नई टेक्नोलॉज़ी के अपने नए-नए खतरे हैं. अलग किस्म के. भयंकर. लीजिए, अब आपके लिए आ गया है कुरूपता मापी. अभी तो यह आईफ़ोन के एप्लीकेशन के रूप में आया है, जल्द ही यह सभी स्मार्टफ़ोनों के लिए उपलब्ध हो जाएगा. यह आईफ़ोन एप्लीकेशन सामने वाले की कुरूपता का पैमाना 1 – 10 स्केल पर बताता है. यदि आपको पूरे दस अंक मिलते हैं तो इसका अर्थ है कि आप सर्वाधिक कुरूप हैं.
इस एप्लीकेशन के वर्णन में लिखा है –
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.... क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आप बदसूरत हैं और आपके दोस्त बस आपका मन रखने के लिए ये बात बताते नहीं हैं और फोकट आपके रूप रंग की तारीफ़ें करते रहते हैं? या फिर आपका कोई कुरूप दोस्त है और आप उससे ये बात कह नहीं पा रहे हैं और चाहते हैं कि किसी तरह ये बात उस तक पहुँच जाए?
कुरूपता मापी आपका फोटो खींचता है, आपके चेहरे के फोटो को स्कैन करता है और फिर आपको 1-10 के कुरूपता स्केल पर आंकता है.
यदि आपको 10 नंबर मिलते हैं तो आपका चेहरा संभवतः इतना कुरूप है कि सिर्फ आपकी माँ ही आपको प्यार कर सकती है. आपकी रेटिंग कितनी खराब है उसके आधार पर कुरुपता मापी आपके लिए हाथों हाथ टिप्पणी भी मारता है!
तो, अब अपने रूप रंग पर गर्व करना, यदि अब तक करते रहे हों तो, छोड़ दें. आईफ़ोन जैसे स्मार्ट फोनों में कुरूपता मापी आ गया है. वो दूध का दूध पानी का पानी कर देगा. इससे पहले कि लोग आपकी रेटिंग करें, आप स्वयं अपनी असलियत जान लें ताकि अपने जीवन का सबसे बड़ा धक्का खाने से बच सकें. वैसे भी, भ्रम में जीने के बजाए, आदमी को सत्य को सदैव स्वीकारना चाहिए.
सुंदरता देखने वाले की आँखों में होती है. कभी होती होगी. अब तो सुंदरता सामने वाले के स्मार्टफोन में बसती है.
अब आपको स्मार्टफ़ोन रखने वाले लोगों से सावधान रहना होगा. बल्कि उनसे डरकर रहना होगा. और यथा संभव दूरी बनाकर रखना होगा. क्या पता सामने वाले के हाथ में कोई कुरूपता मापी लोडेड स्मार्टफ़ोन हो और वो आपके सामने आपकी असलियत धर कर रख दे. क्या पता उसका स्मार्टफोन आपकी तस्वीर चुपके से खींच ले और आज के आपके मेकअप की धज्जियाँ उड़ाकर रख दे. वर्धा ब्लॉगर सम्मेलन में ब्लॉगरों ने एक दूसरे की जमकर तारीफ़ें कीं. यदि उनके स्मार्टफ़ोनों में ये ऐप्लीकेशन लोड होता तो संभवतः बात ही कुछ और होती. इसी वजह से अगले सम्मेलन में खुलेआम बुलावा होने के बावजूद शायद ही कोई ब्लॉगर पहुँचे – क्योंकि तब तक तो सभी ब्लॉगरों के पास इस ऐप्लीकेशन समेत स्मार्टफ़ोन आ चुके होंगे और प्रकटतः खतरा कोई उठाना नहीं चाहेगा. फिर किसी को कोई शिकायत भी न होगी कि किस बड़ी नाक वाले को बुलाया और किस कटी-कच्चे कान वाले को छोड़ दिया!
अभी तक तो होता आया है कि लोग-बाग़ एक दूसरे को झूठा दिलासा और झूठी तारीफें देते रहे हैं. नवीन टेक्नोलॉज़ी की नवीन दुनिया में झूठ का क्या काम? जो है आपके स्मार्ट फ़ोन में है. और पूरा सत्य है. और, यदि सामने वाले ने आपके चेहरे का जुगराफिया बताया तो आप भी कम और पीछे क्यों रहें? उसके चेहरे का नक्शा आप भी बता दें – कि भइए, ठीक है, मेरी रैंकिंग आप आठ बता रहे हो, पर तुम्हारी भी तो पौने आठ या सवा आठ है!
पर, असली खतरा तो तब होगा जब ऐसे स्मार्टफ़ोन एप्लीकेशन आएंगे जो आपके मन की बात को पढ़ लेंगे. एडवांस में. जब आपके मुखारविंद से झर रहे फूल से कोमल और सुंदर वाक्यों के पीछे छिपी असल गंदगी को स्मार्टफ़ोन सही इंटरप्रेट करेंगे असल समस्या तब होगी, और अच्छी खासी होगी. समझिए कि ऐसे ऐप्लीकेशन भी अब आने ही वाले हैं, वो भी अच्छी तादाद में. इट इज जस्ट ए मैटर आफ टाइम. नवीन टेक्नोलॉजी के ये नवीन खतरे हमें उठाने ही होंगे. आप तैयार हैं?