November 2010

यापा बैंड जर्मनी के चार युवा दोस्तों का है, जिनमें एक तीन गिटार बजाने वाले हैं और एक ड्रमर. वे पेरिस के पास के एक गांव के स्कूल के दिनों से साथ में बजाते आ रहे हैं. इनके अब तक तीन एलबम क्रानिक्स द एन्दो, कैन आई टाक टू यू और पारी-वागा आ चुके हैं और चौथे की तैयारी है. यापा को आप फ़ेसबुक में यहाँ पर पा सकते हैं.

कल उनका लाइव परफ़ार्मेंस था जो इतना जीवंत और शानदार था कि प्रेक्षकों ने खड़े होकर ताली बजाते हुए, दो घंटे के नॉन-स्टाप कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद भी दोबारा संगीत सुनने की मांग की जिसे बैंड ने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकारा और प्रेक्षकों का मान रखा.

यापा अपनी धुनें जमीन से जुड़कर बनाते हैं. वे विश्वभर में गांव गांव देश देश घूमते हैं और वहाँ रह कर स्थानीय संगीतकारों से संगीत सुनते हैं और उसे फिर फ़्यूजन से अपनी धुनें बनाते हैं, जो बेहद नशीली होती है.

एक बार का वाकया उन्होंने बताया कि एक बार वे जीवित ज्वालामुखी देखने गए. ज्वालामुखी के अंदर का लाल पिघलता लावा का सुंदर मनमोहक दृष्य उन्हें इतना भाया कि वे सारे दिन वहीं पड़े रहे और वहीं एक धुन भी तैयार कर ली जो बेहद लोकप्रिय रही.

यापा बैंड की एक प्रस्तुति आप भी देखें नीचे दिए गए यूट्यूब वीडियो पर. यदि आपको बैंड पसंद आया हो तो इसकी कुछ अन्य धुनें  यहाँ लगाई जा सकती हैं.

अपनी वर्ड, एक्सेल, पॉवर प्वाइंट फाईलें फेसबुक मित्रों से साझा करें

Docs.com

मारी कंप्यूटिंग की दुनिया तेजी से क्लाउड की ओर अग्रसर है – मतलब ये कि वो पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। इसके प्रत्यक्ष प्रमाण रूप में जब माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने ऑफ़िस सूट 2010 (जिसमें तमाम आफिस तंत्राँश जैसे कि वर्ड, एक्सेल, पॉवर प्वाइंट आदि शामिल होते हैं) को जारी किया तो उसमें न केवल ऑनलाइन दस्तावेज़ों के संपादन व साझा करने की सुविधा मुहैया कराई बल्कि ऐसे प्रयोक्ताओं के लिए जो ऑफ़िस सूट ख़रीद कर प्रयोग करने की कतई श्रद्धा नहीं रखते थे, डॉक्स.कॉम-बीटा नाम से ऑफ़िस सूट 2010 का ऑनलाइन संस्करण भी फ़ेसबुक के रास्ते जारी किया।

हालांकि माइक्रोसॉफ़्ट फ्यूज लैब्स द्वारा जारी डॉक्स.कॉम अब अभी अपने बीटा संस्करण में ही है और इसमें संपूर्ण ऑफ़िस सूट की सुविधाएँ शामिल नहीं की गई हैं, मगर इस पर त्वरित नजर डालने से इसकी संभावनाओं सुविधाओं के बारे में मालूमात किए जा सकते हैं और ये भी कयास लगाए जा सकते हैं कि भविष्य में क्लाउड कंप्यूटिंग का बिज़नेस मॉडल किस तरह आकार ग्रहण करेगा। यकीनन व्यक्तिगत या घरेलू प्रयोग करने वाला प्रयोक्ता आने वाले समय में बेहद फायदे में रहेगा क्योंकि उसे भारी भरकम राशि खर्च कर महंगे सॉफ़्टवेयर उत्पाद खरीदने नहीं पड़ेंगे। आमतौर पर सभी प्रमुख ऑनलाइन उत्पाद उसे मुफ़्त या अत्यंत किफायती कीमतों में और पूर्णतः कानूनी तरीके से हासिल होंगे। पर्सनल कंप्यूटिंग >>> (पूरा आलेख पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिक करें)

चहुँओर पर्यावरण रक्षा के संदेशों के बीच जब जनता जागृत हो गई तो उसने दस्तावेज़ों के प्रिंट आउट लेना एक तरह से बंद ही कर दिया. टोनर इंक की घटती डिमांड से परेशान निर्माता ने अपने सेल्समैनों से कहा – डिमांड बढ़ाओ या खुद नौकरी छोड़कर बढ़ जाओ.

एक नॉट सो ब्रिलिएंट सेल्समैन के दिमाग में एक बत्ती तब जली जब वो नौकरी न रहने की स्थिति में वापस अपने गांव जाने का प्लान कर रहा था.

वो अपनी प्लानिंग बीच में छोड़-छाड़कर अपने मैनेजर के पास भागा. उसे अपना आइडिया बताया -

“सर, टिकट के प्रतिदिन औसतन दस लाख प्रिंट आउट निकलते हैं. यदि हम बैकग्राउण्ड काला कर दें तो टोनर की खपत चार गुना बढ़ जाएगी.”

मैनेजर की आँखें चमक उठीं. वैसे भी यह तो जरा सी सेटिंग-फेटिंग से हो जाने वाला काम था.

टोनर की डिमांड फिर से बढ़ गई. कंपनी फायदे में चलने लगी.

मार्केटिंग स्ट्रेटेजी से पहले की टिकिट -

marketing strategy

बाद की टिकिट

marketing strategy 2

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clip_image002

हमारे प्राइम मिनिस्टर सही कहते हैं. वाजिब कहते हैं. वैसे भी नेताओं-मंत्रियों के लिए ग़लती और ग़लत काम में बाल बराबर ही तो फ़र्क़ होता है. और, दरअसल जो बाल बराबर फ़र्क़ होता है वो जरा कुछ इस तरह का होता होगा –

कांग्रेसी मंत्री करे तो ग़लत काम, कोएलिशन पार्टनर का मंत्री करे तो, वाजिब ग़लती.

मंत्री करे तो वाजिब ग़लती, अफ़सर करे तो ग़लत काम.

बड़ा अफ़सर करे तो वाजिब ग़लती, अदना अफ़सर करे तो ग़लत काम.

वैसे, ये फ़ॉर्मूला भारत में सर्वव्यापी है. सिर्फ सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को जोड़कर इस यूनिवर्सल नियम को नहीं देखा जाना चाहिए. प्रधानमंत्री कोई नई बात नहीं कह रहे. अपने दैनिक सामाजिक जीवन में जरा झांकें –

पति करे तो वाजिब ग़लती, पत्नी करे तो ग़लत काम.

पुत्र करे तो वाजिब ग़लती, पुत्री करे तो ग़लत काम.

पिता करे तो ग़लत काम, पुत्र करे तो वाजिब ग़लती (या कई मामलों में इसके उलट).

सास करे तो वाजिब ग़लती (वो भी बड़ी मामूली), बहू करे तो ग़लत काम (वो भी बहुत भारी!).

सूची यूँ लंबी खिंचेगी, मगर उसे खींचने जैसा ग़लत काम करने का क्या फ़ायदा?

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पहला उपहार -

aimp hindi

एक शानदार एमपी3 म्यूजिक प्लेयर एआईएमपी2 हिंदी में!

पहले देखते हैं कि शानदार क्यों?

अपने सदाबहार म्यूजिक प्लेयर एमपी3 में ट्रैक के साउंड को आन-द-फ्लाई (माने चलते चलते या बजाते बजाते) नार्मलाइज करने की सुविधा नहीं है. आमतौर पर जब हम प्लेलिस्ट पर बहुत से गीतों को बजाते हैं तो होता ये है कि कोई गीत तो तेज आवाज में बजता है और कोई धीमा. आपको प्रायः हर ट्रैक में अथवा हर एलबम में आवाज को कम ज्यादा करना ही होता है. ये बहुत ही झंझट भरा काम होता है. यदि आप विनएम्प में साउन्ड नार्मलाइज करते हैं तो उसके लिए अलग विकल्प से करना होता है और विनएम्प उसे एक तरह से कन्वर्ट कर रखता है और इस हेतु उसे समय और प्रोसेसिंग पावर की जरूरत होती है. विंडोज के डिफ़ॉल्ट म्यूजिक प्लेयर विंडोज मीडिया प्लेयर में चलते-चलते साउंड नार्मलाइज की सुविधा तो है, मगर वो आमतौर पर प्रचलित नहीं है और सिस्टम रिसोर्स बहुत खाता है.

ये सब समस्याएँ एआईएमपी2 म्यूजिक प्लेयर में नहीं है. एआईएमपी2 म्यूजिक प्लेयर में ध्वनि को बजाते बजाते ही स्वचालित नार्मलाइज करने का विकल्प है (मुख्य मेन्यू > डीएसपी प्रबंधक > आवाज स्वचालित सामान्य करें) जिससे आपको हर एलबम के हर ट्रैक में एक जैसी आवाज मिलेगी और आपको बारंबार आवाज को एडजस्ट करना नहीं पड़ता.

साथ ही एआईएमपी2 म्यूजिक प्लेयर अब हिंदी भाषा में भी उपलब्ध है. आपको करना बस यह है कि एआईएमपी2 म्यूजिक प्लेयर को यहाँ से डाउनलोड कर संस्थापित करें (ध्यान दें कि साइट रूसी भाषा में है तथा आपको अंग्रेज़ी में देखने के लिए ऊपरी दायें कोने पर अंग्रेजी En बटन पर क्लिक करना होगा)तथा इसकी लैंगुएज डिरेक्ट्री जो कि आमतौर पर

C:\\program files\aimp2\langs

में होती है उसमें हिंदी भाषा फ़ाइल hindi.lng कॉपी कर दें. हिंदी भाषा फ़ाइल यहाँ से डाउनलोड करें. भविष्य के संस्करणों में उम्मीद है कि यह विकल्प स्वचालित मिलेगा, और अलग से हिंदी भाषा फ़ाइल कॉपी करने की जरूरत नहीं होगी. एआईएमपी2 चलाएँ और मुख्य मेन्यू से भाषा पर जाकर हिंदी चुनें, और म्यूजिक प्लेयर को हिंदी में चलाकर संगीत का हिंदीमय आनंद लें. आपको विंडोज़ के संदर्भ मेन्यू (कॉन्टैक्स्ट मेन्यू, जो किसी भी मीडिया फ़ाइल पर दायाँ क्लिक करने पर मिलेगी ) में भी एआईएमपी प्लेयर से संबंधित हिंदी मेन्यू उपलब्ध होंगे.

वैसे तो विनएम्प के यूआई को बहुत पहले से स्व. धनंजय शर्मा द्वारा हिंदी में अनुवादित किया जा चुका है, मगर अभी तक (संभवतः) डिस्प्ले समस्या के कारण हिंदी भाषा विनएम्प में अभी भी शामिल नहीं है. एआईएमपी2 विनएम्प जैसा ही तगड़ा और कई मामलों में उससे बेहतर (क्योंकि यह विनएम्प डीएसपी प्लगइनों को सपोर्ट करता है, तथा साथ ही अंतर्निर्मित रेकॉर्डर के साथ भी आता है) है. हिंदी इंटरफेस युक्त अपने तरह का पहला संगीत प्लेयर भी है यह.

अद्यतन – एआईएमपी प्लेयर पर सीनेट एडीटर रीव्यू यहाँ देखें तथा गीक रीव्यू यहाँ देखें

 

दूसरा उपहार -

तकनीकी हिंदी समूह व विकिपीडिया में सर्वाधिक सक्रिय सदस्यों में एक श्री अनुनाद जी ने कृतिदेव हंदी फ़ॉन्ट से यूनिकोड (मंगल) फ़ॉन्ट परिवर्तक का एमएस वर्ड मैक्रो बनाया है. इस मैक्रो को आप अपने एमएस वर्ड में इंस्टाल कर सकते हैं तथा कृतिदेव के मैटर को मात्र एक क्लिक के जरिए वर्ड के भीतर ही यूनिकोड (मंगल) में परिवर्तित कर सकते हैं. परिवर्तन आमतौर पर शुद्ध होता है और बड़ी फ़ाइलों के लिए थोड़ा समय लेता है. मैंने कोई पांच पेज का मैटर इससे कन्वर्ट किया जो तीन मिनट में कन्वर्ट हुआ.

इस मैक्रो फ़ाइल को आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं

 

इस मैक्रो को इंस्टाल करने के लिए एमएस वर्ड 2003 में टूल्स --> मैक्रो --->मैक्रोज---> एडिट में जाएँ (वर्ड 2007 में व्यू –> मैक्रो –> क्रिएट) ।  वहाँ  विजुअल बेसिक एडिटर खुलेगा। उसमें  फाइल ---> इम्पोर्ट फ़ाइल (डाउनलोड किया मैक्रो फ़ाइल) करें। फिर  वर्ड में कृतिदेव का मैटर वाली फ़ाइल खोल कर या कृतिदेव में लिखकर इस मैक्रो को चलाएँ.

अद्यतन 2 – अनुनाद जी ने इस मैक्रो को प्रयोग करने का विस्तृत विवरण दिया है -

किसी दिये हुए मैक्रो को एमएस वर्ड में चढ़ाने के कम से कम  दो तरीके हो सकते हैं-
१) अपना वर्ड प्रोग्राम खोलिये। Tools --> Macro ---> Record New Macro करिये।  यहाँ सबसे उपर मैक्रो का कुछ नाम दे दीजिये।  OK कर दीजिये। मैक्रो रिकार्डिंग शुरू हो गयी है। वर्ड में  रिकार्डिंग सम्बन्धी एक आइकन (प्रतीक छबि) भी दिखेगी। इसमें 'Stop recording' कर दीजिये। लीजिये  एक 'डम्मी'  मैक्रो रेकार्ड हो गया। माना कि आपने इसका नाम Macro2 दिया था।
अब फिर Tools--->Macro--->Macros में जाइये। यहाँ मैक्रो नेम में आपको Macro2 डालना है और Edit  बटन दबाना है।  एक नया पेज खुलेगा जिसमें कर्सर  Macro2  की आरम्भिक लाइन पर जाकर रुकेगा। आपको कुछ इस प्रकार का टेक्स्ट दिखेगा-
Sub Macro2()
'
' Macro2 Macro
' Macro recorded 11/9/2010 by samata
'
End Sub
आपको उपरोक्त टेक्स्ट  (Sub Macro2   से लेकर  End Sub तक का)  के स्थान पर  वह मैक्रो पेस्ट करना है जो हमने  वर्ड के लिये बनाकर पोस्ट किया था। पेस्ट  करने के बाद  'सेव' कर दीजिये (File ---> save Normal)।
अब अपने वर्ड में कोई कृतिदेव१०  डॉकुमेन्ट लोड कीजिये जिसका  फॉन्ट बदलना है।  फिर  Tools --> Macro ---> Macros  में जाइये। इसमें  Macro name के लिये  Macro2 चुनिये और इस बार  Run  बटन दबाइये। देखिये आपके डॉकुमेन्ट का फॉन्ट बदल रहा होगा या बदल गया होगा।
२) दूसरा तरीका इम्पोर्ट करने वाला है। इसके लिये सबसे पहले  जो मैक्रो हमने पोस्ट किया है उसे किसी फाइल में सेव कीजिये। अच्छा हो उसका एक्स्टेंशन *.bas   दें या  *.txt दें  । अब   Tools ---> Macro ---> Visual Basic Editor कीजिये। विजुअल बेसिक एडिटर में जाकर   File ---> Import File कीजिये।  इम्पोर्ट वाले मेनू में अपने  मैक्रो फाइल का नाम दें और Open  बटन पर क्लिक करें। काम हो गया।
इसे अब चला (रन) सकते हैं। चलने की विधि वही है जो उपर वर्णित है।  अर्थात -
अब अपने वर्ड में कोई कृतिदेव१०  डॉकुमेन्ट लोड कीजिये जिसका  फॉन्ट बदलना है।  फिर  Tools --> Macro ---> Macros  में जाइये। इसमें  Macro name के लिये  Macro2 चुनिये और इस बार  Run  बटन दबाइये। देखिये आपके डॉकुमेन्ट का फॉन्ट बदल रहा होगा या बदल गया होगा।

 

पिछले दिनों टेक्नोराती ब्लॉग सर्वे का आयोजन किया गया. अब तक के सर्वाधिक 7200 ब्लागरों द्वारा सर्वे में भाग लिया गया जिसमें मैंने भी भाग लिया था.

वैसे तो यह सर्वे प्रमुखतः अंग्रेज़ी ब्लॉगों के आंकड़े ही दिखाता है, मगर दुनिया के तमाम भाषाओं के ब्लॉगिंग रूख की ओर इसके आंकड़े इंगित तो करते ही हैं.

कुछ दिलचस्प आंकड़े हैं -

 

  • पिछले वर्ष 9% की तुलना में इस वर्ष 21% ब्लॉगर किसी न किसी रूप में व्यावसायिक रूप से ब्लॉगिंग करते हैं.
  • इनमें से 11% ब्लॉगरों की प्राथमिक आय ब्लॉगिंग से होती है.
  • शौकिया ब्लॉगिंग करने वाले 65% हैं जो पिछले वर्ष के मुकाबले 7% कम हैं. इसका अर्थ ये हुआ कि बहुत से शौकिया ब्लॉगर व्यावसायिक ब्लॉगिंग में उतर गए? शायद.
  • पिछले वर्ष 1% के मुकाबले इस वर्ष कारपोरेट ब्लॉगरों की संख्या में इजाफ़ा हुआ और आंकड़ा 4% तक जा पहुँचा.
  • अभी भी ब्लॉगिंग में पुरुषों का वर्चस्व है. दो तिहाई ब्लॉगर पुरूष ही हैं.
  • ब्लॉगिंग के साथ साथ सामाजिक मीडिया का प्रयोग बढ़ रहा है और फेसबुक और ट्विटर का योगदान ब्लॉगों के प्रचार प्रसार में किया जा रहा है.
  • 39% ब्लॉगर अब प्रभावी ब्लॉगिंग के लिए स्मार्टफ़ोनों व टेब्लेट्स का भी प्रयोग कर रहे हैं.
  • 70% ब्लॉगर छोटे छोटे पोस्ट लिखने में विश्वास रखते हैं और 50% ब्लॉगर पोस्टों के साथ चित्रों इत्यादि मीडिया का भी प्रयोग करते हैं.
  • 65% ब्लॉग जनता 18-44 वर्ष उम्र की है.
  • क्या आप अपने आपको प्रोफ़ेशनल ब्लॉगर मानते हैं? यदि हाँ, तो आपके पास औसतन 3 से
    अधिक ब्लॉग होने चाहिएँ.
  • शीर्ष के 100 ब्लॉग में प्रत्येक में प्रति माह औसतन 500 के आसपास पोस्ट प्रकाशित होती है. अब
    जरा आप बताएँ कि माह में आपके ब्लॉग में औसतन कितनी पोस्ट प्रकाशित होती है?
  • 65% लोगों का मानना है कि ब्लॉगिंग को चहुँओर गंभीरता से लिया जाने लगा है. वाह! ये हुई न बात!

 


(ऊपर का चित्र – साभार – टेक्नोराती ब्लॉग)

विस्तृत जानकारी नीचे दिए गए स्क्रिब्ड विंडो में देखें.

State Of The Blogosphere Presentation 2010

तुझे मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं?

मैं अपने ज्ञान और स्वज्ञान के भरोसे अपने ब्लॉग पोस्टों में, अपने हिसाब से, अपने विचार से, स्तरीय सामग्री ही लिखता हूं. मेरे ये पोस्ट दूसरों को मेरे अज्ञान, अल्पज्ञान से भरे कूड़ा लगते हैं तो इसमें मैं क्या करूं? मैं अपने ब्लॉग में अपने संपूर्ण होशोहवास व ज्ञान के हिसाब से, अपने हिसाब से सही-सही ही लिखता हूँ. दूसरों को ये भले ही गलत लगें. अब मैं दूसरों के हिसाब से तो नहीं लिख सकता. ....क्योंकि ये ब्लॉग मेरा है.

मेरे विश्वास, मेरी धारणाएँ मेरे अपने हैं. मैं उन्हें किसी के कहने से और किसी वाजिब-ग़ैर-वाजिब तर्क-कुतर्क से तो नहीं बदल सकता और मैं अपने उन्हीं विश्वासों और उन्हीं धारणाओं की बदौलत और अकसर उन्हें पुख्ता करने के लिए, दुनिया को बताने-समझाने के लिए, अपने ब्लॉग पोस्ट लिखता हूँ. मैं दूसरों के विश्वास और दूसरों की धारणाओं के अनुसार तो नहीं लिख सकता. ....क्योंकि ये ब्लॉग मेरा है.

मैं अपनी भाषा, अपनी शैली में लिखता हूँ. अपने ब्लॉग पोस्ट पर किसी को गाली देता हूँ या किसी की वंदना करता हूँ तो इससे किसी को क्या? मैं अपने ब्लॉग पर छिछली उथली भाषा का इस्तेमाल कर भाषा पर बलात्कार करने को या शुद्ध-सुसंस्कृत भाषा लिखने को स्वतंत्र हूँ. सरल भाषा में लिखता हूँ या जटिल इससे किसी को क्या सरोकार? मैं अपनी उथली-छिछली-खिचड़ी भाषा में लिखता हूँ. मैं दूसरों के कहे अनुसार तथाकथित सभ्य बनकर नहीं लिख सकता. ...क्योंकि ये ब्लॉग मेरा है.

अपडेट - मैं किसी भी विषय पर, चाहे उस पर मेरी जानकारी हो या न हो, बड़े ही एक्सपर्ट तरीके से, प्रोफ़ेशनल अंदाज में, बड़ी गंभीरता से, दमदारी से लिख सकता हूँ. वह भी अपने एंगिल से, अपने तर्कों-कुतर्कों से सही ठहराते हुए. मैं आधे-अधूरे और अपने हिसाब से संपादित उद्धरणों के द्वारा अपनी किसी भी बात को सत्य सिद्ध कर सकता हूँ. .... क्योंकि ये ब्लॉग मेरा है .

अब, मेरे लेखों से, मेरे ब्लॉग पोस्टों से किसी को मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं?

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व्यंज़ल

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सभ्य बनने की कोशिश यूँ मेरी भी पूरी थी

तेरे शहर की फ़िजाँ में कोई बात रही होगी

 

ये तो कबूल लो पार्टनर कि इस रुसवाई में

हमेशा की तरह जरा सी कोई बात रही होगी

 

दंगे-फ़साद यूं मुफ़्त में कहीं भी नहीं होते

मानो न मानो कोई न कोई बात रही होगी

 

सब ने यहाँ पे सी लिए हैं होंठ अपने अपने

पता कैसे चले कि क्या कोई बात रही होगी

 

हमें भी कोई शौक नहीं था बतंगड़ का रवि

बात पे निकली थी तो कोई बात रही होगी

**-**

(2007 में लिखी गई यह पोस्ट आज भी मौजूं नहीं है?)

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