मंगलवार, 29 नवंबर 2011

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 18

 

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

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हनुमान की भक्ति

राम के राज्याभिषेक के बाद सीता एवं राम के तीनों भाईयों ने बैठक करके आपस में यह तय किया कि हनुमान को राम की सेवा से मुक्ति दे देनी चाहिए। वे यह चाहते थे कि अब तक जो कार्य हनुमान किया करते थे, उन तीनों को सौंप दिये जायें। उनका ऐसा मानना था कि हनुमान को पहले ही राम की सेवा का पर्याप्त अवसर प्राप्त हो चुका है।

अतः जहां तक संभव हुआ उन्होंने अपनी याददाश्त के अनुसार हनुमान द्वारा सुबह से लेकर शाम तक किए जाने वाले छोटे से छोटे कार्य की सूची बनायी और उन कार्यों को आपस में बांट लिया। हनुमान की उपस्थिति में उन्होंने राम के समक्ष कार्यों की यह सूची प्रस्तुत की।

राम ने इस नयी प्रक्रिया के बारे में धैर्य से सुना, सूची को पढ़ा और मुस्कराते हुए अपना स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने हनुमान से कहा कि उनके द्वारा किए जाने वाले सभी काम अब इन लोगों में बांट दिए गए हैं तथा अब वे आराम कर सकते हैं। हनुमान ने अनुरोध किया कि उन्हें इस सूची को पढ़कर सुनाया जाये। जब उन्हें सूची को पढ़ कर सुना दिया गया तो हनुमान ने उसमें एक चूक पायी और कहा कि इसमें जम्हाई लेते समय चुटकी बजाने के कार्य का उल्लेख नहीं है।

उन्होंने प्रार्थना की कि निस्संदेह एक राजा के रूप में राम को यह कार्य स्वयं नहीं करना चाहिए। यह काम तो किसी सेवक द्वारा ही किया जाना चाहिए। उनका तर्क सुनकर राम ने यह कार्य हनुमान को सौंपने की सहमति प्रदान की।

यह कार्य हनुमान के लिए अत्यंत भाग्यशाली सिद्ध हुआ क्योंकि इस कार्य ने अपने स्वामी श्रीराम के समक्ष दिनभर हनुमान की उपस्थिति को आवश्यक बना दिया। आखिर कोई यह कैसे पता लगा सकता था कि उन्हें जम्हाई कब आएगी?

और इस तरह हनुमान को दिनभर राम का सुंदर चेहरा निहारने का सुअवसर प्राप्त हो गया। अब न तो वे एक पल के लिए राम से दूर जा सकते थे और न ही आराम कर सकते थे।

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एक मिनट की भी देरी किसलिए?
एक बार एक जंगल में जबरदस्त आग लग गई और जंगल का एक बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया. जंगल में एक गुरु का आश्रम था. जब जंगल की आग शांत हुई तो उन्होंने अपने शिष्यों को बुलाया और उन्हें आज्ञा दी कि जंगल को फिर से हरा भरा करने के लिए देवदार का वृक्षारोपण किया जाए.


एक शक्की किस्म के चेलने ने शंका जाहिर ही - मगर गुरूदेव, देवदार तो पनपने में बरसों ले लेते हैं.


यदि ऐसा है तब तो हमें बिना देरी किए तुरंत ही यह काम शुरू कर देना चाहिए - गुरू ने कहा.
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27
सीमित शब्द
एक बार एक गुरुकुल के कुछ छात्र लाओ त्जू की इस सूक्ति पर विचार-विमर्श कर रहे थे -
"जिन्हें मालूम है, वे कहते नहीं,
जो कहते हैं उन्हें मालूम नहीं."


इस सूक्ति का सटीक अर्थ जब उनमें से कोई नहीं बता पाया तो वे इसका अर्थ जानने अपने गुरू के पास पहुँचे.


गुरु ने पूछा - "तुममें से कितने लोग गुलाब की खुशबू के बारे में जानते हो"


सभी शिष्यों ने सहमति में सर हिलाया.


यदि तुम सबको यह मालूम है तो मुझे इसे शब्दों में समझाओ.


सबके सब चुप थे क्योंकि वे इसे शब्दों में कह नहीं सकते थे...!!

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(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

3 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. वर्तमान सर्वोत्तम है।

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  2. एक गीत प्रचलित है, बजाए जा तू हनुमान चुटकी, समझ नहीं पाता था, शायद संदर्भ यही हो.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपने सही समझा राहुल जी। मैं भी अनुवाद के दौरान ही समझ पाया था।

    उत्तर देंहटाएं

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