June 2011

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गूगल प्लस के आमंत्रण लोगों को मिलने लगे हैं. कहा जा रहा है कि इसे फ़ेसबुक को मात देने की नीयत से अच्छी खासी मेहनत व रिसोर्स से तैयार किया जा रहा है. गूगल यूं भी इंटरनेट पर सर्च - ईमेल से लेकर ऑफ़िस सूट तक की  हर किस्म की सेवा प्रदान कर उसका बादशाह बना बैठा है, और उसकी बादशाहत को खतरा फ़ेसबुक से मिल रहा है जहाँ जनता एक बार घुसी तो वहीं पड़ी रहती है. गूगल इस समीकरण को बदलने के लिए गूगल+ नामक नया सोशल साइट लेकर आया है. वैसे तो गूगल के प्लेटफ़ॉर्म में सोशल साइट ओरकुट पहले से है, परंतु फ़ेसबुक के बेहद आसान प्रयोग ने ओरकुट की हवा निकाल दी और अब न सिर्फ हर व्यक्ति, बल्कि उसका कुत्ता, और उसका मोबाइल भी फ़ेसबुक पर है.

सवाल ये है कि क्या गूगल+ की ये कोशिश कामयाब होगी?

कुछ आरंभिक सेवाएँ आपके इंटरनेट जीवन और फोटो-वीडियो फ़ाइल साझा को और आसान बनाने की गरज से रीडिजाइन की गई प्रतीत तो होती हैं. मगर इसका असली टेस्ट तो तब होगा जब यह आम प्रयोग के लिए खुलेगा तब लोग इसे कितना हाथों हाथ लेंगे. और, लोगों को फ़ेसबुक से बाहर निकालना भी तो बड़ी टेढ़ी खीर है.

गूगल+ कोई 44 भाषाओं में उपलब्ध है. मैंने इसे हिंदी में देखा तो पाया कि अनुवाद बेहद ही कच्चा और सड़ियल किस्म का है. सीधा शब्द-दर-शब्द और वाक्य दर वाक्य अनुवाद है. इतना घटिया अनुवाद तो मैंने किसी साइट पर नहीं देखा, यहाँ तक कि गूगल के मशीनी अनुवाद में भी नहीं! एक बानगी देखें -

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मजेदार के बिलकुल विपरीत कार्य? ये हिंदी कहाँ की है मेरे भाई? और, आप हिंदी में आखिर कहना क्या चाहते हैं?

वैसे, गूगल+ एक और मजेदार, काम की सेवा लगती है जिसमें विशिष्ट किस्म की नए फ्लैवर की सेवाएँ मसलन - सर्कल, स्ट्रीम, स्पार्क, हैंगआउट, चैट इत्यादि हैं जिनमें कुछ दम नजर आता है.

गूगल+ का आमंत्रण आपको भी चाहिए? अभी ही यहाँ https://services.google.com/fb/forms/googleplusenuk/  पंजीकरण करें

वस्तुतः हिंदी ब्लॉग तो नहीं, पर हिंदी ब्लॉगों से जुड़े ब्लॉग मंच का ये विज्ञापन पिछले कुछ दिनों से दिखाई देता रहा था-
ब्लॉगमंच को हार्दिक शुभकामनाएँ. हम जानना चाहेंगे कि उनका यह प्रयोग कितना सफल रहा है. यह भी जानना चाहेंगे कि उन्होंने विज्ञापन में कितने खर्च किए, कितने वसूल हुए और प्रतिफल में पाठक-प्रयोक्ता संख्या में क्या और कितनी वृद्धि हुई.

और, इधर कुछ दिन से यत्र तत्र हिंदी में गूगल एडसेंस विज्ञापन फिर से दिखाई देने लगे हैं-

है

क्या गूगल एडसेंस हिंदी जल्द ही वापस आ रहा है ?
लगता तो है.
मगर दारोमदार ब्लॉगमंच जैसे प्रयोग के सफल होने पर है. नहीं तो कोई विज्ञापनदाता यहाँ माल गंवाने क्यों आएगा भला?
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स्क्रीन शॉट में चीजों की वर्तनी गलत दिख रही है वो नए लिनक्स तंत्र में फ़ॉन्ट रेंडरिंग की समस्या के कारण  है.

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गूगल अनुवाद अब हिंदी के अतिरिक्त 5 अन्य भारतीय भाषाओं यथा - बंगाली, गुजराती, कन्नड़, तमिल और तेलुगु में उपलब्ध है.

मैंने हिंदी के एक वाक्य को गुजराती में अनुवाद करने की कोशिश की -

हिंदी का वाक्य -

यह टेक्नोलॉज़ी आलेख मैं हिंदी में लिख रहा हूँ और इसका अनुवाद मैं गुजराती में करूंगा गूगल ट्रांसलेट से. देखता हूँ कि मशीनी अनुवाद कैसा होता है.

और इसका गुजराती अनुवाद मिला -

આ Teknolojhi લેખ હું હિન્દી અને ગુજરાતી લખવા છું હું Google ભાષાંતર સાથે અનુવાદ છે. કે મશીન અનુવાદ જોશો શું છે.

 

पता नहीं अनुवाद कितना सही है, मगर मुझे लगता तो है कि समझा तो जा ही सकता है कि क्या कहा गया है.

इसकी एक और ख़ूबी यह है कि साथ ही दिए गए लिंक से आप पाठ को ध्वन्यात्मक रूप से पढ़ सकते हैं. उदाहरणार्थ, ऊपर दिए गुजराती पाठ को इस तरह से पढ़ा जा सकता है (यदि आप गुजराती लिपि नहीं पढ़ पाते, परंतु बोल पाते हैं, और रोमन लिपि पढ़ पाते हैं)

Ā Teknolojhi lēkha huṁ hindī anē anuvāda huṁ Google bhāṣāntara māṁ chuṁ lēkhitamāṁ chuṁ. Kē maśīna anuvāda jōśō śuṁ chē.

 

भाषाई दीवारों को ढहाने की एक और उम्दा कोशिश. इस सुविधा से अब 6 भारतीय भाषाओं की सामग्री को विश्व की 63 भाषाओं में मशीनी अनुवाद किया जा सकेगा-

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coke studio mtv

भारत में टीवी पर गीत-संगीत के कार्यक्रमों के बेहद बुरे हाल हैं. या  तो आप 24x7 सड़ियल गानों के प्रोमो देखने को अभिशप्त होते हैं या फिर उतने ही सड़ियल - एसएमएस वोटिंग के लिए ऑप्टीमाइज़्ड नॉट सो इंडियन आइडल या पा रे गा मा धा (उल्टा लिख दिया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है?) जैसे रियलिटी शो से काम चलाना पड़ता है, जिनमें गीत संगीत तो 'रीयल' बिलकुल नहीं होता.

coke studio mtv india shankar mahadevan

परंतु आपके इस अनुभव को सिरे से बदलने आ गया है एमटीवी का प्रोग्राम कोक स्टूडियो@एमटीवी.

पहले तो मैंने सोचा था कि यह प्रोग्राम भी दूसरे संगीत प्रोग्रामों की तरह सामान्य या औसत किस्म का, और अनरीयल ही  होगा. मगर मैं गलत था.

इसका पहला एपीसोड शुक्रवार 17 जून 2011 को एमटीवी पर दिखाया गया. और क्या खूब प्रोग्राम रहा यह. यदि आपने अब तक इसे नहीं देखा है तो बारंबार चल रहे इसके री-रन में अवश्य देखें. इसके अगले नए एपीसोड प्रति शुक्रवार  शाम 7 बजे दिखाए जाएंगे.

कोक-स्टूडियो@एमटीवी (coke-studio@mtv)  के विदेशी शो विदेशों में भी खासे लोकप्रिय रहे हैं. और भारत में भी यह लोकप्रियता के रेकॉर्ड तोड़ने के लिए पूरी तरह से सेट है.

इसके इस सीजन में जो बड़े नाम जुड़े हैं उनमें से कुछ हैं -

कैलाश खेर, शान, शफ़ाकत - अमानत अली, कोलोनियल कजिन्स, शंकर महादेवन, सुनिधि चौहान, वडाली ब्रदर्स, चिन्ना पोन्नु, साबरी ब्रदर्स, रिचा शर्मा इत्यादि. संयोजन लेस्ली लुइस का है.

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फ़ोनेटिक टाइपिंग में कठिन शब्दों को टाइप करते समय आपकी जान निकल जाती है? रेमिंगटन (कृतिदेव) पद्धति से यूनिकोड हिंदी टाइप करने का कोई बेहतरीन औजार आपके पास अभी भी नहीं है? हिंदी टाइपिंग के लिए बेहतर विकल्प की तलाश में घूम रहे हैं?
इनस्क्रिप्ट हिंदी टाइपिंग क्यों नहीं सीखते?
अब कोई बहाना नहीं चलेगा. क्योंकि अब आ गया है आपको परिपूर्ण वैज्ञानिक पद्धति से तैयार इनस्क्रिप्ट हिंदी टाइपिंग सिखाने का एक नया, शानदार प्रोग्राम :  स्पर्श.
इस नए प्रोग्राम - स्पर्श बीटा संस्करण 1 को तैयार किया है हिंदी प्रौद्योगिकी व हिंदी जाल-जगत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर श्री बालेंदु शर्मा दाधीच ने.
baalendu sharma dadhich
पर, इस प्रोग्राम की खूबियों और उसके इस्तेमाल के बारे में चर्चा करने से पहले कुछ बातें इनस्क्रिप्ट की करें, ताकि आप इनस्क्रिप्ट हिंदी टाइपिंग सीखने के लिए प्रेरित तो हों!
नीचे दिया गया मसाला भी स्पर्श प्रोग्राम के गाइड बुक से ही निकाला गया है :

इनस्क्रिप्ट क्या है और इसे क्यों सीखें?

  1. इनस्क्रिप्ट हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में कंप्यूटर पर टाइप करने के लिए भारत की आधिकारिक पद्धति है। इसे भारतीय मानक ब्यूरो ने एक मानक (स्टैंडर्ड) के रूप में मान्यता प्रदान की है, ठीक वैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनीकोड एक मानक है या फिर भारत में उत्तम गुणवत्ता की वस्तुओं के लिए ISI मानक प्रचलित है। अन्य कोई भी कीबोर्ड भारतीय भाषाओं के लिए मानक के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है और इसके वैज्ञानिक कारण हैं।
  2. हर डिजिटल डिवाइस (कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन या अन्य) पर भारतीय भाषाओं के लिए इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड स्वतः मौजूद होता है, क्योंकि यही हमारा आधिकारिक मानक कीबोर्ड है। अन्य सभी कीबोर्ड पद्धतियों को लाने के लिए अलग से साधनों की जरूरत होती है।
  3. हर आपरेटिंग सिस्टम में इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड टाइपिंग पद्धति स्वतः मौजूद होती है। भले ही वह विंडोज का कोई भी संस्करण हो, मैकिन्टोश हो या लिनक्स हो। सभी मोबाइल फोनों और अन्य डिजिटल युक्तियों पर भी यही स्थिति है। भविष्य में भी ऐसा ही होगा।
  4. इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड में कुंजियों (keyboard keys) का संयोजन इस तरह किया गया है कि यह तेज गति से टाइप करने में मदद करता है। यदि समय लगता है तो टाइपिंग के अभ्यास के दौरान। उसके बाद गति अन्य पद्धतियों की तुलना में तेज होती है।
  5. इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड का आधार वैज्ञानिक है। इसमें मात्राएँ बाईं तरफ रखी गई है क्योंकि उनका प्रयोग सामान्य अक्षरों की तुलना में कम होता है। कीबोर्ड पर दाईं ओर वे अक्षर रखे गए हैं जिनका अधिक प्रयोग होता है। कीबोर्ड की मध्यवर्ती पंक्ति में वे अक्षर लिए गए हैं जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं।
  6. इनस्क्रिप्ट पद्धति वास्तविक रूप से ध्वन्यात्मक (फोनेटिक) पद्धति है, जो देवनागरी लिपि के लिए अत्यंत अनुकूल है। स्वयं देवनागरी भी ध्वन्यात्मक लिपि है, जिसमें उसी तरह से लिखा जाता है जैसे कि हम बोलते हैं।
  7. इस टाइपिंग पद्धति में हलंत का प्रयोग कर आधे अक्षरों के लिए अलग से कुंजियां याद रखने की समस्या खत्म कर दी गई है। हर पूर्ण अक्षर के बाद हलंत दबाने पर उससे जुड़ा अर्धाक्षर निर्मित हो जाता है। जैसे क + ् से स्वतः आधा क बन जाता है।
  8. संयुक्ताक्षर भी विभिन्न अक्षरों और हलंत के संयोजन से खुद ही बन जाते हैं। जैसे द्ध बनाने के लिए द + ् + ध लिखने की जरूरत है। इस प्रकार इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड पर काम करने के लिए बहुत कम कुंजियों को याद करने की जरूरत है।
  9. नुक्ते और अक्षरों के नीचे लगने वाली बिंदु दोनों के लिए एक समान कैरेक्टर ( ़ ) का प्रयोग किया जाता है जो बड़े कोष्ठक के समापन चिह्न ] वाली कुंजी पर मौजूद है। यह चिह्न अक्षर के हिसाब से स्वयं ही सही स्थान पर लग जाता है।
  10. मूल रूप से रोमन से आए चिह्नों को अंग्रेजी के कीबोर्ड से ही ज्यों का त्यों हिंदी में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे प्रश्नवाचक चिह्न लगाने के लिए पहले अपने कीबोर्ड की लिपि रोमन करें और फिर ? कुंजी दबाएं। इसके बाद लिपि पुनः देवनागरी कर लें। यूनिकोड में विभिन्न भाषाओं के अक्षर साथ-साथ प्रयुक्त किए जा सकते हैं।
  11. याद रखें- जो लोग सिर्फ एकाध बार हिंदी में काम करना चाहते हैं या शौकिया तौर पर कभी-कभार दो-चार पंक्तियां देवनागरी में लिखते हैं और प्रामाणिक ढंग से हिंदी की टाइपिंग सीखने के लिए समय निकालने में असमर्थ हैं, वे ट्रांसलिटरेशन या किसी भी अन्य सहायक टूल का प्रयोग कर ऐसा कर सकते हैं। लेकिन यदि आपका व्यवसाय ही हिंदी से जुड़ा है, आपको बड़े पैमाने पर हिंदी में काम करना है या फिर आप हिंदी के प्रामाणिक तरीके से ही कंप्यूटर पर काम करना चाहते हैं तो इनस्क्रिप्ट जरूर अपनाएं। चार-पांच दिन तक रोजाना एक-दो घंटे के अभ्यास से इसे सीखा जा सकता है और उसके बाद कंप्यूटर बहुत आसान और मैत्रीपूर्ण बन जाता है।

इनस्क्रिप्ट टाइपिंग पद्धति : जरूरी नियम और तौर तरीके :

1. छोटी इ की मात्रा (ि) को भी बड़ी ई की मात्रा की ही तरह मूल अक्षर के बाद में टाइप किया जाता है। 'चिता' शब्द टाइप करने के लिए च + ि + त + ा कुंजियां दबाएंगे।
2. हर पूर्ण अक्षर के आगे हलंत कैरेक्टर ( ् ) टाइप करने पर पूर्ण अक्षर स्वतः आधे अक्षर में बदल जाता है। जैसे- क + ् + य + ा से 'क्या' बनेगा।
3. हर महा-प्राण अक्षर (जैसे ख) अपने अल्प-प्राण अक्षर (जैसे क) की कुंजी पर ही मौजूद होता है। उसे टाइप करने के लिए पहले Shift कुंजी का प्रयोग करें।
4. स्वर और उनसे जुड़ी मात्राएँ एक ही कुंजी पर मौजूद होती हैं। जैसे 'इ' स्वर और ि की मात्रा एक ही कुंजी पर होंगी। स्वरों को टाइप करने के लिए Shift कुंजी पहले दबाएं।
5. संयुक्ताक्षरों का निर्माण संबंधित कैरेक्टर्स और हलंत के प्रयोग से स्वतः हो जाता है। जैसे 'क्ष' लिखने के लिए क + ् + ष लिखना पर्याप्त है। 'त्र' के लिए त + ् + र टाइप करें।
6. नुक्ता कैरेक्टर बड़े कोष्ठक के समापन वाले चिह्न ] की कुंजी पर मौजूद होता है। मूल अक्षर टाइप करने के बाद यह कुंजी दबाने पर नुक्ता लग जाता है।
7. इनस्क्रिप्ट टाइपिंग पद्धति ध्वन्यात्मक (फोनेटिक) है। इसमें ठीक उसी तरह टाइप करें जैसे कि आप बोलते हैं। जैसे इन्दिरा के लिए इ + न + ् + द + ि + र + ा। 'अड्डा' टाइप करने के लिए अ + ड + ् + ड + ा क्रम का प्रयोग करें।
8. कर्ता में जिस तरह ऊपर की ओर आधा र आता है, वैसा चिह्न बनाने के लिए ध्वन्यात्मक तरीके से ही र + ् टाइप करते हैं। कर्ता को यूं लिखेंगे- क + र + ् + त + ा
9. जिन अक्षरों में रेफ का प्रयोग होता है (जैसे प्रण) वहां भी ध्वन्यात्मक ढंग से टाइप करते हैं। जैसे प्रयोग के लिए प + ् + र + ण
10. जहां र के साथ छोटे या बड़े ऊ की मात्रा आती है, वहां सही अक्षर स्वतः बना दिया जाता है। आपको सिर्फ र के बाद मात्रा लगानी है। उसे किस तरह प्रदर्शित किया जाएगा, इसका निर्णय कंप्यूटर खुद करेगा।
11. 'आ' स्वर का स्वयं में स्वतंत्र चिह्न है इसलिए इसे अ + ा के रूप में न लिखें। Shift कुंजी दबाने के बाद रोमन की E कुंजी दबाने पर आ चिह्न स्वयं बन जाता है। इसे अ + ा के रूप में लिखने की परिपाटी गलत है क्योंकि तकनीकी रूप से यह एक अक्षर नहीं है। उस रूप में ये दो अक्षर होते हैं जिन्हें साथ रख दिया गया है। देवनागरी वर्णमाला में आ का एक ही अक्षर के रूप में स्वतंत्र अस्तित्व है।
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इनस्क्रिप्ट हिंदी टाइपिंग सीखने का वैसे तो एक-दो और प्रोग्राम उपलब्ध हैं, मगर यह नया प्रोग्राम बेहतर है, इन्ट्यूटिव किस्म का है और तेजी से टच-टाइपिंग सीखने के लिहाज से डिजाइन किया गया है. स्पर्श के बारे में बालेंदु जी का कहना है -
 
‘स्पर्श’ एक टच-टाइपिंग सॉफ्टवेयर है जो  हिंदी यूज़र्स को मानक हिंदी
कीबोर्ड (इनस्क्रिप्ट) के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करने के मकसद से बनाया गया
है। यह न सिर्फ उन्हें इनस्क्रिप्ट की खूबियों से परिचित करवाता है बल्कि
टाइपिंग सीखने की प्रक्रिया में उनकी दिलचस्पी भी बनाए रखता है। इसमें
लंबे-चौड़े ट्यूटोरियल देने की बजाए सीधे अभ्यास की पद्धति अपनाई गई है। कहते
हैं कि किसी भी सॉफ्टवेयर को सीखने का सबसे आसान और सही तरीका है- उस पर काम
शुरू कर देना। ‘स्पर्श’ इसी सिद्धांत पर काम करता है। इसमें यूज़र अभ्यास के
दौरान ही सीखता है और वहीं अपने प्रदर्शन को जाँच भी लेता है। इनस्क्रिप्ट
कीबोर्ड की कतारों में आने वाले अक्षरों को आधार बनाकर ये अभ्यास बनाए गए हैं।
हर कतार के चित्र देकर उस पर अंकित अक्षरों का अभ्यास कराने का प्रयास किया गया
है। शुरूआत बहुत सरल अभ्यास से होती है और धीरे-धीरे अभ्यास का स्तर कठिन होता
जाता है। लेकिन चूंकि इस बीच यूज़र की दक्षता भी बढ़ती जाती है इसलिए उसे
जटिलता महसूस नहीं होती।

‘स्पर्श’ में कुल मिलाकर 45 ट्यूटोरियल-कम-प्रैक्टिस पेजेज हैं जो किसी भी
यूज़र को इनस्क्रिप्ट टाइपिंग का ठीकठाक अभ्यास कराने में सक्षम हैं। हर
एक्सरसाइज के दौरान यूज़र द्वारा की गई गलतियों और रफ़्तार को भी मापा जाता है
और अंत में दिलचस्प अंदाज में परिणाम दिखाए जाते हैं।

स्पर्श इन्स्टाल करने से पहले कंप्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट 4 फ्रेमवर्क
इन्स्टाल होना जरूरी है।

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जब आप स्पर्श को अपने कंप्यूटर पर  इंस्टाल कर चलाते हैं तो पाते हैं कि इसका प्रारंभिक प्रोग्राम मेन्यू और इंटरफ़ेस बेहद साफ सुथरा और आकर्षक है -
sparsh hindi typing tutor program
इसके प्रोग्राम विंडो में तीन बटन हैं जो हिंदी में हैं. इनस्क्रिप्ट परिचय माला और टाइपिंग के तौर तरीके बटनों को क्लिक करने पर क्रमशः इनस्क्रिप्ट का परिचय और इनस्क्रिप्ट हिंदी टाइपिंग के तरीके पर मदद विंडो खुलती है. इसका सारा पाठ ऊपर दिया गया है जिसे आप पढ़ चुके हैं.
प्रोग्राम का तीसरा बटन अभ्यास शुरू करें है, जिसे क्लिक करने पर (अथवा फ़ाइल > लर्न टू टाइप मेन्यू से चालू करने पर) टाइपिंग ट्यूटर चालू हो जाता है.
sparsh typing tutor
अभ्यास को चरणों में आसान से कठिनतर बनाया गया है. पहले चरण में मध्यक्रम की कुंजियों को टाइप करना सिखाया गया है. अभ्यास पूरा होने पर आपको आपका स्कोर भी बताया जाता है.
sparsh report card
(हम्म... मेरी गति अच्छी है, और गलती - काम चलाऊ है. चलिए, ठीक है. कुछ और अभ्यास से गलतियों को सुधारते हैं, ताकि उसका स्कोर भी  अच्छा हो.)

शुरू में छोटे छोटे अक्षरों को, फिर मात्रा युक्त अक्षरों को - यानी बारहखड़ी को और फिर अक्षरों व संयुक्ताक्षरों को टाइप करना सिखाया जाता है. आखिरी अभ्यासों में लंबे वाक्यों को टाइप करना सिखाया जाता है.
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आप चाहें तो अभ्यास के समय कीबोर्ड दिखाएँ बटन को क्लिक कर इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड को स्क्रीन पर ला सकते हैं.
inscript keyboard
परंतु इस बात की अनुशंसा की जाती है कि टाइप का अभ्यास करते समय जितना संभव हो ऑनस्क्रीन कीबोर्ड लेआउट को स्क्रीन पर न रखें. एक बार नजर मार कर लेआउट को याद रख कीबोर्ड लेआउट विंडो बंद कर अभ्यास करें.
इस शानदार प्रोग्राम के लिए बालेंदु दाधीच जी को धन्यवाद.
इस मुफ़्त  प्रोग्राम को आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं -

http://balendu.com/labs/sparsh/

याद रखें कि यदि आपके कंप्यूटर में पहले से ही माइक्रोसॉफ़्ट .net 4 का संस्करण स्थापित है, तो स्पर्श का संस्करण 1 (4 मेबा आकार) डाउनलोड करें अन्यथा .net4 युक्त संस्करण 2 (50 मेबा से अधिक आकार) डाउनलोड कर संस्थापित करें.













tata sky hd plus

जब शहर की सड़कों पर खुदाई की मार पड़ी तो एंटरटेनमेंट का बाप माईवे आईपीटीवी (माईवे आईपीटीवी की एक विस्तृत समीक्षा यहाँ भी देखें) हर पंद्रह दिनों में लंबे समय के लिए बिला-नागा बंद होने लगा, और साथ ही साथ इसमें एचडी (हाई-डेफ़िनिशन) की संभावना दूर-2 तक दिखाई नहीं दी तो फिर तो विकल्पों की तलाश लाजिमी ही थी.

अब सवाल ये था कि उपलब्ध डीटीएच सेवाओं में से किसे लिया जाए, जिसमें एचडी की भी सुविधा हो और रेकार्डिंग की भी. एयरटेल से अपनी जीभ जला चुका था, लिहाजा वो तो विकल्पों में से पहले ही आउट था.

रिलायंस डीटीएच में 250 से भी ज्यादा चैनल एचडी जैसी (कृपया जोर से ध्यान दें, जैसी शब्द पर) क्वालिटी में उपलब्ध है. मगर यह एचडी जैसी क्वालिटी फुल एचडी नहीं है, महज अपस्केल्ड क्वालिटी है. और, साथ ही इसकी साइट पर कहीं भी होमथियेटर/डीटीएस की  5.1 या 7.1 सराउंड साउंड सुविधा के बारे में दावा नहीं किया गया है अतः यह भी विकल्पों से बाहर हो गया.

जीटीवी के प्लेटफ़ॉर्म में भी 30 से अधिक चैनल एचडी क्वालिटी में देने का वादा किया जाता है, मगर आज की स्थिति में उसमें भी कुछेक चैनलों को छोड़कर बाकी सभी अपस्केल्ड ही हैं - ट्रू एचडी / फुल एचडी  नहीं.

टाटा स्काई में वैसे तो सिर्फ 8 एचडी चैनल हैं, मगर फ़ालतू का कन्फ़्यूजिंग दावा नहीं किया गया है. इसमें 7.1 सराउंड साउंड तक की क्षमता का समर्थन है तथा रेकार्डिंग के लिए 500 जीबी जगह के साथ साथ सीरियल रेकार्डिंग व मोबाइल के जरिए रिमोट रेकार्डिंग की भी सुविधा है. साथ ही बैकग्राउण्ड रेकार्डिंग और लाइव चैनल को पॉज करने की भी सुविधा साथ साथ है. इस लिहाज से यह एक बेहतर चुनाव है.

तो, यदि आप अपने नए फुल एचडी युक्त एलसीडी/प्लाज्मा टीवी या कंप्यूटर मॉनीटर (मैंने अपने सेमसुंग सिंक मास्टर पी 2370एमएस में इसे लगाया है) में एचडी डीटीएच लगवाना चाहते हैं तो टाटा स्काई प्लस एचडी एक उत्तम विकल्प होगा.

इस कनेक्शन के साथ बस एक समस्या है कि आपको सिर्फ एचडीएमआई केबल ही मिलता है और आपको सेट टॉप बॉक्स से अपने सराउंड  साउंड सिस्टम को जोड़ने के लिए कोएक्सियल अथवा ऑप्टिकल केबल बाजार से खरीदना होगा. बाजार में ये 50-100 रुपए में ही मिल जाते हैं, मगर चूंकि ये ज्यादा प्रचलित नहीं हैं अतः थोड़ी खोजबीन करनी होगी. 5.1 अथवा 7.1 सराउंड प्रभाव के लिए ऑप्टिकल केबल ज्यादा उपयुक्त होता है. टाटा स्काई मार्केटिंग विभाग ने भले ही यह केबल नहीं देकर थोड़ी सी बचत कर ली हो, मगर यह एक निहायत ही घटिया किस्म की बचत है. बल्कि टाटा स्काई एचडी प्लस की मार्केटिंग करने वालों को तो इसे प्लस पाइंट बता कर व इसकी मार्केटिंग करनी चाहिए ताकि यदि घर में पहले से नहीं हो तो आदमी केबल देखकर ही 5.1/7.1 साउंड सिस्टम ले आए!

 

नेशनल जियोग्राफ़िक पर हाईडेफ़िनिशन में कीट-पतंगों को देखना एक रोचक अनुभव रहा. साथ ही, स्टार गोल्ड पर कुछ हिंदी फ़िल्मों (जैसे कि बॉलीवुड की अलादीन) को डॉल्बी डिजिटल 5.1 सराउंड साउंड (फ़िलिप्स एचटीएस 3578) के साथ, बिना किसी विज्ञापन (हाल-फिल-हाल?) के देखना भी अलग किस्म का अनुभव रहा (क्योंकि कोई भी टॉकीज चाहे वो कितना ही डीटीएस सर्टिफ़ाइल मल्टीप्लैक्स क्यों न हो, आवाज तो सिरदर्द पैदा करने लायक कानफ़ोड़ू ही होता है).

पका ब्लॉग आपके व्यक्तित्व का दर्पण है. परंतु क्या आपने कभी इस दर्पण में झांका भी है?

यदि नहीं, तो यही उपयुक्त समय है. और, आपकी सुविधा के लिए इंटरनेट पर तो व्यक्तित्व-दर्शना एनालाइजर प्रोग्राम “टाइपएलाइजर” ( http://www.typealyzer.com/?lang=en ) भी है, जिसमें आप अपने ब्लॉग का यूआरएल भरकर अपने व्यक्तित्व का सही सही अंदाजा लगा सकते हैं. और उस फूल कर कुप्पा हुए व्यक्तित्व (या इसके उलट) के भ्रमजाल से बाहर आ सकते हैं जो आपके पाठक या टिप्पणीकर्ता – आपके ब्लॉग पोस्टों की झूठी वाह! वाही! कर (या इसके उलट) आपको प्रदान किए हुए होते हैं.

तो, मैंने भी अपने ब्लॉग के यूआरएल को इस व्यक्तित्व दर्शना प्रोग्राम में भरा. और ये लो! एक क्लिक करते ही मेरे व्यक्तित्व की बाल की खाल हाजिर हो गई –

“The charming and trend savvy type. They are especially attuned to the big picture and anticipate trends. They often have sophisticated language skills and come across as witty and social. At the end of the day, however, they are pragmatic decision makers and have a good analytical ability.

They enjoy work that lets them use their cleverness, great communication skills and knack for new exciting ventures. They have to look out not to become quitters, since they easily get bored when the creative exciting start-up phase is over.”

और इसने मेरी पोस्टों के आधार पर मेरे मन-मस्तिष्क का ग्राफ़िकल एनॉलिसिस का चार्ट भी कुछ यूँ पेश किया –

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फूल कर कुप्पा होने वाला व्यक्तित्व एनॉलिसिस? लगता तो ऐसा ही है.

अब आपकी बारी है. आपका व्यक्तित्व, आपके ब्लॉग यूआरएल के हिसाब से कैसा है?

अभी पता लगाएँ – यहाँ जाएँ - http://www.typealyzer.com/?lang=en

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खास टिप – अपने ब्लॉग यूआरएल का एनालिसिस सिर्फ एक बार ही करें. दोबारा-तिबारा करने पर आपके व्यक्तित्व एनालिसिस की दुर्दशा होने की जिम्मेदारी इस प्रोग्राम की नहीं है!

robb report by invitation only (Custom)

और, यदि आप इस पोस्ट को पढ़ पा रहे हैं तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आप भी आमंत्रितों में से एक हैं.

यह क्या? यह तो नया ट्रैंड आ गया है. सिर्फ आमंत्रितों के लिए. कुछ दिन पहले नए बन रहे एक हाउसिंग कॉम्प्लैक्स का होर्डिंग देखा. शानदार कैंपस. शानदार आर्किटेक्चर और फ़ाइवस्टार सुविधाएँ. परंतु सिर्फ आमंत्रितों के लिए. अब ऐसी जगह में रहने के लिए खरीदना तो दूर की बात, खरीदने का सपना भी मैं नहीं देख सकता क्योंकि मेरे पास आमंत्रण नहीं है.

बहुत पहले एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था का सदस्य बना था. वह संस्था भी सिर्फ और सिर्फ आमंत्रितों को ही सदस्य बनाती है - हर किसी ऐरे गैरे को सदस्य नहीं बनाती. मैं भी सगर्व आमंत्रित सदस्य बना था. परंतु आमंत्रित सदस्यों वाली संस्था में चलने वाली घोर लेटलतीफी और दीगर बातों के चलते जल्द ही मैंने अपने आपको उनके बीच 'अनामंत्रित किस्म' का पाया, और बाहर हो लिया.

robb report by invitation only 2 (Custom)

अभी एक पत्रिका - रॉब रिपोर्ट का विज्ञापन पढ़ा. पत्रिका सिर्फ आमंत्रितों को उपलब्ध होती है. अब तक मुझे इसका आमंत्रण नहीं मिला है. तो इसका सीधा सा अर्थ है कि ये विरल और दुर्लभ पत्रिका मेरे लिए नहीं है. हो सकता है आप पाठकों में से किसी को आमंत्रण मिला हो या इस पत्रिका के आमंत्रित सदस्य हों. तो कृपया हमारे ज्ञान में वृद्धि करें कि आमंत्रण आपको कैसे किस तरह मिला और आमंत्रण हासिल करने के लिए आपने कैसे व किस तरह पापड़ बेले या कौन से हथकंडे अपनाए. वैसे बात दोनों एक ही है, बस पापड़ बेलने व हथकंडे अपनाने में नजरिए - नजरिये में बाल बराबर फर्क है.

इस पत्रिका को लेकर मुझे कुछ उल्टे सीधे विचार भी आ रहे हैं. अब जब ये पत्रिका सिर्फ आमंत्रितों के लिए है तो जब आप इस पत्रिका को किसी आम-व-खास के हाथ या घर में कॉफ़ी टेबल पर देखेंगे तो आपके मन में फ्रस्टेशन उत्पन्न होगा कि देखो अगला तो आमंत्रित है और इधर देखो हमारी कोई पूछ परख ही नहीं. फिर, जो प्रकाशन कंपनी इस पत्रिका को सिर्फ और सिर्फ आमंत्रितों को बांट रही है तो क्या आमंत्रित इसे अपने बीवी-बच्चों या मित्र मंडली से भी दूर रखेगा कि आम जनता से भी दूर रखेगा? क्योंकि यदि वो इन सबको पढ़ने - देखने के लिए देने लगेगा तो फिर सिर्फ आमंत्रितों के लिए वाली बात कहाँ रह जाएगी.

और, जब एक बार पढ़ - देख लेने के बाद जब पत्रिका रद्दी हो जाएगी तो क्या रद्दी वाले को इसे नहीं बेचना है? सिर्फ आमंत्रितों के लिेए उपलब्ध पत्रिका को रद्दी में बेचकर क्या उसका लेवल डाउन करना है? प्रकाशन कंपनी ने अपने विज्ञापन में तो ये बात नहीं बताई है, मगर इस पहलू पर जरूर उसने ध्यान दिया होगा और आमंत्रितों से यह बाण्ड जरूर भरवाया होगा कि वो इस पत्रिका को रद्दी में कभी नहीं बेचेगा, अपने बीवी-बच्चों, मित्रों को नहीं देगा (क्योंकि वे आमंत्रित नहीं हैं,) और आम पब्लिक को तो दूर से भी देखने नहीं देगा.

बहुत पहले, जीमेल खाता खोलने के लिए आमंत्रण की दरकार होती थी. अभी भी यदा कदा किसी किसी नई नवेली इंटरनेट सेवा के लिए इस तरह के टोटके अपनाए जाते हैं. तो, जब जीमेल के लिए आमंत्रण जरूरी होता था, तब जिनके ईमेल पते जीमेल-धारी होते थे वे बड़े विशिष्ट ईमेल पते होते थे. परंतु शुक्र है, यह विशिष्टता जल्द ही खत्म हो गई, और जीमेल सभी के लिए उपलब्ध हो गया.

पर, ये रॉब रिपोर्ट?

क्या आप आमंत्रितों में से हैं? मैं तो नहीं हूं, और न ही आमंत्रण चाहता हूँ.. (अंगूर खट्टे हैं?!)

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नई इंटरनेट प्रोटोकॉल प्रणाली से इंटरनेट के जरिए विश्व के तमाम उपकरण - जी हाँ, आपका रेडियो, फ्रिज, टीवी, ब्रेड टोस्टर यहाँ तक कि आपके कमरे में लगा एसी भी अपने विशिष्ट पते के साथ जुड़ सकता है. और, बहुत संभव है कि मनुष्य की सभ्यता के जारी रहते तक आईपी पतों की कमी नहीं पड़ने वाली.

इस नई प्रणाली की आरंभिक जाँच पड़ताल गूगल द्वारा विश्व IPv6 दिवस, 8 जून से शुरू होने जा रही है. तमाम और भी उपक्रम अपने अपने स्तर पर इसकी जाँच परख कर इसका प्रयोग प्रारंभ करने में लगे हुए हैं.

परंतु इससे पहले आप अपनी पड़ताल कर लें कि क्या आप तैयार हैं?

इसके लिए इस लिंक http://ipv6test.google.com/ पर जाएँ.

यदि नीचे दिया स्क्रीनशॉट जैसा कुछ आपके ब्राउज़र में दिखता है, तब तो आप तैयार हैं, अन्यथा नहीं.

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यदि आप तैयार हैं तो बधाई! अन्यथा, अपने सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए बाजार की ओर, भले ही इसकी अभी इतनी इमर्जेंसी न हो, दौड़ लगाने को तैयार रहें.

बाबा रामदेव गिरफ्तार baba ramdeo arrested

घूसखोरों और भ्रष्टाचारियों में हर्षोल्लास - एक और खबर.

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व्यंज़ल

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मेरा देश यारों देखो ऐसे गिरफ़्तार हो गया
भ्रष्टाचार के हाथों ईमान गिरफ़्तार हो गया

 

कौन भारतीय नेता नहीं है भ्रष्टाचारियों में
इस सवाल पर हर जवाब गिरफ़्तार हो गया

 

कोशिशें तो की थी वैसे मैंने जमाने भर की
भूली बिसरी यादों में मगर गिरफ़्तार हो गया

 

वक्त की बात है ये एक है और वो एक था
वक्त के हाथों मैं यूँ ही गिरफ़्तार हो गया

 

ले के तो गया था रवि भी भाले बरछे तीर
यार की गली में कैसे गिरफ़्तार हो गया

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कुछ अर्थ दे रहा हूं -

real beauty

भारत में -

  • पैसा खिलाने के बाद, किसी का कोई काम सचमुच में हो जाता है.
  • घोर लालफीताशाही के बाद भी कोई प्रोजेक्ट चार के बजाय चौबीस महीनों में सही, जैसे तैसे पूरा तो हो जाता है.
  • कोई अन्ना पैदा हो जाता है.
  • जाम में फंसने के बाद भी जब कोई काम पर समय पर पहुँच जाता है.
  • गर्मी की रातों में, किसी रात, रातभर बिजली गोल नहीं होती.
  • नल में किसी दिन बढ़िया प्रेशर से पांच मिनट ज्यादा पानी आ जाता है.
  • जरूरी समय में किसी नेटवर्क पर किया गया किसी का कॉल ड्रॉप नहीं होता.
  • आपका वायर्ड/वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन पूरी रफ़्तार और गति से सप्ताह भर बढ़िया चल जाता है.
  • कहीं जाने-आने के लिए रेल में आरक्षण आसानी से मिल जाता है.
  • एयरपोर्ट पर सिक्यूरिटी चेक पाइंट पर आपका मुस्कुराहटों से स्वागत किया जाता है.
  • किसी प्रॉडक्ट पर बिक्री उपरांत सर्विस भी शानदार मिल जाती है.
  • ट्रैफिक नहीं होने पर भी ऑटो/मिनिबस लालबत्ती जंप नहीं करते, और सिगनल हरा होने का इंतजार करते हैं.
  • किसी सरकारी ऑफिस में कोई बिल जमा करते समय बिना किसी हील-हुज्जत के, आपको पूरा चिल्लर लौटा दिया जाता है.
  • किसी सप्ताह, अखबार में सप्ताह भर  भ्रष्टाचार संबंधी खबर नहीं आती.
  • किसी माह, महीने भर पेट्रोल के दाम बढ़ने की खबर नहीं आती.
  • ... इत्यादि.

 

आपके अपने भी अर्थ होंगे, परिभाषाएँ होंगी - वास्तविक सुंदरता के. हमें भी बताएंगे जरा?

 

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इस प्रविष्टि को इंडीब्लॉगर.इन द्वारा प्रायोजित - The Yahoo Dove Real Beauty Contest के लिए विशेष तौर पर प्रकाशित किया गया. इसमें आप भी भाग ले सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें.

आप चाहें तो इंडीब्लॉगर पर इस प्रविष्टि को प्रमोट भी कर सकते हैं.

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