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आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 19

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी(273)मूल्यवान हारनसरूद्दीन हौजा के पास अपने दादा के दिए हुए बीस दुर्लभ मोती थे। एक दिन वह एक सुनार के पास गया और बोला कि वह इन मोतियों का एक हार बनवाना चाहता है। सुनार एक लालची व्यक्ति था। सुनार ने नसरूद्दीन से कहा - "ठीक है, पर पहले मैं तुम्हारे सामने इन मोतियों को गिन लूँ।" मोती गिनते समय उसने अपने हाथ की सफाई दिखाते हुए एक मोती अपनी हथेली में छुपा लिया और बोला - "ये उन्नीस हैं।" नसरूद्दीन ने सुनार को मोती छुपाते हुए देख लिया लेकिन वह उसे जाहिर करना नहीं चाहता था। इसलिए वह बोला - "एक बार मैं भी गिन लूँ।" नसरूद्दीन ने मोतियों की गिनती की और सुनार की ही तरह हाथ की सफाई दिखाते हुए एक और मोती कम कर दिया और बोला - "हाँ ये उन्नीस ही हैं।" सुनार बोला - "मैं कल तक हार बना दूंगा। तुम कल हार ले जाना।" बाद में जब शाम को सुनार ने मोतियों की गिनती की तो उसे पता चला कि मोती तो सिर्फ अठारह ही हैं। वह अपने आप से बोला - "लेकिन नसरूद्दीन ने तो मेरे सामने उ…

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 18

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी272हनुमान की भक्तिराम के राज्याभिषेक के बाद सीता एवं राम के तीनों भाईयों ने बैठक करके आपस में यह तय किया कि हनुमान को राम की सेवा से मुक्ति दे देनी चाहिए। वे यह चाहते थे कि अब तक जो कार्य हनुमान किया करते थे, उन तीनों को सौंप दिये जायें। उनका ऐसा मानना था कि हनुमान को पहले ही राम की सेवा का पर्याप्त अवसर प्राप्त हो चुका है। अतः जहां तक संभव हुआ उन्होंने अपनी याददाश्त के अनुसार हनुमान द्वारा सुबह से लेकर शाम तक किए जाने वाले छोटे से छोटे कार्य की सूची बनायी और उन कार्यों को आपस में बांट लिया। हनुमान की उपस्थिति में उन्होंने राम के समक्ष कार्यों की यह सूची प्रस्तुत की। राम ने इस नयी प्रक्रिया के बारे में धैर्य से सुना, सूची को पढ़ा और मुस्कराते हुए अपना स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने हनुमान से कहा कि उनके द्वारा किए जाने वाले सभी काम अब इन लोगों में बांट दिए गए हैं तथा अब वे आराम कर सकते हैं। हनुमान ने अनुरोध किया कि उन्हें इस सूची को पढ़कर सुनाया जाये। जब उन्हें सूची को पढ़ कर सुना दिया गया तो हनुम…

दुःखी हैं? तो ब्लॉगिंग क्यों नहीं करते?

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(चित्र - साभार टू थिंक ऑर नाट टू )

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 17

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी271शिकारएक दिन सुल्तान ने नसरुद्दीन को अपने साथ भालू के शिकार पर चलने को कहा। नसरुद्दीन जाना नहीं चाहता था पर सुल्तान को खुश करने के लिए वह साथ में जाने को तैयार हो गया। शिकार पर गया दल जब शाम को लौटा तो सभी लोग उनसे यह जानने को उत्सुक थे कि शिकार कैसा रहा और उन्होंने नसरुद्दीन से इसके बारे में पूछा। नसरुद्दीन बोला - "बेहतरीन" ! लोगों ने फिर उत्सुकतावश पूछा - "तुमने कितने भालू मारे?" "एक भी नहीं "- नसरुद्दीन बोला। "तो तुमने कितने भालुओं का पीछा किया?"- उन्होंने पूछा। "एक भी नहीं " - नसरुद्दीन फिर बोला। "तो तुम्हें कितने भालू दिखायी दिए?"- उन्होंने पूछा। "एक भी नहीं "- नसरुद्दीन बोला। "तो तुमने कितने भालुओं का पीछा किया?"- उन्होंने उत्सुकतावश पूछा। "एक भी नहीं "- नसरुद्दीन बोला। तो फिर तुम यह कैसे कह सकते हो कि शिकार बेहतरीन रहा? - एक व्यक्ति ने कहा। नसरुद्दीन ने मुस्कराते हुए कहा।- "महोदय! यह जान लीजिय…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी 269 नकल ही करनी है तो बाघ की करो, लोमड़ी की नहीं। अरब के शेख सादी की एक दंतकथा इस प्रकार है - जंगल से गुजरते हुए एक आदमी ने ऐसी लोमड़ी को देखा जिसके पैर टूट चुके थे और वह अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही थी। उसने सोचा कि आखिर वह अपना गुजारा कैसे करेगी। तभी उसने देखा कि एक बाघ अपने मुँह में शिकार को दबाये हुए वहाँ आया। पेटभर खाने के बाद वह बचाखुचा शिकार लोमड़ी के लिए छोड़कर चला गया। अगले दिन भी ईश्वर ने बाघ को लोमड़ी के लिए भोजन के साथ वहाँ भेज दिया। वह आदमी ईश्वर की महानता के बारे में सोचकर आश्चर्यचकित हो गया और उसने यह निर्णय लिया कि वह बिना कुछ एक कोने में पड़ा रहेगा और ईश्वर उसका भरण-पोषण करेंगे। अगले एक माह तक वह ऐसा ही करता रहा और जब वह मृत्युशय्या पर पहुंच गया तब उसे एक आवाज़ सुनायी दी - "मेरे बच्चे! तुम गलत राह पर हो। सत्य को पहचानो। नकल ही करनी है तो बाघ की करो, लोमड़ी की नहीं।" -- 270 एक वादक, एक श्रोता कई वर्ष पूर्व चीन में दो मित्र रहते थे। एक मित्र अत्यंत कौशलपूर्ण तरीके से सित…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी 267 ऐसी कितनी चीजें हैं जिनके बिना मेरा जीवन आराम से कट रहा हैसुकरात का ऐसा मानना था कि बुद्धिमान लोग सहज रूप से मितव्ययी जीवन व्यतीत करते हैं। यद्यपि वे स्वयं जूते नहीं खरीदते थे पर प्रायः बाजार में जाकर दुकानों में सजाकर रखे गए जूते व अन्य चीजों को देखना पसंद करते थे। जब उनके एक मित्र ने इसका कारण पूछा तो वे बोले - "मैं वहां जाना इसलिये पसंद करता हूं ताकि मैं यह जान सकूं कि ऐसी कितनी चीजें हैं जिनके बिना मेरा जीवन आराम से कट रहा है। " -- 268 शेर और डॉल्फिनसमुद्र के तट पर चहलकदमी करते हुए शेर ने एक डॉल्फिन को लहरों के साथ अठखेलियाँ करते हुए देखा। उसने डॉल्फिन से कहा कि वे दोनों अच्छे मित्र बन सकते हैं। "मैं जंगल का राजा हूँ और सागर पर तुम्हारा निर्विवाद राज है। यदि संभव हो तो हम दोनों एक अच्छा मित्रतापूर्ण गठजोड़ कर सकते हैं।" डॉल्फिन ने उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। उनकी मित्रता होने के कुछ ही दिनों बाद शेर की भिडंत जंगली भैंसे से हो गयी। उसने डॉल्फिन को मदद के लिए पुकारा।…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी-- 265 अपने भीतर के प्रकाश को देखोएक गुरूजी लंबे समय से अचेतावस्था में थे। एक दिन अचानक उन्हें होश आया तो उन्होंने अपने प्रिय शिष्य को अपने नजदीक बैठे हुए पाया। उन्होंने प्रेमपूर्वक कहा - "तुम इतने समय तक मेरे बिस्तर के नजदीक ही बैठे रहे और मुझे अकेला नहीं छोड़ा?" शिष्य ने रुंधे हुए गले से कहा - "गुरूदेव मैं ऐसा कर ही नहीं सकता कि आपको अकेला छोड़ दूं।" गुरूजी - "ऐसा क्यों?" "क्योंकि आप ही मेरे जीवन के प्रकाशपुंज हैं।" गुरूजी ने उदास से स्वर में कहा - "क्या मैंने तुम्हें इतना चकाचौंध कर दिया है कि तुम अपने भीतर के प्रकाश को नहीं देख पा रहे हो?" -- 266शेर और लोमड़ीएक लोमड़ी, जंगल के राजा शेर के अधीनस्थ एक नौकर के रूप में कार्य करने को सहमत हो गयी। कुछ समय तक तो दोनों अपने स्वभाव और सामर्थ्य के अनुसार भलीभांति कार्य करते रहे। लोमड़ी शिकार बताती और शेर हमला करके शिकार को दबोच लेता। परंतु लोमड़ी को जल्द ही यह ईर्ष्या होने लगी कि शेर शिकार का ज्यादा हिस्सा …

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी(263)आदेश देने का तरीका एक बार एक राजा ने भगवान महावीर से पूछा, "क्या आप मुझे राज-पाट चलाने के लिये कोई परामर्श दे सकते हैं?" भगवान महावीर बोले - "जरूर। पहले तुम यह सीखो कि आदेश कैसे दिया जाता है।" राजा ने पूछा - "कैसे"? महावीर ने कहा - "तुम्हारा आदेश देने का तरीका ऐसा हो कि अन्य व्यक्ति बिना किसी हीनभावना के उनका पालन करें।" (264)तुम्हारा फर्नीचर कहाँ है?पिछली शताब्दी की बात है। एक अमेरिकी पर्यटक सुप्रसिद्ध पुलिस कर्मचारी रब्बी हॉफेज़ चैम से मिलने गया। उसे यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि रब्बी सिर्फ एक कमरे में रहते थे और वह भी किताबों से भरा हुआ था। उसमें फर्नीचर के नाम पर सिर्फ एक मेज और कुर्सी थी। "तुम्हारा फर्नीचर कहाँ हैं रब्बी?" - पर्यटक ने पूछा । "और तुम्हारा कहाँ हैं?" - रब्बी ने कहा । "मेरा फर्नीचर ! लेकिन मैं तो यहाँ एक पर्यटक हूँ और यहाँ से गुजर ही रहा था।" "और मैं भी" -- -- -- रब्बी ने भोलेपन से कहा । -- 17 व…

बेटियाँ बचाओ : कार्टूनिस्ट इरफान की नजर में

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इरफान के कार्टूनों के दीवाने यकीनन आप भी होंगे. अलग शैली, बेहतरीन पंच और बारीक ऑब्जर्वेशन लिए इनके कार्टून अन्य समकालीन कार्टूनकारों से इन्हें जुदा बनाते हैं.हाल ही में इरफान की कार्टून प्रदर्शनी के साथ साथ कार्टून वर्कशाप का आयोजन भोपाल में हुआ. कार्टून प्रदर्शनी की थीम थी - बेटियाँ बचाओ. इस दौरान इस बेहद उम्दा और सफल प्रदर्शनी को देखने, वर्कशॉप में कुछ देर के लिए ही सही, भाग लेने और इरफान से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.प्रस्तुत है प्रदर्शनी के कुछ चुनिंदा कार्टून -इरफान - कार्टून-कला के वर्कशॉप में प्रतिभागियों को कार्टून की बारीकियाँ सिखाते हुए.इरफान (बीच में) के साथ व्यंग्यकार व संपादक - भास्कर अनुज खरे (दाएँ) तथा कार्टूनिस्ट हरि ओम तिवारी

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी15 कल्पतरूएक बार एक आदमी घूमते-घामते स्वर्ग पहुँच गया. स्वर्ग में सुंदर नजारे देखते हुए वह बहुत देर तक घूमता रहा और अंत में थक हार कर एक वृक्ष के नीचे सो गया. स्वर्ग में जिस वृक्ष के नीचे सोया था, वह कल्पतरू था. कल्पतरू की छांह के नीचे बैठ कर जो भी व्यक्ति जैसी कल्पना करता है, वह साकार हो जाता है. कुछ देर बाद जब उस आदमी की आँख खुली तो उसकी थकान तो जाती रही थी, मगर उसे भूख लग आई थी. उसने सोचा कि काश यहाँ छप्पन भोग से भरी थाली खाने को मिल जाती तो आनंद आ जाता. चूंकि वह कल्पतरू के नीचे था, तो उसकी छप्पन भोग से भरी थाली उसके कल्पना करते ही प्रकट हो गई. चूंकि उसे भूख लगी थी तो उसने झटपट उस भोजन को खा लिया. भोजन के बाद उसे प्यास लगी. उसने सोचा कि काश कितना ही अच्छा होता कि इतने शानदार भोजन के बाद एक बोतल बीयर पीने को मिल जाती. उसका यह सोचना था कि बीयर की बोतल नामालूम कहाँ से प्रकट हो गई. उसने बीयर की बोतल खोली और गटागट पीने लगा. भूख और प्यास थोड़ी शांत हुई तो उसका दिमाग दौड़ा. यह क्या हो रहा है उसन…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी--257कार्य में आध्यात्मिकता गुरू जी को अपने समस्त शिष्यों के प्रति एक समान प्रेम भाव था । इसके बावजूद वे आश्रम में रहने वाले शिष्यों की तुलना में ऐसे शिष्यों के प्रति अपने लगाव को छुपा नहीं पाये जो 'गृहस्थ जीवन' व्यतीत कर रहे थे जैसे - विवाहित, व्यापारी, सैनिक, किसान ............आदि। जब उनसे इसके बारे में पूछा गया तो वे बोले - "संन्यासी जीवन की तुलना में गृहस्थ आश्रम के कार्यशील जीवन में आध्यात्मिकता का अभ्यास कहीं बेहतर होता है।" 258अपनी आँखें खुली रखो दार्जिलिंग में कुछ बुजुर्ग मित्रों का एक समूह था जो आपस में समाचारों के आदान-प्रदान और एक साथ चाय पीने के लिये मिलते रहते थे। उनका एक अन्य शौक चाय की महँगी किस्मों की खोज और उनके विभिन्न मिश्रणों द्वारा नए स्वादों की खोज करना था। मित्रों के मनोरंजन हेतु जब समूह के सबसे उम्रदराज़ बुजुर्ग की बारी आयी तो उसने समारोहपूर्वक एक सोने के महंगे डिब्बे में से चाय की पत्तियाँ निकालते हुए चाय तैयार की। सभी लोगों को चाय का स्वाद बेहद पसंद आ…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडा अनुवाद – परितोष मालवीय व रवि-रतलामी
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महज सम्मान के लिए

एक पत्रकार ने एक छोटे शहर के कई व्यक्तियों से शहर के मेयर के बारे में पूछा।

"वह झूठा और धोखेबाज है" - एक व्यापारी ने कहा।

"वह घमंडी गधा है" - एक व्यापारी ने कहा।

"मैंने अपने जीवन में उसे कभी वोट नहीं दिया" - डॉक्टर ने कहा।

"उससे ज्यादा भ्रष्ट नेता मैंने आज तक नहीं देखा" - एक नाई ने कहा।

अंततः जब वह पत्रकार उस मेयर से मिला तो उसने उससे पूछा कि वह कितना वेतन प्राप्त करता है?

"अजी मैं वेतन के लिए कार्य नहीं करता"- मेयर ने कहा।

"तब आप यह कार्य क्यों करते हैं?"

"महज सम्मान के लिए।" मेयर ने उत्तर दिया।


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दोष को ही खा लेना

कुछ ऐसी परिस्थितियां बन गयीं कि बौद्ध भिक्षु अध्यापक फुगाई एवं उनके अनुयायियों के लिए रात्रिभोज की तैयारी में देरी हो गयी। रसोईया दौड़ा - दौड़ा अपने बगीचे में गया और अपने चाकू से जल्दी-जल्दी कुछ हरी सब्ज़ियों के शीर्ष काट लाया और उन्हें एक साथ बारीक काटकर उनका सूप बना दिया। हड़बड़ाहट में वह यह …

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी13 वास्तविकता – प्रश्न एक उत्तर अनेकवास्तविकता का बोध मस्तिष्क के स्तर और व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है. कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं – 1 व्यास ने चार्वाक से पूछा – चार्वाक! क्या कभी तुमने यह अनुभव किया है कि तुम कहाँ से आए हो, कहाँ तुम्हें जाना है और इस जीवन का उद्देश्य क्या है? चार्वाक का उत्तर था – मैं अपने चाचा जी के घर से आया हूँ, और बाजार जा रहा हूँ. मेरा उद्देश्य है अच्छी सी ताजी मछली खरीदना. 2 यही प्रश्न नारायण ने सुरेश से पूछा. सुरेश का उत्तर था: मैं अपने अभिभावकों से इस जगत् में आया हूँ. भाग्य जहाँ ले जाएगा, वहाँ मुझे जाना है. जो मुझे मिला है उससे अधिक इस संसार को अर्पित करूं यह मेरे जीवन का उद्देश्य है. 3 और जब यही बात गोविंदप्पा ने शंकर से पूछा तो शंकर जा जवाब था – मैं संपूर्णता से आया हूँ और संपूर्णता में ही वापस लौटना है. और जीवन की इस यात्रा में पग-दर-पग संपूर्णता को महसूस करना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है. 4 बुद्ध के प्रश्न पर महाकश्शप का प्रत्युत्तर था – मैं शून्य से आया हूँ, शून्य …

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 8

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी253 राजा से तो बेहतर वृक्ष हैएक लड़का आम के वृक्ष पर पत्थर मारकर आम तोड़ने का प्रयास कर रहा था। गलती से एक पत्थर अपने लक्ष्य से भटककर वहां से गुजर रहे राजा को लगा। राजा के सैनिकों ने दौड़कर उस लड़के को पकड़ लिया और उसे राजा के समक्ष प्रस्तुत किया । राजा ने कहा -"इसके लिए तुम सजा के भागीदार हो। ............ताकि फिर कभी कोई राजा के ऊपर पत्थर फेंकने की हिम्मत न करे, अन्यथा ऐसे तो शासन चलाना मुश्किल हो जाएगा।" लड़के ने विनयपूर्वक उत्तर दिया - "हे वीर एवं न्यायप्रिय राजन, जब मैंने आम के वृक्ष पर पत्थर मारा तो मुझे उपहार स्वरूप मीठे रसीले फल खाने को मिले और जब आपको पत्थर लगा तो आप मुझे दंड दे रहे हैं....आप से भला तो वृक्ष है।" राजा का सिर शर्म से झुक गया। 254 कोट के भीतर डायनामाइटमुल्ला नसरुद्दीन खुशी-खुशी कुछ बुदबुदा रहा था। उसके मित्र ने इस खुशी का राज पूछा। मुल्ला नसरुद्दीन बोला - "वो बेवकूफ अहमद जब भी मुझसे मिलता है, मेरी पीठ पर हाथ मारता है। आज मैंने अपने कोट के भीतर डायन…

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 7

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(इस परियोजना से परितोष मालवीय जी भी जुड़े हैं और उन्होंने क्रमांक 251 से कहानियों का अनुवाद प्रारंभ किया है. यानी आपको कहानियाँ अब दोगुनी रफ़्तार से पढ़ने को मिलेंगी. परितोष जी को धन्यवाद. इन कहानियों को पाठकों का एक बड़ा वर्ग पसंद कर रहा है और नित नए पाठक बन रहे हैं. आप सभी सुधी पाठकों का आभार.) आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडा अनुवाद – परितोष मालवीय व रवि-रतलामी
251 मृगतृष्णा
जब महात्मा बुद्ध ने राजा प्रसेनजित की राजधानी में प्रवेश किया तो वे स्वयं उनकी आगवानी के लिए आये। वे महात्मा बुद्ध के पिता के मित्र थे एवं उन्होंने बुद्ध के संन्यास लेने के बारे में सुना था।
अतः उन्होंने बुद्ध को अपना भिक्षुक जीवन त्यागकर महल के ऐशोआराम के जीवन में लौटने के लिए मनाने का प्रयास किया। वे ऐसा अपनी मित्रता की खातिर कर रहे थे।
बुद्ध ने प्रसेनजित की आँखों में देखा और कहा, "सच बताओ। क्या समस्त आमोद-प्रमोद के बावजूद आपके साम्राज्य ने आपको एक भी दिन का सुख प्रदान किया है?"
प्रसेनजित चुप हो गए और उन्होंने अपनी नजरें झुका लीं।
"दुःख के किसी कारण के न होने से बड़ा सुख और कोई नह…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडा अनुवाद – रवि-रतलामी

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उज्जवल भविष्य अकसर हम अपने टीम सदस्यों को प्रेरित करने के लिए प्रयास करते रहते हैं. कई बार हम कंपनी और व्यक्तिगत सदस्यों के उज्जवल भविष्य हेतु वादा भी करते हैं.
एक धोबी के पास एक गधा था, जो वो सारा काम करता था जो एक गधा करता है. और वह गधा अपने काम से पूरी तरह बोर हो चुका था. वो सोचता था कि अब गधागिरी से तौबा करने का वक्त आ गया है.
एक दिन वह गधा घाट पर एक दूसरे धोबी के गधे से मिला. उनमें वार्तालाप प्रारंभ हुआ. पहला गधा अपने उकताए जीवन के बारे में बताने लगा.
दूसरे गधे ने कहा –“देखो, मैं भी एक समय तुम्हारी तरह पूरी तरह उकताया हुआ था. मेरी जिंदगी में कोई उजाला नजर नहीं आता था. परंतु पिछले सप्ताह मेरे मालिक ने कुछ ऐसा कहा जिससे मेरा भविष्य अच्छा खासा उज्जवल नजर आने लगा है. तो तुम भी उम्मीद मत हारो. किसी दिन तुम्हारे जीवन के खंडहर में भी बहार आएगी.”
“ऐसा क्या कह दिया तुम्हारे मालिक ने?” पहले गधे ने पूछा.
दूसरे ने जवाब दिया “हाल ही की बात है, एक दिन मेरा मालिक अपनी बेटी से बेहद नाराज हो गया, और उस पर गुर्राया था कि यदि व…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – रवि-रतलामी9 छुट्टन के तीन किलोछुट्टन पटसन तौल-2 कर ढेरी बना रहा था. उधर से एक बौद्ध गुजरा. उसने छुट्टन से पूछा “तुम जिंदगी भर पटसन तौलते रहोगे  – तुम्हें मालूम है, बुद्ध कौन था?” छुट्टन ने बताया – “नहीं, पर यह खूब पता है कि पटसन का यह गुच्छा तीन किलो का है.” 10 बारिश में सूखेएक बार एक शिकारी ने मुल्ला नसरूद्दीन को शिकार पर साथ चलने के लिए न्योता दिया. शिकारी ने मुल्ला को एक मरियल सा घोड़ा दे दिया और खुद बढ़िया, तेज घोड़े पर चला. जल्दी ही शिकारी आँख से ओझल हो गया और मरियल घोड़े पर सवार मुल्ला ज्यादा दूर नहीं जा पाया. इतने में बारिश होने लगी. मुल्ला ने अपने सारे कपड़े उतारे, उनकी पोटली बनाई और एक मोटे पेड़ की छांव में बैठ गया. बारिश बन्द होने पर उसने अपने कपड़े पहने और वापस लौट चला. शिकारी को बारिश ऐसी जगह मिली जहाँ दूर दूर तक कोई पेड़ नहीं था, घास के मैदान थे अतः वो बारिश में बुरी तरह भीगा वापस आया. उसने मुल्ला से पूछा कि वो सूखा सूखा कैसे है. मुल्ला ने कहा – “ऐसा आपके घोड़े के कारण हुआ.” दूसरे दिन शिकारी ने धीमा घोड़ा खु…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – रवि-रतलामी7 प्रार्थना -1वे प्रतिवर्ष पिकनिक पर सपरिवार जोशोखरोश से जाते थे और अपनी धर्मपरायण चाची को बुलाना नहीं भूलते थे. मगर इस वर्ष वे हड़बड़ी में भूल गए. आखिरी मिनटों में किसी ने याद दिलाया. चाची को जब निमंत्रण भेजा गया तो उन्होंने कहा – “अब तो बहुत देर हो चुकी. मैंने तो आँधी-तूफ़ान और बरसात के लिए प्रार्थना भी कर ली है.” -- 8 गगरी आधी भरी या खालीएक बुजुर्ग ग्रामीण के पास एक बहुत ही सुंदर और शक्तिशाली घोड़ा था. वह उससे बहुत प्यार करता था. उस घोड़े को खरीदने के कई आकर्षक प्रस्ताव उसके पास आए, मगर उसने उसे नहीं बेचा. एक रात उसका घोड़ा अस्तबल से गायब हो गया. गांव वालों में से किसी ने कहा “अच्छा होता कि तुम इसे किसी को बेच देते. कई तो बड़ी कीमत दे रहे थे. बड़ा नुकसान हो गया.” परंतु उस बुजुर्ग ने यह बात ठहाके में उड़ा दी और कहा – “आप सब बकवास कर रहे हैं. मेरे लिए तो मेरा घोड़ा बस अस्तबल में नहीं है. ईश्वर इच्छा में जो होगा आगे देखा जाएगा.” कुछ दिन बाद उसका घोड़ा अस्तबल में वापस आ गया. वो अपने साथ कई जंगली घोड़े व घ…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – रवि-रतलामी5 सबसे बड़ा सबकचंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में चीन से एक दूत आया. वह चाणक्य के साथ ‘राजनीति के दर्शन’ पर विचार-विमर्श करना चाहता था. चीनी राजदूत राजशाही ठाठबाठ वाला अक्खड़ किस्म का था. उसने चाणक्य से बातचीत के लिए समय मांगा. चाणक्य ने उसे अपने घर रात को आने का निमंत्रण दिया. उचित समय पर चीनी राजदूत चाणक्य के घर पहुँचा. उसने देखा कि चाणक्य एक छोटे से दीपक के सामने बैठकर कुछ लिख रहे हैं. उसे आश्चर्य हुआ कि चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार का बड़ा ओहदेदार मंत्री इतने छोटे से दिए का प्रयोग कर रहा है. चीनी राजदूत को आया देख चाणक्य खड़े हुए और आदर सत्कार के साथ उनका स्वागत किया. और इससे पहले कि बातचीत प्रारंभ हो, चाणक्य ने वह छोटा सा दीपक बुझा दिया और एक बड़ा दीपक जलाया. बातचीत समाप्त होने के बाद चाणक्य ने बड़े दीपक को बुझाया और फिर से छोटे दीपक को जला लिया. चीनी राजदूत को चाणक्य का यह कार्य बिलकुल ही समझ में नहीं आया. चलते-चलते उसने पूछ ही लिया कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया. चाणक्य ने कहा – जब आप मेरे घर पर आए तो उस …

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ -Stories from here and there -2

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – रवि-रतलामी3 ईश दर्शन का सबसे सरल तरीकाएक विद्यार्थी ने पूछा – “सर, क्या हम भगवान को देख सकते हैं? हमें इसके लिए (भगवान के दर्शन) क्या करना होगा?” ईश्वर के दर्शन व्यक्ति के अपने कार्यों से संभव होता है. प्राचीन काल में इसे तपस्या कहा जाता था. बालक ध्रुव ने यह अपनी पूरी विनयता और विनम्रता से हासिल किया. जब ईश्वर उनकी प्रार्थना से प्रकट नहीं हुए तब भी उन्होंने विश्वास और विनम्रता नहीं छोड़ी और अंततः ईश्वर को उन्हें दर्शन देना ही पड़ा. विद्वान परंतु अहंकारी राजा रावण ने भी भगवान शिव के दर्शन हेतु तपस्या की. वे सफल नहीं हुए. उनकी तपस्या में विनम्रता नहीं थी, बल्कि घमंड भरा था. क्रोध से उन्होंने भगवान से पूछा कि उनकी तपस्या में क्या कमी थी. और, जब भगवान शिव ने रावण को दर्शन नहीं दिए तो अंततः उसने अपने सिर को एक-एक कर काट कर बलिदान देना प्रारंभ कर दिया. इसे देख भगवान शिव भी पिघल गए और प्रकट हो गए. कर्नाटक में मैंगलोर और मणिपाल के पास एक छोटा सा शहर है उडिपि (जहाँ कुछ समय के लिए आदि शंकराचार्य ने निवास किया था और जहाँ से दुन…

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there -1

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कल मैंने इस किताब की चर्चा की थी. और लिखा था कि काश! ये हिंदी में होती. किताब को फिर से उलटने पुलटने पर पाया कि यह तो कॉपी लेफ्टेड किताब है. अतः प्रस्तुत है इसकी कहानियों का हिंदी अनुवाद. कुल 555 कहानियाँ हैं. यहाँ प्रतिदिन 2 कहानियों के अनुवाद के प्रकाशन की कोशिश रहेगी. इस लिहाज से 250 दिनों के भीतर यह पूरी किताब आपके सामने हिंदी में होगी. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं. आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँसंकलन – सुनील हांडाअनुवाद – रवि-रतलामी1 घोषणामुल्ला नसरुद्दीन भरे बाजार में एक जगह खड़ा हो गया और भीड़ को संबोधित करने लगा. “भाइयों और बहनो! क्या आप बिना कठिनाई के ज्ञान, बिना मिथ्यापन के सत्य, बिना प्रयास किए उपलब्धियाँ, बिना त्याग किए प्रगति पाना चाहते हैं?” देखते देखते ही भारी भीड़ जुट गई. हर कोई चिल्लाने लगा – “हाँ, हाँ!” “बहुत बढ़िया! मुल्ला ने कहा. मैं यही तो जानना चाहता था. आप लोग मुझ पर भरोसा कर सकते हैं. जब भी मुझे ये बातें …

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर

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बिजनेसमैन और बिट्स-पिलानी, आईआईएम अहमदाबाद से निकले सुनील हांडा द्वारा संकलित कहानियों की किताब में अब, कुछ तो होगा ही.लाइब्रेरी में जैसे ही यह किताब मेरे हाथ लगी और कुछ पन्ने इसके पढ़े, और इसकी कीमत देखी, तो फुरसत के अगले पलों में मैं अपने आपको फ्लिपकार्ट पर इस किताब को ऑनलाइन खरीदते पाया.यह किताब है ही ऐसी.पूरे सवा चार सौ पन्नों की किताब जिसमें 500 से अधिक कहानियाँ संकलित हैं. छोटी-छोटी कहानियाँ, मगर जीवन में हर किसी के लिए उपयोगी. और, मूल्य सिर्फ डेढ़ सौ रुपया. ऊपर से छूट सहित, फ्लिपकार्ट पर घर पहुँच सेवा सहित मात्र 113 रुपए में.सुनील हांडा आईआईएम अहमदाबाद जैसे प्रतिष्ठित  प्रबंधन संस्थान में शौकिया तौर पर प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर गेस्ट लैक्चरर के रूप में पढ़ाते भी हैं. अपने लैक्चर के दौरान वे इन कहानियों का बखूबी प्रयोग उद्धरण के बतौर करते रहे हैं.फ्लिपकार्ट पर इसके दो रीव्यू कुछ इस तरह हैं -Punya Trivedi 06 August 11 Loved it!One of the most amazing books I have every read! Whenever I feel down, I pick up and start reading it. The beauty of this book is short stories, which…

प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक के नए संस्करण में वर्ड के हिंदी तालिका (टेबल), एक्सेल शीट इत्यादि के पुराने हिंदी फ़ॉन्टों को तालिका सहित यूनिकोड में रूपांतरित करने की सुविधा

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प्रखर देवनागरी में 250 से भी अधिक पुराने हिंदी फ़ॉन्टों को यूनिकोड में 100% शुद्धता से परिवर्तन करने की सुविधा है.इसके नए संस्करण में तालिका युक्त सामग्री तथा एक्सेल शीट से कॉपी की गई सामग्री को भी परिवर्तित करने की सुविधा है. इस सुविधा को आप अपने डाटाबेस की फ़ाइल से तालिका युक्त आरटीएफ फ़ाइल में बदल कर भी प्रयोग कर सकते हैं. परिवर्तन में तालिका का रूप व फ़ॉर्मेट भी बरकरार रहता है.यह स्क्रीनशॉट वर्ड से कॉपी की गई तालिका युक्त सामग्री का रूपांतरण दर्शाता है -निम्न स्क्रीनशॉट में एक्सेल शीट से कॉपी की गई तालिका युक्त सामग्री का रूपांतरण दर्शित है:आप देखेंगे कि परिवर्तन न सिर्फ 100% शुद्धता से हुआ है, बल्कि तालिका व फ़ॉर्मेट भी बरकरार है.बहुत से कार्यालयों में हिंदी में बहुत सारा डेटाबेस और सामग्री तालिका रूप में ही बनाई जाती रही है और उनको फॉर्मेट बिगाड़े बगैर यूनिकोड में परिवर्तित करने का यह औजार वरदान सरीखा है.इसका डेमो संस्करण आप यहाँ http://www.4shared.com/u/5IPlotQZ/DangiSoft_India.html  से डाउनलोड कर जाँच परख कर सकते हैं. और यदि ये आपको काम का प्रतीत होता है तो इसे बखूबी खरीद सकते…

कौन किसको टोपी पहनाता है...

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ईमानदारी से बताइएगा, आपने आज तक कितनों को टोपी पहनाई है? चलिए, नहीं बताना चाहते, कोई बात नहीं, ये तो कन्फेस कर ही सकते हैं कि आपको कितनों ने कितनों की टोपी कब कब पहना डाली है? यह बताने में भी इमेज का, इज्जत का खतरा है?हम सभी का साबिका टोपी पहनने पहनाने से पड़ता ही रहता है. कुछ लोग गाहे बगाहे दूसरों को टोपी पहनाने की जुगत में लगे रहते हैं. वहीं कुछ सीधे सादे किस्म के लोग जाने अनजाने जब तब टोपी पहन लेते हैं. टोपी पहनने की तो पता नहीं, परंतु टोपी पहनाना एक आर्ट है, एक अदद कला है. टोपी पहनाने की कला बड़े श्रम और रियाज से पाई जाती है. यूँ किसी-किसी में जन्मजात गुण भी होता है. चाँदी के चम्मच मुँह में लेकर पैदा हुए कई लोग टोपी पहनने-पहनाने के जन्मजात गुण लेकर पैदा हुए होते हैं, मगर वे सब के सब अकसर व्यवस्था, सरकार, देश और अंततः जनता को टोपी पहनाते फिरते हैं. जनता की बात आई तो क्या कोई किसी नेता का नाम बता सकता है कि उसने अपनी जनता, अपने वोटर को कभी वायदों की टोपी नहीं पहनाई हो? इधर अफसर-मंत्री मिल-जुलकर ऐसी नई योजनाएँ बनाते हैं जिससे प्रत्यक्ष तो यह लगे कि देश सेवा हो रही है, मगर भीतर से वे…

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