टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

March 2011

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अस्य श्री क्रिकेटस्तोत्र माला मंत्रस्य श्री क्रिकेट मिथ्या प्रशंसक ऋषिः रविरतलामी छन्दः गलीक्रिकेट खिलाड़ी सर्व वर्ण शक्तयः शुश्रुषा वीजं वाकस्तम्भ कीलकम् क्रिकेटम् प्रसन्नार्थे पठे विआनेयोगः।

हे क्रिकेट। हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम नानागुण विभूषित, सुंदरकांति विशिष्ट बहु संपद युक्त खेल हो अतः हे क्रिकेट ! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम हर्ता क्रियात्मकता व रचनात्मकता के, तुम कर्त्ता आराम व छुट्टी के, तुम विधाता सटोरियों के अतएव हे क्रिकेट हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम समर में 20 ओवर धारी, विंटर में 40 ओवर धारी, बाकी समय 5 दिवस धारी मुफ़्त मनोरंजन कारी अतएव हे क्रिकेट हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम एक रूप से तमाम खेलों पर राज्य करते हो, एक रूप से किसी खेल को आगे बढ़ने नहीं देते हो और एक रूप से अनिश्चित हो, अतएव हे त्रिमूर्ते! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

आप के सत्वगुण आप के प्रसंशकों से प्रगट, आपके रजोगुण आपके मैचों से प्रकाशित, एवं आपके तमोगुण भवत्प्रणीत विश्व संवाद पत्रा दिकों से विकसित, अतएव हे त्रिगुणात्मक ! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम ही अतएव सत् हो, तुम्हारे शत्रु हॉकी-फुटबाल युद्ध में चित्, और प्रसंशकों को आनन्द अतएव हे सच्चिदानंद! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम ब्रह्मा हो क्योंकि खेल-प्रजापति हो, तुम विष्णु हो क्योंकि लक्ष्मी के कृपापात्र हो, तुम महेश्वर हो क्योंकि तुम्हारी टीमें एक में हार कर दूसरे में अजेय रहती हैं, अतएव हे त्रिमूर्ते! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम इंद्र हो तुम्हारी हर टीम वज्र है, तुम चंद्र हो - इनकमटैक्स तुम्हारा कलंक है, तुम वायु हो वायुयान तुम्हारी गति है, तुम वरुण हो जल-थल में तुम्हारा राज्य है, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम दिवाकर हो तुम्हारे प्रकाश से हमारा खेल-अज्ञानांधकार दूर होता है, तुम अग्नि हो क्योंकि अन्य सब खेलों को खा चुके हो, तुम यम हो विशेष करके हॉकी, फुटबाल के, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम वेद हो, तुम स्मृति हो, तुम दर्शन हो क्योंकि चहुँओर खेल मीमांसा में तुम ही तुम विराजे हो अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

हे त्रि-दंडिके, तुम्हारा अमल धवल शुभ्र महाश्म श्रु शोभित त्रि-दंड मंडल व द्वि-गुल्लिका देख करके हमें वासना हुई कि हम तुम्हारी स्तुति करें अतएव हे क्रिकेट, हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

तुम्हारी श्वेत-रक्त वर्ण तीव्र गति चलित कंदुक देखकर के हमको वासना हुई कि हम तुम्हारा स्तव करें, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

हे वरद! हमको वर दो हम सिर पर शमला बाँध के तुम्हारे टिकट के लिए पीछे पीछे दौड़ेंगे, पुलिस के डंडे की मार भी सहेंगे, तुम हमको चाकरी दो, हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हे शुभंकर! हमारा शुभ मनोरंजन करो, जिस टीम में सट्टे का दांव लगाएँ उसे जिताओ, हम तुम्हारी खुशामद करेंगे और तुम्हारे जी की बात कहेंगे हमको धनवान बनाओ हभ तुमको प्रणाम करते हैं.

हे मानद! हमको आईपीएल दो, विश्वकप दो, इंडिया-पाकिस्तान दो, ट्राईसिरीज दो, हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

हे खेलों के महाराजा! हम तुम्हारा रिपीट टेलीकास्ट देखने की इच्छा सुबह-शाम करते हैं, तुम्हारे बारे में चर्चा कर के लोक मण्डल में महामानास्पद होने की इच्छा करते हैं तुम्हारी जानकारियों को स्वर्ण जटित पत्र बक्स में रखने को स्पर्द्धा करते हैं, हे क्रिकेट! तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे अंतरयामिन्! हम जो कुछ करते हैं केवल तुम को देखने को, तुम दाता कहो इस हेतु हम समय दान करते हैं, तुम परोपकारी कहो इस हेतु हम एक दूसरे को क्रिकेट स्कोर बता-पूछ कर परोपकार करते हैं, तुम विद्यमान कहो इस हेतु हम क्रिकेट की खबर पढ़ते हैं अतएव हे क्रिकेट! तुम हम पर प्रसन्न हो हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

हम तुम्हारी इच्छानुसार गली-गली चर्चा करेंगे, तुम्हारे प्रीत्यर्थ बेसरम की डंडी, टेनिस के बॉल से गली क्रिकेट खेलेंगे, तुम्हारी आज्ञा प्रमाण बिना बल्ले पैड के खेलेंगे और आउट न होंगे, तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे सौम्य! हम वही करेंगे जो तुम को अभिमत है, हम सुबह शाम क्रिकेट खेलेंगे, दोपहर क्रिकेट खेलेंगे, रात्रि क्रिकेट खेलेंगे और यदि नहीं खेल पाए तो क्रिकेट चर्चा करेंगे, तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हे मिष्टभाषिण! हम मातृभाषा त्याग करके क्रिकेट भाषा बोलेंगे, पैतृक धर्म छोड़ के क्रिकेट धर्मावलंब करेंगे, अपना नाम छोड़ कर क्रिकेट फैन नाम लिखवाएंगे, तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हे सुभोजक! हम चावल छोड़ के क्रिकेट खायेंगे, क्रिकेट पीयेंगे. क्रिकेट ही हमारा जलपान है अतएव हे क्रिकेट! तुम हम को चरण में रक्खो, हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हम इस देश में क्रिकेट धर्म स्थापित करेंगे, वर्ग-जाति भेद उठा देंगे, सभी गोरे-काले-अफसर-बाबू-नेता-चपड़ासी सिर्फ और सिर्फ एक ही धर्म अपनाएँगे, एक ही जाति के होंगे – क्रिकेटिया, अतएव हे क्रिकेट! तुम हम पर प्रसन्न हो हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे सर्वद! हम को धन न दो, मान न दो, यश न दो, बस हमारी एक वासना सिद्ध करो – हमने जिस मैच में दांव लगाया उसे फिक्स कर दो. हम तुम को प्रणाम करते हैं।

यदि यह न हो तो हमने जिस ओवर में जितने रन और जितने विकेट का सट्टा लगाया उसे तो फिक्स करो, हम तुम को प्रणाम करते हैं।

हमारी स्पीच सुनो, हमारा एसे पढ़ो, हमारा एक्सपर्ट डिसकसन सुनो, हम को वाह वाही दो, इतना ही होने से हम भारतीय क्रिकेटिया समाज की अनेक निन्दा पर भी ध्यान न करेंगे, अतएव हम तुम को नमस्कार करते हैं।

हे भगवन् हम अकिञ्चन हैं और तुम्हारे द्वार पर खड़े रहेंगे, तुम हमको अपने चित्त में रक्खो हम तुम को रिश्वत भेजेंगे, तुम मौसम, पिच का हाल बता देना हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको कोटि कोटि साष्टांग प्रणाम करते हैं।

तुम दशावतार धारी हो – एक दिनी क्रिकेट, पाँच दिनी क्रिकेट, चार दिनी क्रिकेट, रात-दिन क्रिकेट, आईपीएल क्रिकेट, और न जाने क्या-क्या, और लक्ष्मी के प्रिय हो, खेलों में सबसे धनवान् हो हे अवतारिन्! हम तुम को नमस्कार करते हैं।

तुम नृसिंह हो क्योंकि मनुष्य और सिंह दोनों पन तुम में है। विकेट तुम्हारा क्रोध है और रन तुम्हारा प्रेम। तुम परम विचित्र हो, तुम वामन हो क्योंकि तुम चतुर हो – पूरी तरह अनप्रेडिक्टिबल, तुम परशुराम हो क्योंकि तुमने पूरे भारत को (क्रिकेट के अलावा) नि-खिलाड़ी कर दी है अतएव हे लीलाकारिन्। हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

तुम राम हो क्योंकि हिंद-पाकिस्तान के बीच शांति और प्रेम के अनेक सेतु बाधे हैं। तुम बलराम हो क्योंकि विरोधी टीमों के प्रशंसकों के बीच तुम हलधारी जैसे हो। तुम बुद्ध हो क्योंकि अन्य तमाम खेलों के विरुद्ध हो, और तुम कल्कि हो क्योंकि अन्य समस्त खेल संहारकारी हो। अतएव हे दश विधि रूप धारि! हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

तुम मूर्तिमान् हो। मनोरंजन तुम्हारा अंग है। टीवी तुम्हारा शिर है। दूरदर्शन और यू-ट्यूब तुम्हारा नेत्र है। और रेडियो तुम्हारे केश हैं। अख़बार, पत्रपत्रिकाएँ तुम्हारे हाथ-पाँव। अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको नमस्कार करते हैं।

खिलाड़ी तुम्हारे मुख हैं, अंपायर तुम्हारी नाक है, विरोधी टीम तुम्हारी मूंछ है और सट्टेबाज तुम्हारे काल दृष्टा हैं, अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं। हमारा भरपूर मनोरंजन करो।

लाइव प्रसारण और हाईलाइट्स तुम्हारी दोनों भुजा हैं। एक्सपर्ट कमेंटरी तुम्हारे नख है री-टेलीकास्ट तुम्हारा पृष्ट है और आमदनी तुम्हारा हृदय है अतएव हे क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

क्रिकेटरों की नीलामी तुम्हारा पेट है, टेलीकास्ट फीस तुम्हारी क्षुधा है, टिकट चरण है, स्पांसरशिप तुम्हारा प्रसाद है। अतएव हे विराटरूप क्रिकेट! हम निठल्ले तुमको प्रणाम करते हैं।

दीक्षा दान तपस्तीर्थ ज्ञानयागादिकाः क्रिया।

क्रिकेट स्तवपाठस्य कलां नार्हति षोडशीम्।। 1।।

विद्यार्थो लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।

स्टारार्थी लभते स्टारम् मोक्षार्थी लभते गति।। 2।।

एक कालं द्विकालं च त्रिकालं नित्यमुत्पठेत्।

भव पाश विनिर्मुक्तः क्रिकेट लोक संगच्छति।। 3।।

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(भारतेंदु हरिश्चंद्र के अँग्रेज़ स्तोत्र की पैरोडी)

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इंटरनेट की एक सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ संगीत प्रेमियों के लिए हर किस्म का संगीत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. वैध-अवैध तरीके से डाउनलोड करने से लेकर ऑनलाइन रेडियो इत्यादि सबकुछ. और तो और, अपने लोकप्रिय सरकारी विविध भारती विज्ञापन प्रसारण सेवा के लिए भी कुछ लोगों ने कुछ समय से व्यक्तिगत प्रयास कर इंटरनेट पर स्ट्रीमिंग की सुविधा दे दी है जिससे पूरी दुनिया में विविध भारती का प्रसारण सुना जा सकता है.

साउंडट्रकर कुछ-कुछ ऑनलाइन रेडियो जैसी एक बिलकुल नई सुविधा है. एकदम साफ-सुथरा, इस्तेमाल में बेहद आसान. साउंडट्रकर के प्रयोग के लिए न तो आपको पंजीकरण की आवश्यकता है और न ही आपको किसी तरह का कोई शुल्क देना पड़ता है. आप इसे कंप्यूटर पर तो इस्तेमाल कर ही सकते हैं, अपने आईफ़ोन, विंडोज मोबाइल फ़ोनों तथा नोकिया ओवीआई समर्थित फ़ोनों में भी साउंडट्रकर एप के जरिए सुन सकते हैं.

आपको बस इसके सर्च बाक्स के जरिए अपने पसंदीदा कीवर्ड्स का एक चैनल बनाना होगा या पहले से मौजूद चैनलों में से कोई चुनना होगा. जैसे कि यदि आप लता या सुनिधि टाइप कर करते हैं तो यह आपके जियोग्राफ़िक लोकेशन के आधार पर हिंदी गानों के लिए सुनिधि चौहान या लता मंगेशकर चैनल के विकल्प देता है. अब आप इनमें से कोई भी चैनल चुन लें और असीमित संगीत का अनंत काल तक आनंद लें. आप चाहें तो वाद्य यंत्र के नाम का भी चैनल बना सकते हैं जैसे कि (बांसुरी के लिए) फ्लूट. इन पंक्तियों को लिखते समय मैं सांउडट्रकर पर तबला चैनल - http://www.soundtrckr.com/app/station/1258084# सुन रहा हूँ. आप चाहें तो इस लिंक पर जाकर मेरे तबला चैनल का आनंद ले सकते हैं.

आप अपने बनाए हुए चैनल को फ़ेसबुक के जरिए अपने मित्रों के साथ साझा भी कर सकते हैं, या अपने मित्रों के चैनल सुन सकते हैं. अन्य ऑनलाइन रेडियो के विपरीत, साउंडट्रकर पर यदि कोई बजता हुआ गाना आपको पसंद नहीं है तो आप उस ट्रैक को फारवर्ड भी कर सकते हैं. साथ ही यह अगले ट्रैक पर कौन सा गाना बजने वाला है यह भी बताता चलता है. तो देखें कि आपके कानों को ये साउंडट्रकर http://www.soundtrckr.com कितना सुहाता है.

AK MANTRI KI SAMPATI

कम से कम 5 हजार गुना तो होना ही चाहिए, अन्यथा वो मंत्री किस काम का? यदि इससे कम हुआ तो फिर तो वो एक  बेहद नाकारा, निकम्मा और डरपोक किस्म का मंत्री होगा जो ठीक से खाना/खिलाना नहीं जानता.  राजाओं और कोड़ाओं के जमाने में जहाँ मंत्रियों ने अपनी क्या कहें अपने आसपास के लोगों की संपत्तियाँ 5 साल में 5000 गुनी कर दीं हैं, ऐसे मंत्री तो सिस्टम में कलंक हैं. इन्हें मंत्री पद पर रहने का कोई अधिकार ही नहीं है. भारत की जनता ने इन्हें खाने कमाने के लिए चुना था, परंतु ये तो पूरे निकम्मे निकले. पूरे  पांच वर्षों में ये खुद अपना ही भला नहीं कर पाए तो जनता का क्या खाक करेंगे?

जनता को ऐसे नाकारा, असफल मंत्रियों को अगले चुनावों में वोट न देकर हरा देना चाहिए. साथ ही जैसे कि राजनीतिक पार्टियाँ चुनावी घोषणा करती हैं, जनता को भी घोषणा करनी चाहिए कि विधायकों/सांसदों को अपने पांच साला कार्यकाल के दौरान अपनी आय में न्यूनतम 5 हजार गुना और मंत्री बने तो 10 हजार गुना इजाफा करना होगा, अन्यथा उन पर जुर्माना लगाया जाएगा. जनता को साल-दर-साल इनके प्रोग्रेस रिपोर्ट पर नजर रखनी चाहिए और जो इस न्यूनतम मापदंड पर खरे नहीं उतरते उन्हें वापस बुलाने का अधिकार भी जनता के पास होना चाहिए ताकि लाइन में लगे दूसरे टैलेंटेड नेताओं को चांस दिया जा सके.

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कल मैं एमजी रोड से टीटी नगर को जा रहा था तो रास्ते में एमपी नगर पड़ता है. वहाँ जीटीबी कॉम्प्लैक्स में बीएल से मुलाकात हो गई. वो भी मेरी ही बैच, जेएनयू का 86 का पासआउट था बीई आईटी. वो बताने लगा कि आरएल अभी ही एनडी के आईजी एयरपोर्ट पर उतरा है और सीधे यहाँ की फ्लाइट पकड़ रहा है. “यह तो बड़ी खुशी की बात है अब हमें एएसएपी कोई प्लान करना चाहिए” – मैंने कहा.

“नहीं, उसकी कंपनी का कोई लफड़ा है – मनरेगा में घोटाले का. सिटी एसपी के दरबार में उसे हाजिरी देनी है, फिर वो जीटी रोड से तुरंत आगे सीजी के लिए आगे निकल लेगा.” - बीएल ने बताया.

“ओह!, पर जीटी रोड में तो टीसीपी वालों का काम चल रहा है और रोड जगह जगह ब्लॉक है. उसे एबी रोड पकड़ना चाहिए.” – मैंने सुझाया.

“देखते हैं, आने दो उसे. बता देंगे. आज तो एसएल और यूके का मैच आ रहा है एनडीटीवी टीवी पर. वीरू और एचबी पर ही दांव है इस बार. स्कोर क्या हुआ है पता है?” – बीएल ने कहा. फिर अचानक उसे कुछ याद आया और बोला – “यार तू अपने पीसी पर मेरा एक टिकट मुम्बई एलटीटी बुक कर देगा क्या? मेरे एरिये की एलटी लाइन पर एचटी लाइन स्नैप होने से मेरा एनबी खराब हो गया है और विंडो पर मारामारी रहती है और आजकल टीटीई के भाव भी आसमान पर रहते हैं.” 

“टिकिट तो बुक हो जाएगा, परंतु मेरा एचपी प्रिंटर सर्विसिंग में गया है. मैं टिकिट बुकिंग के समय तेरा सेल नं डाल दूंगा तो बुकिंग का एसएमएस संभाल रखना. आजकल उसे भी टिकिट मान लेते हैं.” - मैंने कहा.

“ऐसा क्या? आजकल ससुरी लाइफ़ साली एसएमएस टाइप सचमुच एबरीविएटेड हो गई है.” – उसने अपनी फिलासफी झाड़ी.

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[और, अगर लाइफ़ एबरीविएटेड न हो ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ती तो? ....

एमजी – महात्मा गांधी

टीटी – तात्या टोपे

एमपी – महाराणा प्रताप

जीटीबी – गुरु तेग बहादुर

बीएल – बाबूलाल

जेएनयू – जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी

बीई – बैचलर आफ इंजीनियरिंग

आईटी – इनफ़ॉर्मेशन टेक्नॉलाजी

आरएल – रामलाल

एनडी – न्यू डेल्ही

आईजी – इंदिरा गांधी

एएसएपी – एस सून एस पॉसिबल

मनरेगा – महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना

एसपी – सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस

जीटी – ग्रैंड ट्रंक

सीजी – छत्तीसगढ़

एबी – आगरा बाम्बे

एसएल – श्रीलंका

यूके – यूनाइटेड किंगडम

एनडीटीवी – न्यू डेल्ही टेलिविजन

वीरू - वीरेन्द्र सहवाग

एचबी - हरभजन सिंह

पीसी – पर्सनल कंप्यूटर

एलटीटी – लोकमान्य तिलक टर्मिनस

एलटी - लो टेंशन

एचटी - हाई टेंशन

एनबी - नोटबुक

टीटीई - ट्रेवलिंग टिकिट एक्जामिनर

एचपी – हैव्लेट पैकर्ड

सेल – सेल्युलर मोबाइल

एसएमएस – शार्ट मैसेजिंग सर्विस]

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  हास्य व्यंग्य hasya vyangya

मीडिया में, संसद में, और सड़कों पर – जब चहुँओर महंगाई-महंगाई का रोना रोया जाने लगा तो मैंने सोचा कि चलो महंगाई की पड़ताल कर ही लिया जाए कि किधर है महंगाई और कितनी है महंगाई.

सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक की दुकान पर पहुंचा. सोचा आजकल तो हर चीज हाईटेक हो गई है. महंगाई भी हाईटेक हो गयी होगी और उसका पता यहाँ आसानी से मिल जाएगा.

कम्प्यूटर सेक्शन में एक बढ़िया, ब्रांड न्यू, लेटेस्ट कॉन्फ़िगरेशन वाले कंप्यूटर के प्राइस टैग पर 30 हजार रुपये को काट कर 24 हजार रुपए लिखा गया था. साथ में 3 हजार मूल्य के अन्य उपहार फ्री. इससे रद्दी किस्म का कंप्यूटर दो साल पहले मैंने तो चालीस हजार रुपए में लिया था, और उपहार की बात तो छोड़ ही दें, पायरेटेड सॉफ़्टवेयर इंस्टाल करवाने के अतिरिक्त 5 सौ रुपए अलग से झाड़ लिए गए थे. कमोबेश यही हाल कलर टेलिविजन सेटों, माइक्रोवेव ओवनों, फ्रिज, एयर-कंडीशनरों इत्यादि-इत्यादि में भी था. यहाँ तो महंगाई देवी नजर नहीं आई, और बदले में सस्ती महारानी पैर जमाए मिली.

मुझे लगा कि हो न हो महंगाई डेली नीड्स और खानपान की दुकानों पर मौजूद हो सकती है. नए नए खुले पित्जा झोंपड़ी नामक दुकान पर पहुँचा. वहाँ पर नॉन फ़ेस्टिव सीजन के तहत प्राइज में 10 प्रतिशत छूट थी, फेमिली साइज पित्जा पर कोक की बोतल मुफ़्त तथा कुछ विशेष किस्म के पित्जाओं पर कई-कई माउथ वाटरिंग टॉपिंग बिलकुल फ्री मिल रही थी. लोग लाइन लगाए खड़े थे. टेबलों पर भीड़ जमा थी. काउंटर पर पैक करवाने वालों की मारामारी चल रही थी. महंगाई का तो जनाब, लगता है यहाँ कोई लेना देना ही नहीं था! मुझे बड़ी निराशा हाथ लगी.

कपड़ों, जूतों की दुकानों पर तो मामला और गड़बड़ था. कहीँ 70 प्रतिशत छूट मिल रही थी तो कहीं स्टाक क्लीयरेंस सेल में एक पर 4 फ्री. जूते चप्पलों में 80 प्रतिशत छूट. और तो और सरकारी खादी भंडार की दुकानों में भी कीमतें कम थीं 30 प्रतिशत छूट के साथ!

निराशा और मुर्दनी भरा चेहरा लिए मैं महंगाई को बड़ी बेताबी से ढूंढ रहा था तो अचानक मुंगेरीलाल दिख गया. वो अपने स्मार्ट मोबाइल फ़ोन से चिपका हुआ किसी से बात कर रहा था. वह मुझे देख कर मुस्कुराया, हाथ हिलाया मगर उसका ध्यान पूरी तरह फोन पर बात करने में ही था. मुझे लगा कि मुंगेरी से महंगाई के बारे में कुछ सुराग मिल सकता है. मैंने इंतजार करना उचित समझा कि कब उसकी बात खत्म हो तो मैं उससे महंगाई के बारे में पूछूं. पूरे आधे घंटे और उनचास सेकंड के बाद उसने फोन बंद किया और मुझसे छूटते ही सफाई देते हुए बोला – वो क्या है न फ्री टॉकटाइम वाला प्लान ले रखा है. तो फियांसे से बात कर रहा था. फिर जैसे अचानक उसे याद आया – उसने मेरे सामने अपना नया फुल, मल्टीटच स्क्रीन युक्त स्मार्टफ़ोन लहराया – ये भी अभी हाल ही लिया है. जब यह रिलीज हुआ था तो डबल कीमत थी. अभी सस्ता हुआ और ऑफर आया तो सोचा कि ले ही लें. है न बढ़िया? ऐं...? फ्री प्लान और सस्ता मोबाइल...? और महंगाई – वो किधर है मुंगेरी?

कुछ समय पहले लोग महंगे प्याज के बारे में खूब हल्ला मचा रहे थे. सोचा, चलो सब्जी बाजार चला जाए. वहाँ तो महंगाई हर हाल में दिख ही जाएगी. सब्जी बाजार के मुहाने पर ही प्याज से भरे बोरों के ढेर के ढेर लग रहे थे. मेरा मन उछल पड़ा. हो न हो यहाँ तो महंगाई होगी ही. प्याज और महंगाई का तो पैंट-पतलून (चोली-दामन लिखने से स्त्रीवादी नाराज हो सकते हैं) का रिश्ता है. पर यहाँ भी महंगाई न मिली. पता चला कि किसान प्याज बेचने बाजार आए थे, मगर पैदावार और फसल ज्यादा होने से खरीदार नहीं मिले और उनके पास माल की वापस ढुलाई के पैसे नहीं थे तो वे अपने प्याज वहीं फेंक कर चले गए. मुई महंगाई प्याज को भी छोड़कर चली गई थी तो वो मुझे कहाँ से मिलती.

आखिर में महंगाई को ढूंढते-ढूंढते मैं किराना शॉप में पहुँचा. आजकल दुकानें शॉप में बदल गई हैं. मुझे देखते ही शॉपदार बोला – आइए, साहब क्या लेंगे – साबुन और सर्फ के दाम घट गए हैं. समर स्पेशल साबुन में तो एक पर एक फ्री है. टूथपेस्ट में उसी दाम पर 20 प्रतिशत एक्स्ट्रा मिल रहा है. चिप्स के 2 पैकेट खरीदने पर नूडल्स का एक पैकेट फ्री है. शेविंग क्रीम पर शेविंग ब्लेड के साथ साथ ऑफ़्टर शेव भी मुफ़्त है...

मैं ठगा सा खड़ा रह गया.

नया ऑनलाइन एडीटर:

नया डैशबोर्ड:

 

यदि नहीं, तो नया इंटरफ़ेस या नया ऑनलाइन एडीटर, जैसा कि कहा जा रहा है बहुतों के किसी काम का नहीं होगा क्योंकि कई कारणों में से एक इस महत्वपूर्ण कारण से लोग ब्लॉगर छोड़कर वर्डप्रेस की ओर चले जाते हैं.

एचटीएमएल 5 की ताकत का अंदाजा दिखाता है यूआरएल हंटर नाम का प्रूफ ऑफ कंसेप्ट गेम. इसे आप सीधे ब्राउजर के पता पट्टी (एड्रेस बार) में ही खेल सकते हैं.
खेलने के लिए सीधे यहाँ जाएँ:
http://probablyinteractive.com/url-hunter

ध्यान रहे आपका ब्राउजर एकदम नया, एचटीएमएल5 समर्थित  होना चाहिए - जैसे कि ऑपेरा 11, क्रोम 10, फायरफाक्स 4 या इंटरनेट एक्सप्लोरर 9.
और, इसी का हिंदी संस्करण जो वाकई शानदार चलता है, खेलने के लिए नीचे दिए गए जिप फ़ाइल को अपने कंप्यूटर में डाउनलोड करें, अनजिप करें और यूआरएल हंटर.एचटीएम फ़ाइल को ब्राउजर में खोलें.
जिप फ़ाइल डाउनलोड लिंक

यदि किसी कारण से ऊपर की लिंक काम न करे तो नीचे दिया गया वेब पता कॉपी कर अपने ब्राउजर पता पट्टी में  पेस्ट कर जाएँ व डायरेक्ट डाउनलोड करें :

http://cid-60eace63e15a752a.office.live.com/self.aspx/.Public/url-hunter.zip

दुनिया का पहला वायरस सीब्रेन कुछ समय पहले पच्चीस साल का हो गया. उसे जनवरी 1986 में जारी किया गया था. कंप्यूटर व इंटरनेट की सुरक्षा प्रदान करने वाली कंपनी एफ़-सेक्यूर के मिको हेप्पोनन ने पिछले दिनों पाकिस्तान पहुँच कर सीब्रेन वायरस तैयार करने वाले बासित फ़ारूक अल्वी तथा अमजद फ़ारूक अल्वी से मुलाकात की और उनका साक्षात्कार लिया. वे आजकल ब्रेन कम्यूनिकेशन कंपनी चलाते हैं. उनका साक्षात्कार बेहद मजेदार है. c-brain virus creator farooq brothers

     (अमजद (बाएँ) तथा बासित (दाएँ))

मिको ने बहुत से सवाल किए कि वायरस  लिखने के पीछे क्या कारण रहे थे, क्या अनुभव रहे इत्यादि.

  brain virus has address

और, क्या आपको पता है कि सीब्रेन के कोड में इसके लेखकों के नाम, पते और टेलिफोन नंबर भी दर्ज थे?

साक्षात्कार का वीडियो (अंग्रेज़ी में) यहाँ देखें

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चित्र - मिको के पोस्ट से साभार

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हिंदी ब्लॉगों की चोरी की सामग्री से अखबारों के पन्ने बनाए जाने का सिलसिला तो हिंदी ब्लॉगिंग के इतिहास से ही चालू है. बहुत पहले (29 जुलाई 2009) पीपुल्स समाचार के एक व्यंजन विशेषांक का एक पन्ना पूरा का पूरा निशा मधुलिका ब्लॉग से मय चित्रों के बनाया गया था.

आज एक अखबार नव दुनिया का ब्लॉग पर केंद्रित पूरा का पूरा पन्ना हिंदी ब्लॉगों की कटपेस्ट सामग्री से तैयार किया गया है - जिसमें कॉमा, फुलस्टाप और मात्रा की गलती तक जस की तस उतारी गई है. जाहिर है ब्लॉगरों के नाम व यूआरएल नदारद हैं, और बदले में किसी और का नाम दिया गया है.

ब्लॉग्स इन मीडिया की एक पोस्ट  में इस अखबार की फुल स्कैन इमेज के साथ बताया गया है कि -

"10 मार्च 2011 को नव दुनिया, भोपाल के साप्ताहिक परिशिष्ट ‘युवा’ में ब्लॉग केन्द्रित एक ऐसा आलेख जिसमें लगभग सभी जानकारियाँ विभिन्न ब्लॉगों से ली गई हैं किन्तु न तो किसी ब्लॉग का नाम दिया गया है और ना ही किसी ब्लॉग लेखक का! हैरत की बात यह भी है कि कॉमा, फुलस्टॉप भी हूबहू उठा लिए गए हैं!!

जिन ब्लॉगों की सामग्री हूबहू ली गई हैं उनमें रवि रतलामी (रविशंकर श्रीवास्तव) का अभिव्यक्ति में लेख, बी एस पाबला के ब्लॉग बुखार से 3 पोस्ट, अविनाश वाचस्पति के नुक्कड़ से एक पोस्ट, शिवम मिश्रा के बुरा भला से एक पोस्ट, नवभारत टाईम्स पर मंगलेश डबराल का ब्लॉग आधारित लेखांश मुख्य हैं।..."

यहाँ बाक्स आइटम में मेरे दो आलेखों की सामग्री लेकर हूबहू छापी गई है, जबकि मैंने यहाँ पर कॉपी राइट नोटिस में ये लगाया हुआ है कि सामग्री का किसी भी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्तें सिर्फ नाम व लिंक दे दें.

प्रसंगवश, हिंदी ब्लॉगिंग की एक किताब भी कुछ अरसा पहले ऐसी ही कट-पेस्ट सामग्री से छपकर आई थी.

आमतौर पर ब्लॉगर इसलिए लिखते हैं कि लोगों तक उनका लिखा, उनके विचार पहुँचे. और, नाम व यूआरएल समेत बाईलाइन दिए जाने से किसी ब्लॉगर को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, मगर उनकी लिखी सामग्री का हूबहू नकल कर अखबार के पन्ने तैयार किए जाएं और अपना बिजनेस चलाया जाए यह किसी सूरत नहीं होना चाहिए.

क्या नव दुनिया अखबार प्रबंधन को अपनी गलती की क्षमा नहीं मांगनी चाहिए और संबंधितों को क्षतिपूर्ति नहीं देनी चाहिए?

war for water

बात चाहे कावेरी के पानी को लेकर दो राज्यों के बीच युद्ध की हो या फिर अपने मुहल्ले में आधे-अधूरे टपकते सार्वजनिक नल पर पानी भरने को लेकर मारामारी की हो. अपने देश में तो पिछले कई वर्षों से नित्य युद्ध हो रहे हैं. भयंकर. मारकाट युक्त. है न अपना देश इस मामले में कहीं आगे. बहुत आगे.

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व्यंज़ल

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क्या हुआ जो नहीं मिलता नल का पानी

सर्वत्र सर्वसुलभ तो है बिसलेरी का पानी

 

टाइटन आई+ का डिजाइनर चश्मा पहन

लोग पूछते हैं कहाँ गया आँख का पानी

 

किसलिए जाते हो यारों किसी गंगोत्री को

अब पॉलीपैक में मिलता है गंगा का पानी

 

इन बेशर्म नदियों को बता ही दिया जाए

किसकी यमुना किसका कावेरी का पानी

 

धोने पोंछने की बातें क्यूं करते हो यारों

यहाँ तो मयस्सर नहीं है पीने का पानी

 

लोगों की देखा देखी अपने यार रवि ने भी

चढ़ा लिया है अपने ऊपर सोने का पानी

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