July 2010

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यदि हाँ, तो कुछ करने का यही समय है.

हम आप सभी के मन में ढेरों जिज्ञासाएँ रहती हैं. बहुत बार बहुत सी चीजों के बारे में जानने समझने की इच्छा होती है और समस्याओं के  हल जानने की आवश्यकता होती है.

अंग्रेज़ी में तो इंटरनेट पर आपको आपकी हर किस्म की जिज्ञासा का हल मिलेगा.

मगर हिंदी में?

हिंदी में जब सामग्री का ही घोर अकाल है, प्रयोक्ताओं के सूने जंगल में कव्वे-चमगादड़ भी नहीं उड़ते तो हिंदी में आपकी किसी जिज्ञासा का हल मिलना असंभव है. कम से कम हाल फिलहाल.

मगर आप इसमें अपना थोड़ा सा योगदान दे सकते हैं.

पिछले एक पोस्ट में मैंने आपसे तकनीकी हिंदी गूगल समूह से जुड़ने का आह्वान किया गया था. ऐसे समूह बड़े ही लाभकारी हैं, और इनमें से कई आपकी जिज्ञासाओं की पूर्ति के लिए वाकई बढ़िया परिणाम दे रहे हैं.

मगर इनके साथ एक कमी ये है कि इनमें बिखरी सार्थक सामग्री, ज्ञान की बातें बड़ी बिखरी हुई पड़ी हैं और गूगल की इंडेक्सिंग में भी इन्हें तरजीह नहीं दी जाती!

ऐसे में विकल्पों की तलाश लाजिमी है.

देबाशीश ने इसका एक हल तलाथा और तकनीकी हिंदी समूह पर ये ईमेल लिखा -

मित्रों,
चिट्ठाकार समूह पर मुख्यतः दो किस्म के संदेश आते हैं : जानकारी देने
वाले/बहस
के मुद्दे या फिर तकनीकी या अन्य विषयों पर सवाल. ये दूसरे किस्म के संदेश
(सवाल-जवाब) पत्रसूची में खो कर रह जाते हैं, गूगल पर आसानी से खोजे नहीं
मिलते.
मैं कुछ समय से स्टैकऔवरफ्लो Stackoverflow.com पर आता जाता रहा हूँ,
सवाल-जवाब के लिये यह बेहद कामयाब मंच बन चुका है. यह प्लैटफार्म वे अब अन्य
लोगों को भी दे रहे हैं. तो मैंने सोचा क्यों न तकनीकी सवालों, हिन्दी व अन्य
भारतीय भाषाओं के प्रयोग या भारत या अन्य किसी भी मुद्दे से जुड़े सवाल हिन्दी
में पूछने और हिन्दी में ही जवाब पाने के लिये हम इसका प्रयोग करें. इसके
लिये
हमने अर्जी दी है
http://area51.stackexchange.com/proposals/11782/indic-qaपर.
आप चाहें तो इस प्रस्ताव पर आपकी सहमति की मुहर ला सकते हैं, बताये पेज पर
जाकर फालोवर बनें, अगले पड़ाव तक जाने के लिये कम से कम ६० लोगों का साथ
चाहिये.
फिर देखते हैं कि प्रयास कैसा चल निकलता है.
आपका
देबाशीष

 

तो, स्टेकओवरफ्लो पर हिंदी सवाल-जवाब का खाता खोलने के लिए आवश्यक है कि वहाँ डमी सवाल-जवाब चिपकाए जाएँ और कुछ वोटिंग-शोटिंग की जाए. कोई तीसेक (इन पंक्तियों के लिखे जाते तक 26) लोग और चाहिएँ जो http://area51.stackexchange.com/proposals/11782/indic-qa पर जाकर फालोअर बनें तथा अपने प्रश्न लिख (इन पंक्तियों के लिखे जाने तक 5-5 प्रश्न ऑनटॉपिक और ऑफटॉपिक आवश्यक है) दें.

प्रसंगवश, विश्व की सबसे बड़ी इंटरनेट साइट फेसबुक ने भी हाल ही में अपना अंतर्निर्मित सवाल-जवाब तंत्र को जाँचना परखना चालू किया है. जाहिर है, सवाल सबके मन में होते हैं, तो जवाबों की भी कोई कमी नहीं होती.

तो आइए, नेट पर हिंदी को थोड़ा और समृद्ध करें, अपनी जिज्ञासा को शांत करें.

 

पुनश्च: – हिंदी के लिए खास हिंदी में दो प्रश्नोत्तर फोरम पहले ही चालू होकर बंद हो चुके हैं. एक तो अक्षरग्राम पर परिचर्चा था, जो शुरू में धुँआधार चला बाद में गायब ही हो गया. दूसरा तरकश पर नुक्कड़ नाम से बनाया गया था, जो ज्यादा चल ही नहीं पाया. परंतु तब उतने प्रयोक्ता हिंदी में नहीं थे. अब शायद बात बने और जिज्ञासा चल निकले.

sadata aanaj सड़ता अनाज

व्यंज़ल

सिस्टम इंडियन है सड़ेगा ही

सियासत में समग्र सड़ेगा ही

 

मुहब्बत कब की मर चुकी

मॉडर्न लव है तो सड़ेगा ही

 

दुनिया बदल देने का यह

खयाली पुलाव है सड़ेगा ही

 

मरा हुआ ही पैदा होता है

जब आदमी तो सड़ेगा ही

 

सोचता रहता है बैठे रवि

करे कुछ नहीं तो सड़ेगा ही

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याहू का जिओसिटीज 1994 में चालू हुआ था और जब यह अंततः 27 अक्तूबर 2009 को अपनी मौत मरा तब तक इसमें तमाम भाषाओं के लाखों करोड़ों उपयोगी पन्ने जोड़े जा चुके थे. इसके इस तरह मरने से मेरे जैसे बहुतों को बेहद दुख हुआ था. हम सभी ने ऑनलाइन सामग्री प्रकाशित करने की शुरूआत जियोसिटीज़ से ही की थी, और हममें से बहुतों की बहुत  सी सार और सार्थक सामग्री जियोसिटीज में थी.

हालांकि जियोसिटीज ने अपना धंधा समेटने से पहले कई बार स्पष्ट तौर पर चेतावनी दे दी थी, मगर फिर भी बहुत से मामलों में लिंक तथा सामग्रियों को उसी रूप में नेट पर रखना जियोसिटीज के सभी प्रयोक्ताओं के लिए अंत तक संभव नहीं हो पाया.

बाद में जियोसिटीज के आमतौर पर सभी पेज आर्काइव.ऑर्ग पर भी उपलब्ध किए गए (मेरा भी पन्ना सुरक्षित है वहां), परंतु फिर भी वो बात नहीं बनी. इस बीच एक सेवा ओओसिटीज चली आई जो आपके याहू जियोसिटीज़ को उसी रूपरंग में मिरर के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है.

तो, यदि आप बहुत से – जै हनुमान जी की तरह भाग्यशाली लोगों में से हों तो आपका जियोसिटीज का पन्ना ओओसिटीज में मिल जाए. मेरा पन्ना तो खैर नहीं मिला, मगर वो आर्काइव.ऑर्ग में सुरक्षित है. इससे यह भी सिद्ध होता है कि चाहे कोई कितना ही मिटा डाले, एक बार नेट पर पोस्ट की गई चीज अमर हो जाती है. वो यहाँ नहीं तो वहाँ, और आज नहीं तो कल कहीं न कहीं से प्रकट हो ही जाएगी!

यदि आपका जियोसिटीज पन्ना ओओसिटीज पर है, तो आप जियोसिटीज की अपनी पुरानी कड़ियों को सुधार सकते हैं.

जैसे कि तख्ती की पुरानी जियोसिटीज कड़ी थी -

 

http://www.geocities.com/hanu_man_ji/hindi_page.html

 

जो अब ओओसिटीज पर बन गई है

http://www.oocities.com/hanu_man_ji/hindi_page.html

 

आप ओओसिटीज पर अपने प्रयोक्ता नाम से खोज सकते हैं या फिर सीधे ही वहां जा सकते हैं ओओसिटीज.कॉम के आखिर में प्रयोक्ता नाम लगा कर. जैसे कि जै हनुमान जी के लिए -

http://www.oocities.com/hanu_man_ji/

पर, हो सकता है कि कुछ डाउनलोड फ़ाइलें वहाँ लिंक में उपलब्ध न हों, जैसे कि यहाँ पर तख्ती फ़ाइल डाउनलोड के लिए नहीं मिली. तो यदि आप तख़्ती के लिए इस साइट पर जाना चाहते हैं, तो तख्ती का नया होस्ट है - http://takhti.web.officelive.com/default.aspx 

जिओ जियोसिटीज! ओओसिटीज़!

heavier are brainer

एक नई खोज जो दुनिया को बदल कर रख देगी

यह तो चक्के के आविष्कार की तरह है, जिसने सदियों पहले दुनिया को बदल कर रख दिया था.

वैज्ञानिकों ने अब यह खोज कर दिखाया है कि महिलाएँ जितनी ज्यादा मोटी होंगी, उनका दिमाग उतना ही ज्यादा तेज, सक्षम और दक्ष होगा.

इस खोज से तो, अचानक ही, जैसे दुनिया बदल गई है. आज के अख़बार में इस समाचार को पढ़कर आधी दुनिया खुशियाँ मना रही है, जिसमें मेरी बीवी भी शामिल है. अचानक ही उसका टेंशन जैसे कि टें बोल गया है. हर सुबह उठने पर वो वेइंग स्केल में अपने कम न होते वज़न को देख कर दिन भर व्यथित होती रहती थी, आज इस समाचार को पढ़कर वो सुबह से ही खुश है! आज वो अपने भारी भरकम, तेज दिमाग वाली होने के अहसास से बेहद प्रसन्न है.

इस क्रांतिकारी खोज की वजह से चहुँओर उथल पुथल मचनी ही है. अखबारों में वैवाहिक विज्ञापनों में गोरी स्लिम कन्या चाहिए के बजाए गोरी वज़नी कन्या चाहिए दिखाई देने लगेंगे. क्योंकि जितनी ज्यादा वज़नी कन्या उतना वज़नी दिमाग. अब विवाह योग्य कन्या को दिखने में न सिर्फ खाते-पीते घर का होना चाहिए, बल्कि खुद उसे ओवर-डाइट वाली होना चाहिए ताकि दिनों दिन उत्तरोत्तर उसका वज़न और नतीजतन उसका दिमाग बढ़ता रहे.

बाजारों में जमे हुए उच्च क़ीमत के स्लिमिंग ट्रीटमेंट और स्लिमिंग सेंटरों को या तो अपना बोरिया बिस्तरा समेटना होगा या फिर धंधा बदलना होगा. वीएलसीसी स्लिमिंग सेंटर को सीसीएलवी हैवी सेंटर जैसा नया नाम और नया धंधा धारण करना होगा जो स्लिम सुंदर स्त्रियों को ज्यादा सुंदर और श्रेष्ठ दिमाग वाली यानी वजनदार बनाने में सहायता करेगा. वैसे, इस नए धंधे और नए तरह के ट्रीटमेंट के सफल होने के शत प्रतिशत चांस होंगे और असफलता का प्रतिशत नगण्य होगा. स्त्रियाँ नित्य अपना बढ़ता वज़न और फलस्वरूप बढ़ते दिमाग को देख कर प्रसन्न होते फिरेंगीं. एक पतली स्त्री मोटी स्त्री को देख-देख जलेगी कुढ़ेगी, अपने आप को उसके सामने दबा-कुचला महसूस करेग और स्वयं उससे ज्यादा मोटी और इस तरह ज्यादा दिमागदार होने की पूरी कोशिश करेगी. वहीं एक मोटी, स्थूलकाय स्त्री अपने से पतली स्त्री की ओर वितृष्णा की नजर मारेगी और मन ही मन कहेगी – बेदिमाग कहीं की!

स्लिमिंग कैप्सूल, ट्रेडमिल, एरोबिक्स, लिपोसक्शन इत्यादि इत्यादि बातें ऐतिहासिक हो जाएंगीं और नए जमाने के नए, वजनदार विकल्प सामने आ जाएंगे. नए ब्रांड और नए उत्पाद आएंगे जैसे कि एनर्जी और फैट्स से लबालब पोटैटो चिप्स जिसका एक पैकेट खाने पर आपके वज़न में सौ ग्राम की वृद्धि करने की शर्तिया क्षमता रखता है. ट्रेडमिल की जगह ट्रेडकाउच प्रचलन में आ जाएगा जिस पर घंटा भर बैठ कर जँभाई लेते रहने से छंटाक भर वज़न बढ़ने की शर्तिया गारंटी होगी.

पुरुषों के लिहाज से भी यह नई खोज क्रांतिकारी होगी. साइज़ जीरो कन्याओं की तरफ उनका रुझान अब कम होगा. क्योंकि इसमें फिर जीरो साइज दिमाग युक्त कन्याओं से पाला पड़ने का खतरा होगा. जाहिर है, पुरुष ऐसे खतरे उठाने से परहेज करेगा और वो दिमागदार, वजनदार स्त्रियों को तरजीह देगा. वैसे भी असली सुंदरता तो, पुरुषों के लिहाज से, दिमागदार होने में ही है. उसकी सदियों पुरानी जेनेटिकली डिफ़ाइन्ड पसंद नापसंद में गंभीर परिवर्तन के संकेत साफ नजर आ रहे हैं. पुरूष अपने संगी के रूप में स्थूलकाय, भीमकाय, मोटी स्त्री को पाकर प्रसन्न होगा और समाज में गर्व से ज्यादा ऊँचा सिर उठाकर चलेगा – उसकी पत्नी ज्यादा दिमागदार जो होगी.

वैसे भी, इस दुनिया में बेवकूफ़ों, बेदिमाग वालों का क्या काम? तो यदि आप स्त्री हैं तो अपना स्वयं का दिमाग बढ़ाएँ,  और यदि आप पुरुष हैं तो अपने आसपास, घर-परिवार की स्त्रियों का दिमाग बढ़ाने में मदद करें. दुनिया को दिमागदार स्त्रियों से भरपूर बनाने में मदद करें.

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आप चौंकेंगे कि इस पोस्ट का ये अजीब सा शीर्षक क्या बला है?

मैं भी चौंक गया था इस शीर्षक को पढ़कर.

सदा की तरह कुछ खोजबीन कर रहा था तो यह लिंक मिला. म्लूवी – स्पीक टू योर वर्ल्ड!

और, वहीं पर मिला मेरे ब्लॉगरविरतलामी का हिंदी ब्लॉग - छींटें और बौछारें का अंग्रेज़ी संस्करण!

यह रहा म्लूवी पर मेरे ब्लॉग का अंग्रेज़ी संस्करण :

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यह रहा मूल हिंदी संस्करण :

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म्लूवी क्या है?

म्लूवी – एक ऐसी सेवा है जो आपके ब्लॉग के आरएसएस फ़ीड को गूगल अनुवाद की सहायता से विश्व की 43 भाषाओं में अनुवाद कर नए पोस्ट जनरेट करती है और उसे प्रकाशित कर देती है. सब कुछ स्वचालित तरीके से.

तो मैंने आज एक पोस्ट लिखी थी – जीवन के शर्त में शामिल है रिश्वत.

इसे म्लूवी ने अंग्रेज़ी में अनुवादित कर प्रकाशित किया – और उसका शीर्षक दिया – लाइफ़ इज इनक्लूडेड इन द टर्म्स ऑफ़ द ब्राइब…

स्वचालित, मशीनी अनुवाद और स्वचालित पोस्टिंग के लिहाज से क्या बुरा है? और खासकर तब, जब आपकी पोस्टें स्वयंमेव विश्व की 43 भाषाओं में अनुवादित होकर पोस्ट हो रही हैं?

यानी आपने इधर चार लाइन हिंदी में लिख मारा नहीं, और उधर आपकी सर्जना 43 भाषाओं में अनुवादित होकर प्रकाशित हुई नहीं! मान लिया कि अनुवाद परिशुद्ध नहीं है, मगर बंदा कहना क्या चाह रहा है इसकी झलक तो वो पा ही लेता है.

 

तकनॉलाजी की ख़ूबसूरती का एक और प्रमाण? या फिर नेट पर कचरा फेंकने और फैलाने का एक और अद्वितीय प्रयास?

आदम और हव्वा

rishwat (Custom)

व्यंज़ल

/*/*/
जीने के शर्त में शामिल है रिश्वत 
मुरदे दे रहे  कफ़न के लिए रिश्वत


क़िस्सों में भी नहीं प्यार की बातें 
आदम-हव्वा के बीच घुसी रिश्वत


ऐसे दौर की कामना नहीं थी हमें 
खुद को देना पड़ता है यहाँ रिश्वत


बदल चुके हैं इबादतों के अर्थ भी 
कोई फ़र्क़ बताए रस्म है या रिश्वत


हवालात की हवा खानी ही थी रवि
तूने ली/दी नहीं थी जो कोई रिश्वत

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(व्यंजल – फरवरी 2005 की पोस्ट से संशोधित रीठेल. रिश्वत विषय से संबंधित अन्य पोस्टें यहाँ पढ़ें)

साथ ही विंडोज विस्ता और ऑफ़िस २००७/२००३ का भी. प्रतीत होता है कि माइक्रोसॉफ़्ट भी गूगल की तरह भारतीय भाषाई कम्प्यूटिंग में गंभीरता से घुस रही है. नतीजा है दर्जन भर भारतीय भाषाओं में जिनमें असमी, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु शामिल हैं, विंडोज प्रोग्रामों की उपलब्धता.

इसके लिए आपको अपनी मूल संस्थापना में लिप (लैंग्वेज इंटरफेस) संस्थापित करना होगा. लैंग्वेज इंटरफ़ेस डाउनलोड करने के लिए भाषा इंडिया की साइट पर जाएँ. कड़ियाँ भाषानुसार निम्न हैं -

 

Windows 7 LIP

Category Title
Windows Vista LIP

Category Title
Office 2007 LIP

 

Office 2003 LIP

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माईवे आईपीटीवी की एक विस्तृत समीक्षा कुछ समय पूर्व मैंने लिखी थी, तब से आईपीटीवी के जरिए बहुत से चैनल देखे जा चुके हैं, और अब मामला बहुत कुछ मजेदार और रंग जमता जमाता प्रतीत होता है. क्वालिटी और सेवा में सुधार हुआ है. मनोरंजन सामग्री भी जुटाई गई है.

चंद शुरूआती मुश्किलों को झेलने के बाद मेरा माईवे आईपीटीवी बढ़िया चलने लगा और अभी अभी इसमें बहु-प्रतीक्षित नई सुविधा जोड़ी गई है. ऑटो रेकॉर्डिंग की. 50 लोकप्रिय चैनलों (जिनमें सोनी, स्टार प्लस, स्टार वन, कलर, जूम, आजतक इत्यादि शामिल हैं) के रेकॉर्डेड सीरियल और प्रोग्राम अब आप पिछले 7 दिनों के भीतर कभी भी देख सकते हैं. और न सिर्फ आप इन्हें देख सकते हैं, इन प्रोग्रामों को फारवर्ड, रिवर्स और पॉज कर सकते हैं. साथ ही यदि आप चाहें तो यूएसबी एक्सटर्नल हार्डडिस्क लगाकर अपने अन्य पसंदीदा चैनल को भी स्वयं रेकॉर्ड कर सकते हैं. एक तरह से दर्शकों को एंटरटेनमेंट का जैकपॉट दिया गया है.

इसका अर्थ है कि टीवी पर अब आपको बारंबार लगातार एक ही सीरियल में और एक ही ब्रेक में एक ही विज्ञापन को सिर धुनते हुए देखने की आवश्यकता नहीं है. आप लाइव प्रोग्राम के बजाए घंटाभर बाद प्रोग्राम देखें और जैसे ही विज्ञापन आए, उसे आगे फारवर्ड कर दें. एक रेकॉर्डेड चैनल पर मैंने फ़िल्म देखने के लिए लगाया जो कल प्रसारित किया गया था. फिल्म दो घंटे बीस मिनट की थी, जबकि विज्ञापन सहित चार घंटे दस मिनट का समय प्रोग्रेस बार पर दिख रहा था. विज्ञापनों और फूहड़ बेसिरपैर के गानों को आगे खिसका कर मैंने सवा घंटे में फिल्म देख ली, जबकि यदि इसे मैं लाइव देखता तो विज्ञापनों सहित फिल्म को चार घंटे झेलना पड़ता!

फिर, कल यह फ़िल्म प्राइम टाइम यानी रात आठ बजे से लेकर ग्यारह बजे तक दिखाई जा रही थी, जबकि मुझे इस दौरान आवश्यक कार्य से बाहर जाना था. चूंकि यह प्रोग्राम आईपीटीवी में बाद में मेरे लिए स्वचालित रूप से रेकॉर्डेड किया हुआ 7 दिनों तक उपलब्ध रहेगा यह मुझे पता था, अतः मैंने आराम से अपना आवश्यक कार्य निपटाया और फिर इस जरूरी देखे जाने वाले फिल्म का आनंद बाद में अपनी सुविधानुसार लिया. और, जहाँ बिजली आती जाती रहती है वहाँ तो यह बड़ी सुविधा है. इनवर्टर चार्ज हो न हो, चिंता नहीं! तकनॉलाज़ी ने आपके आराम, सुविधा और मनोरंजन में एक और आयाम जोड़ दिया है. है ना?

माईवे आईपीटीवी में फ़िल्में और तमाम अन्य इन्फ़ोटेनमेंट सामग्री भी तेजी से जुटाई जा रही है. हालाकि कुछ मामलों में क्वालिटी खराब है, और रेडियो चैनल के नाम पर पता नहीं क्या बकवास तेज संगीत बजाते रहते हैं, फिर भी यह सेवा अब अतुल्य हो गई है और इसका कोई विकल्प नहीं है. यदि आप किसी अन्य डीटीएच की रेकॉर्डेड सेवा भी लेते हैं तो उसे आपको शेड्यूल करना होगा और आप एक बार में एक से अधिक तथा कुल मिलाकर 100-200 घंटे की लाइव रेकॉर्डिंग ही कर सकते हैं. मगर 50 चैनल के 24 घंटों की पिछले 7 दिन की रेकॉर्डिंग आप नहीं कर सकते. और, 50 चैनल की सीमा आगे बढ़ेगी ही.

माईवे आईपीटीवी – आपकी भी टीवी देखने की आदतों में शर्तिया परिवर्तन कर देगा, जैसे कि इसने मुझमें परिवर्तन कर दिया है. एंड आ’एम लविंग इट.

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महीने की पहली तारीख़ को जैसे ही मैंने अपनी पत्नी के हाथ में अपनी तनख्वाह के हजार हजार के नए-नए करारे नोट रखे, उसने उन नोटों को आगे-पीछे से और रौशनी में ले जाकर इस तरह से जाँचा परखा कि गोया मैं कोई नक़ली नोट छापने वाला क्रिमिनल होऊँ, और उसके हाथ में नक़ली नोटों का बंडल थमा रहा होऊँ.

मेरे चेहरे पर उभर आए अप्रसन्नता के भावों को वह ताड़ गई. पत्नियाँ वैसे भी ताड़ने में माहिर होती हैं जैसे कि पड़ोसिन ने आज नई साड़ी पहनी है तो क्यों और नहीं पहनी है तो क्यों. य़ा फिर पतिदेव आज नीला सूट पहन कर ऑफ़िस जा रहे हैं तो क्यों, और लाल सूट पहन कर नहीं जा रहे हैं तो क्यों. बहरहाल, चूंकि उसके हाथों में मेरी महीने भर की कमाई थी, तो उसने मिश्री-घुली आवाज में स्पष्टीकरण दिया – तुम्हारा क्या, जो सामने वाले ने पकड़ाया ले के चले आते हो – बाजार से सड़ी धनिया पत्ती की तरह. क्या पता इनमें से कोई नक़ली नोट हो? अख़बार में आए दिन नक़ली नोटों की खबरें छपती रहती हैं. उसके कहे गहरे अर्थ वाले भावों को मैं समझ गया था – शायद वो कम से कम एक मामले में तो सही कह रही थी - काश विवाह के समय मैं कुछ देख-दाख लिया होता!

मैंने पूछना चाहा कि मैं कब ऐसे नक़ली नोट ले के आ गया था जो मुझे संदेहास्पद समझा जा रहा है. मगर मैं चुप कर गया. वैसे भी एक सफल पति को अधिकतर मामलों में चुप लगा जाना चाहिए. और, पत्नी ही क्या, आप अपने अजीज, लंगोटिया दोस्त को हजार रुपए टिका कर देखें कि भइए, जरा छुट्टा देना तो. वो उस नोट को यूँ एक्जामिन करेगा जैसे कि वास्तव में दुनिया का वही एक अकेला नक़ली नोट है, और उसे उसका बेहद अजीज दोस्त टिका रहा है, फंसा रहा है. आप शर्म से पानी पानी हो जाएंगे ये सोच कर कि साला देखो, दोस्ती का दम भरता है, औक़ात एक हजार की नहीं. नोट को नक़ली समझ कर मुआयना कर रहा है. क्या मैं उसे नक़ली नोट टिकाऊंगा? और यदि टिका भी दिया तो क्या दोस्ती के इतने माने भी नहीं?

अभी पिछले दिनों बिजली विभाग के दफ़्तर में बिल जमा कराने पहुँचा. बिजली वैसे तो यूँ रहती नहीं, मगर बिल बाकायदा बिला नागा चला आता है और हर बार बढ़-चढ़कर. कभी कभी तो लगता है कि महंगाई बिजली के बिल पर ज्यादा, दो-गुना चौ-गुना असर करती है. तो, दो हजार नौ सौ निन्यान्बे रुपए के बिल के साथ हजार हजार के तीन नोट मैंने बिजली बाबू को टिकाए तो उसने बड़ी वितृष्णा से कहा – छुट्टे नहीं हैं? वह तो एक तरह से नोटों को लेने से इंकार कर रहा था, और मुझे घूरता बैठा रहा था थोड़ी देर तक जब तक कि पीछे वाले हल्ला नहीं करने लगे कि क्या बाबू घास खाने लग गया है जो इत्ती देर हो रही है. मजबूरी में उसने मेरे हाथों से हजार के तीन नोट लिए और उनका बारीकी से मुआयना करने लगा. उसकी निगाहों में भी मैं वही वाला क्रिमिनल था जो देश में नक़ली नोट छाप-छाप कर सप्लाई करता है और जैसे कि ये तीन नोट अभी ही छापकर मैंने लाए हैं.

मैंने उससे पूछा कि साहब जी, आपके पास वो जो नक़ली नोट चेक करने की मशीन लगी है उससे चेक क्यों नहीं करते? काम जल्दी होगा और परफेक्ट होगा. तो उसने बताया कि सप्लायर और साहब की मिली भगत से नक़ली मशीन सप्लाई हो गई है और वो असली नोट को नक़ली और नक़ली को असली बताता है. इसलिए तमाम नोटों में से नक़ली को पहचानने के लिए उसे अपने इंट्यूशन (किसी भी नोट को नक़ली बता कर नहीं लेने का अधिकार) और अनुभव का सहारा लेना पड़ता है.

फिर उसने नोट पर मेरा बिजली का कनेक्शन नंबर लिखा और मेरा मोबाइल नंबर मांगा. मैंने पूछा कि भइए, बिल जमा करवाने पर मोबाइल नंबर की क्या आवश्यकता. उसने बेरूखी से कहा हजार पाँच सौ के नोट लाओगे तो मोबाइल नंबर देना पड़ेगा, नहीं तो बिल जमा नहीं होगा. यदि तमाम जाँच पड़ताल के बाद भी नोट बाद में नक़ली निकल गया तो मोबाइल के जरिए तुरंत पकड़ तो सकेंगे. मरता क्या न करता – टेलीमार्केटियरों से बचने की असफल कोशिश में अपना मोबाइल नंबर मैं बेहद सीक्रेट रखता हूँ, अपने बॉस को भी नहीं बताता, मगर यहाँ बिजली विभाग के बाबू को नोटों के असली नक़ली के चक्कर में बताना पड़ गया.

कल ही की तो बात है. पार्किंग वाले ने छुट्टे के पाँच रुपए मुझे वापस लौटाए तो देखा-देखी मैं उसे उलट पलट कर और रौशनी में वाटरमार्क की तसदीक कर उसकी असलियत पहचानने लगा. पार्किंग वाला बेसाख्ता और बेतहाशा हँसने लगा. बोला – मजाक काहे करते हो साहब. कभी कोई पाँच रुपए का नक़ली नोट निकला है क्या? मैं झेंप गया और बात को हँसकर सम्हालने की कोशिश की कि यार, आदत बनी रहे तो ठीक है नहीं तो कौन जाने हजार – पाँच सौ के नकली नोट भरोसे पे टिका जाए. फिर भाई लोग तो दो अठन्नी को फेविक्विक से चिपका कर पाँच रुपए के सिक्के के नाम पर चला देते हैं.

सरकार भी नक़ली नोटों के पीछे असफल हो रही है. उसकी नाक के नीचे लोग भारतीय करेंसी नोट छाप रहे हैं. इससे बचने को सरकार को या तो अमरीकी डालर को अपनी करेंसी बना लेनी चाहिये या फिर यूरो को. वैसे, पाकिस्तानी करेंसी को अपनाने में कोई बुराई नहीं दीखती. कश्मीर में इस करेंसी को चलाने की मांग तो दशकों से हो रही है, ऊपर से भारतीय नक़ली नोटों को पाकिस्तानी आईएसआई ही छपवा रही है ऐसी खबरें है. ऐसे में आईएसआई को मात देने का एक ही तरीका है – पाकिस्तानी करेंसी अपना ली जाए!

भारतीय नोट अपने नक़ली पन के चक्कर में रिश्ते-नातों, मित्रता, जान-पहचान तक को खतरे में डाल रहा है. आइए, इसका बहिष्कार करें. प्लास्टिक नोट अपनाएँ – अरे – वही क्रेडिट कार्ड. जब तक नोट का अपना भरोसा वापस नहीं आता है, जब तक बीवी मेरे हाथ से लिए नोट को नक़ली समझ कर देखना बंद नहीं करती, मैंने नोटों का प्रयोग बन्द कर दिया है. और क्रेडिट कार्ड अपना लिया है! आपकी अपनी आप जानें!

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इस समूह के सदस्यों की संख्या अब सौ हो गई है!
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समूह के सभी साथियों को बधाई!


(2)

सबको बधाई !
आइये इस समूह को और जीवंत बनायें। खूब प्रश्न करें। जितना जानते हैं उतना उत्तर अवश्य दें। पूछे, बताएँ। सोछें कि हम हिन्दी के लिये कौन सा काम कर सकते हैं। हिन्दी के उपकरण (प्रोग्राम/सॉफ्टवेयर) खोजें। अच्छे उपकरण सुझाएँ। यदि आपको किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता है तो अपनी आवश्यकता से इस समूह को अवश्य अवगत कराएं।

आइये हम सब मिलकर प्रयत्न करें कि हिन्दी में औजारों की कमी न हो , सामग्री (कन्टेन्ट) की कमी न रह जाय।

ये दो संदेश पिछले महीने गूगल तकनीकी हिंदी समूह में तब भेजे गए जब इस समूह के सदस्यों की संख्या 100 को छू गई. पर क्या यह एक बड़ी उपलब्धि है?
 
खासकर तब जब तमाम फोरमों में सक्रिय हिंदी चिट्ठाकारों की संख्या पचास हजार से ऊपर पहुँच रही है? और अभी भी हिंदी के कम्पयूटिंग में प्रयोग संबंधी तकनीकी दिक्कतों का सामना प्रयोक्ताओं को करना पड़ रहा है.

 
अभी भी बहुत से हिंदी के इंटरनेट प्रयोक्ताओं को हिंदी के इन समूहों की उपलब्धता तथा इनके द्वारा दिए जाने वाले सहयोग की जानकारी नहीं है. इसी वजह से न तो वे इसके सदस्य बन पाते हैं न ही समूहों पर आर्काइव में उपलब्ध तकनीकी विचार-विमर्श तथा सलाह-सुझाव का प्रयोग नहीं कर पाते हैं.


तो, यदि आप गूगल तकनीकी हिंदी समूह के सदस्य नहीं बने हैं और यदि आप हिंदी कम्प्यूटिंग संबंधी ज्ञान का आदान-प्रदान करना चाहते हैं, तो यह एक अत्यंत उत्कृष्ट फोरम है, इसके सदस्य यथाशीघ्र बनें.


सदस्य बनने के लिए यदि आप गूगल खाता प्रयोग करते हैं या नया गूगल खाता बनाना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें -


http://groups.google.com/group/technical-hindi/post?hl=hi&sendowner=1


और दिए गए निर्देशों का पालन करें. सदस्य बनना आसान है, मगर समूह के आचार व्यवहार की जानकारी अवश्य ले लें.


यदि आपके पास गूगल खाता नहीं है (जैसे कि याहू ईमेल है) या आप गूगल खाता नहीं बनाना चाहते तब आप समूह मॉडरेटर को सदस्य बनाने हेतु निवेदन इस ईमेल पर करें - technical-hindi@googlegroups.com


यदि आप सदस्य नहीं भी बनना चाहते हैं, तो आप समूह के पुराने वार्तालापों और विचार विमर्श पर भ्रमण कर काम की बातें निकाल सकते हैं. इसके लिए समूह के होम पेज पर यहाँ जाएँ - http://groups.google.com/group/technical-hindi?hl=hi&lnk=


यदि आपके पास हिंदी कंप्यूटिंग संबंधी कोई समस्या हो तो आप उससे संबंधित हल बहुत संभव है कि इसके आर्काईव में मिल जाए, नहीं तो आप समूह में प्रश्न पूछ सकते हैं, और हो सकता है कि आपके प्रश्न पूछते ही दस मिनट के भीतर कोई आपके प्रश्न का सटीक उत्तर भी दे दे.


तकनीकी हिंदी समूह की विशेषता है कि यहाँ  फ़ाइल खंड में दर्जनों हिंदी फ़ॉन्ट कन्वर्टर मुफ़्त प्रयोग के लिए उपलब्ध हैं


इसी तरह से हिंदी ब्लॉग / चिट्ठाकारी संबंधी एक समूह है चिट्ठाकार समूह. इसके सदस्य बनकर आप हिंदी चिट्ठाकारी व समसामयिक हिंदी कमप्यूटिंग संबंधी ज्ञान का आदान-प्रदान कर सकते हैं.


गूगल पर हिंदी के और भी समूह हैं जिनके बारे में आपको जानकारी यहाँ से मिल सकती है - http://groups.google.com/?hl=hi


और, यदि आपके संज्ञान में ऐसे ही अन्य हिंदी (संबंधी) समूहों की जानकारी हो / आप सदस्य हों तो उनका संक्षिप्त विवरण देते हुए कृपया अपनी बहुमूल्य जानकारी हमसे अवश्य साझा करें.

ब्लॉगर का प्रयोग करने वाली जनता की लं$$$$$$$$बी डिमांड थी ये. भारी भरकम स्टेट काउंटर के कोड से अब राहत मिलेगी. और, जो लोग रीयल टाइम स्टेट के लिए फ्लैश आधारित घूमती हुई पृथ्वी अपने ब्लॉगों के साइडबार में लगा रखते हैं, उनसे निवेदन है - मित्रों, उससे तत्काल छुटकारा पा लो. क्योंकि, आपके आंकड़े दिखाते हुए एनीमेशन हमारे पेज लोड को बेहद धीमा करते हैं!

अब, सब कुछ आपके अपने ब्लॉगर के भीतर ही उपलब्ध है. डैशबोर्ड में जाएँ, अपने ब्लॉग के स्टेट्स पर क्लिक करें और देखें सारी जानकारी. सेवा चूंकि अभी ही चालू हुई है, अत: मासिक, साप्ताहिक या वार्षिक आंकड़ों के लिए आपको इंतजार करना होगा, मगर आंकड़े हैं चुस्त दुरूस्त.

रचनाकार के आंकड़े देखें - पिछले दिन एक हजार सात सौ (1700) से ऊपर पेज लोड्स. कंटेंट इज किंग!! गो क्रिएट कंटेंट मैन! एंड एंजॉय योर स्टैट्स!!
(चित्र को बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)

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