August 2009

वैसे तो अपने तमाम हिन्दी चिट्ठाकारों ने समय समय पर ब्लॉग उपदेश दिए हैं कि चिट्ठाकारी में क्या करो और क्या न करो. परंतु अभी हाल ही में दो सुप्रसिद्ध, शीर्ष के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले भारतीय अंग्रेज़ी-भाषी ब्लॉगरों की गिनती में शामिल, अमित वर्मा (इंडिया अनकट) तथा अर्नाब –ग्रेटबांग (रेंडम थॉट्स ऑफ डिमेंटेड माइंड) ने अपने अपने ब्लॉगों में कुछ काम के टिप्स दिए हैं. उनके टिप्स यहाँ दिए जा रहे हैं. अमित वर्मा से विशेष अनुमति ली गई है तथा ग्रेटबांग के चिट्ठे की सामग्री का क्रियेटिव कामन्स के अंतर्गत प्रयोग किया गया है.

तो, सबसे पहले, पहली बात. पेंगुइन की एक किताब – गेट स्मार्ट – राइटिंग स्किल्स के लिए लिखे अपने लेख में अमित वर्मा कहते हैं:

ब्लॉग लेखन मनुष्य की सर्जनात्मकता का सर्वाधिक आनंददायी पहलू है. एक चिट्ठाकार पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होता कि वो क्या लिखे, कैसे लिखे, कितना लिखे. आप चार शब्दों में अपना पोस्ट समेट सकते हैं तो चालीस पेज भी आपके लिए कम हो सकते हैं. इसी तरह, न तो विषयों पर कोई रोक है, और न आपकी शैली पर कोई टोक.

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(अमित वर्मा – चित्र – साभार http://labnol.org )

अमित अपने ब्लॉग में आगे बताते हैं

“तो, यदि आप स्वांतःसुखाय ब्लॉग लिख रहे हैं तो आप दुनिया जहान की चिंता आराम से छोड़ सकते हैं. और इस चिट्ठे को भी गोली मार सकते हैं और बिन पढ़े सटक सकते हैं. परंतु...

परंतु यदि आप चाहते हैं कि आपका लिखा सर्वत्र पढ़ा सराहा जाए, आपके नियमित पाठक आपके नियमित पोस्टों को पढ़ें तो फिर आपको कठिन जतन करने होंगे. इसका कारण है – इस माध्यम की प्रकृति.

जब कोई पाठक पढ़ने के लिए कोई किताब खरीदता है, तो फुर्सत के लम्हे ढूंढता है और फिर उसमें डूब कर पढ़ने की कोशिश करता है. वही पाठक यदि कोई पत्र-पत्रिका पढ़ने के लिए उठाता है तो सुबह के नित्य कर्म या चाय की चुस्कियों और मित्रों के गप सड़ाकों के बीच उसके पन्ने पलटता है. पर जब कोई पाठक किसी ब्लॉग पर विचरण करता है तो वो दूसरी तरफ कई कई सारे काम एक साथ करता होता है – जैसे कि चैट विंडो में चैट कर रहा होता है, ईमेलिया आदान प्रदान करता होता है, कहीं किसी गेम में हाथ आजमा रहा होता है या यू-ट्यूब के किसी वीडियो के बफर पर नजरें जमाया हुआ होता है कि कब ये पूरा हो और वो वीडियो देखे. आपका चिट्ठा इन सब के साथ प्रतिद्वंद्विता में लगा हुआ होता है पाठक का ध्यान खींचने के लिए. तो यदि आपका लेखन पाठक के ध्यान को आकर्षित करने में नाकामयाब होता है तो वो ब्राउज़र के किसी दूसरे टैब पर बिना हिचक भाग लेता है.

एक सफल चिट्ठाकार के लिए, सिर्फ और सिर्फ एक ही नियम है जिसे आपको निभाना है – वो ये है कि आप अपने पाठक के समय का लिहाज रखें. जो कोई भी सलाह आपको मैं यहाँ दे रहा हूं वो इसी नियम को ध्यान में रखते हुए दे रहा हूं.

कुछ चीजें हैं, जिन्हें मैंने ब्लॉगिंग में सीखी हैं वो हैं –

 

संक्षिप्तता में गुरूता है

लंबे लंबे वाक्यों, वाक्य विन्यासों, अनुच्छेदों और पृष्ठों से इंटरनेट के पाठकों को डराने का इससे बेहतर तरीका और कोई नहीं है. आपके दोस्त, परिचित तो आपको भले ही झेल लेंगे, मगर एक अजनबी को अपना शिकार क्यों बना रहे हैं? इसलिए जितना बन पड़े अपने लेखन को संक्षिप्त रखें. (फुरसतिया टाइप चिट्ठाकार व पोस्टें इनके अपवाद स्वरूप हैं और रहेंगे, :)*  - रवि) छोटे, आसानी से समझ में आने वाले शब्दों, वाक्यों का प्रयोग करें, ये ध्यान रखें कि हर वाक्य आपकी पोस्ट के लिए जरूरी है, नहीं तो उसे उड़ा दें.

दिखावे से बचें

नए नए लिक्खाड़ अपनी भाषा शैली दिखाने लग जाते हैं. इससे बचें. लोगों को अपनी कहानी बतानी है, किसी मुद्दे पर अपने विचार रखने है तो इसके लिए जटिल, साहित्यिक, पुस्तकीय भाषा की आवश्यकता नहीं है. इसीलिए आपकी भाषा सादा और सरल होनी चाहिए. यदि आपका कोई पाठक ये कहता है कि वाह क्या बढ़िया लाजवाब शैली है आपके लेखन की – तो इसका मतलब ये है कि उसे आपके पोस्ट की विषय वस्तु ने नहीं खींचा है. आप जो कहना चाहते हैं, वो कह नहीं पाए. इसीलिए वो आपकी शैली को देखने व सराहने लग गया. आपका लेखन ब्लॉग पर केंद्रित न हो, बल्कि आप क्या लिख रहे हैं उस पर केंद्रित हो, नहीं तो आपके लेखन के टाइप्ड होते और अंततः एक ही शैली से लोगों को बोर होने में देर नहीं लगेगी. लेखन की शैली को लेखकीय तत्व के सदा पीछे होना चाहिए.

आप क्यों और किसलिए लिख रहे हैं

यदि आप अपने आदर्श पाठक की कल्पना कर सकें कि आप उसके लिए ब्लॉग पोस्टें लिख रहे हैं तो आपका लेखन आसान और आरामदायक हो सकता है. कभी कहीं अटक रहे हों तो ये सोचें कि आप इसे ब्लॉग पोस्ट के रुप में नहीं, बल्कि अपने किसी मित्र को ईमेल भेज रहे हैं. फिर देखिए कि आप इसे कितना जल्दी और कितने सुभीते से लिख सकेंगे.

पोस्ट में अपने बारे में भी कुछ कहें

नेट पर हजारों लाखों की संख्या में ब्लॉग हैं तो आदमी स्वतंत्र है कि वो क्या पढ़े और किस पर निगाह ही न मारे. पर आपके ब्लॉग में कोई न कोई ऐसी खास बात तो होगी ही. हां, है. वो है आप. अपने ब्लॉग के लिए एकमात्र खास बात, विशिष्ट बात आप हैं. इसलिए हर पोस्ट में छोटा सा ही सही, अपनी बात अवश्य जोड़ें – चाहे वो आपका अपना नजरिया हो, कोई अनुभव हो, या हजारों बार सुना-सुनाया गया कोई चुटकुला ही क्यों न हो. आपका ब्लॉग ही तो है जो आपको बाहरी दुनिया से जोड़ता है तो उसमें आप अपने बारे में अवश्य लोगों को बताएँ.

नियमितता से बड़ा कुछ नहीं

यदि आप चाहते हैं कि आपके ब्लॉग के नियमित पाठकों का बड़ा समूह हो तो आपको भी तो नियमित ब्लॉग ठेलने होंगे. एक बार पाठक को आपके लिखे को पढ़ने में आनंद मिलने लगेगा तो वो बारंबार आपके ब्लॉग पर आना चाहेगा. और चाहेगा कि जब भी वो आए, उसे कुछ न कुछ मिले. अगर उसे एक लाइन भी नया कुछ पढ़ने को मिल जाता है तो वो अगली मर्तबा एक अनुच्छेद की कामना लिए वापस जाता है. इसीलिए, नियमित लिखते रहें.

परंतु ये भी नहीं कि पोस्ट ठेलने के नाम पर कुछ भी अनर्गल भर दें. फिर, यदि आप ब्लॉग लेखन से बोर होने लगेंगे, क्या लिखें यही सोचने लगेंगे तो आपके पाठक भी आपके लिखे को पढ़ कर महाबोर होने लगेंगे और क्यों पढ़ें यही सोचने लगेंगे. आप अपने आपसे जोर जबर्दस्ती से पोस्ट तो लिखवा लेंगे, मगर आपके पाठकों पर तो कोई जोर जबर्दस्ती नहीं है. ऐसे में ब्लॉगिंग से अल्पविराम ले लें.

नए विषयों को आजमाने में डरें नहीं

ब्लॉग एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आप अपने लेखन में हर किस्म का प्रयोग कर सकते हैं. यदि आपको सन्देह है, तो ट्रिगर दबा ही दें. हो सकता है कि आपके नियमित पाठकों को यह परिवर्तन पसंद आए.

भाषा, वर्तनी पर ध्यान दें

ठीक है कि हिन्दी वर्तनी जांचक नहीं है, गूगल ट्रांसलिट्रेट जैसे औजारों से हिन्दी लिखना कठिन है, मगर भरसक प्रयास करें कि आपकी भाषा शुद्ध हो, वर्तनी की गलतियाँ न हों, यदि भाषा शुद्ध और सरल होगी तो आपके ब्लॉग पाठकों के पठन-पाठन में भी ये सरल रहेंगे.

कड़ियों का जमकर प्रयोग करें

आप अपने पाठकों को जितना ज्यादा देंगे, वे आपके उतने ही मुरीद होते जाएंगे और बारंबार आपके ब्लॉग पर आते रहेंगे. आप अपने ब्लॉग के जरिए अपने पाठकों की सबसे बड़ी सेवा उनका ज्ञानवर्धन के जरिए कर रहे होते हैं. और इसका सबसे सरल तरीका है पाठकों को इंटरनेट की कड़ियाँ प्रदान करना. यह इंटरनेट की खासियत है. एक छोटा सा पेज गहन ज्ञान के पृष्ठों की सैकड़ों कड़ियाँ समो सकता है. तो आप जिस विषय पर बात कर रहे होते हैं, जिस विषय पर आपने अपना पोस्ट ठेला है, उसके संबंधित काम की कड़ियाँ अपने पाठकों के लिए अवश्य डालें.

इस बात से निश्चिंत रहें कि कड़ियों को क्लिक कर आपके पाठक नए साइटों में चले जाएंगे और वापस आपके चिट्ठे पर नहीं आएंगे. यदि उन्हें आपके द्वारा प्रदत्त कड़ियों में काम की चीजें मिलती हैं तो वे इसका जिक्र कई मौकों पर करते हैं और आपके अगले पोस्ट का इंतजार करते हैं. पर ये भी ध्यान रखें कि आपका पोस्ट कड़ी की झड़ी न बन जाए जहाँ काम की चीजों को ढूंढ पाना मुश्किल हो – यहाँ भी पाठक के बहुमूल्य समय का ध्यान रखें.

अपने पाठकों को बेवकूफ़ न समझें

अपने पाठकों को अपने से ज्यादा स्मार्ट भले ही न समझें मगर अपने स्तर का स्मार्ट तो समझें ही. तो, किसी विषय पर लिखने व उसे पोस्ट करने से पहले अपने विषय ज्ञान को परख लें, लिखे हुए की सत्यता को प्रमाणित कर लें नहीं तो दूसरे ही पल आपके ज्ञान की वाट लगने ही वाली है समझें. साथ ही, यदि आपको किसी दूसरे के चिट्ठे में कोई चीज गलत नजर आती है तो अपने को सदा-सर्वदा-सर्वज्ञानी-महाज्ञानी मान कर पंडिताई न झाड़ें. सभ्य भाषा में गलती की ओर इंगित करें. गलतियाँ होती हैं. बोलें इस तरह जैसे कि आप सही हैं, परंतु सुनें इस तरह जैसे कि आप गलत हैं.

निजता से दूर रहें

चिट्ठाकारी के दौरान पोस्टों या टिप्पणियों में चाहे वे अपने स्वयं के ब्लॉग पर हो या दूसरे ब्लॉगों में, वार्तालाप और विचार-विमर्श के दौरान व्यक्तिगत होने से बचें. जरा से कहे गए व्यक्तिगत शब्द वातावरण में कड़ुवाहट घोलने में देरी नहीं करते. आमतौर पर स्वस्थ विचारविमर्श स्वस्थ मीडिया – जिनमें ब्लॉग भी शामिल है, जरूरी है, मगर निजी और व्यक्तिगत छींटाकसी से सारा गुड़ गोबर हो जाता है.

ऐसे समय में क्या करें? याद रखें कि विचार विमर्श विषय केंद्रित हो, व्यक्ति केंद्रित नहीं. किसी व्यक्ति के अभिप्राय, उसके ज्ञान या उसके मोजे के रंग पर प्रश्नचिह्न न लगाएँ. बस उस विषय पर अपना मत दें, कि उस विषय में आपके क्या विचार हैं. वह भी संयत, मृदु और सरल, संक्षिप्त भाषा में. निरपेक्ष पाठक आपके विचारों से सहमत होंगे, और यदि नहीं भी हुए तो वे आपके विचारों का आदर ही करेंगे.

विश्वासघात न करें

बहुतेरे चिट्ठाकार अपनी निजी जिंदगियों के बारे में अपने पोस्टों में लिखते रहते हैं. ठीक है. ब्लॉग आपका है, आप चाहे जो लिख सकते हैं. मगर, सिर्फ अपने बारे में. दूसरों के बारे में नहीं. और दूसरों की व्यक्तिगत जिंदगियों के बारे में तो कतई नहीं. एक विश्वसनीय चिट्ठाकार होने के नाते आपको दूसरे व्यक्ति की निजता का आदर करना चाहिए. दूसरे किसी से की कभी गई चर्चा, दूसरों के ईमेल, उनकी अन्य जानकारियाँ इत्यादि न छापें. यदि छापना आवश्यक लगे तो पहले अनुमति ले लें. यदि आप ऐसी चीजें गाहे बगाहे या यदा कदा छाप देते हैं, तो लोग आपसे कतराएंगे और आपके सामने कुछ भी कहने से हिचकेंगे कि पता नहीं कब ये पोस्ट बनकर नेट की दुनिया में चला आए! इसीलिए, लोगों का विश्वास बनाए रखें.

अपने ब्लॉग पेज को भानुमति का पिटारा न बनाएँ

जब आप किसी दुकान में जाते हैं तो कोई चीज खरीदते समय सबसे पहले उसके रूप रंग को देखते हैं. और जो चीज ज्यादा आकर्षक लगती है, उसे पहले उठाते हैं. मगर फिर बाद में उसकी उपयोगिता को भी ठोंक बजाकर देखते हैं. तो आपका ब्लॉग साफ सुथरा और पठन-पाठन में आसान हो. साइडबार में विजेटों का मेला न लगाएँ. बहुत से ब्लॉगों में साइडबार में घड़ी लगाया हुआ दिखता है. हर कंप्यूटर के तंत्र तश्तरी में जब घड़ी मौजूद रहता है तो ब्लॉग के साइडबार में घड़ी लगाना बेवजह तो है ही, ये पेज लोड में भी देरी करता है.

चित्रों का भरसक प्रयोग करें

जहां तक बन पड़े अपने ब्लॉग पोस्ट में एकाधिक चित्र लगाएं. इससे आपका ब्लॉग रंग व जीवंतता से भरपूर हो जाता है. पर सुनिश्चित हों कि चित्र किसी दूसरे की सम्पत्ति न हों. नेट से उतारे गए चित्र कॉपीराइट न हों. कॉपीलेफ़्ट, मुफ़्त चित्र प्रयोग करें. यदि आप जाने अनजाने ऐसे चित्रों का प्रयोग करते हैं जिनके बारे में कॉपीराइट का संज्ञान नहीं होता है, तो चित्र की साभार कड़ी अवश्य दें.

जब तक मजा है ब्लॉगिंग में, तब तक टिकें वरना तम्बू उखाड़ लें

ये मेरी आखिरी सलाह है. कोई भी काम ऐसा न करें जिसमें मजा न हो. और फिर, ब्लॉगिंग है ही मजे के लिए. जब आपको आपकी अपनी ब्लॉगिंग में मजा नहीं रहेगा तो आपके पाठकों को क्या खाक मजा आएगा आपकी पोस्टों को पढ़ने में! ब्लॉगिरी आपको कोई करोड़पति तो नहीं बना रहा है तो फिर मजबूरी में ब्लॉगिंग क्यों? पर ये बात भी जानें कि ब्लॉग का एक पोस्ट भी मजे में लिख लेना अपने आप में एक पुरस्कार है. तो अपने आप को नियमित, मजे लेकर पुरस्कृत करते रहें!

सार संक्षेप:

वेब डिजाइन

1 अपने ब्लॉग को व्यवस्थित रखें. इसे साफ सुथरा व आसानी से पठन योग्य रखें
2 सामग्री जमाकर रखें. आपके ब्लॉग की तमाम सामग्री आपके पाठक को आसानी से उपलब्ध हो इसकी व्यवस्था करें
3 यह सुनिश्चित करें कि आपकी साइट त्वरित गति से लोड हो
4 रंगबिरंगे व विविध आकारों के फ़ॉन्ट प्रयोग न करें. पाठ पढ़ने में आसान हो ऐसी रंग व्यवस्था करें. सफेद पृष्ठभूमि पर काला पाठ सर्वश्रेष्ठ योजना है.
5 चित्रों का प्रयोग करें. श्वेत स्थान (व्हाइट स्पेस) प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें

वेब ट्रैफ़िक

1 उन विषयों पर लिखें जो आपके लिए दिलचस्प हैं, तभी वे आपके पाठकों के लिए भी दिलचस्प होंगी.
2 अन्य ब्लॉगों पर भी विचारविमर्श में हिस्सा लेते रहें. परंतु मात्र अपनी उपस्थिति यत्र तत्र दर्ज न करवाते रहें. यदि आप विचारविमर्श में गूढ़ और गहन विचार रखेंगे तो सबका ध्यान खीचेंगे, और लोग आपके ब्लॉग पर अवश्य उपस्थिति देंगे
3 अपने पसंद के ब्लॉगों को अपने ब्लॉग में लिंकित करें दें. समय समय पर उनका जिक्र करते रहें.
4 टैग्स व श्रेणी का प्रयोग हर ब्लॉग पोस्ट में करें. पर, एक ही पोस्ट में चार दर्जन टैग्स न लगाएं
5 सम-सामयिक विषय पर लिखें. यदि आप वर्तमान समसामयिक विषय पर लिखते हैं तो लोगों का रुझान ऐसे विषयों पर जाहिर है अधिक होता है और वे ऐसे विषयों पर अधिक जानकारियाँ पाना चाहते हैं
6 नियमित लिखें. आप नियमित रहेंगे तो आपके पाठक भी आपको पढ़ने के लिए नियमित बने रहेंगे

बढ़िया पोस्ट का रहस्य

1 जिसके बारे में आपको ज्ञान हो, उसी विषय पर लिखें. उथले ज्ञान का प्रदर्शन न करें. इंटरनेट पर आपकी अज्ञानता का भंडा फूटने में सिर्फ एक क्लिक की देरी होती है.
2 उन तमाम सामाजिक-राजनीतिक विषयों के बारे में लिखें जिनके बारे में आपको लगता है कि आपको अपने विचार प्रकट करने चाहिएँ.
3 कोशिश करें कि आपके ब्लॉग में लोगों को खास चीज मिलती है जो अन्यत्र नहीं मिलती (जैसे कि इस ब्लॉग में व्यंज़ल – :) - रवि) – अब चाहे वो विचार हो, हास्य-व्यंग्य हो या 4 कविता कहानी कार्टून या फिर कुछ और. अन्यथा कोई भला आपके ब्लॉग को पढ़ने कौन आएगा?
5 कड़ियाँ प्रदान कर अपने पाठकों का भला करें और उनके ज्ञान में वृद्धि करें.
6 संक्षिप्तता में समग्रता के नियम का पालन करें. पाठक के समय का लिहाज करें. सादा, सरल लिखें.

कॉपीराइट नियम

1 इंटरनेट पर कोई भी किसी भी तरह की वस्तु डिफ़ॉल्ट से कॉपीराइट होती है – वे सामग्री भी जिनमें कॉपीराइट नोटिस नहीं हैं
2 किसी अन्य के पोस्ट को बिना अनुमति के पूरा का पूरा न उतारें. संदर्भ देते हुए मूल सामग्री की कड़ी अवश्य दें.
3 उद्धरण देना अच्छी बात है, मगर कड़ियाँ अवश्य दें.
4 अपने ब्लॉग सामग्री के लिए कॉपीराइट नोटिस अवश्य लगाएँ. चाहे वो क्रिएटिव कामन्स हो या ग्नू – जीपीएल जैसा मुक्त स्रोत का ही क्यों न हो.”

ये सलाहें अमित वर्मा की थीं जिनके चिट्ठे को 9500 से अधिक लोग नियमित सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं. अर्नाब के चिट्ठे रेंडम थॉट्स ऑफ डिमेंटेड माइंड को 4575 से अधिक लोग नियमित सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं. अर्नाब ने जब ब्लॉग लिखना शुरू किया तो इनके चिट्ठे को शुरू में कोई पढ़ता ही नहीं था. कोई पढ़ता भी होगा तो कोई टिप्पणी ही नहीं करता था. कई महीनों तक ये स्थिति बनी रही. तो एक दिन इन्होंने लिखा कि मैं किस लिए और किसके लिए लिखता हूं. मगर ये लगातार लिखते रहे. और आज चंद प्रसिद्ध भारतीय अंग्रेजी चिट्ठाकारों में इनका नाम शामिल है.

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अर्नाब ब्लॉग लेखन के लिए 5 बिनमांगी सलाहें कुछ इस तरह से दे रहे हैं –

1. कभी हार नहीं मानें – बस लिखते रहें. ईमानदारी से लिखते रहें, नियमित लिखते रहें. आज नहीं तो कल – दुनिया आपका, आपके लेखन का नोटिस तो लेगी ही. मैंने जब लिखना चालू किया तो कोई माई का लाल मेरे लिखे को पढ़ता ही नहीं था. टिप्पणी देना तो दूर की बात. मैं दिन पर दिन निराश और हताश होता जा रहा था. पर मैंने कभी भी हार नहीं मानी. मैं बस लिखता गया. और आज मेरे 600 पोस्ट पर 36 हजार जेनुइन टिप्पणियाँ मेरी सफलता की कहानी बयान करती हैं.

2. गलत कारण से चिट्ठाकारी न करें – यदि आपको लगता है कि अपनी चिट्ठाकारी से आप आजीविका चला सकते हैं, या कोई दुकानदारी चला सकते हैं या फिर समाज में क्रांति ला सकते हैं तो बेहतर है आप चिट्ठाकारी का विचार छोड़ दें. भारत में चिट्ठाकारी से आजीविका चंद अपवादों को छोड़कर संभव नहीं है. (हिन्दी में तो ख़ैर बिलकुल ही नहीं है - रवि) इसीलिए, ब्लॉग को ब्लॉग के रूप में ही रहने दें और ब्लॉगिंग के लिए ही ब्लॉग लिखें. हो सकता है कि आपके परिपक्व लेखन (हिन्दी ब्लॉगिंग में भी कई हैं ब्लॉग से प्रिंट मीडिया में आ चुके हैं- रवि) को प्रिंट मीडिया में जगह मिलने लगे और इस तरह कुछ मानदेय पारिश्रमिक मिलने लगे.

3. तकनॉलाजी में न घुसें – अपनी चिट्ठाकारी को शुद्ध रहने दें. माइक्रोब्लॉगिंग, मोब्लॉगिंग, पॉडकास्टिंग, वीडियोकास्टिंग, सर्च इंजिन ऑप्टीमाइजेशन इत्यादि इत्यादि अनाप शनाप आंकड़े बाजी से दूर रहें. जब तक आप ओबामा गर्ल नहीं हैं, आपके लिए शुद्ध ब्लॉगिंग ही सर्वोत्तम है.

4. नकारात्मक, प्रतिकूल टिप्पणियों से निराश और हताश न हों. ये ध्यान रखें कि दुनिया में आप हर किसी को प्रसन्न नहीं रख सकते. आप किसी खास वर्ग के लिए कुछ लिखते हैं तो दूसरा वर्ग आपके पीछे डंडा बल्लम लेकर तो पड़ेगा ही. आप अपने पाठकों का फीडबैक लें, और इससे अपना लेखन सुधारें, मगर ये याद रखें कि आप अपने ब्लॉग के सर्वश्रेष्ठ प्रशंसक और टीकाकार आप स्वयं हैं, और आपको पता है कि आपको क्या लिखना है.

5. यदि आप अब तक ब्लॉगिंग में नहीं कूदे हैं, तो यही सर्वश्रेष्ठ समय है ब्लॉगिंग में अपने आप को झोंकने का. (हिन्दी के लिए तो खैर, ये स्वर्णकाल है – मात्र दस-पंद्रह हजार सक्रिय हिन्दी ब्लॉग में एक्सपोजर और निगाह में चढ़ने का इससे बेहतर समय और हो ही नहीं सकता - रवि) और, आखिरी बात – चिट्ठाकारी में सब जायज है, पर मौलिकता का ध्यान रखते हुए जी भर कर उन विषयों पर लिखें जिसमें आपको अनुराग है – भले ही वो माचिस के डिब्बों के अपने संग्रह के बारे में क्यों न हो - आप पाएंगे कि आपके भीतर की सृजनात्मकता अपने पूर्ण स्वरूप में स्वयंमेव बाहर आ रही है.

 

बहुत उपदेश झेल लिया? उपदेशों को मानें या सिरे से खारिज करें, समय एक ठो ब्लॉग पोस्ट ठेलने का तो हो ही गया है. है ना?

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चार सौ बीस की संख्या से कौन सबसे ज्यादा भय खाता है? चार सौ बीस के अंक से सबसे ज्यादा आतंकित कौन रहता है? चार सौ बीस का आंकड़ा दिन रात जागते सोते उठते बैठते किसे सबसे ज्यादा परेशान करता है?

जाहिर है, भारतीय नेताओं को. इसीलिए, आखिरकार लोकसभा में चार सौ बीस नंबर की कुर्सी ही ग़ायब कर दी गई. लोक सभा में कुर्सियों के नंबर सिस्टम से चार सौ बीस की संख्या ही निकाल बाहर कर दी गई. चारसौबीस नंबर की कुर्सी को चारसौउन्नीस ए कर दिया गया है. फिर अगले नंबर की कुर्सी का क्रमांक चारसौ इक्कीस है. राज्य सभा और दीगर राज्यों की विधान सभाओं में भी आगे यही हाल होने वाला है लगता है. फिर दीगर सरकारी कार्यालयों, भवन, सड़क इत्यादि का नंबर जल्द ही आ जाएगा.

अब ये तो मामला एक माँद में दो तलवार या एक पिंजरे में दो शेर जैसा लगता है. या तो जनप्रतिनिधि चारसौबीस रहे या उसकी कुर्सी का नंबर. अब जबकि जग जाहिर है, दुनिया भर के जनप्रतिनिधियों का चारसौबीसी से चोलीदामन का साथ है, तो उनकी कुर्सी कैसे चारसौबीस हो सकती है भला? फिर, अंधे को अंधा कहना किसे अच्छा लगता है?

अब यह नंबर हम सबको – जनता को भी खारिज कर देना चाहिए. वाहन का नंबर, सड़क का नंबर, मकान-प्लाट का नंबर यदि चारसौबीस होता है तो उसे बदल कर चारसौउन्नीस ए कर देना चाहिए. देश के जन प्रतिनिधि जब चारसौबीस की संख्या पचा नहीं पा रहे हैं, उसे खारिज कर रहे हैं, तो जैसी राजा वैसी प्रजा के लिहाज से हम सभी को चारसौबीस का अंक अपने परिवेश से मिटा देना चाहिए. चारसौबीसी भले रहे, फूले फले, मगर चारसौबीस नहीं.

जब हम चारसौबीस के अंक को अपने परिवेश से बाहर कर रहे हैं तो फिर पहली कक्षा के विद्यार्थी को पहाड़े और गिनती में चारसौबीस क्यों पढ़ाया जा रहा है भला? सिब्बल के लिए एक और एजेंडा आ गया है. छात्रों की गिनती की पढ़ाई में से चारसौबीस के अंक को गायब करना. नहीं तो होगा ये कि विद्यार्थी जब पढ़कर बाहर निकलेगा, सिनेमा की सीट पर या नोट के नंबर पर चार सौ उन्नीस के बाद देखेगा कि उसका पढ़ा लिखा चारसौबीस तो कहीं है ही नहीं तो फिर वो अपनी पढ़ाई को बेकार समझेगा या फिर अपने गुरुओं को गाली देगा कि उन्होंने चारसौबीस तो पढ़ा दिया, मगर चारसौउन्नीस करने की चारसौबीसी नहीं सिखाई.

संसद से शुरूआत हो ही गई है. आइए हम भी खारिज करें चारसौबीस को. आपका ब्लॉग पोस्ट, लिखी-मिली टिप्पणी इत्यादि की संख्या चारसौबीस न रहे ये ध्यान रखें!

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व्यंज़ल


कैसे बताएँ कौन है 420

नजर आते हैं सभी 420


संसद के लंगोटिया यार

एक दूजे को कहते 420


इश्क में इबादत में भी

अब तो चहुँ ओर हैं 420


एक बंदा गया जल्द ही

क्योंकि वो नहीं था 420


रवि आया तो था शरीफ़

वक्त ने बना दिया 420

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दुनिया भर के तमाम कम्प्यूटरों पर ऑफ़िस अनुप्रयोगों में पहले नंबर पर सदा सर्वदा से दौड़ रहे एमएस ऑफ़िस का नया ताज़ा संस्करण – ऑफ़िस 2010 टेक्नीकल प्रीव्यू लगता है एक और लंबी कूद लगाने वाला है जिससे कि आने वाले बहुत समय तक उनके प्रतिद्वंद्वी और भी पीछे ही रहें.

वैसे तो बहुत सी तमाम खूबियाँ हैं ऑफ़िस 2010 तकनीकी पूर्वावलोकन संस्करण में. इसके पूर्ण संस्करण में कुछ और खूबियों और सुविधाओं की उम्मीद तो कर ही सकते हैं.

विंडोज़ 7 (पी4, हायपरथ्रेडिंग 3 गीगाहर्त्ज, 1 जीबी रॅम ) पर वर्ड 2010 को चालू करने हेतु क्लिक करने पर इसका स्प्लैश स्क्रीन 1 सेकण्ड से कम में नमूदार होता है और पाँच सेकण्ड के भीतर प्रोग्राम आपकी सेवा में हाजिर. वाह! क्या स्पीड है.

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काम करने हेतु सुविधाओं में अच्छा खासा इजाफ़ा किया गया है. आप वर्ड (माने ऑफ़िस अनुप्रयोगों – मसलन एक्सेल, पावरपाइंट) के भीतर से ही स्क्रीनशॉट खींच सकते हैं, सीधे लाइव राइटर की तरह इस्तेमाल करके ब्लॉग पोस्ट कर सकते हैं (बहुत कुछ साफ सुथरे एचटीएमएल के साथ) दस्तावेज़ों (प्रेजेन्टेशन इत्यादि में) में वीडियो एम्बेड कर सकते हैं तथा न जाने और क्या क्या.

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दस्तावेज़ के भीतर से ही अपने दस्तावेज़ों को पीडीएफ़/एक्सपीएस के रूप में सहेज सकते हैं, दस्तावेज़ के फ़ाइल टाइप बदल सकते हैं, इंटरनेट पर दस्तावेज साझा करने के लिए शेयरपाइंट में सहेज सकते हैं इत्यादि इत्यादि.

 

स्मार्ट आर्ट ग्राफ़िक के नाम से एक धमाके दार और जोर दार नया तरीका दस्तावेज़ में काम की चीजों को घुसाने के लिए दिया गया है. उदाहरण के लिए आप अपने दस्तावेज़ की सूची को भी कई-कई नए प्रकार से सजा-संवार सकते हैं.

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इसके साथ ऑफ़िस वेब की सुविधा भी मिलेगी जहाँ आप अपने दस्तावेज़ों को न सिर्फ इंटरनेट पर सुरक्षित सर्वरों पर सहेज सकेंगे, बल्कि किसी अन्य स्थान और अन्य कम्प्यूटरों से अपने दस्तावेज़ों में ब्राउज़रों के जरिए काम भी कर सकेंगे.

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ऑफ़िस 2010 - तकनीकी पूर्वावलोकन में हिन्दी के लिए किसी तरह का विशिष्ट आयोजन नहीं है, बल्कि यह अपने पूर्ववर्ती संस्करणों के विपरीत पूर्वस्थापित हिन्दी डीएलएल लाइब्रेरियों (जैसे कि शब्दकोश इत्यादि) को भी अनदेखा कर देता है. तो, जब तक इसमें हिन्दी के लिए बढ़िया वर्तनी जांचक नहीं आता है, तब तक हम हिन्दी वालों के लिए तो एमएस ऑफ़िस 2010 के ये नए घंटे और नगाड़े किसी काम के तो नहीं ही लगते!

यदि आप एमएस वर्ड (एक्सेल, पावरपाइंट, आउटलुक इत्यादि में भी) में हिन्दी या अंग्रेज़ी में काम करते हैं तो बाइलिंग्वल स्मार्ट टैग अंग्रेज़ी हिन्दी डिक्शनरी नाम का मुफ़्त का, द्विभाषी औजार आपके बहुत काम का हो सकता है.

यदि आप अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद में रुचि रखते हैं, तब तो आपके लिए यह बेहतरीन, मदद करने वाला औजार बेहद काम का है जो आपको शब्दों के संदर्भानुसार अर्थों का चयन करने की सुविधा देता है. वैसे तो यह औजार द्विभाषी है – यानी अंग्रेज़ी हिन्दी दोनों में ही काम करता है, मगर हिन्दी से अंग्रेज़ी में यह उतना उन्नत नहीं है जितना अंग्रेज़ी से हिन्दी में. इसका अंग्रेज़ी शब्द भंडार अच्छा खासा है और अनुवादों में अच्छी खासी सहायता तो मिलती ही है, कार्य भी आसानी से और जल्द हो जाता है.

इसे प्रयोग करना बेहद आसान है. इसे इंस्टाल करने के बाद इसे एमएस ऑफ़िस अनुप्रयोगों में कुछ आसान चरणों से सक्षम करना होता है, जिसकी चरण-दर-चरण चित्रमय जानकारी इसके इंस्टालर फ़ाइल के साथ उपलब्ध पीडीएफ़ तथा डॉक फ़ाइल में उपलब्ध है.

एक उदाहरण आपके सामने है – दो वाक्य हैं – एक अंग्रेज़ी में और एक हिन्दी में.

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आप देखेंगे कि अंग्रेज़ी तथा हिन्दी के वाक्य में कुछ जगह पर बैंगनी रंग के बिन्दुओं से शब्दों या वाक्यांशों को रेखांकित किया गया है. जहाँ रेखांकित किया गया है, वहाँ अपना माउस ले जाएं. जैसे कि नीचे दिए गए चित्र में document के ऊपर. आप देखेंगे कि एक छोटा चौकोर डिब्बा प्रकट होता है जिसमें आई लिखा रहता है –

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डब्बे के भीतर आई के ऊपर क्लिक करें.

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आप देखेंगे कि स्मार्ट टैग के कई विकल्प मिलेंगे. वर्ड लिस्ट में जाएं. वहां आपको document के विविध संदर्भों में अर्थ हिन्दी में मिलेंगे. जैसे कि प्रशासनिक उपयोग में – दस्तावेज़, लेख्य, लिखतम, प्रलेख इत्यादि. यदि यहीं पर सामान्य में क्लिक करेंगे तो आपको मिलेंगे – दस्तावेज़ तैयार करना तथा कागजात बनाना. आपको कम्प्यूटर तथा साहित्य खण्ड भी मिलेंगे जिस पर क्लिक करने से संदर्भित अर्थ मिलते हैं.

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हिन्दी में ‘करना’ शब्द के लिए कुछ विकल्प मिले –

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इस अनुप्रयोग का त्रिभाषी रूप – अंग्रेज़ी-हिन्दी-गुजराती भी है. इन्हें भाषाइंडिया के डाउनलोड साइट की निम्न कड़ियों से मुफ़्त उपयोग हेतु सीधे डाउनलोड किया जा सकता है.

द्विभाषी अंग्रेजी हिन्दी स्मार्ट टैग शब्दकोश डाउनलोड

तथा –

त्रिभाषी स्मार्ट टैग (अंग्रेज़ी-हिन्दी-गुजराती) डाउनलोड

इसी प्रकार, बैंकिंग शब्दावली के लिए भी अंग्रेज़ी हिन्दी स्मार्ट टैग शब्दकोश है. जिसे आप इस कड़ी से डाउनलोड कर सकते हैं.

 

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अभी तक तो सेमिनार से वास्ता पड़ा था. धन्यवाद इंटरनेट और इंटरनेट तकनॉलाज़ी. अब आप वेबिनार के जरिए घर बैठे अपने कम्प्यूटर पर वेब यानी इंटरनेट के जरिए तमाम तरह के सेमिनार जैसे आयोजनों का न सिर्फ लुत्फ़ उठा सकते हैं, बल्कि बहुत से शैक्षणिक सेमिनारों – ओह, माफ़ कीजिएगा, वेबिनारों से सीख भी सकते हैं.

हाथ कंगन को आरसी क्या? यदि आप अपने कम्प्यूटर पर लिनक्स संस्थापित कर उसे चलाना सीखना चाहते हैं, तो 19 अगस्त का दिन बुकमार्क कर लें.

भारत की लोकप्रिय कम्प्यूटिंग पत्रिका डिजिट 19 अगस्त को भारतीय समयानुसार शाम 3 बजे ‘लिनक्स बेसिक्स पर संपूर्ण गाइड’ विषय पर वेबिनार आयोजित कर रही है. यह रहा उनका निमंत्रण -

 

This wednesday Digit brings to you a webinar - The complete guide to Linux Basics.

About the Webinar:

The Linux webinar will be a guide to setting up Linux on a target machine using a number of approaches Including an installation CD/DVD and dual booting with another operating systems.The webinar will have step-by-step screenshots for each of these and some basics on getting started, including setting up drivers and installing additional applications

Date: Wednesday, 19th August 2009

Time
: 1500 Hrs
Click here to open webinar link or copy paste this link in your browser: http://snipurl.com/qd45t

Meeting Key
: thinkdigit
Hope to see you there!
Regards,
Team Digit

 

और हाँ, आम – सामान्य सेमिनारों की तरह आप प्रश्न भी पूछ सकते हैं और अपने इनपुट भी दे सकते हैं. जैसे कि आप वहां – यदि न बताया जाए तो – पूछ सकते हैं कि लिनक्स में हिन्दी में लिखने के लिए क्या किया जाए? साथ ही वेबिनार में वेबहुड़दंगियों से सामना करने के लिए भी तैयार रहें, जो वेबिनार जैसे आयोजनों में भी घुसकर अपना ढोल पीटते हैं.

और, आप चाहें तो डिमडिम जैसी वेब सेवाओं के जरिए स्वयं मुफ़्त में वेबिनार आयोजित कर सकते हैं – किसी भी विषय पर – जैसे कि चिट्ठों में लोगों को शांतिपूर्वक कैसे गरियाएँ इत्यादि…:)

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इंटरनेट पर हिन्दी के शुरूआती दिनों में हिन्दी के पाँव जमाने में कुछ खूबसूरत प्रकल्पों का बड़ा हाथ रहा है. इनमें अक्षरग्राम, उसका सर्वज्ञ, अनुगूंज तथा परिचर्चा का नाम सर्वोपरि रहा है. अक्षरग्राम में बहुत सी सामग्री है, जो हिन्दी और हिन्दी वालों के लिए बहुत काम की है. सर्वज्ञ में हिन्दी में लिखने पढ़ने की तकनीकी समस्याओं का तमाम समाधान उसमें संग्रहित आलेखों और कड़ियों में है. इसी प्रकार परिचर्चा फोरम में हिन्दी की तकनालाजी से लेकर घिसे-पिटे चुटकुले तक यानी हर मामले में परिसंवाद का अच्छा खासा और काम का संग्रह था. और, एक समय अक्षरग्राम साइट माइक्रोसॉफ्ट नेटवर्क तथा नवभारत टाइम्स के बाद तीसरे नंबर पर था. बीबीसी हिन्दी का नंबर 8 वां तथा वेबदुनिया हिन्दी का नंबर 10 वां था!

 

अभी ये सभी मृत-प्राय: पड़े हैं. नारद जी का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं है. क्या इनमें पुन: जान नहीं फूंका जाना चाहिए? इसी तरह से चिट्ठाविश्व था हिन्दी का पहला चिट्ठा-संकलक. (देखें इसका जुलाई 2004 का पृष्ठ!) इसे भी ऐतिहासिक दृष्टि से ही सही, कहीं पर पुनर्जीवित नहीं किया जाना चाहिए?

क्या ये प्रकल्प चिट्ठाजगत् से जुड़ सकते हैं? या इनकी सामग्री चिट्ठाजगत् में सीधे ही या रिडायरेक्ट करते हुए डाली जा सकती है?

प्रसंगवश, क्या अब यह समय नहीं आ गया है कि ब्लॉगवाणी / चिट्ठाजगत जैसे प्रकल्प दिन-दूनी-रात चौगुनी प्रगति करने के लिए, आवश्यक संसाधनों (पैसा व मानव श्रम दोनों ही – डेडिकेटेड प्रोग्रामर व वेबमास्टर को नियमित नौकरी पर रखकर) को लगातार बनाए रखने के लिए, उन्हें अपना व्यवसायिक रूप अख्तियार नहीं करना चाहिए? अन्यथा ये अपने-अपने मालिकों से रिसोर्सेस ब्लीड करते रहेंगे और, खुदा न करे, किसी दिन बेमौत मर जाएँगे.

 

अक्षरग्राम के कुछ खूबसूरत पन्ने आर्काइव.ऑर्ग में यहाँ देख सकते हैं

क्या आप अपने कम्प्यूटर के डिफ़ॉल्ट मंगल फ़ॉन्ट से परेशान हैं? देखें कि इसका रूप बदलने के लिए क्या कुछ किया जा सकता है-

लिनक्स गीक इसीलिए विंडोज़ को गरियाते हैं. जहाँ आप लिनक्स में सिस्टम फ़ॉन्ट को मनमर्जी का चुन सकते हैं, विंडोज पर यदि आप यूनिकोड हिन्दी में काम करना चाहते हैं तो सिस्टम के डिफ़ॉल्ट फ़ॉन्ट मंगल (जो यूआई या अन्य अनुप्रयोगों में डिफ़ॉल्ट तय होता है) को बदल ही नहीं सकते. विंडोज के यूनिकोड फ़ॉन्ट प्रदर्शक यूनिस्क्राइब में हिन्दी के लिए डिफ़ॉल्ट में मंगल फ़ॉन्ट ही तय है, और इसे बदला नहीं जा सकता! यदि आप कुछ तोड़ निकालते हैं, तो ये विंडोज़ के लाइसेंसिंग से छेड़छाड़ होगी. एमएस वर्ड जैसे अनुप्रयोगों में आप संपादन व पाठ के लिए तथा नए आधुनिक ब्राउज़रों में प्रदर्शन हेतु दूसरे अच्छे हिन्दी के यूनिकोड फ़ॉन्ट ले तो सकते हैं, पर फिर बात वही ढाक के तीन पात जैसी होगी यदि आपको नोटपैड++ जैसे अनुप्रयोगों पर काम करना होगा.

पिछले दिनों नोटपैड++ पर विंडोज़ एक्सपी पर काम करते समय नुक्ते, बिंदी इत्यादि प्रदर्शन की तमाम समस्याएँ आईं. समस्या नोटपैड++ पर नहीं थी, बल्कि मंगल फ़ॉन्ट में थी. छोटे आकार में इनका प्रदर्शन इतना खराब होता था कि समझ में ही नहीं आता था कि मात्राएं व बिन्दु कहां लग रहे हैं. अचानक खयाल आया कि विंडोज़ 7 के साथ उपलब्ध मंगल फ़ॉन्ट का रूप बहुत सुधरा हुआ है और यह बेहतर प्रदर्शन कर सकता है क्योंकि इसका आकार भी पहले वाले 202 किबा से कम, 174 किबा है, और शायद ये समस्या न आए.

मैंने तत्काल विंडोज 7 से मंगल फ़ॉन्ट कॉपी किया, विंडोज़ एक्सपी से डिफ़ॉल्ट स्थापित मंगल फ़ॉन्ट को निकाल बाहर किया और नया मंगल फ़ॉन्ट स्थापित किया.

और ये रहा नतीजा - एकदम चकाचक!!



स्क्रीनशॉट बड़े आकार में देखने के लिए उन पर चटका लगाएँ.



नोटपैड++ नए मंगल फ़ॉन्ट के साथ


ब्लॉगवाणी नए मंगल फ़ॉन्ट के साथ



बीबीसी हिन्दी नए मंगल फ़ॉन्ट के साथ

(सभी चित्र विंडोज़ एक्सपी पर)

वैसे तो माइक्रोसॉफ़्ट को नया मंगल फ़ॉन्ट विंडोज़ एक्सपी के उपयोक्ताओं को मुफ़्त में उपलब्ध करवाना चाहिए, परंतु ऐसी व्यवस्था माइक्रोसॉफ़्ट में कहां? आप चाहें तो विंडोज़ 7 का ट्रायल संस्करण संस्थापित कर वहां से मंगल फ़ॉन्ट कॉपी कर सकते हैं. इसमें समस्या हो तो आप चाहें तो इसके लिए मुझे ईमेल कर सकते हैं, मैं आपको मंगल का नया संस्करण ईमेल से भेज दूंगा ( अलबत्ता इसे आसान डाउनलोड हेतु कहीं उपलब्ध नहीं करवा सकता)

अद्यतन - 19 अगस्त 09 -- एक तुलना - नए मंगल फ़ॉन्ट और एरियल यूनिकोड फ़ॉन्ट में. स्क्रीनशॉट नीचे देखें:

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आमतौर पर जब आपके मोबाइल में अज्ञात नंबर का मिस कॉल आता है तो आप क्या करते हैं?

यदि आप बिजनेस में हैं, पत्रकार हैं, या सदैव संपर्क में रहने वालों में से हैं तो संभावित ग्राहक, समाचार या भूले बिसरे मित्र से गपशप के नाम पर अकसर उस मिस कॉल पर फोन लगाकर पूछते हैं कि भइए, आपने मुझे फोन लगाया था तो आप कौन हैं, क्या काम था या फिर कहीं गलती से तो नहीं लगाया था?

 

पर, अब अगर आपके पास अज्ञात नंबर का मिस कॉल आए, तो उस अज्ञात नंबर पर वापस फोन कर तहकीकात करने से पहले दोबारा सोच लें.

एफ़-सेक्यूर ब्लॉग के एक लेख  में मिस कॉल के जरिए मासूम मोबाइल प्रयोक्ताओं को चूना लगाने के खेल का भंडाफोड़ किया गया है!

शातिर लोग मोबाइल नंबरों का प्रीमियम खाता खोलते हैं जिसमें इनकमिंग कॉल के लिए (मानो कि आप कोई सेवा ले रहे हैं – जैसे कि अपना ज्योतिष फल जानना चाह रहे हैं… तो इसके लिए प्रति मिनट आपको पच्चीस रुपए भुगतान करने होंगे जिसकी बिलिंग आपके मोबाइल फोन में होगी) कॉल करने वाले मोबाइल फोन के खाते से तगड़ी रकम कट कर उनके खाते में जमा हो जाती है. अब वे किसी स्वचालित तरीके से उस प्रीमियम नंबर से बेतरतीब तरीके से लोगों को मिस कॉल मारते हैं. सौ में से दस लोग भी मिस काल को देख कर फोन लगा लेते हैं – और शायद लगाते ही हैं - तो ये मान लें कि उनकी शातिराना चाल सफल हो गई. और, मिस कॉल का ये धंधा कई क्षेत्रों में सफलता से चल रहा है.

 

तो, अगली दफ़ा यदि मैं स्वयं भी आपको मिस काल मारूं तो पता है न कि आपको क्या करना है? (किसी से कहिएगा मत, मैंने आज ही अपने मोबाइल में वही वाला प्रीमियम एकाउंट डलवाया है!)

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(चित्र – वन मिस्ड काल फ़िल्म से साभार)

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ये मैं नहीं कह रहा. आलोक तोमर ने अपने ब्लॉग में ने ये खुलासा किया है -

“….मगर जहां तक नेट का समाज नहीं होने की बात है, वहां नेट से रोजी रोटी चलाने के कारण मैं कुछ तथ्य उनके सामने पेश करना चाहता हूं। ब्लॉगर और वर्ल्ड प्रेस नाम की दो मुफ्त ब्लॉगिंग सेवाओं के जरिए भारत में ही करीब नौ लाख ब्लॉग बने हैें और उनमें से तीन लाख हिंदी में हैं। एक ब्लॉग को एक दिन में ज्यादा नहीं, अगर दस लोग भी पढ़ते हैं तो तीन करोड़ का समाज तो ये हो गया।…”

क्या सचमुच? चिट्ठा जगत् की मानें तो हम तो आंकड़ा दस हजार के पार जाने की आस लगाए बैठे थे और साल के अंत तक पच्चीस हजार को छूने की भविष्यवाणी किए बैठे थे. वैसे, रेडिफ, वेब-दुनिया, रोमन हिन्दी इत्यादि इत्यादि के हिन्दी ब्लॉगों को भी मिला दें तो क्या आंकड़ा 3 लाख तक पार हो सकता है? मुझे तो फिर भी नहीं लगता.

आपका क्या विचार है?

आलोक तोमर के ब्लॉग पर टिप्पणी बंद है, अन्यथा वहीं उनसे पूछते कि महोदय, आपने ये चमत्कृत कर देने वाले आंकड़े कहां से प्राप्त किए?

और, अगर ये आंकड़े वाकई सही हैं, तब तो हिन्दी ब्लॉग जगत् के लिए है – पा र् टी टा इ म!

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कहावत है कि घूरे के भी दिन फिरते हैं. मच्छरों के भी दिन फिर गए हैं. अब तक तो हम सभी मच्छर भगाने के, मच्छर मारने के तमाम जतन करते फिरते थे. मच्छरदानी से लेकर आलआउट और बिजली के रैकेट, फ़ॉगिंग मशीन से लेकर गम्बूजिया मछली तक न जाने क्या क्या उपाय करते रहते थे और ओडोमॉस लगा लगाकर अपने चेहरे और हाथ पैरों का सत्यानाश करते रहते थे. यही मच्छर अब हमारे वैक्सीनेशन के काम आएंगे. अभी तो मलेरिया के वैक्सीन तैयार हुए हैं, जरा ठहरें. आगे मल्टीपल बीमारियों – जिनमें सर्दी-जुकाम से लेकर टाइफ़ाइड-कुकुर खांसी तक हो सकते हैं, उनके वैक्सीन मच्छरों के डंक से मिलने लगेंगे.

मच्छरों के लिए ये बयार उलटी होगी. अचानक ही वे सबके प्रिय हो जाएंगे. कोई उन्हें हिजड़ों की तरह ताली मारकर अब नहीं मारेगा. बल्कि पुचकारेगा – मच्छर-मियाँ, आओ, जरा हमें भी काट खाओ. मगर होगा ये कि मच्छर-मियाँ आपको काटेंगे ही नहीं. उनका मूड ही नहीं होगा काटने को. या फिर, वे व्यक्ति की शख्सियत देख देख कर काटा करेंगे – जैसे कि ऐश्वर्या या हृतिक जैसों के पीछे तो मच्छर पड़े रहेंगे, या फिर सरकार में बैठे नेताओं के पीछे मच्छरों को जबर्दस्ती पीछे पड़वाया जाएगा, मगर आम आदमी मच्छरों के लिए वैसे ही तरसता रहेगा जैसे आजकल अरहर की दाल के लिए तरसता है.

फिनिट-आलआउट जैसे मच्छरमारकों का धंधा भले ही बिगड़ेगा, मगर फिर नए धंधे भी तो चालू होंगे – इनिट-आलइन जैसे मच्छर बचाओ, मच्छर बढ़ाओ कैमिकल तैयार होने लगेंगे. मच्छरदानी के बजाए मच्छरआनी बनने लगेंगी जिनमें बड़े बड़े छेद युक्त झालरों में विशिष्ट मच्छरों को आकर्षित करने वाले कैमिकल लगे होंगे जो इसके भीतर सोने वालों को मच्छरों से काटने (और इस तरह से मनुष्यों को बीमारियों से इम्यूनाइजेशन करने की) की संभावना बढ़ाने में सहयोग करेंगे. इन मच्छरआनियों के भीतर विशिष्ट किस्म के मच्छरों की खेप छोड़ी जाएगी जो रात भर सोते हुए मनुष्यों को जी भर कर काटेंगे और मनुष्य प्रेम से मच्छरों से अपने को कटवाएगा. ओडोमॉस नया फ़ॉर्मूला ओडोआस लेकर आएगा जो मॉस्किटो रिपेलेंट नहीं, बल्कि मॉस्किटो एट्रैक्टर का काम करेगा.

मकान और शहर भी मॉस्किटो फ्रेंडली बनेंगे. अपने अपने घरों के आसपास सभी को डबरों और कीचड़ों के लिए विशेष, अनिवार्य व्यवस्थाएं करनी पड़ेंगी ताकि मच्छर खूब और बहुत पैदा हों, घर घर पैदा हों. सड़कों के गड्ढों को पाटने के लिए कोई आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि गड्ढों को पाटने वालों पर उल्टे कार्यवाही होगी – बरसाती पानी न सही नलों का बहता पानी तो ऐसे गड्ढों में भर कर मच्छरों के पलनो पोसने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है. नगर पालिका – नगर निगम में मच्छरों के पालने पोसने और उनकी संख्या में इजाफ़ा करने के लिए तगड़े बजट का विशेष सेल बनाया जाएगा. इस सेल की खासियत ये होगी कि इसमें भ्रष्टाचार बिलकुल नहीं होगा. क्योंकि सेल में काम करने वालों को भी तो अपने को मच्छरों से कटवाना होगा कि नहीं? और मच्छर ही नहीं होंगे तो कौन काटेगा? इसीलिए वो पूरी ईमानदारी से काम करेंगे.

और, अभी तो जेनेटिकली मॉडीफ़ाइल मच्छरों के डंक से मलेरिया जैसी बीमारियों से इंसान को इम्यून बनाने की बात की जा रही है, कल को खुदा न करे इंसान को इंसानियत से इम्यून बनाने वाले मच्छर पैदा कर लिए जाएँ तो? पर, दूसरे एंगल से लगता है कि ये इम्यूनिटी तो इंसान में खुद ब खुद पैदा हो रही है. मच्छरों को इसके लिए किसी तरह की तकलीफ देने की शायद कभी कोई आवश्यकता ही नहीं होगी.

 

(समाचार कतरन – साभार टाइम्स आफ इंडिया)

 

पुनश्च: – मच्छर चालीसा आपने अभी तक पढ़ा या नहीं?

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