बुधवार, 4 मई 2011

झूठा कहीं का

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व्यंज़ल

अचरज है ये मुद्दा नहीं है

मुद्दा है कि ये मुद्दा नहीं है.

 

जवाब सबको मालूम हैं

सवाल कोई मुद्दा नहीं है.

 

समस्या तो कुरसी की  है

यूँ और कोई मुद्दा नहीं है.

 

भूखे पेट, सड़ते अनाज

कमाल है ये मुद्दा नहीं है

 

जीतना तो है रवि को

कि कैसे, ये मुद्दा नहीं है.

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10 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. यह मुद्दा अब मुर्दा हो गया है :)

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  2. मुद्दे इतने हैं कि कोई मुद्दा नहीं है...रवि जी खड़े हो गये तो जीतना तय है...बशर्ते आपके पास कोई मुद्दा न हो...

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  3. ज्‍वलंत मुद्दा.

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  4. अब ये मुद्दा नहीं है|

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  5. कुछ लोगों को गड़े मुर्दों को मुद्दा बनाने में विशेषज्ञता भी हासिल है.

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  6. बहुत ही धारदार। शर्म है कि इनको आती नहीं।

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  7. सुन्दर व्यंग.

    "जब तक भुना सको उसे ज़िन्दा रखे रखो,
    'मुद्दे' का धर्म है कि धरम से जुड़ा रखो.
    कल फिर चुनाव होना है, 'कुर्सी' की बात है,
    'इतिहास' का ये सफहा हमेशा 'मुड़ा' रखो."

    http://aatm-manthan.com

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