बताओ, कब रिटायर हो जाऊँ?

करूणानिधि का रिटायरमेंट

एक नेता कभी रिटायर होता है भला? रिटायर तो चपरासी होता है, अफसर होता है. माँ भी रिटायर होती है. बाप-दादा भी रिटायर हो जाते हैं. फौजी तो पंद्रह बरस के शार्ट सर्विस में ही रिटायर हो जाते हैं. मगर नेता? वो भी भारतीय नेता. भारतीय नेता और रिटायरमेंट? कभी नहीं!

जनता इनके भाषण सुन-सुन के बोर होकर दुनिया से रिटायर हो जाएगी, वोटर इन्हें वोट दे दे कर रिटायर हो जाएंगे, मगर नेता कभी रिटायर नहीं होंगे.

वैसे भी, रिटायर कौन होता है? रिटायर तो वो होता है जो कभी कोई काम करता होता है. जैसे कि किसी सरकारी ऑफ़िस का बाबू. वो भले ही कितनी मक्कारी करे, कितनी ही घूंसखोरी और भ्रष्टाचार करे, मगर उसे ग्यारह से पाँच की साप्ताहिक नौकरी तो बजानी ही होती है. ऑफ़िस की कुर्सी तोड़ने के नाम पर वो भले ही कैंटीन और पान ठेले के चक्कर लगाता रहे, घेले भर का काम न करे, मगर उसके हिस्से में काम तो होता ही है. और उस काम के लिए उसकी अनिवार्य न्यूनतम योग्यता भी होती है.

मगर नेता? नेता के लिए कोई काम डिफाइन है क्या? उसकी कोई अनिवार्य न्यूनतम योग्यता निर्धारित है क्या? प्राइमरी कक्षा में सामाजिक विज्ञान के किसी पाठ में पढ़ा था कि नेता बनने के लिए किसी को दीवालिया तथा पागल नहीं होना चाहिए. शायद यही न्यूनतम योग्यता है नेता बनने का. तो जब नेताओं के लिए कोई काम, कोई योग्यता ही डिफाइन नहीं है, तो वो फिर रिटायर कैसे होगा. रिटायर तो वही होता है जो काम करता है, जिसके पास काम होता है.

एक नेता यदि खुद चाहता है कि वो रिटायर हो जाए, तो उसके चमचे, छुटभैये नेता जिनका धंधा-पानी उस नेता पर निर्भर होता है, उसे रिटायर नहीं होने देते. नेता दुनिया से रिटायर हो जाता है, मगर नेतागिरी से रिटायर नहीं होता.

वैसे, एक नेता को दूसरा नेता ही रिटायर कर सकता है. विरोधी दल के नेता का जी चाहे तो वो अपने विरोध में खड़े होने वाले तमाम नेताओं को एक साथ एक झटके में रिटायर कर दे. पर ऐसा होता नहीं है. बहुत से विरोधी दलों के नेताओं की हसरतें यूँ ही रिटायर हो जाती हैं, चूंकि सामने वाला नेता रिटायर होने का नाम ही नहीं लेता. विरोधी दल के नेता के तमाम चाल, तमाम पैंतरे विफल हो जाते हैं, पर सत्ता पक्ष के नेता रिटायर होने का नाम ही नहीं लेते. कभी कभी एक ही दल के नेता अपने अगल बगल के नेताओं को टंगड़ी मारकर रिटायर करने की कोशिश करते हैं. इन्हें कभी कामयाबी मिलती है तो कभी नाकामयाबी. अकसर ऐसे खेल सत्ताधारी दलों में होता है, और मंत्री पद हथियाने की होड़ में ज्यादा होता है.

कभी कभी जनता भी किसी नेता या किसी दल से निराश होकर उसे रिटायर करने की नाकाम कोशिश करती है. ऐसे में कभी कभी होता ये है कि पहले रिटायर जनता द्वारा रिटायर समझ लिया गया, पक चुका, चुक चुका नेता वापस सत्ता पर काबिज हो जाता है.

अब इससे पहले कि आप इस पोस्ट को रिटायर कर इंटरनेट के अगले पन्ने पर बढ़ें, मैं इस लेख को ही रिटायर करता हूँ और पेश करता हूँ एक व्यंज़ल, जो खुद रिटायर है –

व्यंज़ल

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देखो कोई नेता रिटायर हो गया

अरे वाह ये तो सेटायर हो गया


खाप के जमाने में अपना हीर

रांझा के बिना रिटायर हो गया


इधर ये ग़ज़ब हो गया कि वक्त

वक्त से पहले रिटायर हो गया


इस दौर में हर इंकलाबी शख्स

भूख के चलते रिटायर हो गया


कलम का धनी था अपना रवि

सियासत में वो रिटायर हो गया

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बहुत मजा आया यह पोस्ट पढकर

प्रणाम

सच कहा गुरुदेव। नेता मर सकता है, रिटायर नहीं होता। इसीलिए तो लोग भी नेता के रिटायर होने की कामना नहीं करते।

सही कहा गुरुदेव। नेता मर सकता है, रिटायर नहीं हो सकता है। इसीलिए लोग नेताओं क रिटायर होने की तो कामना नहीं ही करते।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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