आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 44

 

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

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हवा और सूरज

एक दिन हवा और सूरज में इस बात को लेकर नोकझोक हो गयी कि उनमें से कौन ज्यादा ताकतवर है। उन्होंने इस बात का फैसला एक प्रतियोगिता के जरिए करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह तय किया कि जो भी उस यात्री को अपना कोट उतारने को विवश कर देगा, वही ज्यादा ताकतवर कहलायेगा।

हवा ने कहा कि पहले वह प्रयास करेगी। इसके बाद हवा अपनी पूरी रफ्तार से बहने लगी। बादल उमड़ने लगे और यात्री को ऐसा प्रतीत हुआ जैसे बर्फ का तूफान आ गया हो। हवा जितनी तेज बहती जाती, वह यात्री अपना कोट उतनी ही मजबूती से अपने शरीर से जकड़े रहता।

इसके बाद सूरज की बारी आयी। अपनी पहली किरण से ही उसने घने बादलों और ठंड को दूर भगा दिया। यात्री को अचानक गर्मी महसूस हुयी। जैसे - जैसे सूरज गर्म होता गया, यात्री को गर्मी का अहसास होता गया और अंततः उसने गर्मी से छटपटाते हुए अपना कोट उतारकर जमीन पर फेंक दिया।

सूरज को इस प्रतियोगिता का विजेता घोषित कर दिया गया। वास्तविकता यह है कि प्रकृति की भयावह शक्तियों और खतरों की तुलना में सूरज की गुनगुनी धूप किसी भी व्यक्ति की बांछे खिला सकती है।

"शक्ति की तुलना में विनय का दर्ज़ा हमेशा ऊपर होता है।"

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चील और लोमड़ी

एक चील और लोमड़ी काफी लंबे अर्से से एक अच्छे पड़ोसी की तरह रहते चले आ रहे थे। चील का घोसला पेड़ के ऊपर स्थित था और लोमड़ी की माँद उसी पेड़ के नीचे।

एक दिन चील को अपने बच्चों का पेट भरने के लिए कोई भोजन नसीब नहीं हुआ। उसने यहाँ-वहाँ देखा तो उसे पता लगा कि लोमड़ी अपने घर पर नहीं है। वह झट से नीचे उतरी और लोमड़ी का एक बच्चा पंजे में दबाकर अपने घोसले में ले गयी। वह आश्वस्त थी कि उसके घोसले की ऊँचाई उसे लोमड़ी के प्रतिशोध से बचायेगी।

चील उस लोमड़ी के बच्चे को अपने भूखे बच्चों में बांटने ही वाली थी कि लोमड़ी अपनी माँद में लौटी और अपने बच्चे की सुरक्षित घर वापसी का याचना करने लगी। चील ने उसकी अनुनय-विनय पर कोई ध्यान नहीं दिया। लोमड़ी को जब अपने तमाम प्रयास व्यर्थ जाते दिखाई दिए, तब वह पड़ोस के एक किसान के खेत पर पहुँची। वह किसान खाना पका रहा था। लोमड़ी वहाँ से जलती हुई मशाल उठा लायी और पेड़ को आग लगा दी। अपने बच्चों और स्वयं के जीवन पर खतरा मंडराता देख चील ने लोमड़ी के बच्चे को सही सलामत वापस कर दिया।

"एक तानाशाह उन लोगों से कभी सुरक्षित नहीं होता

जिन पर वह तानाशाही करता है।"

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असली चमत्कार

एक स्वामी जी थे जिनके भक्तों की संख्या लाखों में थी. वे अपने प्रवचनों में मनुष्यों में मनुष्यत्व बचाए रखने की बातें अकसर किया करते थे.

एक बार एक अन्य स्वामी के भक्त उन्हें सुनने आए. प्रवचन के बीच में उन भक्त ने स्वामी जी का उपहास उड़ाते हुए कहा कि हमारे स्वामी तो नदी के एक किनारे खड़े होकर हाथों में ब्रश लेकर हवा में चित्र बनाते हैं तो वह नदी के दूसरे किनारे पर रखे कैनवस पर उतर आता है. क्या आप ऐसा कोई चमत्कार कर सकते हैं?

स्वामी जी ने कहा हाँ, क्यों नहीं! मैं इससे भी ज्यादा चमत्कार करता हूँ. आपके तथाकथित गुरु जादू की छड़ी से ऐसा ट्रिक कर दिखाते हैं, पर मेरा यह तरीका नहीं है. मेरा चमत्कार तो यह है जब मुझे खूब भूख लगती है तभी मैं खाता हूँ, और जब मुझे जोर की प्यास लगती है, तभी मैं खाता हूं. और यही बात मैं अपने भक्तों को सिखाता हूँ.

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संसदीय हास-परिहास 4

जब एक संसद सदस्य सरकार के कामधाम के बेहद धीमे तरीके से बेजार होकर यह बोले – यह सरकार तो पूरी तरह स्थाई हो गई है बाल बराबर भी नहीं खिसकती. तो जवाब में प्रो. मधु दंडवते ने स्पष्ट किया - सरकार वैसे भी स्थाई सम्पत्ति है.

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(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

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सच मै रवी जी आप यह कहांनीया लिख कर बहोत अच्छा कर रहे है ।

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उत्तम अनुवाद!

हवा और सूरज वाली कहानी अखण्ड ज्योति में पढी थी सालों पहले। चमत्कार पर और तानाशाह पर भी बढिया।

बचपन में पढ़ी थी सुरज और हवा की कहानी।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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