
यह बोरीवली, बंबई मुम्बई, भारत महाराष्ट्र के रहने वाले एक मनसे कार्यकर्ता की टॉप सीक्रेट डायरी के कुछ पन्नों के संक्षिप्त अंश हैं.
मेरी डायरी का यह पहला पन्ना. परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि मेरी इस डायरी के बारे में मेरे कॉमरेड ताजिंदगी कभी भी न जान पाएँ! क्योंकि यदि उन्हें पता चलेगा कि मैं इसे मराठी में नहीं, बल्कि हिन्दी में लिख रहा हूं, तो वो तो मुझे वडा पाव में दबा कर खा जाएं! हालांकि हिन्दी में लिखने का अलग मजा है क्योंकि बहुत से पार्टी सदस्य हिन्दी से घोर नफरत करते हैं, और उनके सामने इस डायरी को लहराने पर भी वे इसकी ओर देखेंगे भी नहीं. वे तो सिर्फ और सिर्फ मराठी देखने-पढ़ने के लिए प्रोग्राम्ड हैं!
कल का दिन हम सभी के लिए बहुत ही विशिष्ट और अच्छा गुजरा! हमने यूपी के दस भैयाओं को सुबह सुबह तब पकड़ लिया जब वे निपटने के लिए समुद्र किनारे जा रहे थे! हमने उन्हें अपने शानदार मराठी अलंकार “हलकट” से पुकारा और वहां से मार भगाया.
चूंकि शुरूआत शानदार रही थी, तो बाकी का दिन और भी बढ़िया गुजरना ही था. दोपहर में तो आज गुरूजी का भाषण था ना! गुरु रा* ठाकरे एमएनएस कार्यकर्ताओं की आमसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने हम सभी कार्यकर्ताओं को निम्न सार्थक टिप्स दिए:
1 – दुनिया में जीवन के वर्गीकरण वो नहीं है जो अब तक बताया जाता रहा है – आदमी और जानवर. बल्कि असली वर्गीकरण है – मराठी माणूस और गैर मराठी माणूस.
2 – मुम्बई में आतंकवादी हमलों की बातें जो आम जनता करती है वो बेमानी है, और बरगलाया जाता है. दरअसल, यूपी के भैया ही असली आतंकवादी हैं, और मुम्बई पर उनके हमले नित्य जारी हैं.
3 – हम लोग भले ही महाराष्ट्र के राजा हैं, मगर यूपी-बिहार में अकेले कभी न जाएँ!
4- रेलवे का उपयोग बन्द कर दो. पहले रेल मंत्री बिहारी हुआ करता था, अब “बंगाली” है.
5 - यदि कोई फ़िल्म, किताब या कुछ भी आपको पसंद न आए, तो आप बस चिल्लाना चालू कर दो – यह मराठी माणूस के खिलाफ है. इस तरह से आपके पास पोस्टर, सिनेमाहाल, कार-बस-ट्रेन इत्यादि में तोड़फ़ोड़ करने और आगजनी करने का लाइसेंस मिल जाएगा.
इत्यादि... इत्यादि....
शाम बड़ी अफरातफरी भरी रही. भीड़ भड़क्के में देश के हर कोने से आए गैर मराठी मणहूसों से भिड़ते भिड़ाते, यूपी-बिहारी भैयाओं को दौड़ाते भगाते, उनके विरूद्ध नारे लगाते पूरी तरह थक हारकर घर पहुँचे. घर पर पता चला कि दादा जी जब बाजार से लौट रहे थे तो उनका एक्सीडेंट हो गया था. वो तो लगभग मर ही जाते यदि समय पर वहां उपस्थित भीड़ में से कुछ लोगों ने उनकी सहायता नहीं की होती और तत्काल चिकित्सा सुविधा मुहैया नहीं करवाई होती. दादा जी ने बताया कि उनमें से बहुत सारे लोग गैर मराठी माणूस थे. यह कितना अजीब है न कि जब उन लोगों ने मेरे दादा जी की मदद की तो न तो उन्होंने जात देखी न पांत. मराठी-बिहारी-यूपी तो बिलकुल ही नहीं देखी. गुरु रा* ठाकरे के बुद्धिमत्ता पूर्ण शब्द पता नहीं क्यों यहाँ लागू नहीं हुए, पर चुनावों के समय तो ये बढ़िया कमाल दिखाते हैं, नहीं तो हम दाएँ-बाएँ और बाजू की इत्ती सीटें कैसे जीत पाते?
तो इस तरह से आज का यह दिन घटना प्रधान गुजरा. शुभरात्रि मेरी डायरी!!
--
(मूलत: पूअरजोक्स.कॉम पर ब्लॉग-ए-टन के तहत अंग्रेज़ी में All in a Day's Work. शीर्षक से प्रकाशित. हिन्दी अनुवाद की स्वीकृति देने के लिए निहारिका का धन्यवाद.)