संदेश

July, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

एवरीथिंग – फ़ास्ट एंड फ़्यूरियस सर्च अब हिन्दी में!

चित्र
वैसे तो आपके कम्प्यूटर पर हजारों लाखों की तादाद में जमा हिन्दी सामग्री व हिन्दी नामधारी फ़ाइलों को खोज-बीन कर ढूंढ निकालने के लिए बहुत से विकल्प हैं – जैसे कि गूगल डेस्कटॉप सर्च (तेज तो है, पर यह विंडोज पर बहुत बड़ा फोल्डर बना देता है) तथा विंडोज डेस्कटॉप सर्च (हिन्दी सामग्री ढूंढने के लिए बेहतर, परंतु हिन्दी नामधारी फ़ाइलों को ढूंढने  के लिए प्रयोग में कठिन, धीमा) इत्यादि.पर, ये उतने त्वरित, तत्क्षण परिणाम नहीं दे पाते जितना एवरीथिंग देता है. ऊपर से यह सिस्टम पर कोई खास लोड नहीं डालता. इसकी संस्थापना फ़ाइल (आप चाहें तो इसका पोर्टेबल संस्करण इसे संस्थापित किए बगैर प्रयोग कर सकते हैं) मात्र 334 किबा है.फ्रीवेयर प्रोग्राम एवरीथिंक का प्रयोग मैं अरसे से करता आ रहा हूं और डेस्कटॉप की फ़ाइलों को त्वरित ढूंढ निकालने में इसका कोई सानी नहीं है. आप जैसे जैसे टाइप करते जाते हैं, वैसे वैसे आपके सामने सर्च को रिफाइन करता हुआ परिणाम डायनामिक रूप से आपके सामने रखता है.एवरीथिंग के नए संस्करण में अब हिन्दी में सर्च की सुविधा भी समाहित हो गई है. मैंने इसके सर्च विंडो पर कहानी शब्द युक्त फ़ाइलों को ढूं…

लिनक्स पॉकेट गाइड हिन्दी में पढ़ें / डाउनलोड करें बिलकुल मुफ़्त

लिनक्स पॉकेट गाइड को हिन्दी में अब आप पूरा का पूरा यहीं ई-पेपर पर पढ़ सकते हैं या फिर पूरी पीडीएफ़ ई-बुक डाउनलोड कर सकते हैं वह भी बिलकुल मुफ़्त. इसका प्रिंट संस्करण किताब के रूप में चाहिए तो पोथी.कॉम पर ऑर्डर कर सकते हैं.

आप चाहें तो इसे मुफ़्त में स्काईड्राइव से यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं
वैकल्पिक डाउनलोड लिंक आर्काइव.ऑर्ग का यह है -

http://archive.org/download/LinuxPocketGuideInHindi/LinuxPocketGuideInHindi.pdf

या फिर ईपेपर पर आप नीचे यहीं पर पढ़ें. ध्यान दें कि किताब 6 मेबा की है, जिससे इसे लोड होने में थोड़ा समय लग सकता है.

टीप : किताब को पूरे स्क्रीन पर बड़े आकार में बड़े फ़ॉन्ट साइज में पढ़ने के लिए इसके ऊपरी दाएँ कोने पर फुल स्क्रीन टॉगल बटन पर क्लिक करें.

हरे राम! हरे कृष्ण!!

चित्र
10 हजार वाट के साउन्ड सिस्टम, जिसके कि कई पोंगे बेदर्दी से फट चुके हैं पर पड़ोस में 72 घंटे का अखंड भगवन्नाम का पाठ चल रहा है. ग्रहण के दुष्प्रभावों को आदमजात से दूर करने के लिए, विश्व शांति के लिए, अच्छी बारिश के लिए, और न जाने क्या क्या – इन सबके लिए अखंड पाठ. पर लगता है कि ये पाठ सिर्फ पाठ नहीं है, ईश्वर को चेताने के लिए है – भइये, देखो हम पाठ कर रहे हैं – 10 हजार वाट का साउन्ड सिस्टम लगाया है. अक्खा शहर पर हमरी आवाज गूंज रही है. तुम तक तो जाएगी ही. अनदेखा करने की, बहरे बनने की कोशिश न कीजो!भक्तों की बारंबार, एक ही टोन और एक सी आवाज में हरे राम! हरे कृष्ण!! भजती आवाज जब दिमाग को कंझाने लगी (सोचो, भगवान कितना बोर होता होगा, या अब तक वो किस हद तक बोर हो चुका होगा) तो सोचा चलो कुछ टीवी देखा जाए. हाई वॉल्यूम में टीवी ऑन किया. बाहर से आ रही हरे राम! हरे कृष्ण!! से थोड़ी देर के लिए मुक्ति मिली. चैनल पर चल रहा था – राखी सावंत का स्वयंवर. पांचेक मिनट ये ड्रामा देखा. राखी सावंत का आधुनिक स्वयंवर. और मेरे मन में बेसाख्ता निकला - हरे राम! हरे कृष्ण!! ये भी कोई सीरियल है? ये भी कोई स्वयंवर है?…

लीजिए डाउनलोड एस्सेलरेटर का मजा हिन्दी में

चित्र
यदि आप इंटरनेट से कुछ न कुछ डाउनलोड करते रहते हैं तो ऐसे में डाउनलोड प्रबंधक आपके लिए बेहद काम के रहते हैं क्योंकि ये न सिर्फ आपके डाउनलोड गति को बढ़ाते हैं, बल्कि डाउनलोड में त्रुटियों को भी नहीं होने देते और यदि डाउनलोड बीच में ब्रेक हो जाता है तो आपको शुरू से डाउनलोड नहीं करना होता, बल्कि बाकी बचे हिस्से को डाउनलोड कर फ़ाइल काम में ले सकते हैं. ऐसा ही एक उन्नत किस्म का डाउनलोड प्रबंधक है डाउनलोड एस्सेलरेटर. अब यह हिन्दी में भी उपलब्ध है. देखें कुछ स्क्रीनशॉट्स -प्रोग्राम सेटअप के समय हिन्दी भाषा का विकल्प चुनें.अनुवाद की भाषा थोड़ी भोथरी है, मगर ये ऑनलाइन, स्वयंसेवकों द्वारा विकि-आधारित पृष्ठ पर की गई है. अत: गलतियों को नजरअंदाज कर प्रयास को सराहें. और यदि हो सके तो अनुवाद की साफ सफाई में सहयोग दें. डाउनलोड एस्सेलरेटर हिन्दी यहाँ - http://download.speedbit.com/dap92_bros.exe से डाउनलोड करें.

इंटरनेट बुराइयों की जड़ है...

चित्र
मैं अपने पुराने दिनों को याद नहीं करना चाहता। तब इंटरनेट नहीं था, ईमेल नहीं था (और न ही पॉर्न साइटें थीं)। आज के शोध छात्रों के विपरीत, मुझे अपनी परियोजना फ़ाइलों को पूरा करने के लिए विद्यालय के ग्रंथालय तक नित्य दौड़ लगानी होती थी, सैकड़ों भारी भरकम पुस्तकों को उठापटक कर हजारों पृष्ठों में से मसाला खोजना होता था, टीप लिख-लिख कर रखना होता था, अपने प्रोफ़ेसर के साथ घंटों बैठकर दिमाग खपाकर प्रत्येक महत्वपूर्ण बात को दुबारा-तिबारा ढूंढ ढांढ कर लिखना होता था।

तब अगर आज की तरह मेरे पास इंटरनेट होता तो मुझे कहीं जाने की जरूरत ही नहीं होती। मैं अपने शोध विषय के कुछ शब्दों को लेकर गूगल पर कुछ खोजबीन करता और कम्प्यूटर तंत्र की सबसे बढ़िया ईजाद - ‘नक़ल कर चिपका कर’ यानी कि कॉपी/पेस्ट के जरिए देखते ही देखते मेरा बेहतरीन, तथ्यपरक, मौलिक शोध ग्रंथ तैयार हो जाता। किसी तरह की कोई झंझट नहीं होती। आज के शोधार्थियों को तो आधुनिक युग का आशीर्वाद मिला हुआ है। आज उनके पास इंटरनेट है। गूगल है।

आज के शोधार्थियों को तो आधुनिक युग का आशीर्वाद मिला हुआ है। आज उनके पास गूगल है। मैं किसी सूरत अपने पुराने दिनों क…

सौजन्य बाब.ला - अभिवादन का नया तरीका – धन्यवाद, निंदापूर्ण, मेनका।

चित्र
इंटरनेट पर हिन्दी अपने पैर जहाँ तहाँ पसार रही है. इसका एक अच्छा उदाहरण है बहुभाषी पोर्टल बाब.ला. इसमें हिन्दी अनुवाद, शब्दकोश इत्यादि दिए गए हैं. आइए, हिन्दी शब्द अच्छा की जांच परख यहाँ करें -वाह!, ये तो वाकई इम्प्रेसिव है!बाब.ला में शब्द आधारित ऑनलाइन  गेम्स जैसे कि हैंगमेन, उलट-पुलट, स्मरण इत्यादि अन्य भाषाओं में तो हैं, परंतु हिन्दी में नहीं हैं. उम्मीद करें कि ये शीघ्र ही उपलब्ध होंगे. बाब.ला की सूचना मुझे मेनका के  ईमेल से मिली. आप भी जायजा लें -मेरा नाम मेनका है और मैं bab.la (http://bab.la) में काम करती हूँ.  यह एक इंटरैक्टिव भाषा पोर्टल है. मैं हाल ही में आपके वेबसाईट से गुजरी और मुझे आपके लेखकों के लेखन दिलचस्प लगे.
bab.la एक इंटरैक्टिव भाषा पोर्टल है  जो मुफ्त में ऑनलाइन शब्दकोश, शब्द संग्रहों में पाठ, परीक्षा, खेल और वाद सभा दिलवाती है. यहाँ १५ भाषाओं में शब्दकोश हैं. इनमें हज़ारों बोलचाल में इस्तेमाल किए जानेवाले शब्द और हर विषय में उपयोग होनेवाले विशेष शब्द संग्रहित है. bab.la का उपयोग करनेवाले अपनी ही उल्थाएं जोड सकते हैं, परीक्षाएं बना सकते है, और स्वयं ही अपने श…

एचपी कॉम्पैक लैपटॉप / नोटबुक – टोटल फेलुअर?

चित्र
एचपी / कॉम्पैक का लोगो कितना सुंदर और प्यारा सा है – एचपी-टोटल केयर. परंतु काम सीधे इसके उलट है. टोटल फेलुअर. इसलिए, दोस्तों एचपी कॉम्पैक का लैपटॉप/नोटबुक भूलकर भी न खरीदें. विवरण आगे देता हूं कि क्यों:-मेरे v3000 सीरीज के कॉम्पैक नोटबुक में शुरू से ही समस्या बनी रही थी. यह धुंआधार गर्म होता था, यदा कदा डिस्प्ले नहीं आता था, वायरलेस नेटवर्क कार्ड में गड़बड़ी थी, डीवीडी रेकॉर्डर खराब हो गया था इत्यादि... 4-5 बार रिपेयर होने के बाद भी उसके वायरलेस ने पूरा काम करना बंद कर दिया था. मेरी 12 महीने की वारंटी खत्म हो गई थी तो मैं मरता क्या न करता, यूएसबी वायरलेस नेटवर्क कार्ड अतिरिक्त 1200 रुपए खर्च कर ले आया. मुझे लगा था कि ये सिर्फ मेरे ही कम्प्यूटर में है. परंतु नहीं. ये समस्या बहुत से, हजारों-लाखों एचपी/कॉम्पैक नोटबुक/लैपटॉप में है. हजारों परेशान ग्राहकों ने तमाम फोरमों में इसका जिक्र किया है. भारत की कम्प्यूटर तकनालाजी की पत्रिका डिजिट ने इस विषय पर मई-जून-जुलाई 2009 में पिछले तीन महीनों में लगातार फॉलोअप किया है और सैकड़ों परेशान उपभोक्ताओं की समस्याओं को सामने रखा है. इन समस्याओं के मद…

आइए, लिनक्स सीखें हिन्दी में...

चित्र
जब हिन्दी ब्लॉगिंग की कट-पेस्ट किताब छप कर आई तो विचार आया कि क्यों न इसी स्टाइल में हिन्दी लिनक्स सिखाने की किताब लिख दी जाए. वैसे भी लिनक्स संबंधी बहुत से ट्यूटोरियल पहले भी लिख मारे थे और जाल जगत के लिनक्स प्रेमी गीकअंकुर गुप्ता ने भी बहुत से टिप्स व ट्रिक्स हिन्दी में ही लिख मारे थे. आलोक ने तो लिनक्स परिचय का पूरा का पूरा अनुवाद का बीड़ा एक समय हाथ में लिया था. तो कुछ शुरूआती सामग्री हाथ में तो थी ही. आलोक की अनुवादित सामग्री जीपीएल में थी, और अंकुर ने अपने ब्लॉग की सामग्री के इस्तेमाल की सहर्ष अनुमति दे दी. आलोक व अंकुर का विशेष आभार.
इस विचार को बूस्ट-अप किया राजेश रंजन ने जिन्होंने पहले ही हिन्दी कम्प्यूटिंग पर एक बढ़िया किताब लिख डाला है, और उसे अभी वे परिमार्जित कर रहे हैं. यह किताब भी कुछ ही समय में आपके सामने उपलब्ध होगी.
तो इस तरह लिनक्स सिखाने की हिन्दी गाइड तैयार हो गई. किताब को बिगिनर्स – नए सीखने वालों के लिहाज से लिखा गया है, चित्रमय है और स्टेप-बाई स्टेप विधियाँ दी गई हैं. लिनक्स टिप्स व ट्रिक्स भी है, तो अति संक्षिप्त लिनक्स मैनुअल भी. यदि किसी को लिनक्स सीखना …

पतलून पहन कर आज ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं और नंगा हो गया हूं…

चित्र
इससे जोरदार, इससे शानदार और इससे नया-नायाब विचार और क्या हो सकता है भला? न रहेगा बांस न बनेगी बांसुरी और न फिर कोई इसे बजा पाएगा! भ्रष्टाचार रोकने के लिए बिना जेब की पतलून पहन कर काम पर आने का आदेश दिया गया है. बात भले ही नेपाल की हो रही हो, पर किसी दिन भारत में, और फिर सारे संसार में ये बात लागू होने में देर नहीं लगेगी. ये पक्का समझें.चलिए, पुरुष कर्मचारी पर तो यह नियम लागू कर सकते हैं कि वो बिना जेब की कमीज-पतलून पहन कर आए. पर, यदि कर्मचारी महिला हुई तो? बहुत सी महिलाएँ अपना माल-मत्ता रुपया-पैसा अपनी चोली में उंड़स कर रखती हैं. तो क्या उन पर बिना चोली के वस्त्र पहन कर आने का नियम बनाया जाएगा? चलिए, ये विचार तो एक्स्ट्रीम हो सकता है, मगर उन पर बिना हैंड-बैग लिए काम पर आने का नियम तो बनाया ही जा सकता है. अब भले ही हो पाउडर लिप्स्टिक्स बनाने वाली कंपनियों - पॉड्स, निविया, रेवलॉन वालों की ऐसी  की तैसी. वैसे, इस नियम को बनाने वालों को बिना जिप की पतलून पहनने का नियम बनाने का विचार क्यों नहीं आया यह आश्चर्य का विषय  है. समाज में भ्रष्टाचार के अलावा और भी तो अपराध होते हैं. बहुत से भ्रष्टा…

राष्ट्रीय ब्लॉग संगोष्ठी : छपास पीड़ा का इलाज मात्र हैं ब्लॉग?

क्या ब्लॉग सिर्फ और सिर्फ छपास पीड़ा को जड़ से मारने का इलाज मात्र है या फिर इंटरनेट का यह मल्टीमीडिया युक्त सुगम सरल प्रकाशन सुविधा भविष्य में प्रेमचंद या देवकीनंदन खत्री जैसे लेखकों को पैदा करने की ताक़त रखता है?पिछले दिनों हिन्दी के एक ब्लॉग में पुष्पा भारती के कथन पर गंभीर चर्चा चली थी। पुष्पा भारती ने हिन्दी ब्लॉगों को यह कह कर खारिज कर दिया था कि यहाँ तो भाषाएँ भी बड़ी अजीब है - ब्लॉगर ‘टेंशनात्मक’ लिख रहे हैं – तो ये टेंशनात्मक क्या है? इससे पहले नामवर सिंह जैसे दिग्गज इसे खारिज कर चुके हैं। अलबत्ता राजेंद्र यादव सरीखे कुछ विशिष्ट भविष्यदृष्टा की नजरों में ब्लॉगों के जरिए सृजनात्मकता की असीम संभावनाएँ भी झलकती हैं।पांच साल के हिन्दी ब्लॉग इतिहास में सृजनात्मकता के लिहाज से क्या कुछ हासिल हुआ और भविष्य का पट क्या कहता है?क्या ब्लॉग सिर्फ और सिर्फ छपास पीड़ा को जड़ से मारने का इलाज मात्र है या फिर इंटरनेट का यह मल्टीमीडिया युक्त सुगम सरल प्रकाशन सुविधा भविष्य में प्रेमचंद या देवकीनंदन खत्री जैसे लेखकों को पैदा करने की ताक़त रखता है? क्या यहाँ सिर्फ अनर्गल और पानठेलों-पर-की-जाने-व…

पैसे के लिए कुछ भी करेगा?

चित्र
मंदी की मार में, आदमी तो आदमी, लगता है कंपनियाँ भी पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गई हैं. विश्व की नं #1 पैसा-लेन-देन वाली कंपनी पेपाल ने एक नया विचार गढ़ा है. आप सभी से थैंक्यू सर्विस नहीं ले सकते, लिहाजा पैसा देकर काम करवाएँ. कोई भी काम. छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा. डू स्टफ़ फ़ॉर मनी नाम की यह सेवा देखते हैं कितना लोकप्रिय होती है, और जनता के काम आती भी है या नहीं. जो भी हो, वहां पर लोगों को एक दूसरे को काम बताने की होड़ सी मच गई है – पर, फोकट में नहीं. पैसा देकर.मैंने समीर ‘उड़नतश्तरी’ को बेनामी आरती फिर से ढोल मंझीरे के साथ गाने का निवेदन किया, तो इसने मेरा हिन्दी अनुरोध अस्वीकार कर दिया. ये जमूरा प्रोग्राम हिन्दी नहीं समझता.फिर से अंग्रेज़ी में अनुरोध भेज दिया है. देखते हैं समीर भाई झांझ-मंझीरे के साथ आरती गाने का काम करते भी हैं या नहीं. यदि वो फिर से आरती गा देते हैं तो समझिए कि यह प्रकल्प सफल है!

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

अधिक दिखाएं

---------------

छींटे और बौछारें का आनंद अपने स्मार्टफ़ोन पर बेहतर तरीके से लें. गूगल प्ले स्टोर से छींटे और बौछारें एंड्रायड ऐप्प image इंस्टाल करें.

इंटरनेट पर हिंदी साहित्य का खजाना:

इंटरनेट की पहली यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित व लोकप्रिय ईपत्रिका में पढ़ें 10,000 से भी अधिक साहित्यिक रचनाएँ

हिन्दी कम्प्यूटिंग के लिए काम की ढेरों कड़ियाँ - यहाँ क्लिक करें!

.  Subscribe in a reader

इस ब्लॉग की नई पोस्टें अपने ईमेल में प्राप्त करने हेतु अपना ईमेल पता नीचे भरें:

FeedBurner द्वारा प्रेषित

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

***

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद करें