बुधवार, 21 जुलाई 2010

जिओ जियोसिटीज़ – ओओसिटीज बनकर!

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याहू का जिओसिटीज 1994 में चालू हुआ था और जब यह अंततः 27 अक्तूबर 2009 को अपनी मौत मरा तब तक इसमें तमाम भाषाओं के लाखों करोड़ों उपयोगी पन्ने जोड़े जा चुके थे. इसके इस तरह मरने से मेरे जैसे बहुतों को बेहद दुख हुआ था. हम सभी ने ऑनलाइन सामग्री प्रकाशित करने की शुरूआत जियोसिटीज़ से ही की थी, और हममें से बहुतों की बहुत  सी सार और सार्थक सामग्री जियोसिटीज में थी.

हालांकि जियोसिटीज ने अपना धंधा समेटने से पहले कई बार स्पष्ट तौर पर चेतावनी दे दी थी, मगर फिर भी बहुत से मामलों में लिंक तथा सामग्रियों को उसी रूप में नेट पर रखना जियोसिटीज के सभी प्रयोक्ताओं के लिए अंत तक संभव नहीं हो पाया.

बाद में जियोसिटीज के आमतौर पर सभी पेज आर्काइव.ऑर्ग पर भी उपलब्ध किए गए (मेरा भी पन्ना सुरक्षित है वहां), परंतु फिर भी वो बात नहीं बनी. इस बीच एक सेवा ओओसिटीज चली आई जो आपके याहू जियोसिटीज़ को उसी रूपरंग में मिरर के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है.

तो, यदि आप बहुत से – जै हनुमान जी की तरह भाग्यशाली लोगों में से हों तो आपका जियोसिटीज का पन्ना ओओसिटीज में मिल जाए. मेरा पन्ना तो खैर नहीं मिला, मगर वो आर्काइव.ऑर्ग में सुरक्षित है. इससे यह भी सिद्ध होता है कि चाहे कोई कितना ही मिटा डाले, एक बार नेट पर पोस्ट की गई चीज अमर हो जाती है. वो यहाँ नहीं तो वहाँ, और आज नहीं तो कल कहीं न कहीं से प्रकट हो ही जाएगी!

यदि आपका जियोसिटीज पन्ना ओओसिटीज पर है, तो आप जियोसिटीज की अपनी पुरानी कड़ियों को सुधार सकते हैं.

जैसे कि तख्ती की पुरानी जियोसिटीज कड़ी थी -

 

http://www.geocities.com/hanu_man_ji/hindi_page.html

 

जो अब ओओसिटीज पर बन गई है

http://www.oocities.com/hanu_man_ji/hindi_page.html

 

आप ओओसिटीज पर अपने प्रयोक्ता नाम से खोज सकते हैं या फिर सीधे ही वहां जा सकते हैं ओओसिटीज.कॉम के आखिर में प्रयोक्ता नाम लगा कर. जैसे कि जै हनुमान जी के लिए -

http://www.oocities.com/hanu_man_ji/

पर, हो सकता है कि कुछ डाउनलोड फ़ाइलें वहाँ लिंक में उपलब्ध न हों, जैसे कि यहाँ पर तख्ती फ़ाइल डाउनलोड के लिए नहीं मिली. तो यदि आप तख़्ती के लिए इस साइट पर जाना चाहते हैं, तो तख्ती का नया होस्ट है - http://takhti.web.officelive.com/default.aspx 

जिओ जियोसिटीज! ओओसिटीज़!

7 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. यह तो बहुत अच्छी जानकारी है, मैं तो अपने जियोसिटी के पते को भी भूल गया

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  2. कुछ बैक अप का उपाय तो रखना पड़ेगा इन सेवाओं के साथ।

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  3. प्रिय ब्लाँगर साथी

    आपके ब्लाँग को ईटिप्स ब्लाँग टीम के द्वारा ब्लाँग आँफ द मंथ के लिये चुना गया है एक बार यहाँ आएँ

    http://etips-blog.blogspot.com/2010/07/blog-post_22.html

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  4. मई 2007 में आपने सही कहा था - नेट पर रखी सामग्री ईश्‍वर की तरह अजर-अमिट-अमर रहेगी।

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  5. ऐसा सुना है की नेट पर जो भी एक्स्चेंज होता है उसका पूरा लेखा जोखा अमेरिका के पास है

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  6. Dear Ravi ji,

    इस आन्तर्जालिक हादसों से सावधान रहना चाहिए, बरना अपने कीमती लेखों से हाथ धोना पद सकता हैं। सूचना के लिए
    धन्यवाद।

    ए एन नन्द
    http://ramblingnanda.blogspot.com

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