टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

June 2009

krishna kumar ajanabi ghoomti hui


(प्रिया से क्षमायाचना सहित)

आज पहली बारिश ने सत्यानाश कर दिया,
पॉलीथीन से तने झोंपड़े को सराबोर कर दिया,
एक झोंका हौले से आया और तिरपाल ले गया,
फिजा ने कान से टकरा कर जैसे, एक गाली दे दिया।

पानी की धार रुखसारों को छूती हुई...
कान के पीछे से नीचे चली गई,
मौका देख एक धार कमीज भिगो गई,
धार की बेहयाई...
खून बन कर आँखों में उतर गई।

नजर उठा जब आस-पास देखा...
उड़ कर आए टपरे, फटे तिरपाल...
इन्द्रधनुषी पॉलीथीन शीट, नालीदार चादरें...
असहाय पड़े थे इधर उधर,
हम दीवाने से बरसात में उन्हें उठा जमा रहे थे।

मन बावरा बदहवास हो गया,
इन धड़कनों पर इसका राज हो गया।

सुन बे मौसम! बदल दे मिजाज अपना जल्दी
घबरा रहे हैं हम कि कहीं
“हमें तुमसे नफरत न हो जाए”
---

(चित्र – कृष्ण कुमार अजनबी की कलाकृति)

 windows 7

यदि आप किसी कारण से अपने विंडोज़ एक्सपी को दो-बारा किसी नई जगह या नए पार्टीशन पर (एक ही कम्प्यूटर पर क्लीन इंस्टाल) इंस्टाल करते हैं, या कोई नया उन्नत संस्करण डालते हैं जो अपग्रेडेबल नहीं होता (जैसे कि होम एक्सपी पर नॉन अपग्रेडेबल एन्टरप्राइज या अल्टीमेट) तो आपको विंडोज़ के सारे प्रोग्राम नए सिरे से इंस्टाल करने होते हैं, और कई प्रोग्रामों को दोबारा रजिस्टर करना होता है.

ये सारा झमेला बहुत ही सिरदर्दी का होता है जिसमें अच्छा खासा समय जाया होता है.

परंतु विंडोज़ 7 में ये सुविधा है कि अब आप अपने पुराने विंडोज़ में संस्थापित प्रोग्रामों को वहीं से सीधे चला सकते हैं. जब आप अपने विंडोज एक्सपी पर विंडोज़ 7 अतिरिक्त रूप से दूसरे पार्टीशन पर ड्यूअल बूट मोड में संस्थापित करते हैं तो आपको अपने विंडोज़ 7 के लिए उन प्रोग्रामों को अलग से (आमतौर पर प्राय: सभी प्रोग्रामों में, कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में विशिष्ट प्रोग्रामों को छोड़कर) फिर से दोबारा संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है.

आप बस अपने पुराने विंडोज के प्रोग्रामों के शार्टकट अपने विंडोज़ 7 के डेस्कटाप पर लगा लें और अपने प्रिय प्रोग्रामों का आनंद लें. यहां तक कि जटिल प्रोग्राम जो विंडोज़ रजिस्ट्री पर निर्भर रहते हैं जैसे कि एमएस ऑफिस वे भी बढ़िया चलते हैं.

लगता है कि विंडोज विस्ता की असफलता से विंडोज़ 7 ने बहुत कुछ सीख लिया है :)

विंडोज़ 7 RC यहाँ से डाउनलोड करें. इसे आप मार्च 2010 तक जांच परख हेतु मुफ़्त चला सकते हैं.

कभी कभी बस्तर के किसी गांव में बैठे बैठे आपको लगता होगा कि न्यूयार्क (या कनाडा?) से आपको अपना ब्लॉग पढ़वाने का स्पैम भेजने वाले के (कम्प्यूटर के) हार्ड-डिस्क में आखिर कौन सा डाटा भरा होगा? यदि आपको उसके हार्ड-डिस्क पर पहुंच हासिल हो जाए तो? चलिए, उसके पूरे हार्ड-डिस्क पर तो नहीं, पर हाँ, उसके कुछ फ़ोल्डरों पर अब आपकी पहुँच हो सकती है. यही नहीं, आप चेन्नई में बैठकर, अपने कंप्यूटर पर दिल्ली के अपने मित्र के हार्ड-डिस्क पर तमाम जुगाड़ों से जमा किए गए सैकड़ों हजारों गानों को आप सुन सकते हैं.

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दिन-ब-दिन तकनीक के बढ़ते कदम से लगता है कि एक दिन पता नहीं हम कहां चले जाएंगे. बहरहाल, एक और तकनीकी छलांग जो जाल जगत के कम्प्यूटरों को और भी अधिक उपयोगी बना देगी. कुछ समय पूर्व बिट-टोरेंट नामक फ़ाइल शेयरिंग विधा ने इंटरनेट कम्प्यूटरों के प्रयोग की दिशा ही बदल दी थी, ठीक उसी तरह नए कलेवर में और बेहद आसान जाल अनुप्रयोग रूप में आए इस प्रकल्प की उपयोगिता इंटरनेट से जुड़े कम्पयूटरों व प्रयोक्ताओं के मायने बदल कर रख देने की ताकत रखती है.

आखिर क्या है यह अनुप्रयोग?

यह है ओपेरा यूनाइट. ओपेरा यूनाइट आपके ओपेरा ब्राउज़र को एक वेब सर्वर के रूप में बदल देती है. इस वेब सर्वर में अभी अंतर्निर्मित फ़ाइल साझा है, चित्र साझा है, एक मल्टीमीडिया ऑडियो प्लेयर है (एमपी3 बजाता है), इंस्टैंट मैसेंजर है और टीप चिप्पी औजार है.

इसके मायने क्या?

इसके मायने यह है कि आप ओपेरा ब्राउजर तथा ओपेरा यूनाइट को डाउनलोड करें, ओपेरा में एक खाता खोलें, और बस तैयार हो जाएँ. आपको एक जाल-पता मिलेगा, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति आपके कंप्यूटर के फ़ोल्डरों पर पहुँच सकेगा. इसके लिए ओपेरा ब्राउजर चालू करते ही आप इसके बाएँ पट्टी में पैनल पर यूनाइट पर क्लिक करें. यूनाइट खुलते ही आपको विविध विकल्प मिलेंगे. जैसे कि फ़ाइल साझा, फोटो साझा, मीडिया प्लेयर इत्यादि. इसके लिए आपको वांछित फ़ोल्डर चुनने के लिए कहा जाएगा जिसे आपको इंटरनेट से साझा करना है. यहाँ सिर्फ उन्हीं फ़ोल्डरों को चुनें जिसे आप साझा करना चाहते हैं. आपके बाकी के फ़ोल्डरों पर किसी की पहुँच नहीं हो सकेगी जब तक आप न चाहें. आप चाहें तो सुरक्षा के लिहाज से डिफ़ॉल्ट सेटिंग का प्रयोग कर सकते हैं जिसमें आपके मित्रों को आपके फ़ोल्डरों पर पहुँच के लिए पासवर्ड की आवश्यकता होगी. या फिर आप चाहें तो बगैर पासवर्ड के भी इन्हें रख सकते हैं.

एक बार सेटिंग करने के बाद आप इसका प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं. ओपेरा यूनाइट को डेवलपरों के लिए खुला रखा गया है और आने वाले दिनों में इसमें और भी तमाम चीजें जुड़ेंगी. जैसे कि ऑनलाइन शतरंज या टिक-टैक का खेल जो हम और आप आपस में खेल सकें!

हाल फिलहाल, आप मेरे निम्न फ़ोल्डरों को देख सकते हैं –

(1) फोटो शेयरिंग:

http://a.raviratlami.operaunite.com/photo_sharing/

यहाँ आपको मेरा चित्र देखने को मिलेगा. आप चाहें तो इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं. इसका पासवर्ड है - jWhdu6Pm

(2) फ़ाइल शेयरिंग:

http://a.raviratlami.operaunite.com/file_sharing/

यहाँ आपके लिए मैंने कुछ मुफ़्त के यूनिकोड हिन्दी फ़ॉन्ट रखे हैं. चाहें तो डाउनलोड करें! पासवर्ड है – tWdrxluX

(3) टीप चिप्पी:

यहाँ आप मुझे चिप्पी भेज सकते हैं – कुछ भी. एड नोट पर क्लिक करें और भेजें - जैसे कि – क्या घटिया लिखा है...

http://a.raviratlami.operaunite.com/fridge/

कोई पासवर्ड नहीं!

(4) सर्वर:

यहाँ पर आप मेरे वेब सर्वर से पेश किए जा रहे मेरे हार्ड-डिस्क में रखे एचटीएमएल फ़ाइलों को ब्राउज कर सकते हैं. हिन्दी लिनक्स – साभार – आलोक.

http://a.raviratlami.operaunite.com/webserver/

यहाँ इंडेक्स एचटीएमएल फ़ाइल पर क्लिक करें व लिनक्स हिन्दी गाइड का आनंद लें. पासवर्ड है – tFwpofqx

और, अंत में –

(5) मीडिया प्लेयर:

यहाँ पर आप मेरे हार्ड डिस्क में रखे हुए तमाम एमपी3 फ़ाइलों को अपने कम्प्यूटर पर ऑनलाइन सुने!

http://a.raviratlami.operaunite.com/media_player/access_content/uH4NYgah

क्या कहा? वहां तो सिर्फ एक ही गाना है – रॉक ऑन!

भई, मेरे बैंडविड्थ का भी तो सवाल है. अगर ज्यादा अपलोड की कोशिश हुई तो मेरा सर्वर बैठ जाएगा.

(टीप – ये सुविधाएँ मेरे कम्प्यूटर के ऑनलाइन बने रहने की स्थिति में ही उपलब्ध रहेंगी, तथा इंटरनेट की अपलोड गति पर भी बहुत कुछ निर्भर रहेगा. अत: इसे मात्र जांच परख नुमा पोस्ट समझा जाए.)

 

अद्यतन : – अभी अभी दोस्तों ने कुछ चिप्पियाँ मारी हैं. स्क्रीनशॉट संलग्न है -

fridge

तो, देर किस बात की? आप भी चिप्पियाँ मारिए, मेरे फ्रिज में!

हाल ही में इस पोस्ट पर अनाम जी की ये टिप्पणी दर्ज हुई:

 dhoort and ghaagh

तो,  खरी-खरी (बहना?, व्याकरण के हिसाब से?) भाई को समर्पित है ये व्यंज़ल :

 

वक्त ने बना दिया है धूर्त और घाघ
कहीं खुद वक्त तो नहीं धूर्त और घाघ

मेरे शहर का हाल है कुछ ऐसा यहां
जिंदा हैं यहाँ तो बस धूर्त और घाघ

उठा तो दी है यार तुमने इधर उँगली
वक्त बताएगा कौन है धूर्त और घाघ

जाने कैसे चश्मे पहन लिए हैं लोग
एक दूसरे में देखते हैं धूर्त और घाघ

आया तो था रवि भी शहर में बेदाग़
दोस्तों ने बना दिया धूर्त और घाघ

----

प्रिय मिश्र जी,
शायद देरी आपकी तरफ से तो नहीं हुई? सालेक भर पहले का (6-2-08) ईमेलिया आदान-प्रदान का स्क्रीनशॉट नीचे दिया जा रहा है. समस्या पुरानी है, बार बार हो रही है और यह शायद आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता का है. आपसे गुजारिश है कि होस्ट बदलें, कोई सुरक्षित सेवा प्रदाता की सेवा लें.
इस संबंध में कल सुरक्षा संबंधी कुछ पत्राचार भी हुए, जिनमें एक मित्र ने लिखा -
“मिश्रजी को मैने बहुत पहले ही चेताया था. वो बोले कोई समस्या नहीं, मगर थी जरूर.”
शायद ये भी आपको याद हो.

और हाँ, आपने सही कहा, पिछली पोस्ट तो नहीं, पर ये पोस्ट जरूर ठेलने का फायदा उठाने लिए एक विषय के रूप में जानबूझ कर चुना है. और, शीर्षक भी! :)


(चित्र बड़ा कर देखने के लिए इस पर क्लिक करें.)

r c mishra virus
कुछ हिन्दी ब्लॉगों (अधिकांशत: स्वयं के होस्टेड डोमेन युक्त वर्डप्रेस वाले ब्लॉगों में) की साइट पर यदि आप जाएंगे, और यदि आपने अपना एंटीवायरस तंत्र और फायरवाल मजबूत नहीं रखा हुआ है, तो आपका कम्प्यूटर ट्रोजन हार्स नामक वायरसों से संक्रमित हो सकता है. ट्रोजन हार्स आपके कम्प्यूटर से पासवर्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ चुराने वाले वायरसों को कहा जाता है. ट्रोजन हार्सों को आईफ्रेम के जरिए वेबसाइट के पृष्ठों पर कम सुरक्षा का फायदा उठाते हुए इंजेक्ट कर दिया जाता है और वेबसाइट के मालिकों को हवा ही नहीं रहती. और इसका खामियाजा उस जाल स्थल की सैर करने वाले मासूम प्रयोक्ता भुगतते रहते हैं.

इस तरह के वायरस और ट्रोजन की समस्या सिर्फ हिन्दी ब्लॉगों की नहीं है. समस्या तमाम इंटरनेट पर तमाम साइटों की है – यहाँ तक कि मजबूत से मजबूत सुरक्षित तंत्र में भी हैकरों द्वारा वायरस घुसा दिए जाते हैं. अभी हाल ही में खबर आई थी कि अमरीकी रक्षा प्रणाली के कुछ संवेदनशील नेटवर्क में भी हैकरों ने सेंध लगा दी थी और वायरसों की बात तो दूर, उस पर अपना कब्जा जमा लिया था.
इसीलिए, अपने स्वयं के कम्प्यूटर के लिए अभेद्य सुरक्षा प्रणाली बनाए रखें. इंटरनेट पर भ्रमण करते समय सुनिश्चित करें कि आपका एंटीवायरस और फ़ॉयरवाल चल रहा है. और, यदि आप स्वयं के डोमेन पर साइट चला रहे हैं, तो भगवान के लिए, उसमें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाएं, नियमित तौर पर स्कैन करते रहें ताकि सुरक्षा के बावजूद जाने-अनजाने कोई वायरस डेरा न डाल बैठे.
उपर्युक्त स्क्रीनशॉट मेरे कम्प्यूटर पर चल रहे अवास्त! एंटीवायरस द्वारा दी गई चेतावनी (9 जून सुबह 7.30 बजे, भारतीय समयानुसार) का है. अवास्त! एंटीवायरस घरेलू उपयोक्ताओं के लिए मुफ़्त में उपलब्ध है, और ये आपके कम्प्यूटर को 7 स्तरीय सुरक्षा प्रदान करता है.

--
अद्यतन - टिप्पणियों में कुछ सुझाव/पूछताछ हुए हैं, अत: जानकारी के लिए -

अवास्त की तरह एवीजी भी मुफ़्त व बढ़िया एंटीवायरस है. अवास्त का डाउनलोड लिंक है - http://www.avast.com/eng/download-avast-home.html

एवीजी का डाउनलोड लिंक है -


http://free.avg.com/download-avg-anti-virus-free-edition

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स्क्रीन कैप्चर के लिए अत्यंत परिष्कृत प्रोग्राम स्नैगइट का (पूर्ण, लाइसेंस) संस्करण 7.1 आप मुफ़्त में 5 जून तक डाउनलोड कर सकते हैं. आमतौर पर जो स्क्रीन शॉट आप मेरे ब्लॉग में देखते हैं उनमें से प्रायः स्नैगइट द्वारा खींचे गए होते हैं.

स्नैगइट में और क्या क्या हैं –

· डेस्कटॉप का कोई क्षेत्र फाइल या क्लिपबोर्ड में चित्र सहेज सकते हैं

· किसी विंडो को फाइल में सहेज सकते हैं

· स्क्रॉलिंग विंडो को भी चित्र/एनीमेटेड जिफ में सहेज सकते हैं

· स्क्रीन में किसी वस्तु को सहेज सकते हैं

· संपूर्ण स्क्रीन सहेज सकते हैं

· फ्रीहैंड क्षेत्र का चित्र ले सकते हैं

· टाइम डिले विकल्प द्वारा मेन्यूओं के भी चित्र खींच सकते हैं

· विंडो के पाठ के भी चित्र ले सकते हैं

· स्क्रीन का वीडियो रेकॉर्ड कर सकते हैं

· किसी वेबसाइट के सारे चित्रों को सहेज सकते हैं

· गेम (कम्प्यूटर खेल) के भी चित्र खींच सकते हैं

· इसके साथ ही आपको इसमें अन्य सुविधाएँ भी मिलती हैं जैसे कि चित्रों में तीर, निशान इत्यादि डालना, चित्र के फ़ॉर्मेट को बदलना इत्यादि.

स्नैगइट 7.1 यहाँ से डाउनलोड करें. ईमेल से लाइसेंस कुंजी प्राप्त करने के लिए वहीं पर पंजीकृत भी होना पड़ेगा.

 

# अद्यतन – सुविधा 5 मई गलत छप गया है. इसे 5 जून पढ़ें

लीजिए, आपके लिए पेश है हिन्दी में, हिन्दी का पहला, असली #1 ब्लॉग गान.

पर, पहले थोड़ी सी नजर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर डालें.

लिनस टॉरवाल्ड (अरे! आप लिनस को नहीं जानते?!!!!) ने जब एक माइक्रोसॉफ़्ट के उत्पाद की दिल खोलकर प्रशंसा की तो, लगा कि क्या सूर्य पश्चिम से तो नहीं उग आया है? मगर, सचमुच यहाँ सूर्य कहीं और से ही चमक रहा है.

लिनस ने सांगस्मिथ नाम के एक औजार की घोर, मुक्त कंठ से प्रशंसा की तो मैंने भी उसे डाउनलोड कर लिया क्योंकि उसका ट्रायल वर्जन मुफ़्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है.

सांगस्मिथ का टैगलाइन है – हर एक के दिल में संगीत बजता है.

song-smith

सही कहा. सांगस्मिथ एक ऐसा अनुप्रयोग है जो आपकी आवाज से मिलते जुलते टोन और गति से आपके द्वारा माइक्रोफोन में (बाथरूमिया स्टाइल में ही सही, ) गाए जा रहे गीत के लिए पार्श्व संगीत तैयार करता है जिसे आप पूरी दुनिया को सुनाने के लिए सहेज सकते हैं तथा डबल्यूएमए फ़ॉर्मेट में एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं. इसका प्रयोग एकदम आसान है. स्टाइल ड्रापडाउन मेन्यू से मनपसंद पार्श्व संगीत चुनें और लाल रेकार्ड बटन को दबाकर,  माइक में गाना चालू कर दें. जब गाना पूरा हो जाए तो स्टाप बटन दबा दें. आपका गाना स्टूडियो क्लास रेकॉर्डिंग सहित तैयार है!

मेरे पहले प्रयास का नतीजा रहा – हिन्दी का असली # 1 ब्लॉग गान (धन्यवाद सांगस्मिथ और लिनस,). गुलाबी प्ले बटन पर चटका लगाएँ,  सुनें और मज़े लें.

 

पुनश्च – वैसे तो देबाशीष ने बहुत पहले 2004 में ही हिन्दी का प्रथम ब्लॉग गीत छाप दिया था.

bing 1

बड़ी हलचल मच रही थी बिंग के लिए, और सुनने में आ रहा था कि बिंग के लिए माइक्रोसॉफ़्ट ने बड़ी मेहनत की है, और बड़े तामझाम (विज्ञापन और मीडिया कवरेज) के साथ इसे जारी किया गया.

पर, क्या ये हम हिन्दी वालों के लिए खरा उतरता है? क्या ये वाकई हमारे काम का है? आइए, कुछ जांच पड़ताल करें.

सबसे पहले सर्च करते हैं – रचनाकार. पर ये क्या – हिन्दी में गूगल सजेस्ट जैसा बिंग में आता ही नहीं! (अंग्रेज़ी में तो बढ़िया आ रहा है – जैसे ही मैंने bho टाइप किया, सबसे ऊपर Bhopal आ गया!) क्या मेरे ब्राउजर की समस्या है? पता नहीं. पर ये मोजिल्ला, ओपेरा और इंटरनेट एक्सप्लोरर पर तो नहीं चला. अलबत्ता एकल शब्द का सर्च तो बढ़िया प्रतीत होता है -

 bing 2

सर्च परिणाम के पास एक छोटा सा नारंगी बिन्दु कमाल का है. उस पर माउस फिराने से कुछ अतिरिक्त जानकारी मिलती है, तत्काल. फिर मैंने एक छोटा सा वाक्यांश सर्च करने की कोशिश की. परिणाम ये रहा -

bing 3 - how to create blog

अरे! ये क्या? परिणामों में से अधिकतर तो कचरा सामग्री है, जो हिन्दी टेकफैक जैसी साइटों से निकाले गए हैं! तौबा!!

 

अब इसी सर्च को गूगल में देखते हैं -

bing 3 - google - how to create blog

कचरा तो यहाँ भी है, पर कुछ काम की भी कड़ियाँ हैं.

परिणाम?

अरे बाबा! परिणाम तो स्वयं सिद्ध है – बिंग हिन्दी में फेल.

 

# अद्यतन : अंकुर गुप्ता ने भी बिंग पर एक बढ़िया रीव्यू लिखा है.

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