क्या आपमें इस सड़ियल व्यंज़ल को पढ़ने की हिम्मत है?

clip_image002

हिम्मत एक रिलेटिव शब्द है. अफसर बाबू पर और बाबू चपरासी पर हिम्मत दिखाता है. बदले में चपरासी निरीह जनता पर हिम्मत दिखाता है और जनता को अपने काम के लिए अफसर से, बाबुओं से मिलने नहीं देता. टीचर छात्र पर हिम्मत दिखाता है, पर प्राइमरी और मिडिल तक. हाई स्कूल पहुंचते पहुंचते छात्र की हिम्मत बढ़ने लगती है और वो उलटे टीचर पर हिम्मत दिखाता है. कॉलेज में तो छात्र अध्यापक के साथ साथ तमाम व्यवस्था पर गाहे बगाहे हिम्मत दिखाता रहता है. पुलिस का काम वैसे तो अपराधियों पर हिम्मत दिखाना है, मगर वो अपराधियों से गलबहियाँ डाले कानून से डरने वाले, कानून का पालन करने वाले हर आम और खास नागरिक पर हिम्मत दिखाती है. राठौरें, रूचिकाओं पर हिम्मत दिखाते हैं. वैसे भी आजकल हिम्मत का हिसाब ही उलटा हो गया है. एक व्यक्ति – ओसामा, एक राष्ट्र – विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्र अमरीका - को हिम्मत दिखाता है!

इधर राजनीति में चलें तो मामला गड्ड मड्ड प्रतीत होता है. चुनावों के समय मतदाता हिम्मत दिखाने की सोचता है तो धनकुबेर नेता नोटों का हिम्मत दिखाकर मतदाता के हिम्मत को दबाने की कोशिश करता है. चुनाव हो जाने के बाद पाँच साल तक पार्षद/विधायक/सांसद माननीय बनकर चहुँओर  हिम्मत दिखाता फिरता है. हिम्मत कर यदि वो मंत्री बन गया तो उसकी हिम्मत और बढ़ जाती है. हंग पार्लियामेंट में निर्दलीय हिम्मत दिखाता है. कोएलिशन पॉलिटिक्स में करूणानिधि और राजा हिम्मत दिखाते हैं.

रहा सवाल जनता का. जनता बेचारी चारों ओर हिम्मत देख देख के परेशान है. जनता सड़क पर निकलती है तो सड़कों के गड्ढों के जरिए  पी डब्ल्यू डी विभाग हिम्मत दिखाता है. घर में तो बिजली विभाग जब तब बिजली गोल कर और पहाड़ जैसा बिल भेजकर हिम्मत दिखाते ही रहता है. मनोरंजन के समय टीवी पर पाँच मिनट के कार्यक्रम में पंद्रह मिनट का विज्ञापन दिखाकर चैनल वाला हिम्मत दिखाता रहता है. भोजन के समय उसकी थाल में मौजूद बीटी बैंगन हिम्मत दिखाता है.

क्या आप में हिम्मत है? यदि है तो आइए, आप भी जरा हिम्मत कीजिए और यह सड़ियल व्यंज़ल पढ़िए :

----

व्यंज़ल

छातियों पे मूंग दलने की हिम्मत है?

वक्त के विपरीत चलने की हिम्मत है?


सड़कों पटरियों पे तो फूटते रहेंगे बम

अब भी तुममें चलने की हिम्मत है?


उठाए तो हो हाथ में कमंडल लेकिन

परजीवी की तरह पलने की हिम्मत है?


लोग जलते हैं माया-वी तरक्कियों से

क्या खुद उनमें जलने की हिम्मत है?


बातें तो बहुत करते हो रवि तुम भी

पराये तेल में तलने की हिम्मत है?

---.

(समाचार कतरन – साभार, पत्रिका)

एक टिप्पणी भेजें

हिम्मत तो है, पढ़ने की भी और टिप्पणी भी करने की।
तक़लीफ़ सिर्फ़ यही है कि जो हालात आपने बयान किए हैं उनसे निपटने की हिम्मत नहीं है। लड़ने की हिम्मत न होते हुए भी लड़ना पड़ रहा है, हालात से, लोगों से और अपने आप से।

बातें तो बहुत करते हो रवि तुम भी

पराये तेल में तलने की हिम्मत है?


जय हो..

छातियों पे मूंग दलने की हिम्मत है?
वक्त के विपरीत चलने की हिम्मत है?
आपका व्यंजल अच्छा लगा ..थोड़ी हिम्मत आरही है ...इस चेलेंज से

व्यंजल पढ़ लिया. आपका चैलेन्ज लेने की हिम्मत है.

हिम्मत तो है, पढ़ने की भी और टिप्पणी भी करने की।
तक़लीफ़ सिर्फ़ यही है कि जो हालात आपने बयान किए हैं उनसे निपटने की हिम्मत नहीं है। लड़ने की हिम्मत न होते हुए भी लड़ना पड़ रहा है, हालात से, लोगों से और अपने आप से।

आज के दौर पर सटीक रचना.. पिछले छह महीने से हमारे बन्द पड़े घर की छत पर पड़ोसी द्वारा बढ़ा कर बनाई गई छत की पुलिस में रिपोर्ट कराने की हिम्मत नहीं...हाँ यहाँ टिप्पणी में बस अपने मन की बात करने की हिम्मत कर बैठे...:(

हम लोगों की हिम्मत तो सरकारों ने चूस ली है मंहगाई, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, मंहगा और विलम्बित न्याय देकर...

हिम्मत करने की ही हिम्मत नहीं होती अब तो ।

बडी हिम्मत करके जैसे तैसे पढ पाये हैं,
अपने एडवाईजर से ये पूछने की हिम्मत है कि बताओ कब डिग्री दे रहे हो ? ;)

ये हिम्मत शब्द ही बस खास है बाकी किसी मे हिम्मत कहाँ?

It is really nice to read your site. I'll be visiting it more often. By the way, even I am a Hindi writer and a published poet. You can read some of my poems here- http://souravroy.com/poems/

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget