March 2009

ह, सच कहा है. सुंदरता तो, देखने वाले की आँखों में बसती है. और ग्लैमर? आज का ग्लैमर तो अधिकांश खच्चरिया ही होता है. ज्ञानदत्त जी को खच्चर में ग्लैमर भले ही दिखाई न दिए हों, मगर यहाँ देखिए – एक से एक ग्लैमरस खच्चर. खच्चर एक रूप अनेक. बस थोड़ा सा रंग रोगन की जरूरत है और ग्लैमर हाजिर.

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(कलाकार की खच्चरिया कूंची?)

 

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(चिक में से झांकती हसीना?)

 

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(ग्लैमरस प्रतिबिम्ब?)

 

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(बर्निंग सेंशेसन…)

 

और.. अंत में -

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(पिन अप सुंदरी?)

अब तो आप मानेंगे कि वास्तविक ग्लैमर कम्प्यूटर प्रोग्रामों के जरिए ही मिलता है? आप भी अपने दीगर चित्रों में निजी प्रयोग के लिए फ्री-फोकट में उपलब्ध प्रोग्राम फ़ोटोफ़िल्टर के फिल्टर औजारों के जरिए ऐसे ही ग्लैमरस प्रभाव डाल सकते हैं.

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अभी पिछले दिनों मेरे दो अजीज मित्रों के साथ अलग-अलग मगर एक ही किस्म का हादसा हो गया. उनके मोबाइल फोन के कान्टेक्ट नंबर व अन्य डाटा उनसे खो गए. एक का मोबाइल खो गया तो दूसरे के मोबाइल का डाटा उड़ गया. वर्षों से एकत्र किए हुए मित्रों परिचितों व रिश्तेदारों के सम्पर्क नंबर तथा अन्य महत्वपूर्ण डाटा जो उन मोबाइलों में दर्ज थे वे उड़ गए जिनकी वजह से उन्हें बहुत परेशानी उठानी पड़ी.

ये हादसा आपके साथ भी कभी भी हो सकता है. आपका मोबाइल खो सकता है, चोरी जा सकता है, उसका डाटा वायरस इत्यादि के जरिए या किसी अन्य नामालूम सी वजह से उड़ सकता है. कभी बेध्यानी में या मिसहैंडलिंग के कारण मोबाइल में भौतिक टूटफूट हो सकती है और नतीजतन उसका डाटा खराब हो सकता है.

lg desktop light

(एलजी का मोबाइल सूट प्रोग्राम एलजी डेस्कटाप बहुत ही उम्दा किस्म का है, जिसके जरिए आप अपने एलजी मोबाइल के सम्पर्कों का बढ़िया प्रबंधन कर सकते हैं और अपने मोबाइल डाटा का बैकअप बना कर रख सकते हैं)

ऐसे में होने वाली समस्याओं से बचने का एकमात्र उपाय है – नियमित समय पर मोबाइल डाटा का बैकअप लेते रहना व उस बैकअप को सुरक्षित रखते रहना. मोबाइल डाटा का बैकअप लेना बहुत ही आसान है. कुछ बेसिक मॉडल के मोबाइल फोनों के अलावा आमतौर पर मोबाइल फोनों को डाटाकार्ड/ब्लूटूथ/इन्फ्रारेड/वायरलेस के जरिए कम्प्यूटर से आसानी से जोड़ा जा सकता है और मोबाइल फोनों के पीसीसूट जैसे अनुप्रयोगों के जरिए उनमें दर्ज डाटा का बैकअप कम्प्यूटरों पर डाटा एक्सपोर्ट के जरिए किया जा सकता है. आमतौर पर उच्च कीमत वाले मोबाइल फोनों के साथ डाटा कार्ड व मोबाइल फोन पीसी सूट जैसा अनुप्रयोग मुफ़्त में आता है. यदि नहीं आता है तो एलजी व नोकिया जैसे मोबाइल फोनों के डाटाकार्ड व प्रोग्राम की सीडी कोई 150-200 रुपए कीमत में (असली के चक्कर में अधिक कीमत में न फंसें,) किसी भी मोबाइल फोन की दुकान से खरीदे जा सकते हैं. यदि आपको लगता है कि आप यह सब नहीं कर पाएंगे, इनमें कुछ झमेला है तो आप अपना मोबाइल फोन लेकर मोबाइल शॉप में चले जाएं, जहाँ मोबाइल फोनों में डाउनलोड इत्यादि की सुविधा दी जाती है. वे आपको आपके मोबाइल डाटा की सीडी बहुत ही वाजिब दामों में बनाकर दे देंगे. बीएसएनएल जैसे कुछ मोबाइल सेवा प्रदाता फोन के कुछ माडलों के साथ आपके सम्पर्कों की सूची को उनके सर्वर में सहेजने की भी सुविधाएँ प्रदान करते हैं. यदि आपके मोबाइल में यह सुविधा उपलब्ध है, तो इसका लाभ अवश्य लें क्योंकि तब आपके कान्टेक्ट नंबरों का अद्यतित डाटा बिना झमेले के – जैसे कि सिर्फ एक काल के जरिए नियमित रूप से बैकअप लेते रह सकते हैं. इस सेवा को नियमित अंतराल पर स्वचालित अपडेट करने (जैसे कि महीने में एक बार, हर पहली तारीख को) की सुविधा भी ले सकते हैं.

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(कामा से अलग किए गए मूल्य (सीएसवी) कुछ ऐसा दिखता है जिसे आप एक्सेल के जरिए भी आसानी से संपादित कर सकते हैं)

आप चाहें तो अपने मोबाइल के सम्पर्कों की सूची को अपने कम्प्यूटर पर मोबाइल पीसीसूट प्रोग्राम के जरिए बेहतर तरीके से प्रबंधित भी कर सकते हैं. मोबाइल पर सम्पर्कों की सूची को प्रबंधित करने में स्क्रीन आकार छोटा होने व सीमित कुंजीपट के कारण दिक्कतें आती हैं. आप अपने मोबाइल पीसी सूट (जैसे कि एलजी डेस्कटाप लाइट या नोकिया पीसी सूट) जैसे प्रोग्रामों के जरिए सम्पर्क सूची का संपादन ज्यादा बेहतर तरीके से कर सकते हैं.

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(नोकिया का निर्यात किया हुआ, सहेजा गया व बैकअप लिया हुआ  कान्टेक्ट डाटा पाठ फाइल में कुछ-कुछ ऐसा दिखता है जिसे आप नोटपैड पर आसानी से संपादित कर सकते हैं. नाम व नंबरों को धुंधला कर दिया गया है.)

आप अपने कान्टेक्ट डाटा को कई तरीके से जैसे कि - सीएसवी (कॉमा सेपरेटेड वेल्यू) या टैक्स्ट फ़ॉर्मेट में एक्सपोर्ट कर सकते हैं. आपका यह एक्सपोर्ट किया गया डाटा तब भी आपके बहुत काम में आएगा जब आप कोई नया, दूसरा मोबाइल लेते हैं, या अपने मोबाइल को नए उन्नत मॉडल के साथ अपग्रेड करते हैं. तब आपको अपने सम्पर्कों को मोबाइल में एक एक कर फिर से भरने की आवश्यकता नहीं है. आप इस पहले से एक्सपोर्ट किए डाटा को अपने मोबाइल में इम्पोर्ट कर सकते हैं. यदि आप जीमेल जैसी ईमेल सेवा का प्रयोग कर रहे हैं तो आप अपने मोबाइल फोन के टैक्स्ट रूप में निर्यात डाटा को स्वयं के पते पर ईमेल से भेजकर उसे इंटरनेट पर सदा सर्वदा के लिए सुरक्षित रख सकते हैं तथा आपके पास आपका कम्प्यूटर/मोबाइल नहीं होने पर भी किसी भी स्थान से इंटरनेट के जरिए सम्पर्क नंबरों को देख सकते हैं. चाहें तो आप इस निर्यात किए मोबाइल डाटा के पाठ फाइल का प्रिंटआउट लेकर भी डायरी नुमा शक्ल में बाइंडिंग करवा कर रख सकते हैं.

तो फिर देर किस बात की? इससे पहले कि आपके मोबाइल के सम्पर्कों का डाटा, ईश्वर न करे, कहीं खो न जाए, इसका बैकअप बना ही लें. दूसरे सभी कामों को त्यागकर, तत्काल, अभी ही!

आप कहेंगे कोई साम्य नहीं. गणित गणित है और विवाह विवाह. इसमें वन टू का फोर कहां से आ गया.  या फिर आप दार्शनिक अंदाज में  कह सकते हैं - विवाह गणित की वो पहेली है जिसे हल करने का दावा तो हर कोई करता है, पर दरअसल वो एक मिथ्या हल होता है 1+1=1 जैसा!
जो भी हो, चलिए, एक एक कर देखते हैं.
पहले, कुछ वैवाहिक अवधारणाएँ :
~~~~~~~~~~~~
यदि कुछ गलत हो सकता है तो उसे होना ही है. विवाह भी.
~ मरफ़ी का नियम
विवाह एक श्रमसाध्य कार्य है. यह वैसा ही है जैसा कि किसी कप को सदैव निहारते रहना. कभी तो अपने पार्टनर को अंतरिक्ष में सुदूर कहीं फेंक देने का दिल करता है तो कभी उसे गले लगाने को.
~ अनाम
एक अच्छी पत्नी हमेशा अपने पति को जब वह खुद गलत होती है, माफ कर देती है.
~ मिल्टन बर्ले
"धन हस्तांतरण (फंड ट्रांसफर) के लिए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग से भी ज्यादा तीव्र, त्वरित एक सेवा और है. इसे शादी कहते हैं. "
~ जेम्स होल्ट मैकगावरन
मैंने हाल ही में पढ़ा कि प्यार पूरी तरह से रसायन शास्त्र का विषय है. वह होगा ही क्योंकि मेरी पत्नी मुझे जहरीले कचरे की तरह जो मुझे मानती है.
~ दाऊद बिसोनेटी
शादी के बाद, पति पत्नी एक सिक्के के दो पहलू होते हैं. वे एक दूसरे का सामना नहीं कर सकते हैं फिर भी वे एक साथ रहते हैं.
~ हेमंत जोशी
चाहे जो भी हो शादी कर ही लें. यदि आपको एक अच्छी पत्नी मिलती है, आप खुश रहेंगे. अगर बुरी पत्नी मिलती है तो आप एक दार्शनिक हो जाएंगे.
~ सुकरात
स्त्रियाँ बड़े बड़े काम करने के लिए, हमें प्रेरणाएँ देती हैं, और फिर वे उन्हें प्राप्त करने से हमें रोकती हैं.
~ ड्यूमास
मैं अपनी पत्नी के साथ कुछ शब्दों में बात करता हूं, और वो मेरे साथ कुछ पैराग्राफों में.
~ बेनामी
"कुछ लोग हमारी लंबी शादी का रहस्य पूछते हैं. एक ही रहस्य है. हम सप्ताह में दो बार रात का खाना बरसों से
एक रेस्तरां में खाते आ रहे हैं. मोमबत्ती की रोशनी में, रात का खाना, मधुर धीमा संगीत और नृत्य के बीच रात्रि भोज. वह शुक्रवार की रात रात्रि भोज में जाती है, मैं मंगलवार को जाता हूं. "
~ हेनरी यंगमैन
"मेरा दुर्भाग्य मेरी दोनों पत्नियों के साथ रहा. पहली ने मुझे छोड़ दिया, दूसरी ने नहीं. "
~ पैट्रिक मूर्रे
दो रहस्य आपकी शादी सफल बनाने के लिए
1. जब भी आप गलत हों, स्वीकारें
2. जब भी आप ठीक हों, चुप रहें.
~ नैश
यदि आप दोनों प्रसन्न और सुखी हैं, तो इंतजार कीजिए विवाह होने तक.
~ अनाम
विवाह में सफलता इस बात पर निर्भर नहीं है कि आपने सही व्यक्ति से विवाह किया. सफलता इस बात पर निर्भर है कि आप सही हैं या नहीं.
~ अनाम
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अब, कुछ झूठे गणितीय अवधारणाएँ और असत्य गणितीय प्रमेय:
  • प्रश्न – वृत्त ने स्पर्शरेखा से क्या कहा? उत्तर : मुझे स्पर्श करना बंद करो!
  • सही मायने में एक गणितज्ञ वह व्यक्ति होता है जो कभी ये देखता है कि किसी कमरे में तीन आदमी अंदर जाते हैं और उसमें से पाँच बाहर निकलते हैं तो उसके हिसाब से दो आदमियों को कमरे के भीतर जाना चाहिए ताकि हिसाब बराबर हो सके...
  • विश्वविद्यालय का कुलपति - भौतिक विभाग के डीन को : मैं आपके विभाग को इतना पैसा हमेशा क्यों देता रहूं – पता नहीं इतने महंगे उपकरणों और औजारों का क्या करते रहते हो. गणित विभाग को देखो – उन्हें पेंसिल और कागज के अलावा किसी दूसरी चीज की जरूरत ही नहीं होती. यहाँ तक कि रबर की भी नहीं.
  • एक सिमुलेशन क्लास में क्रमश: इंजीनियर, भौतिकविद् और गणितज्ञ को एक सवाल हल करने को कहा गया – जब आप अंडा फ्राई कर रहे हों तो किचन में आग लग जाए. इंजीनियर ने आव देखा न ताव, एक बाल्टी पानी लाया, आग में पानी झोंका और आग बुझा दिया. सारा किचन पानी से सराबोर हो गया. भौतिकविद् ने बड़ी देर तक हिसाब लगाया, फिर उसने सही माप का पानी लिया और इस तरह आग में हिसाब से पानी डाला. पानी की अंतिम बूंद आते तक आग बुझ गई. गणितज्ञ ने जेब में रखा कागज और पेंसिल निकाला, दनादन कुछ प्रमेय लिखे, कुछ समीकरण हल किए और खुशी से चिल्लाया – आहा! इसका हल तो मौजूद है. फिर वो अंडा फ्राई करने लगा.
  • प्रश्न - पाई क्या होता है? जवाब : गणितज्ञ – पाई एक संख्या है जो कि किसी वृत्त और उसकी त्रिज्या के बीच संबंध को दर्शाती है. भौतिकविज्ञानी – पाई है 3.1415927 और प्लस-माइनस 0.00000005. इंजीनियर – पाई है – लगभग 3.
  • जब आपको ये नहीं पता होता है कि आप किस बारे में क्या बोल रहे हैं तो फिर वहां पर बीजगणितीय चिह्नों का प्रयोग किया जाता है.
  • ग्रेट बर्टेंड रसेल ने कभी कहा था कि यदि 1+1=2 दिया जाए तो वे किसी भी चीज को सत्य सिद्ध कर देंगे. उनसे किसी दिन किसी ने स्मार्ट बनते हुए पूछा – ठीक है, अच्छा आप ये सिद्ध करके बताओ कि आप पोप हो. बर्टेंड रसेल थोड़ी देर सोचते रहे फिर हल बताया – मैं एक हूं. पोप एक है. अतः मैं और पोप एक ही हैं. अतः मैं पोप हूं.
  • बूढ़े गणितज्ञ कभी मरते नहीं हैं. वे सिर्फ अपने कुछ फंक्शन्स खो देते हैं.
(ऐसे ही कुछ और मजेदार गणितीय हास्य (अंग्रेजी में)  इस फाइल को डाउनलोड कर पढ़ें)
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अंत में,

व्यंज़ल


क्या क्या न लगाया प्रमेय गणित में
उपाय न मिला जीवन के गणित में


सबको पता है क्या लाया ले जाएगा
तब भी है गुणा भाग के गणित में


कोई कहता है सरल तो कोई कठिन
कैसे तो प्रमेय हैं प्यार के गणित में


धर्म जात क्षेत्र राज्य देश भाषा बोली
आदमी फंस गया है किस गणित में


बड़ा गुमान था रवि को अपने ऊपर
फेल हो गया सियासत के गणित में

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(यह पोस्ट अभिषेक ओझा – जिनके गणितीय पोस्टों ने एक औसत दूसरे दर्जे के गणित के विद्यार्थी के मन में नए सिरे से गणित में दिलचस्पी जगाई - को समर्पित.)

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मितवा के सदस्य बनें और सार्थक सामाजिक जीवन शुरू करें...

ये कैच लाइन है एक नए सामाजिक जाल स्थल मितवा का. मितवा का पहला बीटा संस्करण पूरी तरह हिन्दी में कुछ ही समय पूर्व बिना किसी हल्ला-गुल्ला के जारी किया गया है. पर, लगता है कुछ हड़बड़ी में चालू किया गया है क्योंकि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक (17 मार्च 2009, 2.28 बजे, भारतीय समय) इसके मुख्य पृष्ठ पर उपलब्ध हिन्दी लिखने के औजार की कड़ी काम नहीं कर रही है. साथ ही जहाँ तहाँ वर्तनी की ग़लतियाँ हैं, जो मजा खराब कर रही हैं. एक व्यावसायिक प्रकल्प में ऐसी ग़लतियाँ अक्षम्य हैं.

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फिर भी, आकल्पन बढ़िया, साफसुथरा और काम का प्रतीत होता है. हालाकि फेसबुक के जैसे अंतर्निर्मित अनुप्रयोगों और सुविधाओं का इंटीग्रेशन इसमें भविष्य में हो भी पाएगा या नहीं – जिसके बगैर बड़ी सफलता नामुमकिन सी लगती है - भविष्य ही बताएगा.

वैसे तो मितवा को पूरा भारतीय और पूरा हिन्दीमय बनाया और बताया गया है. मगर इसके शुरूआती पृष्ठों के विजुअल और विज्ञापनों में मॉडलों के रूप-रंग विदेशी हैं. इस पर भी शुद्ध हिन्दीमय रूप धरा जाता तो जरा ज्यादा मजा आता.

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मितवा में हाल फिलहाल निम्न सुविधाएँ हैं –

मित्र मंडली बनाना व उनके सम्पर्क में रहना

चित्र, वीडियो साझा करना

ब्लॉग लिखना

फोरम व समूह बनाना

तो, क्या आप भी सार्थक सामाजिक जीवन जीना नहीं चाहेंगे?

यदि हाँ, तो जुड़ें मितवा से. हिन्दी ब्लॉग जगत् से संजय बेंगाणी पहले पहल जुड़ने वालों में अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं.

चलिए, हम भी उनके मितवा बन जाते हैं...

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(आत्मकथा लिखना अब अमीरों की ही बपौती नहीं रह गई है. अब तो गरीब भी आत्मकथा लिख सकता है. लिखकर उसे प्रकाशित भी कर सकता है. वो तो धन्य है इस चुनाव का, कि उसे एक स्मार्टफोन और चहुँओर इंटरनेट का वादा मिल गया है. तो उसने आव न देखा न ताव, एक पार्टी के इलेक्शन मेनिफेस्टो के एक कोरे हिस्से में दन्न से एक आत्मकथा लिख मारा. स्मार्टफोन के आते ही उसे फट् से इंटरनेट पर चढ़ा देगा. पेश है आपके लिए उसका प्रीव्यू. अंतिम प्रकाशन तक इसमें थोड़ा मोड़ा कांटछांट और फेरबदल संभव है.)

मुझे चुनाव का मौसम बहोत पसंद है. मैं चाहता हूं कि काश चुनाव का मौसम हर छठे-चौमासे आता रहे. तमाम नेताओं को तभीच मेरी याद आती है. इस बार तो मुझे नया, चमचमाता स्मार्टफोन मिलने वाला है. पिछली बार मैं तमिलनाडु में था तो मुझे रंगीन टीवी मिला था. घड़ियों, साड़ियों, सौ-सौ के नोटों की सौगात हम गरीब गुरबों को चुनावों के दौरान ही तो मिलता है तो फिर चुनाव हरदम हर समय होते ही रहना चाहिए कि नहीं. जैसे ही इधर एक चुनाव गुजरे, उधर दूसरा चालू हो जाना चाहिए. तभी हम गरीबों पर लोगों का ध्यान जाएगा. वरना हम क्या खा पी पहन रहे हैं, कैसे जीवनयापन कर रहे हैं उसका पता किसी को भी नहीं चलता.

पिछले चुनाव में चाउर वाले बाबा ने हमें दो रुपए किलो चावल का वादा किया था. इस बार हमें उम्मीद थी कि एक रूपया किलो तो कर ही देगा. चलो कोई बात नहीं, अगले चुनाव में तो हो ही जाएगा. अगले चुनाव के लिए कुछ बचा के रखना है कि नहीं. हम तो सपना देख रहे हैं कि किसी न किसी चुनाव में किसी इलेक्शन मेनिफेस्टों में अप्रत्यक्ष रूप से कहा जाएगा – अबे गरीब, तू गरीब का गरीब रह. बस तू हमें और हमारी पार्टी को वोट देता रह. हम तुम्हें मुफ़्त में चावल-दाल-आटा तो देंगे ही, खाली स्मार्ट फोन क्या – हम उसमें समय समय पर टाक टाइम भी डलवा कर देते रहेंगे.

वो तो बुरा हो चुनाव आयोग का जो जबरन जबरदस्ती ज्यास्ती में नेताओं की नकेल कसता रहता है. सबसे बड़ा गरीबों का दुस्मन है वो. उसे गरीबों में खुसहाली आती अच्छी नहीं लगती. चुनाव आयोग का सिस्टम बदल देना चाहिए. आचार संहिता को फाड़ के फेंक देना चाहिए. ये नहीं होते तो - पिछले कई चुनावों से लेकर अब तक -हम गरीबों की हालत कुछ और ही होती.

लोगबाग कहते हैं कि साला गरीब नोट लेकर वोट देता है. घड़ी और साड़ी लेकर ईवीएम का बटन दबाता है. रात में मुफ़्त की दारू पीकर सुबे में उसको वोट दे आता है जो उसे दारू पिलाता है. ठीक है, पर ये बताओ भइये कि नागनाथ और सांपनाथ में ही जब चुनना है तो उसको वोट क्यों नहीं दें जो कुछ खिलाता पिलाता है. इलेक्सन जीतकर फिर खुद खाएगा पिएगा, और अगले चुनाव में फिर हमें जादा खिलाएगा पिलाएगा खैरात बांटेगा. तो हम ऐसे ही लोगन को तो चुनेगा न!

अबकी चुनाव में सुनेला है कि हर कोई पीएम इन वेटिंग हो गया है. क्या आडवानी, क्या माया. पवार से लेकर पासवान और जया अम्मा से लेकर मेरी झुग्गी की लाइन का पार्सद जयराम बाबू. मैं भी सोचता है साला क्यों न मैं भी पीएम इन वेटिंग बन जाऊं. सोचने में क्या जाता है? वैसे भी अपनी फिल्लम में साहरूख भाई ने कहा है – यदि किसी चीज को शिद्दत से चाहोगे तो विश्व की तमाम शक्तियाँ आपके स्वप्न को पूरा करने का षडयंत्र करेंगी. वैसे तो अपुन इधर गरीबइच ठीक है, अमीरों के लफड़े अपने को नईं सुहाते, फेर पीएम इन वेटिंग की बात अलग है. एकाध चुनाव जीत जाने की बात अलग है...

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(कार्टून कतरन – साभार टाइम्स आफ इंडिया)

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यह प्रकल्प देश-विदेश के जाने माने ब्लॉगर अमित अग्रवाल का है. अमित अग्रवाल आईआईटी ग्रेजुएट हैं, उनका ब्लॉग करोड़ों ब्लॉगों के बीच, तमाम विश्व के टॉप 200 ब्लॉग में शुमार है, और उन्होंने भारत में ब्लॉगिंग की दशा-दिशा तय करने में भी भूमिका निभाई है.

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 इंडिया ब्लॉग स्कूल अपने तरह का पहला, अकेला, अ-लाभकारी संकल्पना है जिसमें ब्लॉगरों को ब्लॉगिंग बेसिक्स से लेकर ब्लॉगिंग तकनीक तक की समस्त जानकारियाँ हर संभव उपाय – ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह से उपलब्ध करवाई जाती हैं. पिछले दिनों इंडिया ब्लॉग स्कूल के सौजन्य से आगरा में ब्लॉगिंग सेमीनार का आयोजन किया गया था. भविष्य में भी विभिन्न शहरों में ऐसे सेमीनार करने की योजनाएँ हैं. हाल-फिलहाल, इंडिया ब्लॉग स्कूल के साइट में उपलब्ध सामग्री से आप अपने ब्लॉगिंग बेसिक्स में धार और ब्लॉगिंग फंडे में निखार ला सकते हैं. कुछ काम की कड़ियाँ हैं- (ध्यान दें - सामग्री अंग्रेजी में है)

गुरुओं से ब्लॉगिंग सलाह, ब्लॉगिंग गाइड और ब्लॉगिंग आचार संहिता, ब्लॉगिंग के लिए सामान्य टिप्स, कमाई के लिए ब्लॉगिंग इत्यादि पर धीर गंभीर आलेखों के लिए इस कड़ी पर जाएँ.

ब्लॉग परिचय, ब्लॉग कैसे बनाएँ, सफल ब्लॉगर कैसे बनें इत्यादि इत्यादि संबंधी वीडियो प्रस्तुति देखने के लिए इस कड़ी पर चटका लगाएँ. यहाँ पर  सफल ब्लॉग कैसे बनाएँ वीडियो देखना भूलें नहीं.

ब्लॉगिंग फॉर डमीज आपने अभी तक पढ़ी या नहीं? ऐसे ही और भी काम की ब्लॉगिंग किताबों की जानकारी के लिए यहाँ जाएँ

विश्व के कुछ चुनिंदा, बढ़िया, जानकारी सम्पन्न ब्लॉग जिनमें से कुछेक आप पढ़ते होंगे, बहुत कुछ छूट भी रहे होंगे. समग्र सूची यहाँ देखें.

सब कुछ पढ़-देख लिया. अभी भी बहुत सारा प्रश्न मन में उमड़-घुमड़ रहा है. ब्लॉगिंग फोरम है ना! पूछ लो जो पूछना है.

ईमेल से पूछना चाहें तो पता  - help@blogschool.in है.

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आपके कम्प्यूटर पर हिन्दी कैसे दिखाई देती है? बेकार-बदसूरत-अपठनीय सा? उसपर थोड़ा रंग-रोगन आप कर सकते हैं ताकि वो जरा सुंदर दिखाई दे. आइए, देखते हैं कैसे.

पिछली पोस्ट पर अनिल की टिप्पणी थी – “हिंदी पढ़ने के लिये सबसे बढ़िया browser मुझे अव तक "सफारी" लगा। सफारी में फौंट बहुत ही सुंदर दिखते हैं और पढ़ने में बहुत आसानी होती है। लिनक्स औपरेटिंग सिस्टम में भी हिंदी (और अन्य भारतीय भाषाओं) को पढ़ने-लिखने का बहुत ताकतवर जुगाड़ है।“

वैसे, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि लिनक्स तंत्र में हिंदी पढ़ने-लिखने और प्रदर्शित करने का बहुत ताकतवर जुगाड़ है – क्योंकि उसमें प्रायः हर चीज को आप अपने मनमाफिक संपादित कर सकते हैं – कुंजीपट को भी.

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(हिन्दी अनुप्रयोग संस्थापित करने पर विंडोज एक्सपी पर डिफाल्ट हिन्दी प्रदर्शन )

विंडोज एक्सपी का डिफॉल्ट प्रदर्शन हिन्दी मित्र नहीं है. इसमें यदि आप हिन्दी के अनुप्रयोग संस्थापित करते हैं तो हिन्दी अनुप्रयोगों के मेन्यू इत्यादि एरियल एमएस यूनिकोड में आमतौर पर प्रदर्शित होते हैं जो कि बहुत ही भोंडा फोंट है हिन्दी के लिहाज से. छोटे रूप में उसे पढ़ने में भी दिक्कत आती है. इसे बदल कर मंगल किया जा सकता है, तथा क्लीयर टाइप विकल्प चुनकर इसे सुंदर, पठनीय बनाया जा सकता है. निम्न चरण दर चरण युक्ति अपनाएँ व अपने विंडोज एक्सपी के डिस्प्ले को सही रूप दें (विंडोज विस्ता व 7 में हिन्दी विकल्प चुनने पर आमतौर पर ये सेटिंग स्वचालित लागू हो जाते हैं)

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(विंडोज एक्सपी पर हिंदी मित्र सेटिंग लागू करने के बाद का प्रदर्शन)

(1) डेस्कटॉप के खाली स्थान पर दायाँ क्लिक करें और चुनें प्रापर्टीज. डिस्प्ले प्रापर्टीज नाम की एक खिड़की खुलेगी. उसमें एपीयरेंस टैब पर क्लिक करें और फांट साइज – लार्ज फोंट चुनें और एप्लाई पर क्लिक करें.

properties

(2) डिस्प्ले प्रापर्टीज खिड़की पर ही इफेक्ट्स बटन पर क्लिक करें. नई प्रकट खिड़की पर ‘यूज द फालोइंग मैथड टू स्मूथ एज आफ स्क्रीन फोंट’ ड्रापडाउन विकल्प में क्लीयर टाइप चुनें. ओके पर क्लिक करें.

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(3) डिस्प्ले प्रापर्टीज खिड़की पर ही एडवांस्ड बटन पर क्लिक करें. नई प्रकट हुई एडवांस्ड एपीयरेंस खिड़की पर जहाँ एक्टिव विंडो लिखा दिखेगा, उस पर क्लिक करें. अब नीचे ड्राप डाउन सूची में फोंट विकल्प में मंगल चुनें. अन्य आइटमों के लिए भी मंगल चुनें, और आकार १२-१४ (बेहतर, मनमाफिक प्रदर्शन के लिए कुछ प्रयोग कर सकते हैं) चुनें. ओके पर क्लिक करें, एप्लाई पर क्लिक करें, और एक बार फिर ओके पर क्लिक करें.

advanced - active window

आपके कंप्यूटर का डिस्प्ले हो गया ना हिन्दी मित्र?

इंटरनेट एक्सप्लोरर का नया, संस्करण 8 बीटा  (आरसी1) यूं तो बढ़िया, तेज चलता है परंतु जब विंडोज एक्सपी पर संस्थापित किया जाता है तो यह हिन्दी पाठों की ऐसी-तैसी कर देता है. ब्लॉगवाणी का यह स्क्रीनशॉट देखें जिसे संजीत त्रिपाठी ने इस समस्या के बारे में बताते हुए मुझे भेजा –

IE8-1

संयोग से उस वक्त मैं भी इंटरनेट एक्सप्लोरर, संस्करण 8 बीटा की जांच परख कर रहा था, और मुझे यह समस्या दिखाई नहीं दी. जैसा कि नीचे के स्क्रीनशॉट में दिया गया है –

 ie8

मैंने उन्हें बताया कि मेरे कम्प्यूटर पर तो सब सही दिख रहा है, कृपया अपने कम्प्यूटर की एनकोडिंग इत्यादि सेटिंग को जांचें. परंतु बाद में ध्यान आया कि मैं उस वक्त विंडोज 7 पर था, और संभवत: संजीत त्रिपाठी को समस्या विंडोज एक्सपी पर रही होगी. मैंने इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 को विंडोज एक्सपी पर संस्थापित किया और चलाकर देखा तो पाया कि समस्या यथावत् है. विंडोज एक्स पी पर इंटरनेट एक्सप्लोरर 8 कुछ हिन्दी की साइटों पर यह हिन्दी को कचरा कर देता है (प्रमुखत: ब्लॉगवाणी) तो कुछ हिन्दी साइटों को सही दिखाता है.

क्या कहें? विंडोज 7हिन्दी मित्र है? हाँ, शायद.

radio channel

मामला मुझे तो लालू की रेल जैसा ही दिक्खे है. पटना से रेल चली तो पटना में ही पहुँची – वैसे ही डी राजा की गाड़ी दक्षिण में ही घूमी?

प्रसार भारती की डिश टीवी सेवा – डीडी डायरेक्ट प्लस में पिछले कुछ दिनों बिना हो-हल्ला कुछ अपग्रेडेशन हुआ लगता है और उसमें रेडियो चैनलों में तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ – याने तमाम दक्षिण भारतीय भाषाओं में प्रत्येक में 3 - 3 शानदार रेडियो सेवाओं की शुरूआत हुई. जी हाँ, 3 - 3 शानदार रेडियो – क्लासिक, 90’s और लेटेस्ट. इन रेडियो चैनलों में सीडी क्वालिटी का नान-स्टाप 7x24 संगीत बजता है, वो भी धुंआधार और वह भी एफएमिया शैली के घनघोर फोकट फालतू बकवास के बगैर.

और हिन्दी? हिन्दी तो ग़ायब है. मेरे जैसे हिन्दी भाषी के लिए जो संगीत ओढ़ता बिछाता खाता पीता और सोता है, यह बहुत ही निराशाजनक है. उम्मीद करें कि डीडी डायरेक्ट के अगले अपग्रेड में गाड़ी उत्तरी राज्यों तक भी पहुंचेगीभी?

Chhattisgarhi shining

विश्व की 108 भाषाओं के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी भाषा चमकती हुई यहाँ नजर आ रही है. केडीई 4.2 लोकेलाइजेशन टीम की सूची में यह अन्य भारतीय भाषाओं – असमी, बंगाली, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, मैथिली, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, और तेलुगु के साथ चमक रही है. टॉप टेन सूची में भी यह अन्य सभी भारतीय भाषाओं से ऊपर 29 वें पायदान पर (11 मार्च 2009 की स्थिति में) खड़ी है.

Chhattisgarhi shining top 10

इसी स्थल से इसकी अनुवाद फ़ाइलें डाउनलोड कर इनका प्रयोग केडीई 4.2 की भाषा छत्तीसगढी में बदलने हेतु किया जा सकता है. विंडोज/लिनक्स वातावरण में छत्तीसगढ़ी में दर्जनों प्रोग्रामों व अनुप्रयोगों को मुफ़्त व मुक्त डाउनलोड कर चलाया जा सकता है.

इस परियोजना को मूर्त रूप देने में मेरा उत्साहवर्धन करते रहने हेतु इस चिट्ठे के आप सभी पाठक गणों का योगदान रहा है. आप सभी को धन्यवाद और आभार. निम्न महानुभावों के सक्रिय सहयोग के बगैर यह नामुमकिन था. इन्हें भी धन्यवाद और आभार.

 

जी. करूणाकर

रविकान्त

राजेश रंजन

गोरा मोहंती

संजीव तिवारी

जयप्रकाश मानस

राजेश चौधरी

संजीत त्रिपाठी

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बाजार में यूं तो नए नवेले गूगल क्रोम और सफारी को मिलाकर दर्जनों ब्राउजर हैं, मगर हिन्दी के लिए काम के कुछेक ही हैं. इनमें भी आमतौर पर फ़ायरफ़ॉक्स और इंटरनेट एक्सप्लोरर का प्रयोग अधिकतर होता है.

इन ब्राउजरों में हिन्दी दिखाने में समस्या अब भी बनी हुई है. समस्या तब आती है जब आप वर्ग-पहेली जैसा इनपुट विंडो युक्त साइटें खोलते हैं और उनमें हिन्दी सामग्री भरने की कोशिश करते हैं. इनमें तब या तो नीचे लगने वाली उ, ऊ, ऋ की मात्राएँ नहीं दिखतीं या फिर छोटी इ की मात्राएं.

firefox on varga paheli

 

ऑपेरा के नए, ताज़ा संस्करण में यह समस्या दूर कर ली गई है, और हिन्दी के लिए इनपुट विंडो बहुत ही बढ़िया काम करता है.

opera on varga paheli

ऑपेरा के साथ समस्या ये है कि यह सिर्फ विंडोज में बढ़िया हिन्दी दिखा सकता है. लिनक्स में इसमें हिन्दी प्रदर्शन में अभी भी समस्याएं हैं. लिनक्स में हिन्दी प्रयोग के लिए सबसे बढ़िया ब्राउज़र है – कॉन्करर. कॉन्करर अब विंडोज के लिए भी उपलब्ध है. नीचे दिया स्क्रीनशॉट विंडोज एक्सपी पर चलता हुआ खींचा गया है.

konqueror on varga paheli

ऑपेरा का नया संस्करण हिन्दी में भी उपलब्ध है. तो, देर किस बात की? अभी उतारें और ऑनलाइन वर्ग-पहेली खेलें बिना किसी परेशानी के!

 

opera download

 

वैसे तो, एडसेंस 23 अगस्त सन् 2006 से हिन्दी में विज्ञापनों को दिखा रहा है, परंतु अढ़ाई साल बीत जाने के बाद अब भी हिन्दी उसकी चिन्दी करती हुई दिखाई देती है. सालेक भर पहले एडसेंस हिन्दी पृष्ठों में दिखना बंद हो गया तो कुछ जुगाड़ कर इसे वापस पाया गया तो एडसेंस इस चिट्ठे पर फिर से दिखने तो लगा है, मगर कुछ चुटकुले नुमा. हाथ कंगन को आरसी क्या –

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adsense - l k adwani for pm

आडवाणी फार पीएम?

इसे तो पक्के कांग्रेसी पक्का चुटकुला मानते होंगे. ये बात दीगर  है कि चुनावों के बाद चुटकुला किस करवट बैठता है, और इस चुटकुले पर कौन हंसता है और कौन रोता है!

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adsense in hindi - a joke

हिन्दी कविता और पंजाब समाचार एक? हा हा हा – बहुत बढ़िया चुटकुला है. कविगण माफ करें, आजकल वैसे भी कविताओं और व्यंजलों में कविता क्या है और समाचार क्या है ये फर्क करना मुश्किल है. तो ये बेचारा एडसेंस कैसे फर्क करेगा!

 

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adsense in hindi - a joke 2

यात्रा का आयोजन वेब साइट पर – प्लानिंग तो सुना था, पर आयोजन! और, कार शायद छोटी - नैनो के आने से कार् हो गई है, और सब जानकारियाँ आज ही पा लें, कल को तो बहुत देर हो सकती है!!!

 

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adsense in hindi - a joke 3

आपके एक कुछ क्या ?

जोक है भाई. चुटकुला है. समझिए. और, हँसिए.

और, इसीलिए अभी भी हिन्दी चिट्ठों पर एडसेंसिया आय भी एक जोक ही है!

dangisoft hindi font converter1

(चित्र को स्पष्ट, बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)

एक नया फ़ॉन्ट परिवर्तक ‘प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक’ हाल ही में रिलीज किया गया है जो दर्जन भर से ज्यादा पुराने आस्की हिन्दी फ़ॉन्टों – यथा कृतिदेव, डेवलिस, शुषा, युवराज, चाणक्य, डीवीटीटी योगेश इत्यादि को पूरी परिशुद्धता के साथ यूनिकोड हिन्दी फ़ॉन्ट में बदलता है.

वैसे तो तकनीकी हिन्दी समूह के फाइल खण्ड में अनुनाद सिंह और नारायण प्रसाद द्वारा बनाए गए दर्जनों किस्म के पुराने नए हिन्दी फ़ॉन्टों के यूनिकोड और यूनिकोड से वापस इन्हीं फ़ॉन्टों में परिवर्तक उपलब्ध हैं, और यही नहीं, ये हमेशा उपयोक्ताओं की मांग पर विविध हिन्दी फ़ॉन्टों के परिवर्तक मुक्त व मुफ़्त ओपन सोर्क की तर्ज पर तत्परता से उपलब्ध करवाते रहते हैं. मैं स्वयं इन परिवर्तकों का प्रयोग रचनाकार की सामग्री को परिवर्तित करने के लिए नित्य करता हूं, और इनमें से बहुत से परिवर्तक तो प्रायः शत-प्रतिशत तक शुद्धता से परिणाम देते हैं.

मगर ये परिवर्तक ब्राउजर आधारित होने से इनमें कुछ समस्याएँ यदा-कदा आती रहती हैं – जिनमें मुख्य है बहुत बड़ी फाइल को एक साथ फ़ॉन्ट परिवर्तन करने में समस्या. तथा अलग अलग फ़ॉन्टों के लिए अलग अलग फाइलें. इन समस्याओं का एक हल हो सकता है – जगदीप डांगी का बनाया हुआ नया हिन्दी फ़ॉन्ट परिवर्तक – प्रखर देवनागरी फ़ॉन्ट परिवर्तक.

इसका परीक्षण संस्करण मैंने यहाँ से उतारा (800 किबा आकार, परंतु आपके कम्प्यूटर पर .net संस्थापित होना आवश्यक) और चलाकर देखा तो पाया कि यह विभिन्न फ़ॉन्टों के परीक्षण पाठ को 100 प्रतिशत शुद्धता से परिवर्तित कर रहा है. अभी इसमें कोई दर्जन भर निम्न फ़ॉन्टों के परिवर्तक उपलब्ध हैं, जिनमें बढ़ोत्तरी की जा रही है –

1. DevLys 010
2. DevLys 020
3. DevLys 020 Thin
4.DV-TTYogeshEN
5.DVW-TTSurekh
6.DVW-TTYogeshEN
7.Kruti Dev 010
8. Kruti Dev 020
9. Kruti Dev 020 (Space)
10.Shusha
11.Shusha05
12.Yuvraj

13.Chanakya

dangisoft hindi font converter3

जाहिर है, परीक्षण संस्करण सिर्फ एक पैरा पाठ को ही परिवर्तित करता है और बाकी के पाठ के लिए यह संदेस देता है -

dangisoft hindi font converter2

इसका पूरा संस्करण प्राप्त करने के लिए जगदीप डांगी से सीधे संपर्क किया जा सकता है. यदि आपके पास कोई अन्य हिन्दी फ़ॉन्ट है जिसका परिवर्तक उपलब्ध नहीं है या आप चाहते हैं कि वो इसमें आए, तो भी आप इसके लिए इसके डेवलपर से सम्पर्क कर सकते हैं. इनका पता है –

Er. Jagdeep Dangi
Ward No. 2,
Behind Co-operative Bank,
Station Area Ganj Basoda,
Distt. Vidisha (M.P.) India.
PIN- 464 221
Res. (07594) 222457
Mob. 09826343498
Profile: http://www.iiitm.ac.in/iiitm/Scientist_Eng/JDangi.htm

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