टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

February 2011

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वैसे तो अब हर किस्म के हिंदी फ़ॉन्टों को यूनिकोड में तथा वापस यूनिकोड से पुराने हिंदी फ़ॉन्टों में तथा उनमें भी वापस आपस में परिवर्तन करने की बहुत सी सुविधाएँ आ गई हैं, और समय समय पर उनके बारे में बहुत सी जगहों पर लिखा भी गया है. मगर फिर भी अभी भी नए/पुराने प्रयोगकर्ताओं के सामने नित्य कुछ न कुछ दिक्कतें आती ही रहती हैं. यह प्रश्नोत्तरी (FAQ) इस समस्या का जेनुइन समाधान करने की कोशिश करेगी.

प्र. - क्या किसी भी हिंदी फ़ॉन्ट की सामग्री को शतप्रतिशत शुद्धता के साथ यूनिकोड में बदला जा सकता है?
उ. हाँ. डांगी सॉफ़्ट का प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक शत प्रतिशत शुद्धता के साथ 200 से अधिक हिंदी फ़ॉन्टों की सामग्री को यूनिकोड में बदल सकता है.
प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक के संबंध में अधिक जानकारी यहाँ से प्राप्त करें -
http://www.4shared.com/u/5IPlotQZ/DangiSoft_India.html

प्र. - क्या किसी 400 पेज के दस्तावेज (वर्ड डाक्यूमेंट) को एक ही बार में फ़ॉन्ट परिवर्तित किया जा सकता है?
उ. - हाँ. सिल कन्वर्टर के बल्क वर्ड कन्वर्टर के प्रयोग से यह किया जा सकता है. सिल कन्वर्टर के बारे में अधिक जानकारी यहाँ से प्राप्त करें:
http://raviratlami.blogspot.com/2010/05/blog-post_26.html

प्र. - क्या एक्सेल फ़ाइल का फ़ॉन्ट परिवर्तित किया जा सकता है?
उ. - हाँ. सिल कन्वर्टर के जरिए यह किया जा सकता है. सिल कन्वर्टर के बारे में अधिक जानकारी यहाँ से प्राप्त करें:
http://raviratlami.blogspot.com/2010/05/blog-post_26.html

प्र. - क्या वर्ड डाक्यूमेंट की फ़ाइल की टैक्स्ट की फ़ॉन्ट फार्मेटिंग बनाए रखते हुए फ़ॉन्ट परिवर्तन किया जा सकता है? जैसे कि मेरे वर्ड डाक्यूमेंट में हिंदी अंग्रेजी शब्दों का मिश्रण है और मैटर भी हेडिंग, सब हेडिंग, फूटर इत्यादि समेत व रंगीन है.
उ. - हाँ. सिल कन्वर्टर के बल्क वर्ड कन्वर्टर के जरिए यह किया जा सकता है. अधिक  जानकारी के लिए ऊपर के प्रश्न में दिए गए लिंक पर जाएँ

प्र. - क्या पेजमेकर फ़ाइल की सामग्री का फ़ॉन्ट परिवर्तन किया जा सकता है?
उ. - हाँ. टैक्स्ट को कॉपी-पेस्ट कर या फ़ाइल को एचटीएमएल में एक्सपोर्ट कर उसे वर्ड के रूप में खोल कर दो चरणों में यह कार्य किया जा सकता है.

प्र. - क्या हिंदी पीडीएफ़ फ़ाइल की सामग्री का फ़ॉन्ट परिवर्तन किया जा सकता है?
उ. - हाँ भी और नहीं भी. पीडीएफ़ फ़ाइल कई तरीकों से बनाई जाती है. यदि स्कैन कर चित्र के रूप में पीडीएफ बनाया गया है तो नहीं. यदि टैक्स्ट मैटर को प्रिंट कर पीडीएफ़ बनाया गया है तो हाँ. वह भी यदि पीडीएफ में पासवर्ड डालकर उसे एनक्रिप्ट नहीं किया गया हो या पासवर्ड प्राप्त हो तब. यदि पीडीएफ़ का टैक्स्ट एक्स्ट्रैक्ट हो जाता है (सेव एज टैक्स्ट के रूप में) तो फ़ॉन्ट परिवर्तित हो सकता है. हिंदी की पीडीएफ़ फ़ाइल किस फ़ॉन्ट में है यह जानने के लिए पीडीएफ के भीतर दस्तावेज की फ़ॉन्ट प्रापर्टी देखें.

प्र. - क्या हिंदी / यूनिकोड हिंदी मैटर को रोमन (अंग्रेज़ी) अथवा दूसरे भारतीय भाषाओं की लिपि में परिवर्तित किया जा सकता है?
उ. - हाँ. सिल कन्वर्टर के जरिए यह किया जा सकता है. अलबत्ता आपको यह कार्य कई चरणों में करना पड़ सकता है.

प्र. - मेरे पास एक पेज का छोटा सा मैटर है. क्या उसे परिवर्तित करने का त्वरित, फोकट का ऑनलाइन जुगाड़ है?
उ. - हाँ. है. वैसे तो बहुत से हैं. तकनीकी हिंदी खंड में दर्जनों हिंदी फ़ॉन्ट के मैटर को यूनिकोड में और वापस यूनिकोड से पुराने फ़ॉन्ट में तत्काल बदलने का ऑनलाइन (फाइल सेव कर रख लें तो ऑफलाइन भी) मुफ़्त जुगाड़ है. लिंक यह है -


http://raviratlami.blogspot.com/2010/10/blog-post_22.html

प्र. - आपकी निगाह में सबसे बढ़िया फ़ॉन्ट परिवर्तक कौन सा है?
उ. - यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी आवश्यकता कैसी है. यदि आप बड़ी फ़ाइलों में काम करते हैं, फार्मेटिंग बचाए रखना है, मैटर हिंदी-अंग्रेज़ी मिक्स है तो सिल कन्वर्टर का विकल्प नहीं. यदि आप बहुत से विचित्र और अजनबी किस्म के हिंदीं फ़ॉन्टों में कन्वर्शन करना चाहते हों और साथ ही यदि शुद्धता आपकी प्रथम आवश्यकता हो तो डांगी सॉफ़्ट का प्रखर देवनागरी परिवर्तक उत्तम है. यदि आपको छोटे मोटे फ़ॉन्ट कन्वर्शन कार्य यदा कदा निपटाने हों तो तकनीकी हिंदी खंड में उपलब्ध फ़ाइल कन्वर्टरों का कोई तोड़ नहीं, बशर्तें कि आपके फ़ॉन्ट कन्वर्टर वहाँ हो.

प्र. - क्या फ़ॉन्ट कन्वर्टर के लिए मुझे कोई राशि देनी होगी?
उ. - नहीं. यदि आप सिल कन्वर्टर या तकनीकी हिंदी खंड के कन्वर्टर प्रयोग करते हैं तो नहीं. ये सभी मुफ्त फ़ॉन्ट परिवर्तक हैं. डांगी साफ़्ट प्रखर देवनागरी परिवर्तक हेतु आपको भुगतान करना होगा जो (संभवतः अभी) 1 लाइसेंस हेतु 1500 रुपए (लगभग 35 यूएसए डालर) है.

प्र. - क्या यूनिकोड से पुराने हिंदी फ़ॉन्ट जैसे कि कृतिदेव या चाणक्य में परिवर्तित  किया जा सकता है?
उ. - हाँ. सिल कन्वर्टर, और तकनीकी हिंदी खंड की फ़ाइलों से कुछ प्रचलित फ़ॉन्टों में कन्वर्ट किया जा सकता है. डांगी सॉफ़्ट का एक अलग किस्म का फ़ॉन्ट कन्वर्टर खास यूनिकोड पाठ को पेजमेकर फ्रेंडली फ़ॉन्टों में बदलने के लिए भी उपलब्ध है.
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यदि अब भी आपकी  कोई समस्या यहाँ अनुत्तरित रह गई  है तो निसंकोच पूछें.

virtual credit card

अब आपकी ऑनलाइन शॉपिंग संबंधी क्रेडिट कार्ड से होने वाले खतरों को दूर करने का पक्का समाधान आ गया है। वर्चुअल क्रेडिट कार्डों के जरिए।

क्या हैं वर्चुअल क्रेडिट कार्ड

वैसे तो वर्चुअल क्रेडिट कार्ड का प्रयोग पिछले सात-आठ वर्षों से जारी है, मगर इसके प्रयोग में झंझट अधिक होने के कारण यह प्रयोक्ताओं में कभी भी लोकप्रिय नहीं रहा। साथ ही इक्का-दुक्का बैंकों ने ही इसे लागू किया, मगर जब क्रेडिट कार्डों के ऑनलाइन हैकिंग और फ्रॉड बढ़ने लगे, तो अतिरिक्त सुरक्षा विकल्प के रूप में वर्चुअल क्रेडिट कार्डों का प्रचलन अब बढ़ने लगा है।

जैसा कि नाम से जाहिर है, इस कार्ड का भौतिक अस्तित्व नहीं होता। इसके लिए आपको अपने वास्तविक क्रेडिट कार्ड या बैंक खाते को जोड़कर एक कंप्यूटर अनुप्रयोग के जरिए अथवा अपने खाते में ऑनलाइन लॉगिन कर वर्चुअल क्रेडिट कार्ड बनाना होता है। इस तरह से वर्चुअल क्रेडिट कार्ड का एक नंबर व पासवर्ड जेनरेट होता है जिसे आप इंटरनेट पर किसी भी किस्म की ऑनलाइन शॉपिंग या बिल भुगतान के लिए कर सकते हैं। वर्चुअल क्रेडिट कार्ड की अन्य खूबियां भी होती हैं, जैसे कि इन्हें एक बार, सीमित अधिकतम धन भुगतान अथवा सीमित अवधि के लिए जेनरेट किया जा सकता है ताकि कुछ समय बाद या एक बार प्रयोग के बाद ये स्वत: ही काम के न रहें। इस तरह से प्रयोक्ता को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया होती है।

>>>> आगे पूरा विस्तृत आलेख यहाँ पढ़ें.

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मेरीधुन की याद है आपको? यदि नहीं तो यहाँ जाकर याद कर लें.

गीतों को व्यक्तिगत रूप-रंग देने वाली सेवा ने अब अपने कदम और फैला लिए हैं और अब हिंदी के अलावा कन्नड़, मराठी और तमिल भाषा में भी पर्सनलाइज़्ड सांग तैयार किए जा सकते हैं.

मेरीधुन की सेवा में एक और अतिरिक्त खूबी जोड़ी गई है. अब आप मेरीधुन के जरिए प्रति सप्ताह एक गीत मुफ़्त में पर्सनलाइज़्ड कर सकते हैं. अलबत्ता वे जो गीत आपके लिए प्रस्तुत करते हैं उसे ही आप व्यक्तिगत बनवा सकते हैं. दूसरे और भी सैकड़ों गीतों में से चुनकर पर्सनलाइज़्ड करवाने के लिए आपको पैसे खर्चने होंगे. फिर भी, आप देखेंगे कि कुछेक सप्ताह में ही आपके पास व्यक्तिगत बनाए गए मुफ़्त के गीतों का पूरा एक संग्रह तैयार हो गया है!

मैंने पिछले कई हफ़्तों के मुफ़्त गीत बनवा लिए हैं. ताज़ा ताज़ा गीत ये है -

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हो…  रेखा  को देखा तो ऐसा लगा
  रेखा  को देखा तो ऐसा लगा
जैसे खिलता गुलाब
जैसे शायर का ख्वाब
जैसे उजली किरण
जैसे वन में हिरण
जैसे चाँदनी रात
जैसे नगमे की बात
जैसे मंदिर में हो एक जलता दिया
हो....  रेखा   को देखा तो ऐसा लगा
हो....   रेखा   को देखा तो ऐसा लगा
 रेखा  को देखा तो ऐसा लगा
जैसे सुबहों का रूप
जैसे सर्दी की धूप
जैसे वीणा की तान
जैसे रंगों की जान
जैसे बलखाए बेल
जैसे लहरों का खेल
जैसे खुश्बू लिए आए ठंडी हवा
हो.... रेखा  को देखा तो ऐसा लगा
हो....   रेखा   को देखा तो ऐसा लगा
 रेखा  को देखा तो ऐसा लगा
जैसे नाचता मोर
जैसे रेशम की डोर
जैसे परियों का राग
जैसे संदल की आग
जैसे सोलह सिंगार
जैसे रस्की फुहार
जैसे आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता नशा
हो.... रेखा  को देखा तो ऐसा लगा
  रेखा   को देखा तो ऐसा लगा

--MALE--
Ho…  rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
  rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
Jaise Khilta Gulaab
Jaise Shaayar Ka Khwaab
Jaise Ujli Kiran
Jaise Van Mein Hiran
Jaise Chaandni Raat
Jaise Naghme Ki Baat
Jaise Mandir Mein Ho Ek Jalta Diya
Ho....   rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
Ho....   rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
 rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
Jaise Subahon Ka Roop
Jaise Sardi Ki Dhoop
Jaise Veena Ki Taan
Jaise Rangon Ki Jaan
Jaise Balkhaaye Bel
Jaise Lehron Ka Khel
Jaise Khushboo Liye Aaye Thandi Hava
Ho....  rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
Ho....   rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
 rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
Jaise Naachta Mor
Jaise Resham Ki Dor
Jaise Pariyon Ka Raag
Jaise Sangdal Ki Aag
Jaise Sola Sighaar
Jaise Raski Fuhaar
Jaise Aahista Aahista Badhta Nasha
Ho....  rekha  Ko Dekha To Aisa Laga
  rekha  Ko Dekha To Aisa Laga

इस व्यक्तिगत बनाए गए गीत को आप यहाँ जाकर सुन सकते हैं -

 

http://www.meridhun.com/forms/general/songdownload.aspx?userid=23743&ordeDetailID=58435

 

अब, आप ये मत पूछिएगा कि ये रेखा कौन है?

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आपके जीमेल खाते में कितने ईमेल हैं? सौ? हजार? लाख?

मेरे जीमेल खाते में करोड़ों ईमेल हैं.

जी हाँ, करोड़ों. ऑफ़ीशियल.

एक समय खबर आई थी कि माइक्रोसॉफ़्ट के प्रमुख बिल गेट्स के ईमेल खाते में दुनिया में सर्वाधिक ईमेल आते हैं पर उनमें से अधिकतर स्पैम होते हैं. परंतु उनके खाते में भी करोड़ों ईमेल नहीं होते होंगे.

मगर मेरे खाते में करोड़ों ईमेल हैं.

आपको विश्वास न हो तो स्क्रीनशॉट दिखाता हूं -

1 crore gmail email

है न सही? करोड़ों ईमेल!

जब मैं अपने स्वयं के जीमेल खाते में एकत्र ईमेल में  खोज-बीन कर रहा था तो ये दिखा.

करोड़ों का - मैं चकराया. और अपने इनबाक्स पर नजर डाली -

1 crore gmail email 2

वहाँ आंकड़ा दुरुस्त था. चलिए, थोड़ा सुकून मिला. नहीं तो करोड़ों ईमेल देख कर तो मेरे हाथ-पांव फूल गए थे. करोड़ों रूपए होते तो कहीं कोई पूरा का पूरा आईलैण्ड खरीदकर वहाँ जिंदगी बिताने चला जाता. मगर करोड़ों ईमेल? कैसे मैनेज करता उन्हें मैं?

धन्यवाद गूगल. आपने अपने हिंदी प्रयोक्ताओं को करोड़पति ईमेलिया बना दिया. जब आप जीमेल के हिन्दी इंटरफेस का प्रयोग करते हैं तब ये नजर आता है. शायद ये हिन्दी अनुवाद का करोड़गुना घटिया अनुवाद है!

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व्यक्ति आमतौर पर स्प्लिट पर्सनलिटी का साइलेंट शिकार होता है - उसे पता नहीं होता कि उसके कई कई मुखौटे होते हैं. वो घर पर कुछ और मुखौटा धारण करता है तो बाहर कुछ और. ऑफ़िस में कुछ और, सड़क में कुछ और. ड्राइंग रूम में अलग तो बाथरूम में अलग.

पेश हैं कुछ मुखौटे - क्या इनमें से कुछ एक को आप पहचान सकते हैं जो आपके भीतर बाहर कहीं छुपा हुआ होता है और जो जब-तब यदा-कदा बाहर निकल आता है?

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कुछ और -

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तो अंततः माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस हिन्दी भी हम सबके (भारतीयों के लिए हाल ही में, अमरीकी/यूरोपीय लोगों के प्रयोग हेतु कुछ समय पहले से) लिए ऑनलाइन मुफ़्त प्रयोग के लिए जारी कर ही दिया गया. क्लाउड कंप्यूटिंग के जमाने में जहाँ गूगल डॉक्स, जोहो इत्यादि ऑफ़िस सूट एक जमाने से हिंदी प्रयोक्ताओं को इंटरनेट पर मुफ़्त उपलब्ध थे, माइक्रोसॉफ़्ट का ऑफ़िस सूट ऑफ़िस 2010 के साथ इंटरनेट पर ब्राउजर के जरिए काम के लिए उपलब्ध था. अब यदि आपके पास माइक्रोसॉफ़्ट का ऑफिस सूट 2010 नहीं भी है, तब भी आप माइक्रोसॉफ़्ट के लाइव एकाउन्ट के जरिए इसका लाभ ले सकते हैं.

मैंने कुछ जांच परख किया तो पाया कि इसमें हिन्दी समेत कई भारतीय भाषाओं का बढ़िया समर्थन है. वह भी बढ़िया इंटरफेस समेत.

हिन्दी की वर्तनी जाँच सुविधा उपलब्ध है तथा रीयल टाइम वर्तनी जाँच सुविधा (टाइप करते समय वर्तनी जाँच की सुविधा) भी उपलब्ध है.

आप वर्ड, पावरपाइंट, एक्सेल तथा वन-नोट में नए दस्तावेज बना सकते हैं तथा इसे ऑनलाइन साझा कर सकते हैं.

हालांकि आनलाइन सुविधा में बहुत से उन्नत फंक्शन अनुपलब्ध रहेंगे, मगर जरूरी व बेहद काम के मूल फंक्शन तो उपलब्ध हैं ही जिनसे आप बढ़िया दस्तावेज तैयार कर सकते हैं.

कुछ स्क्रीनशॉट -

microsoft web app

(अंग्रेज़ी इंटरफेस युक्त ऑफ़िस वेब एप - हिंदी वर्तनी जाँच सुविधा युक्त)

 

microsoft web app hindi

(माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस वेब एप का इंटरफेस आप हिंदी में सेट कर सकते हैं. अन्य भारतीय भाषाएँ जैसे कि गुजराती, तमिल, मराठी इत्यादि भी उपलब्ध.)

 

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(बहुभाषी माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस वेब एप)

 

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(माइक्रोसॉफ़्ट वेब एप से आप वर्ड, एक्सेल, पावरपाइंट तथा वन-नोट दस्तावेज़ बना सकते हैं. लाइव खाते में लॉगिन करने पर ऑफ़िस में क्लिक करने पर यह मेन्यू प्रदर्शित होता है)

 

माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस वेब एप पर तैयार किया मेरा दो लाइन का वर्ड दस्तावेज़ स्काईड्राइव पर यहाँ देखें. तथा यहीं से आप अपने लाइव खाते से नए दस्तावेज तैयार करने हेतु लॉगिन कर सकते हैं.

जो लोग माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस का प्रयोग करते रहे हैं उनके लिए, तथा एक बढ़िया हिन्दी वर्तनी जाँचक सुविधा के लिए यह वेब एप बढ़िया है. अलबत्ता अन्य सुविधाओं, फंक्शनलिटी, तेजी, दस्तावेज़ फ़ॉर्मेट समर्थन इत्यादि के लिए गूगल डॉक्स वर्तमान में उपलब्ध बेहतर विकल्पों में से एक है.

हिंदी तकनीकी अनुवादों हेतु स्टाइल गाइड कहीं पर भी सार्वजनिक प्रयोग हेतु अब तक उपलब्ध नहीं था, जिसके अभाव में नए-पुराने सभी तरह के अनुवादकों को आमतौर पर समस्या आती रहती थी.

इस कमी को पूरा करने की एक शानदार कोशिश की है राजेश रंजन ने.

उन्होंने कंप्यूटर ट्रांसलेशन स्टाइल एंड कन्वेंशन गाइड फ़ॉर हिंदी नामक एक स्टाइल गाइड तैयार किया है जो तकनीकी - खास तौर पर आईटी-कंप्यूटर विषय के तकनीकी अनुवादों में अच्छी खासी सहायक होगी.

गाइड को वे आगे परिष्कृत भी करेंगे. इस हेतु आप चाहें तो अपने अमूल्य सुझाव उन्हें उनके ईमेल पते rajeshkajha एट yahoo.com पर प्रेषित कर सकते हैं.

गाइड को पीडीएफ ईबुक रूप में यहाँ नीचे एम्बेड विंडो में पढ़ सकते हैं अथवा डाउनलोड कर सकते हैं. चाहें तो इसे odt फार्मेट में डाउनलोड भी कर सकते हैं.

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टीवी पर रीयलिटी शो, डांस, ड्रामा, एक्शन, चहुँओर भ्रष्टाचार के सड़ियल समाचारों और मुन्नी-शीला जैसे गीत संगीत देखते देखते एक दिन वैराग्य-सा उत्पन्न हो गया तो सोचा कि चलो आज धार्मिक चैनलों का लाभ लिया जाए. कुछ पुण्य कमाया जाए. आखिर अपने अगले जन्म और मृत्यु के बाद के जीवन का उद्धार करने का भी तो कोई फर्ज बनता है ना!

अब जब बात अपने अगले जन्म और मृत्यु के बाद के जीवन के उद्धार की हो तो यूँ तो कई तौर तरीके हैं मगर सबसे बढ़िया और आसान तरीका आपका टीवी है और टीवी का रिमोट है. आपकी सेवा-सुविधा के लिए दर्जनों धार्मिक चैनल हैं. बस दोनों हाथ जोड़ कर भक्तिभाव से टीवी ऑन कीजिए, रिमोट के बटनों को धार्मिक चैनल के लिए दबाइए, और बस देखते सुनते बैठे रहिए.

मैंने अपने भीतर कुछ धार्मिक संस्कार लाने के लिए, नामानुरूप, संस्कार चैनल लगाया. एक स्वामी का प्रवचन चल रहा था. मनुष्य मात्र को वे तमाम दुखों-सुखों से ऊपर रहने का ज्ञान बांट रहे थे. माया-मोह से दूर रहने का सलाह दे रहे थे. दिमाग के किसी कोने में मेमोरी रीकाल हुआ तो याद आया कि स्वामी महोदय तो रेप केस में फंस चुके हैं और अभी जमानत पर चल रहे हैं. मगर महोदय का जनता को माया-मोह से ऊपर बने रहने का प्रवचन जारी है.

चैनल बदला. सोचा अभी तो और भी धार्मिक चैनल हैं, और भी धार्मिक साधु संत हैं. आस्था पर एक बापू जी का प्रवचन चल रहा था. मैंने अपनी मेमोरी को जबरन दबाया जो बारंबार यह बताने की कोशिश कर रही थी कि इन बापू जी के आश्रम में बच्चों की हत्याएँ हुई हैं. बापू बड़े ही सम्मोहक आवाज और स्टाइल में प्रवचन दे रहे थे. आत्मा और परमात्मा की बातें बता रहे थे. गुरु के महत्व की बात कर रहे थे. जीवन को सफल बनाने के लिए, जीवन में सफलता पाने के लिए , अंधकार से प्रकाश की ओर जाने के लिए, गुरु की महिमा का बयान कर रहे थे. एक अदद गुरू की आवश्यकता प्रतिपादित कर रहे थे. सुनकर लगा कि अब तक का जीवन तो सारा पूरा असफल हो गया है. गुरु जो अब तक किसी को नहीं बनाया था. पिछले कुछ समय से किसी को जो कुछ गुरु अब तक मानता रहा था वो था गूगल जो मेरी अज्ञानता में प्रकाश कुछ कीवर्ड के सहारे सर्च करने के उपरांत डालता रहा था. मैं पूरी तैयारी में था कि आज बापू को गुरु महाराज बना ही लिया जाए कि इतने में ब्रेक बन गया और एक कमर्शियल आने लगा.

कमर्शियल था – राम रक्षा यंत्र का. वैसे तो कमर्शियलों में बहुत सी बातों को बढ़ा-चढ़ा कर बताया जाता है मगर किसी ने बताया था कि इन दिनों सरकार की विज्ञापन रेगुलेटरी बॉडी थोड़ी सक्रिय हुई है. तो लगा कि इस कमर्शियल पर थोड़ा-मोड़ा भरोसा तो कर ही सकते हैं. तो इस कमर्शियल में बताया गया कि राम रक्षा यंत्र को पहनने मात्र से ही व्यक्ति का जीवन सफल हो सकता है. वो जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो सकता है. सुख-समृद्धि मिल सकती है. आत्मा-परमात्मा से डायरेक्ट कनेक्शन यह राम रक्षा यंत्र करवाने में पूरी तरह सक्षम था.

मैंने कमर्शियल को धन्यवाद दिया कि उसने मेरे मन में गुरु बनाने के भाव को समाप्त कर दिया था. अब मुझे एक अदद गुरु नहीं, इस एक अदद राम रक्षा यंत्र की आवश्यकता थी. इसकी कीमत थी मात्र तीन हजार नौ सौ निन्यान्बे रुपए मात्र. निन्यानबे का फेर यहाँ भी था. चलिए, निन्यानबे रुपए तो गोलू की गुल्लक से निकल गए. बाकी का जुगाड़ जल्द से जल्द कर जीवन को सफल बना ही लिया जाए.

परंतु अभी चंद चैनल और शेष थे. शायद ये जीवन को और अधिक सफल बनाने में योगदान दें. रिमोट का बटन आगे दबाया तो श्रद्धा चैनल चला आया. धार्मिक चैनलों के साथ अच्छी बात ये है कि ये सब्सक्रिप्शन चैनल नहीं हैं, नहीं तो पता चले कि आप बड़ी श्रद्धा से श्रद्धा चैनल का लाभ लेने चलें तो पता चले कि इसका सब्सक्रिप्शन लेना होगा. ये अच्छी बात है कि तमाम जनता को उनके जीवन को सफल बनाने, उनका उद्धार करने ये चैनल पूरी भक्ति भाव से मुफ़्त, फ्री चैनलों के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं.

तो, श्रद्धा चैनल में मैंने देखा कि एक स्वामी बड़ी संख्या में मजमा लगाए लोगों को योग सिखा रहे हैं. उन्होंने बड़े विस्तार से बताया कि व्यक्ति का जीवन तभी सफल है जब वो योग को अपने नित्य जीवन में अपना ले. कोकाकोला को टायलेट साफ करने के लिए प्रयोग करे और हरिद्वार की खास कंपनी की बनी आयुर्वेदिक दवाई का प्रयोग करे. आह! मेरा तो योग के बगैर इहलोक ही असफल था, तो मैं परलोक की बात क्या खाक करता! तुरंत ही मन में मैंने प्रण किया कि कल से – क्योंकि आज तो मैं धार्मिक चैनलों को देखने का प्रण ले चुका था – योग को प्राणपण से अपनाऊंगा और अपना जीवन सफल करूंगा. और, अभी तो कुछ और धार्मिक चैनल बचे थे देखने में.

अगला चैनल था – गाड चैनल. ये तो साक्षात ईश्वरीय चैनल था. सूट-बूट में लकदक एक प्रवचनकर्ता ने बताया कि एक धार्मिक किताब के अध्याय 14 उप अध्याय 13 लाइन 12 में ईश्वर ने बताया है कि सफलता प्राप्त करने के लिए मनुष्य को विश्वास करना सीखना चाहिए. यदि उसे विश्वास हो कि सामने जो पहाड़ है वो राई बन जाए तो सचमुच में वो पहाड़ राई बन जाएगा. वाह! क्या अद्भुत बात बताई बंदे ने. अब तक का धार्मिक चैनलों से बटोरा ज्ञान तो कोरा बकवास था. मुझे बस विश्वास करना था कि मेरा जीवन सफल है. मेरा इहलोक सफल है. मेरा परलोक बहुत ही सुंदर है. बस. और फिर सब कुछ मेरे विश्वास के मुताबिक ही होगा. मैं अपने विश्वास को पुख्ता करने में जुट गया. अब कुछ और करने की जरूरत ही नहीं है.

अबकी मैंने टीवी का रिमोट बेतरतीबी से दबाया. एएक्सएन चैनल लगा. अब आप कहेंगे कि अभी तो और भी धार्मिक चैनल बचे हैं दर्शन लाभ लेने के लिए. पर, भाई, विश्वास नाम की कोई चीज होती है कि नहीं. मुझमें भरपूर विश्वास है. यकीन रखिए.

तो, एएक्सएन पर जैकी चैन की फ़िल्म आ रही थी. एक्शन अपने चरम पर था. मैं उसमें डूब गया. हर काम में डूब कर, उसे मन लगा कर करना चाहिए. किसी धार्मिक चैनल पर अभी अभी हाल ही में सुना था. उस पर अमल तो करना ही चाहिए. है न?

---

इंटरनेट तो वैसे भी कॉपी-पेस्ट मास्टरों की दुनिया है. आमतौर पर हर दूसरा बंदा नेट से माल मार कर इधर उधर उगलता, उलटी करता रहता है. मगर बात जब महारथी माइक्रोसॉफ़्ट के तथाकथित नए, शानदार सर्च इंजन बिंग की हो तो?

गूगल ने तमाम पुख्ता सबूतों के साथ माइक्रोसॉफ़्ट बिंग पर ये आरोप लगाया है कि बिंग गूगल के खोज परिणामों का जस का तस नक़ल कर रहा है!

एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए गूगल ने इसे कैसे सिद्ध किया ये देखें -

गूगल ने कुछ बहुत ही अजीब सर्च टर्म तैयार किए जैसे कि  - delhipublicschool40 chdjob और फिर इसके गूगल खोज परिणाम को जबरन एक फर्जी पेज में शामिल कर दिया - वेलकम टू क्लाइड फिंडले एरिया क्रेडिट यूनियन.

कुछ समय बाद बिंग में भी यही परिणाम दिखने लगा. जबकि खोजे जा रहे शब्द और खोज परिणाम का आपस में कोई लेना देना नहीं था. वो तो गूगल ने जबरदस्ती मैनुअल लिंकिंग कर दी थी जाँच-परख और स्टिंग ऑपरेशन हेतु. गूगल ब्लॉग में यह निष्कर्ष निकाला गया कि -

"...As we see it, this experiment confirms our suspicion that Bing is using some combination of:

or possibly some other means to send data to Bing on what people search for on Google and the Google search results they click. Those results from Google are then more likely to show up on Bing. Put another way, some Bing results increasingly look like an incomplete, stale version of Google results—a cheap imitation...."

और, वहीं पर ये भी लिखा है -

"..Even search results that we would consider mistakes of our algorithms started showing up on Bing...."

नीचे दिए गए चित्रों से आपको यह आसानी से समझ आ जाएगा -

delhi-google

 

delhi-bing

(चित्र साभार गूगल ब्लॉग.)

 

और, इस तरह से माइक्रोसॉफ़्ट की चोरी पकड़ी गई. रंगे हाथों!

सच है, नकल के लिए भी अकल चाहिए!

--

व्यंज़ल

--

नकल के लिए भी अकल चाहिए

जोकर को भी कोई शकल चाहिए

 

समझने को तैयार बैठी है अवाम

वृत्तांत मगर पूरी सकल चाहिए

 

बात को बिगाड़ें नहीं भीड़ बढ़ाकर

मुहब्बत में मामला  एकल चाहिए

 

असल पूरी तरह बेअसर है  इधर

यहाँ पर दरअसल नकल चाहिए

 

डिग्रियाँ चिपका ली हैं रवि ने भी

इल्म के लिए परंतु अकल चाहिए

---

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