गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 38

 

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

309

लीला

एक गुरू जी अपने शिष्यों को हिंदू मान्यताओं को समझाते हुये बोले - "सारा जगत प्रभु की लीला है, यानि यह संसार एक खेल है और यह ब्रहांड खेलकूद का मैदान है। आध्यात्म का लक्ष्य जीवन को एक खेल बनाना है। "

एक शुद्धतावादी पर्यटक को उनकी बातें निरर्थक लगीं। वह बोला - " तो क्या कर्म का कोई महत्त्व नहीं है ?"

गुरू जी उत्तर दिया - "जरूर है। लेकिन कोई कार्य तब आध्यात्मिक हो जाता है जब इसे खेल की तरह किया जाये। "

310

नेता के कार्य

जब एक धार्मिक नेता के चेलों ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने नेता की तारीफों के पुल बांधे, तो नेता बहुत खुश हुए।

बाद में उनसे इस बारे में पूछा गया तो वे बोले - "जो व्यक्ति दूसरों को अपनी शक्ति दिखाता है, वह धार्मिक नेता नहीं हो सकता।"

तब उनसे पूछा गया कि "फिर धार्मिक नेता के क्या कर्का होते हैं?"

नेता जी ने उत्तर दिया - लोगों को प्रेरित करना न कि कानूनी पचड़ों में डालना। उन्हें जागृत करना, न कि मजबूर करना ।"

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62

संसदीय हास-परिहास – 3

बहस के दौरान जब एक सदस्य ने आपत्ति दर्ज की कि सभापति महोदय का ध्यान आकर्षित करने के लिए कई सदस्य शुरू से ही कोशिश कर रहे हैं ताकि उन्हें भी बोलने का मौका मिले, मगर सभापति महोदय ध्यान ही नहीं दे रहे हैं!

इस पर सभापति ने मुस्कुराते हुए अपनी बात कुछ यूँ रखी – “मेरा ध्यान एक बार में एक ही सम्माननीय सदस्य की ओर आकर्षित हो सकता है!”

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63

नमक की सही कीमत

एक बार एक सुल्तान अपने लाव-लश्कर के साथ यात्रा पर था. यात्रा लंबी, कई दिनों की थी, और एक बार बीच पड़ाव में रसोई का नमक खत्म हो गया.

रसोइये ने सुल्तान से फरियाद की कि उसके भंडार का नमक खत्म हो गया है. सुल्तान ने तुरंत अपने अपने एक सिपाही को बुलाया और पास के गांव के किराना दुकान से शीघ्र ही नमक लेकर आने को कहा. साथ ही सुल्तान ने सिपाही को रुपए देते हुए कहा कि नमक की वाजिब कीमत देकर ही लाना.

सिपाही की प्रश्न-वाचक निगाहों को सुल्तान ताड़ गया. सुल्तान ने स्पष्ट किया – “तुम सुल्तान के सिपाही, चाहो तो सुल्तान के नाम पर मुफ़्त नमक ला सकते हो या फिर पैसा तो तुम्हारी जेब का नहीं, राजकोष का है ऐसा सोचकर अनाप-शनाप भाव से नमक ला सकते हो. मगर दोनों ही परिस्थिति में तुम गलत कार्य करोगे.

जरा जरा सी बातें ही हमें बहुत कुछ सिखाती हैं. बूंद-बूंद से घट भरता है. आज तुम नमक की तुच्छ सी कीमत सही-सही अदा नहीं करोगे तो भविष्य में बड़े बड़े सौदे में सही कीमत कैसे लगाओगे? इसीलिए जाओ और सही कीमत देकर ही नमक लाओ.”

(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

3 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. खेल खेल में जीवन जीना, रीत बहुत ही पुरानी है।

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  2. नमक की कीमत कहानी बहुत अच्छी और प्रेरक है।

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  3. बहोत अच्छा लगा पढ के ।

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