टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

अपग्रेड ऑर नाट टू अपग्रेड?

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वैसे भी, कहावत है कि किसी चलती चीज को न छेड़ें. तो, जब आपका कम्प्यूटर अच्छा भला चलता होता है, किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आती होती है तो फिर आप अपग्रेड के चक्कर में आखिर पड़ते ही हैं क्यों भला?

कुछ समय पहले उन्मुक्त ने अपना लिनक्स का संस्करण अपग्रेड किया था और उनका हिन्दी लिखने का कुंजीपट स्किम उनके अच्छे खासे चलते लिनक्स तंत्र से गायब हो गया था. पिछले दिनों मेरे कम्प्यूटर पर बारंबार फ्लैश होते संदेश कि - नया संस्करण अपडेट के लिए बहुत समय से आ चुका है और आप बुद्धू अपग्रेड ही नहीं कर रहे हो – को देख देख कर जब बोर हो गया तो अंतत: मैंने भी हथियार डाल दिए.

और, नतीजा बड़ा हौलनाक रहा!

वैसे, कंपनियाँ अपने सॉफ़्टवेयरों के अपग्रेड संस्करण निकालती हैं – तो अपने प्रयोक्ताओं के भले के लिए. नया संस्करण ज्यादा सुविधा वाला, तेज, अतिरिक्त फ़ंक्शनलिटी और आसान इत्यादि इत्यादि युक्त होता है. होता करे, मगर हमारे जैसा गरीब उपयोक्ता क्या करे जब उसका अच्छा खासा चलता सिस्टम समस्या पैदा करने लगे?

ऊपर दिया स्क्रीनशॉट लिनक्स उबुनन्टु 9.10 पर चल रहे अनुप्रयोग लोकलाइज का है. जहाँ एडिटिंग विंडो है वहाँ देख रहे हैं कि पाठ ब्रेक हो रहा है. जबकि ट्रांसलेशन मेमोरी में वही पाठ बढ़िया दिखा रहा है. जबकि यही अनुप्रयोग उबुन्टु 8.X पर झकास, बिना परेशानी के अब तक चला आया है.

इसी तरह, नोकिया सीडीएमए का फोन भी नेट से कनेक्ट नहीं हो रहा, जबकि पहले तो बढ़िया हुआ करता था. अपग्रेड कर हमने तो अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मार ली.

लगता है, डाउनग्रेड ही करना पड़ेगा.

सीख – यदि बेहद जरूरी न हो, तो किसी अच्छी भली काम करती चीज में छेड़खानी न करें, भले ही वह मुफ़्त का अपग्रेड ही क्यों न हो! खासकर, प्रोडक्टिविटी से जुड़े मशीनों में.

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हम तो फा.फो. के अपग्रेड से इत्ते परेशान हुए कि वर्डप्रेस को अपग्रेड करने से परहेज कर रहे हैं, मगर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?

सही कहा आप ने। हम भी ऐसे मैसेज को अनदेखा करेगें

बात तो सही है पर मन है कि मानता ही नहीं।

अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

उबुन्टू मे एस.सी.आई.एम. की जगह परिषकृत आई बस आ गया है। शायद उन्मुक्त जी ने अब तक खोज लिया होगा। किसी भी‌ अपग्रेड मे स्वम इन्सटाल किये गये साफ्टवेयर हटने की संभावना तो होती ही है।

हाँ यह आपने बहुत आवश्यक सलाह दी कि जबतक -अतिआवश्यक न हो अपग्रेड न करें। और यथा संभव नवीनतम साफ्टवेयर का उपयोग करें।

सही कहा आपने !
मैंने भी उबुन्टू९.१० आते ही पहले दिन ही अपडेट कर लिया लेकिन बहुत सी परेशानियाँ आई | कंप्यूटर में इनबिल्ट स्पीकर आज तक उबुन्टू ९.१० में नहीं चले जबकि ९.०४ में ये मजे से चलते है | थक कर मैंने भी वापस उबुन्टू ९.०४ ही इन्स्टाल कर लिया |

उबुन्टू लिनक्स का इस्तेमाल मैंने अपने कई मित्रों से शुरू करवाया है सभी बहुत खुश है खास तौर से इसमें नेट सर्फिंग की स्पीड से सभी प्रभावित है |

कई सॉफ़्टवेयरों में बहुत बार तुरंत अपग्रेड कर भुगता है, उसके बाद यही अक्ल अपने को आई कि अपग्रेड उपलब्ध होते ही तुरंत नहीं करना चाहिए, गर्म खाने से मुँह जल जाता है, इसलिए ठंडा करके खाना चाहिए। तो अब जब भी अपग्रेड आता है किसी सॉफ़्टवेयर का तो थोड़ा समय रुकता हूँ, देखता हूँ कि उससे किसी को दिक्कत आई है कि नहीं, उसके ज्ञात मुद्दे आदि हैं क्या कोई और उसके बाद ही अपग्रेड करता हूँ। :)

आपसे सहमत हूँ। फायरफॉक्स अपग्रेड करो तो बहुत सी ऍक्सटेंशनों से हाथ धोना पड़ता है। आजकल बारबार वर्डप्रैस के डैशबोर्ड पर संदेश आता है कि अपग्रेड करें पर हम टाले जाते हैं।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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