टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

ग़रीबों का काइनेक्ट - इंटेक्स वेब कैम...

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वीडियो गेम को रीडिफ़ाइन करने में काइनेक्ट ने बड़ा कमाल किया है, और ये अच्छा खासा सफल और लोकप्रिय रहा है. इसका एपीआई अब सब के लिए खोल दिया गया है, इसका मतलब है कि देखते ही देखते इसके सैकड़ों अकल्पनीय प्रयोग भी सामने आएंगे.

काइनेक्ट वस्तुतः वेब कैम के सहारे फेस व बॉडी रिकग्नीशन के जरिए कॉम्प्लैक्स कंप्यूटिंग इनपुट हासिल कर उनका संपादन करता है. काइनेक्ट के जरिए आप अपने हाथों और पैरों को वास्तविक रूप में चला कर एक तरह से एक्सरसाइज करते हुए गेम खेल सकते हैं.

काइनेक्ट चूंकि पूर्णतः एक गेमिंग कंसोल उपकरण है, अतः यह महंगा उपकरण है.

अभी हाल ही में मुझे एक नए वेब कैम की जरूरत पड़ी तो सस्ता सा इंटेक्स आईटी 305 डबल्यूसी उठा लाया. वैसे तो यह प्लग-एंड प्ले है, परंतु इसके साथ एक सीडी भी थी और एक दो पन्ने का यूजर मैनुअल. यूँ ही सरसरी निगाह यूजर मैनुअल में मारी तो पाया कि अरे! यह तो ग़रीबों का काइनेक्ट है.

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(बच्चों के लिए एक छोटा सा मजेदार खेल - आप जहाँ जहाँ अपना सिर ले जाएंगे - वहाँ वहाँ नाक से पानी टपकता रहेगा)

इस वेब कैम के साथ आए सीडी में में फेस व हैंड रिकग्नीशन सिस्टम के साथ बढ़िया तरीके से काम करने वाले कुछ मजेदार खेल हैं. इन खेलों को काइनेक्ट की तरह ही बिना किसी माउस अथवा कीबोर्ड के, इस वेब कैम के सामने अपना सिर व अपने हाथों को हिलाकर कर कंट्रोल कर सकते हैं. गेम जरूर छोटे हैं, धीमे हैं और रिस्पांस थोड़ा टाइमलैग के साथ व स्लगिश है, मगर एक पांच सौ रुपल्ली के वेब कैम में आपको और चाहिए?

मैं तो उस दिन का इंतजार कर रहा हूँ जब मैं मॉनीटर के सामने बैठूं और फ़ाइल मेन्यू में कमांड अपने पलकों को झपका कर दूं. इससे कम से कम मेरी आँखों में आ रही शुष्कता तो दूर होगी और कुछ एक्सरसाइज भी, साथ ही साथ उंगलियों के कार्पेल टनल सिंड्रोम का इलाज भी होगा.

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आपका ब्लाग अच्छा लगा । बचपन में कभी सोचा था कि तकनीक इतनी आगे निकल जायेगी । मेरे हिसाब से आप जैसे लोगों के दिमाग को किसी मुझ जैसे प्राणी में डाल दिया
जाये । आपका जीवन तो सफ़ल हो ही गया हमारे को भी करवा दो।

वाह यह तो मजेदार है। हम भी इंतजार करेंगे कि कभी ऐसा दिन आये कि हम होठों की मूवमेंट से टाइप कर सकें।

रतलामी जी, जल्‍दी ही वह दिन भी आएगा, जब आपकी पलकों को एक्‍सरसाइज करने का बहाना मिल जाएगा।

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अब लगता है कि माउस का कार्य पलकें करेंगी।

‘मैं मॉनीटर के सामने बैठूं और फ़ाइल मेन्यू में कमांड अपने पलकों को झपका कर दूं’

.... तो भविष्य में कंप्यूटर से आंखों ही आंखों में बात होगी :)

रवि जी,
जहाँ तक मेरा अनुभव है पलक झपकाकर आदेश देकर फाइल मेन्यू को तो आसानी से एक्स पी में खोला जा सकता है। मैंने तो क्या था एक दो बार। वर्ड में ट्रेनिंग करने के बाद कमांड भी काम करता है सिर्फ़ बोलने से। मैंने तो स्पीच रिकग्निशन के साथ कमांड पर काम किया है।

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