेशा हुआ कि मेरा याहू ईमेल खाता हैक कर लिया गया है.

याहू खाते पर लॉगिन करने में समस्या आने पर इसकी पुष्टि हो गई. हैकिंग मैक्सिको से की गई थी. याहू लॉगिन इतिहास में यही दर्ज हुआ था. ऐसा नहीं है कि मैंने याहू का पासवर्ड कोई साधारण सा रखा हो. पासवर्ड भी कठिन और लंबा था, तथा हैकिंग रोकने हेतु याहू के कुछ अन्य उपाय भी मैंने किए हुए थे. मैं स्वयं इंटरनेट सुरक्षा उपायों संबंधी टिप्स यहाँ इस ब्लॉग में लिखता रहता हूँ. मगर, हैकरों और इंटरनेट प्रयोक्ताओं का तो तू डाल डाल तो मैं पात पात का मामला रहता है. बहुत पहले प्रसिद्ध भारतीय तकनीकी चिट्ठाकार अमित अग्रवाल का जीमेल एकाउंट भी हैक कर लिया गया था.

गनीमत ये रही की पासवर्ड रीसेट हेतु अन्य उपायों को हैकर ने बदला नहीं था - इस वजह से मैं अपना खाता वापस पाने में सफल रहा और पासवर्ड रीसेट भी कर लिया. और, याहू का मेरा ईमेल एकाउंट पुराना है, जिसे मैं अब सेकेण्डरी एकाउन्ट के रूप में चलाता हूँ. यदि मेरा जीमेल एकाउंट हैक होता तब तो कयामत ही आ जाती... पर, शायद किसी दिन ये भी हो जाए... हालांकि याहू मेल के विपरीत जीमेल में कई स्तरीय सुविधाएँ हैं जिससे हैकिंग को प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है.

मगर, जो नुकसान होना था वो तो हो चुका. हैकर ने मेरे याहू मेल के कोई अस्सी कॉन्टैक्ट्स को घटिया साइटों के लिंक युक्त सैकड़ों ईमेल संदेश भेजे.

आप सभी को जिनको ये ईमेल मिले हों, आग्रह है कि उन्हें तत्काल मिटा दें, और लिंक को भूले से भी न खोलें. आपको हुई असुविधा के लिए खेद है.

वैसे, वायरस टोटल में जाँच करने पर इन कुछ लिंक्स में मालवेयर पाए जाने की पुष्टि हुई है, जिससे इन लिंक को खोलने पर समस्या हो सकती है.

image

--

व्यंज़ल

--

अपुन का दिमाग तो जॉनी

पूरा फ़ेसबुक हो गया है

 

कल तक तो वो दोस्त था

आज फ़ेसबुक हो गया है

 

मैं ठहरा अज्ञानी न जानूं

कौन फ़ेसबुक हो गया है

 

कहने वाले तो कहते हैं

गूगल+ फ़ेसबुक हो गया है

 

सियाह रात की छोड़ो

दिन भी फ़ेसबुक हो गया है

 

रवि इतराता फिरता है

क्या फ़ेसबुक हो गया है

--

image

इट्ज़ ऑफ़ीशियल नाऊ! जर्मनी की सरकारी एजेंसियों ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलेंस के नाम पर व्यावसायिक रूप से बिक्रय के लिए उपलब्ध ट्रोजन (कीलॉगर) वायरस को खरीदा और उसे अपने तथाकथित सरकारी काम-काज के लिए अपनाया! मजेदार बात ये है कि यह जर्मनी के कानून के खिलाफ है!

भारत में क्या स्थिति है? यह तो सिर्फ समय का सवाल है. इट इज जस्ट ए मैटर ऑफ टाइम. (और अगर आपको यहाँ मेरी लेखनी में अंग्रेज़ी ज्यादा पढ़ने को मिले तो मुझे दोष न दें, बल्कि हिंदी लिखने की नई सरकारी नियमावली सॉरी.. रूल्ज़-एंड-रेगुलेशन एंड गाइडलाइन को देखें.) किसी दिन सुबह सुबह हमें भी यह पता चलेगा कि हमारी कुछ सरकारी एजेंसियों ने भी ऐसी ही करामातें दिखा दी हैं!

और, रहा सवाल एंटीवायरसों का, तो अब जब आपकी सरकार ही आपको वायरस परोस रही है तो कैसा भी एंटीवायरस हो वह भी क्या खाक कर लेगा!

इसलिए, अपनी दाँतों में उंगली दबाए रखिए!


हम जैसे लाखों लोगों के प्रेरणा स्रोत - कंप्यूटर गुरु और दूरदृष्टि युक्त सफल व्यवसायी, स्टीव जॉब्स नहीं रहे.
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.
प्रस्तुत है, उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप उनके एक अत्यंत विख्यात भाषण का हिंदी रूपांतर.
यह रचनाकार में पूर्व प्रकाशित है.

ये हैं कंप्यूटर गुरू स्टीव जॉब्सएप्पल कंप्यूटर और पिक्सार एनिमेशन स्टूडियोज़ के प्रमुख. मौक़ा है स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का. दिन रविवार. तारीख़ 12 जून 2005.

मुख्य वक्ता स्टीव जॉब्स ने छात्रों को जो कुछ बताया वह जीवन को सच्ची जीवटता से जीने की सही मिसाल है. इससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं – बहुत कुछ.

प्रस्तुत है स्टीव जॉब्स के संबोधन का पूरा पाठ- (मूल अंग्रेज़ी से अनुवादआशीष श्रीवास्तव (http://desh-duniya.blogspot.com/ ) )

इस विद्यापीठ के, जिसे विश्व के सर्वोत्तम विद्यापीठों में से एक माना जाता है, दीक्षान्त समारोह में शामिल होकर मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ. मैंने किसी महाविद्यालय से उपाधि नहीं ली है. सच्चाई यह है कि मैं यहां पर आज मौजूद हूं यह महाविद्यालय और उपाधि से मेरी सबसे ज्यादा निकटता है. आज मैं आपको अपनी जिन्दगी से जुड़ी तीन कहानियाँ सुनाने जा रहा हूं. बस वही. कोई बड़ी बात नहीं, सिर्फ तीन कहानियां.

पहली कहानी है बिन्दुओं को मिलाने के बारे में.

मैंने रीड कालेज पहले ६ महीने में ही छोड़ दिया था, लेकिन मैं वहां पर अगले १८ महीने और रहा. उसके बाद मैंने कालेज सही अर्थों में छोड़ दिया. मैंने कालेज क्यों छोड़ा ?

दरअसल इसकी नींव तो मेरे जन्म लेने से पहले से रखी जा चुकी थी . मेरी जन्मदात्री जवान कुंवारी मां कालेज स्नातक छात्रा थी. उसने मुझे किसी को गोद देने का निश्चय किया था. उसकी मजबूत सोच थी कि मुझे किसी कालेज स्नातक माता पिता को ही गोद लेना चाहिए. इस लिये एक वकील और उसकी पत्नी मुझे गोद लेने के लिये तैयार थे, लेकिन जब मेरा जन्म हुआ तब उन्होंने आखिरी क्षणों में लड़की गोद लेना निश्चय किया. अब मेरे पालक जो प्रतीक्षा सूची में थे को आधी रात में फोन कर के पूछा गया "अप्रत्याशित रूप से हमारे पास एक बालक शिशु है, क्या आप उसे गोद लेना चाहेंगे ?" उनका जवाब हां में ही था. मेरी जन्मदात्री मां को बाद में जब पता चला कि मेरी मां और पिता ने किसी कालेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त नहीं की है, गोद लेने के काग़ज़ातों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. मेरे माता पिता के मुझे कालेज भेजने के आश्वासन देने बाद मेरी जन्मदात्री मां किसी तरह से हस्ताक्षर करने को तैयार हुई.

और, इस तरह १७ साल बाद मैं कालेज गया. लेकिन मैंने जो कालेज चुना था वह स्टैनफोर्ड के जैसा ही महंगा कालेज था. मेरे माता पिता की सारी कमाई मेरी फीस में चली जाती थी. ६ महीनों के बाद मैंने महसूस किया कि इस कालेज शिक्षा का कोई लाभ मेरे लिए नहीं है. मुझे नहीं मालूम था कि मैं जिन्दगी में क्या करना चाहता हूँ, और मेरे कालेज की शिक्षा इसमें क्या मदद करने वाली है. और मैं उस कालेज शिक्षा पर अपने माता पिता की सारी जिंदगी की कमाई खर्च कर रहा था. तब मैंने कालेज छोड़ने का निश्चय किया और विश्वास किया कि इससे सब कुछ ठीक हो जायेगा, यह एक डरावना निर्णय था, लेकिन जब आज मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ तो सोचता हूँ कि वह निर्णय मेरे द्वारा लिये गये सर्वोत्तम निर्णयों में से एक है. जिस क्षण मैंने कालेज छोड़ा, मैंने अरुचिकर कक्षाओं में जाना बन्द कर दिया और रुचिकर कक्षाओं में जाना कम कर दिया.

यह सब अच्छा (रोमांटिक) नहीं था. मेरे पास सोने के लिये कमरा नहीं था, मैं दोस्तों के कमरे में जमीन पर सोता था. मैं कोक की बोतलों को जमा कर वापस करता था जिससे मुझे हर बोतल पर ५ सेंट मिलते थे, इन पैसों से मैं खाना खरीदता था. हर रविवार मैं ७ मील चलकर हरे कृष्णा मन्दिर अच्छा खाना खाने जाता था. मुझे यह सब अच्छा लगता था. मेरी जिज्ञासा और अंतरात्मा को लेकर मेरा संघर्ष बाद में अमूल्य साबित हुआ. मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ
रीड कालेज उस समय कैलीग्राफी (लिपि/अक्षर बनाने की कला) का सबसे अच्छा शिक्षण देता था. पूरे कैम्पस में हर पोस्टर , दराजों पर लिखे गये नाम बहुत ही सुंदरता से लिखे गये थे. मैं कालेज छोड़ चुका था और मुझे सामान्य कक्षाएँ नहीं करनी होती थी, मैंने कैलीग्राफी की कक्षाएँ करने का निश्चय किया. मैंने शेरीफ और सैन्स शेरीफ टाईप फ़ेस सीखा, विभिन्न तरह के अक्षरों के बीच की कम ज्यादा जगह छोड़ने के बारे में सीखा, मैंने सीखा कि क्या है जो किसी टाइपोग्राफी को अच्छा बनाती है. यह एक सुंदर , ऐतिहासिक, कला है, जो विज्ञान नहीं सिखा सकता, और मुझे मनोरंजक लगा.

इसमें से कुछ भी मेरी जीवन में काम आएगा ऐसी उम्मीद नहीं थी. लेकिन १० साल बाद जब हम पहला मैकिंतोश बना रहे थे, यह सब मुझे याद आया. और यह सब हमने मैक में डाला. वह पहला कम्पयूटर था जिसके अक्षर सुंदर थे. यदि मैंने कालेज नहीं छोड़ा होता तो मैक के पास विभिन्न चौड़ाई और दो अक्षरों के बीच भिन्न-भिन्न खाली जगह वाले फ़ॉन्ट नहीं होते . और जिस तरह विन्डोज ने मैक की नकल की, यह संभावना है कि किसी भी निजी कम्प्यूटर में ये नहीं होता. यदि मैंने कालेज नहीं छोड़ा होता तो मैंने कैलीग्राफी की कक्षा नहीं की होती और निजी कम्प्यूटर में सुन्दर टाइपोग्राफी नहीं होती. हां मेरे कालेज में रहते हुए बिन्दुओं को सामने की ओर जोड़ना असंभव था, लेकिन दस साल बाद ये आसान है.
फिर से आप बिन्दुओं को आगे की तरफ नहीं जोड़ सकते, आप उन्हें पीछे की ओर देखते हुए ही जोड़ सकते हैं. आपको भरोसा करना होगा कि ये सभी बिंदु भविष्य में जुड़ जाएंगे. आपको अपनी शक्ति, भाग्य, जीवन, कर्म वगैरह पर भरोसा करना होगा. मेरी इस शैली ने मुझे कभी नीचा नहीं दिखाया है और इसी ने मेरा जीवन कुछ हट कर बनाया है.

मेरी दूसरी कहानी है प्यार और नुकसान के बारे में

मैं भाग्यशाली था. मैंने जिन्दगी की शुरूआत में जान लिया था कि मुझे किससे प्यार है. वाझ और मैंने अपने मातापिता के गैरेज में "एप्प्ल" की शुरूआत की, जब मैं २० साल का था. हमने कड़ी मेहनत की और १० साल में एप्प्ल गैरेज में काम करने वाले हम २ लोगों से बढकर २ बिलियन डॉलर और ४००० कर्मचारियों वाली कंपनी बन चुका था. एक साल पहले हम अपनी सबसे खूबसूरत कृति मैकिंतोश को बाजार में उतार चुके थे, और मैं ३० साल का हो चुका था. और तब मुझे एप्प्ल से निकाल दिया गया ! आप उस कम्पनी से कैसे निकाले जा सकते हैं जिसकी स्थापना आपने की थी ? अच्छा, जैसे-जैसे एप्पल बढने लगा था, हम लोगों ने कुछ ऐसे लोगों को नौकरी दी थी जिनके बारे में मैं सोचता था कि वे मेरे साथ कंपनी चलाने में प्रतिभाशाली साबित होंगे. और पहला साल अच्छा गया. लेकिन उसके बाद हमारी भविष्य की सोचों में अंतर आने लगा और हम अलग होने लगे. जब ऐसा हुआ तब कंपनी के निदेशक मंडल ने उनका साथ दिया. तो ३० साल की उमर में मैं बाहर था. मेरी संपूर्ण वयस्क जिन्दगी का केन्द्र जा चुका था और ये दिल तोड़ देने वाला था.

अगले कुछ महीनों तक मुझे नहीं मालूम था कि क्या करना चाहिए. मुझे महसूस होता था कि मैंने पिछली पीढ़ी के व्यावसायिकों को नीचा दिखाया है. मुझे दिया गया 'बेटन' मैंने नीचे गिरा दिया है. मैं डेविड पैकार्ड और बॉब नोयके से मिला और उनसे इस बुरी स्थिती के लिये क्षमा माँगी. मैं एक असफलता का प्रतीक था और मैंने 'सिलिकॉन वैली' से भाग जाने की भी सोच लिया था. लेकिन मेरे अंदर कुछ आलोकित हो रहा था, मैंने जो किया उससे मुझे प्यार था. एप्प्ल में जो कुछ हो रहा था उसमें कुछ भी नहीं बदला था. मुझे नकार दिया गया था लेकिन मैं उससे प्यार करता था. और मैंने सब कुछ फिर से शुरू करने की ठानी.

मैंने उस समय महसूस नहीं किया लेकिन एप्पल से मुझे निकाल दिया जाना मेरी जिन्दगी में घटित सबसे अच्छी घटना है, एक सफल इंसान होने का बोझ, अब एक नयी शुरूवात करने वाले का हल्का मन बन चुका था. इस घटना ने मुझे अपने जिन्दगी के सबसे क्रियाशील हिस्से में आने का अवसर दिया.

अगले ५ सालों में मैंने एक कम्पनी NeXT शुरू की, एक और कम्पनी 'पिक्सार' भी शुरू की. उसी समय एक प्यारी स्त्री के प्यार के गिरफ़्त में भी आ गया जो बाद में मेरी पत्नी बनी. पिक्सार ने विश्व की सबसे पहली कम्प्यूटर द्वारा एनीमेशन फीचर फिल्म 'टॉय स्टोरी' बनायी. आज पिक्सार विश्व का सबसे सफल एनीमेशन स्टूडियो है. परिस्थितियों में बदलाव कुछ ऐसे हुआ कि एप्प्ल ने NeXT को खरीद लिया, मैं एप्प्ल वापिस लौटा और जो तकनीक हमने NeXT में विकसित की आज एप्पल की तकनीक का हृदय है. और लारेंस और मेरा एक सुखी परिवार है.

मुझे पूरा विश्वास है कि यदि मुझे एप्पल से निकाला नहीं गया होता तो ये सब कुछ नहीं होता. वह एक कड़वी दवाई थी लेकिन मरीज को उसकी जरूरत होती है. यदि जिन्दगी आपके सर पर एक ईंट का प्रहार करे तो भी भरोसा ना छोड़ें. मुझे विश्वास है कि इकलौती चीज जो मुझे संघर्ष करने की प्रेरणा देती रही, वो था मेरा अपने किये गये कार्य से प्यार. आपको अपना प्यार पाना है, और यह आपके काम के लिये उतना ही सच है जितना आपके प्रेमी के लिये. आपका कार्य आपकी जिन्दगी का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है और अपने जीवन में संतोष पाने का इकलौता रास्ता है आपका सोचना कि जो काम मैं कर रहा हूँ वो सर्वोत्तम है. और एक सर्वोत्तम काम वह है जिससे आप प्यार करते है. यदि आपको अपना प्यार नहीं मिला, ढूंढते रहें – ढूंढते रहें. रुकें नहीं. वह आपको जब भी मिलेगा आपका दिल उसे पहचान लेगा . और एक अच्छे रिश्ते की तरह वह समय के साथ अच्छा, और अच्छा होते जाता है, तो ढूंढते रहिये, रूकें नहीं.

मेरी तीसरी कहानी है मौत के बारे में

जब मैं १७ वर्ष का था, मैंने कहीं पढ़ा था "यदि आप हर दिन को जिन्दगी के अंतिम दिन की तरह जीते हैं, किसी दिन आप जरूर सच होंगे". इसने मेरे मन पर गहरा प्रभाव डाला था और तब से पिछले ३३ सालों से हर सुबह मैंने आईने में खुद को देखा है और पूछा है "यदि आज मेरी जिन्दगी का अंतिम दिन है तो मैं आज मैं करने जा रहा हु वह मैं करना चाहूँगा या नहीं ?" और जब मेरा उत्तर कुछ दिनों तक लगातार नकारात्मक आया है मुझे मालूम हो जाता है कि मुझे कुछ परिवर्तन की जरूरत है.

अपनी मृत्यु को याद रखना, वह सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसने मुझे जिन्दगी के हर बड़े चुनावों में मदद की है. क्योंकि लगभग सब कुछ , हर उम्मीद , गर्व या असफलता की शर्म का डर ये सब मौत के सामने मायने नहीं रखते, बच जाता है जो सच ए महत्वपूर्ण है. आप एक दिन मरने वाले हैं इसे याद रखना , आपको कुछ खो देने के डर के जाल में फंसने से बचाएगा. आप के पास खोने के लिये कुछ नहीं है, आप को अपने दिल की भावना का पालन नहीं करने के लिये कोई कारण नहीं है.
.
एक साल पहले मुझे कैंसर होने का पता चला था. सुबह ७.३० बजे मेरी जांच हुई, और मेरे पित्ताशय में मैने ट्यूमर अच्छी तरह से दिख रहा था. मुझे पित्ताशय क्या होता है यह भी नहीं मालूम था. डाक्टर ने बताया कि इस तरह के कैंसर का कोई इलाज नहीं है और मुझे ३ से ६ महीने से ज्यादा जीने की उम्मीद नहीं रखना चाहिए. डाक्टर ने मुझे घर जा कर सभी काम व्यवस्थित करने की सलाह थी, जो उनकी भाषा में होता है मृत्यु की तैयारी करो. इसका मतलब होता है अपने बच्चों को आपके अगले १० सालों की योजना को कुछ महीनों में बताना. इसका मतलब होता है कि सब कुछ व्यवस्थित कर देना जिससे आपके परिवार को परेशानी कम से कम हो. इसका मतलब था अलविदा कहना.
पूरे दिन मैं उस जांच के भय के साथ रहा. बाद में शाम को मेरी बॉयप्सी हुई,. उन लोगों ने में मेरे गले से एक एन्डोस्कोप, मेरे पेट में, मेरी आंतों तक पहुँचाया और मेरे पित्ताशय से सुई के द्वारा कुछ कोशिकायें निकाली. मैं बेहोश था, लेकिन मेरी पत्नी जो वहां पर थी, ने बताया कि जब डाक्टरों ने कोशिकाओं को सुक्ष्म्दर्शी से देखा और चीखना शुरू कर दिया. यह उन बिरले कैंसर में से एक था जो शल्यचिकित्सा से ठीक हो जाता है. मेरी शल्य चिकित्सा हुई और मैं अब अच्छा हूँ.

यह मौत से मेरा सबसे नजदीकी साक्षात्कार था, और आशा है इसका अनुभव अगले कुछ दशकों तक रहेगा. इस से गुजरने के बाद मैं आपसे कुछ ज्यादा विश्वास से कह सकता हूँ कि मौत एक उपयोगी लेकिन बौद्धिक विषय है.
कोई नहीं मरना चाहता. जो स्वर्ग जाना चाहते है वह भी वहां जाने के लिये मरना नहीं चाहते. लेकिन मौत एक ऐसा मंजिल है जिसे हर किसी को पहुँचना है. कोई बच नहीं पाया है. और ऐसा होना भी चाहिये, क्योंकि मौत जिंदगी का सबसे बडा आविष्कार है. वह जीवन का परिवर्तक है. वह पुराने को हटा, नये के लिये रास्ता बनाता है. आज आप नये है, लेकिन एक दिन - आज से ज्यादा दूर नहीं, आप बूढ़े हो जाएंगे और किनारे हटा दिये जाएंगे. नाटकीयता के लिये क्षमा चाहूँगा, लेकिन यही सच है.

आपके पास समय कम है, इसलिये किसी और की जिन्दगी जीने के लिये बर्बाद न करें. किसी और के विचारों के अनुसार जीने के जाल में न फँसें. किसी और की सोच का शोर आपकी अंतरात्मा की आवाज को दबा ना पाये. और, सबसे महत्वपूर्ण, आपके पास अपने दिल और अंतरात्मा के कहे का पालन करने का साहस होना चाहिये. वो किसी-तरह-से जानते है कि आप सच में क्या बनना चाहते हैं. बाकी सब, किसी महत्व का नहीं है.

जब मैं जवान था, एक अच्छा प्रकाशन था "व्होल अर्थ कैटेलाग", जो हमारी पीढ़ी के लिये बाइबिल था. वह यहां मेनलो पार्क से कुछ ही दूर रहने वाले स्टीवर्ट ब्राण्ड ने लिखा था, और उसे काव्यात्मक अंदाज में जीवन दिया था. यह १९६० के दशक के आखिर की बात है जब निजी कम्प्यूटर और डेस्कटॉप का प्रकाशन नहीं था. यह टाइपराटर, कैंची और पोलराईड कैमरों से बनी थी. उसे गूगल का पेपरबैक अंक कहा जा सकता है, ३५ साल पहले, गूगल के आने से पहले. वह एक आदर्श था और अच्छी जानकारी से भरपूर था.

स्टीव और उनकी टीम ने "व्होल अर्थ कैटेलाग" के कई अंक प्रकाशित किये और जब वे थक गये तब उन्होंने उसका अंतिम अंक प्रकाशित किया. यह १९७० के दशक के मध्य की बात है जब मैं आपकी उम्र का था. उसके अंतिम अंक के पिछले कवर पर एक गांव के रास्ते का सुबह के समय का चित्र था, कुछ उस तरह का आपको पहाड़ों में देखने को जरूर मिलेगा यदि आप साहसी है और हिचहाइकिंग करते है. उसके नीचे लिखा था. "भूखे रहो, मूर्ख रहो" यह विदाई का संदेश था, क्योंकि उन्होने प्रकाशन बन्द कर दिया था. भूखे रहो, मूर्ख रहो और मैंने अपने लिये यही चाहा है और आपको भी यही शुभकामना देता हूँ

भूखे रहो, मूर्ख रहो – नए ज्ञान के लिए - भूखे रहो, मूर्ख रहो.

धन्यवाद
स्टीव जॉब्स

जैसा कि अपनी पिछली पोस्ट में मैंने लिखा था, कि एम एस ऑफ़िस 2010 हिंदी वर्तनी जाँच और गूगल डॉक्स हिंदी वर्तनी जाँच में तुलना करेंगे, तो प्रस्तुत है एक त्वरित तुलना.

तुलना के लिए मैंने एक छोटी सी कविता की कुछ पंक्तियाँ लीं, और एमएस वर्ड 2010 हिंदी में चिपकाया और उसी को गूगल डॉक्स में भी चिपकाया.

पाया कि न तो कोई बीस है और न ही उन्नीस!

और, न तो कोई पास है, और न ही फेल!

दोनों के ही वर्तनी जाँच परिणाम आमतौर पर एक जैसे रहे, दोनों  में ही हिंदी के कुछ आम प्रचलित सही शब्दों को भी गलत समझ कर लाल रंग से रंग दिया गया.

हाथ कंगन को आरसी क्या? आपके लिए दोनों के स्क्नीनशॉट उपलब्ध हैं.-

गूगल डॉक्स हिंदी वर्तनी जाँच -

google docs hindi spell check result

 

एमएस वर्ड 2010 हिंदी वर्तनी जाँच

ms office 2010 hindi spell check

 

अब आप खुद ही तय करें कि एमएस ऑफ़िस 2010 का 11 सौ रुपए मूल्य का वर्तनी जाँच बेहतर है या मुफ़्त का गूगल डॉक्स हिंदी वर्तनी जाँच.

पोस्ट्स जीनियस postsgenius

ब्लॉगिंग से कमाई करने की आस देखने वालों के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है. एक नई सेवा चालू की गई है. पोस्ट्स जीनियस. यह बहुभाषी सेवा है, जिसमें हिंदी भी शामिल है. इस सेवा के जरिए ब्लॉग पोस्टें लिख कर कमाई की जा सकती है. यह सेवा दो-तरफा है. जहाँ ब्लॉगर या वेबसाइट मालिक किसी उत्पाद के रीव्यू व ब्लॉग पोस्टें लिख कर कमाई कर सकते हैं तो तो उत्पादक या विक्रेता ऐसी पोस्टें लिखवा कर अपने उत्पाद का विज्ञापन/विपणन भी कर सकते हैं.

पोस्ट्स जीनियस में ब्लॉगरों के लिए दावा किया गया है -

" ब्लॉगर्स व वेब-सामग्री प्रकाशक

ब्लॉगिंग के जरिए पैसे कमाएँ. पोस्ट व समीक्षाएँ लिख कर व उन्हें अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर प्रकाशित कर पैसे कमाएँ.
वेबसाइट, उत्पाद या सेवा समीक्षाएँ लिखकर हजारों रुपए कमाएँ.
अपने स्वयं के ब्लॉग/वेबसाइट में आलेख, पोस्ट व समीक्षाएँ लिखकर प्रकाशित करें और इससे आय अर्जित करें.
अपने पाठकों के लिए उच्च कोटि के आलेख जुटा कर अपने ब्लॉग की पाठक संख्या में वृद्धि करें.
नए उच्च कोटि के टारगेटेड सामग्री आपके ब्लॉग या साइट पर सर्च इंजिन ट्रैफ़िक भेजेंगे. हम आपको लिखने का तरीका बताएंगे.
आपके ब्लॉग की गुणवत्ता के आधार पर हम आपको प्रति प्रकाशित ब्लॉग पोस्ट के लिए $5 से लेकर $1000 का भुगतान करेंगे.
"

 

आजकल किसी भी उत्पाद की खरीदी के लिए इंटरनेट के जरिए उसके रीव्यू और फ़ीडबैक का सहारा लेने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. इसी बात को मद्देनजर रखते हुए यह सेवा प्रारंभ की गई है.

विज्ञापनदाताओं / व्यापारियों के लिए कहा गया है -

"विज्ञापनदाता, विपणनकर्ता तथा एसईओ


अपने वेबसाइट, उत्पाद या सेवा के लिए प्रायोजित आलेख, भुगतान किए गए ब्लॉग पोस्ट व समीक्षाएँ खरीदें और ट्रैफ़िक व बज़ पाएँ.
किसी नई साइट, उत्पाद या सेवा के लिए बज़ पैदा करें. इसके बारे में पूरी दुनिया को लोगों को बताएँ.
सर्च इंजिन रैंकिंग बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता के स्थाई पाठ कड़ियाँबनाएँ.
व्यवसायिकसमीक्षकों तथा उनके पाठकों से सही व रचनात्मक सुझाव प्राप्त करें.
लक्षित पाठकों से और ज्यादा डायरेक्ट विजिटर्स प्राप्त कर अपने वेबसाइट ट्रैफ़िक को बढ़ाएँ.
प्रति पोस्ट/आलेख/समीक्षा की कीमत $5 से प्रारंभ होती है और यह सिर्फ आप पर निर्भर है कि आप कितना भुगतान करना चाहते हैं.
"

देखना ये है कि इसे विज्ञापनदाता, उत्पादक और विक्रेता किस रूप में लेते हैं. ब्लॉगर तो खैर अतिरिक्त आय की आस में इससे जल्द ही जुड़ेंगे. परंतु जब तक इससे अच्छी खासी संख्या में विज्ञापनदाता नहीं जुड़ेंगे, इस सेवा की सफलता में संदेह है.

फिर भी, ब्लॉगिंग से - वह भी हिंदी ब्लॉगिंग से कमाई का एक और चैनल खुला तो सही. अब ये दीगर बात है कि हमें सफलता कब और कितनी मिलती है, या मिलती भी है या नहीं!

एमएस ऑफ़िस 2010 में विश्व की तमाम प्रमुख भाषाओं के वर्तनी जाँचक अलग से लगाए जा सकते हैं. यदि आप किसी खास भाषा जैसे कि हिंदी में अच्छा खासा काम करते हैं तो इसका हिंदी भाषा का पैक अलग से लगा सकते हैं जिसमें हिंदी के अलावा गुजराती, तमिल, तेलुगु, मराठी, कन्नड़ भाषाओं के वर्तनी जाँचक भी आपको मुफ़्त में मिलते हैं. कुछ अन्य भारतीय भाषाओं मसलन ओडिया, बांग्ला, असमी इत्यादि के लिए दूसरा पैक लेना होगा.

भाषा पैक कैसे लगाएँ -

स्टार्ट > प्रोग्राम मेन्यू > माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस > माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस टूल्स में जाएँ और वहाँ माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस 2010 लैंगुएज प्रेफ़रेंस पर क्लिक करें.

एक नया विंडो खुलेगा जो ऐसा दिखेगा -

ms office hindi spell check

यहाँ आप एड एडीशनल एडिटिंग लैंगुएजेस ड्राप-डाउन मेन्यू में जाएँ और हिंदी चुनकर एड पर क्लिक करें. अब चूज़ एडीटिंग लैंगुएज खंड में हिंदी भाषा दिखेगी. परंतु ग्रामर वर्तनी इत्यादि के नीचे नॉट इंस्टाल्ड दिखेगा. इसपर क्लिक करें.

 

आपका डिफ़ॉल्ट ब्राउजर खुलेगा जो इंटरनेट पर माइक्रोसॉफ़्ट के डाउनलोड स्थल पर ले जाएगा जहाँ आपको हिंदी का लैंगुएज पैक डाउनलोड करने के निर्देश दिए गए होंगे. वैकल्पिक रूप से आप लैंगुएज पैक डाउनलोड करने के लिए सीधे ही इस कड़ी पर जा सकते हैं - http://office.microsoft.com/en-in/language/  . डाउनलोड करने के लिए आपके पास विंडोज लाइव खाता होना आवश्यक है, जो कि अनावश्यक सा लगता है.

यह हिंदी का लैंगुएज पैक 1157 रुपए का है. यदि आप हिंदी में अच्छा खासा काम करते हैं, और एक बेहतर वर्तनी जाँच चाहिए, तो यह राशि कोई अधिक नहीं है. इसके लिए भुगतान विकल्प के लिए आपके पास मास्टरकार्ड का क्रेडिट कार्ड होना आवश्यक है. अन्य नेटबैंकिंग विकल्प अभी नहीं हैं.

ms office hindi spell check web select

डाउनलोड करने के उपरांत इसे आसानी से इंस्टाल किया जा सकता है. इंस्टालेशन के उपरांत अन्य किसी अतिरिक्त सेटिंग के यह एम एस ऑफ़िस के तमाम अनुप्रयोगों - मसलन वर्ड, एक्सेल इत्यादि में वर्तनी जाँच सुविधा के लिए स्वचालित उपलब्ध हो जाता है.

image

माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस के वर्तनी जाँच के साथ यह सुविधा भी है कि बहुभाषी दस्तावेज में आप एक साथ कई भाषाओं में वर्तनी जाँच एक साथ चला सकते हैं.

 

कल की पोस्ट में देखेंगे - एमएस ऑफ़िस 2010 हिंदी तथा गूगल डॉक्स की मुफ़्त हिंदी  वर्तनी जाँच सुविधा की आधारभूत तुलना.

How to add hindi Tamil Telugu Gujarati Kannada Punjabi spell check in MS Office 2010

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget