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Friday, April 03, 2009

जालिम जमाने ने मुहब्बत के मायने बदल दिए!

new style for making love

मेरे प्यार को, मेरे मुहब्बत के इजहार के इस तरीके को जरा समझने की कोशिश तो करो जानेमन!

व्यंज़ल

जालिम जमाने ने सबकुछ बदल दिए
हां मुहब्बत के मायने तक बदल दिए

हमारा प्रेम परवान चढ़ता किस तरह
उन्होंने तो जब चाहे रास्ते बदल दिए

वक्त का तो क्या बताएँ आपको साहब
वक्त ने तो अच्छे महिवाल बदल दिए

उनके जरा से अहसास के लिए हमने
अपने दिनरात सुबह शाम बदल दिए

अपने मुहब्बत की खातिर रवि हमने
क्या कहें खुद को कैसे तमाम बदल दिए
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(समाचार कतरन साभार – टाइम्स ऑफ इंडिया)

4 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

संजय बेंगाणी said...

हाय हम अच्छे प्रेमी हो न सके....

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

लगता है प्रेमी होना इस जनम में नहीं लिखा है।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

आपके चिठ्ठे की चर्चा ब्लॉग समयचक्र में
रामनवमी पर आप को हार्दिक शुभकामनायें

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

स्पैंकिंग की बजाय शायद सहलाना भी उतना ही कारगर हो। पर उससे इतनी बढ़िया अखबारी कॉलम थोड़े ही बनता।

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