बुधवार, 7 जनवरी 2009

फूल ही फूल खिल उठे हैं मेरे मन में…

आपने गुलाब के फूलों की कितनी किस्में एक साथ देखी हैं? बात इंटरनेट पर या सीडी-रॉम एनसाइक्लोपीडिया या किताबों-पत्रिकाओं में देखने की नहीं हो रही है, बल्कि प्रत्यक्ष देखने की हो रही है. लाल गुलाब, पीले गुलाब, हरे गुलाब, नीले और काले गुलाब. सफेद, छींटदार गुलाब. बटन गुलाब, चांदनी गुलाब. और न जाने क्या क्या गुलाब. पिछले दिनों रोज सोसायटी भोपाल द्वारा अखिल भारतीय गुलाब पुष्प  प्रतियोगिता व प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. हजारों गुलाब की किस्में. हर गुलाब एक से बढ़कर एक. जैसे हर फूल को बड़े जतन से बड़ा किया गया हो. इतने सारे सुंदर, महकते फूलों को एक साथ देखना चमत्कृत होने जैसा अनुभव था.

मेरे पुरातन, कालातीत, परंतु अभी भी बढ़िया काम कर रहे कोडक इजीशेयर 2 मेपि कैमरे से खींचे गए गुलाब के कुछ पुष्प आपको भी नजर हैं.

rose show1

rose show

yellow rose

orange zoom

white rose

pink rose

orange

rose1

3 rose

प्रदर्शनी की खास बात मुझे ये नजर आई कि यहाँ बहुत से शासकीय विभागों की भी प्रविष्टियाँ थीं, जिनमें पिछले कई वर्षों से कई कई श्रेणियों में गुलाब प्रदर्शनी व प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार पाने वाला विभाग बीएचईएल भी था, और इस वर्ष भी स्थिति जुदा नहीं थी.  बीएचईएल में खास अलग से गुलाब उद्यान है.

बीएचईएल के उद्यान प्रभारी श्री शैलेन्द्र अग्रवाल हैं जो पेड़ पौधों से बेहद प्यार करते हैं और उनकी लगन व मेहनत का ही परिणाम है कि बीएचईएल पिछले कई वर्षों से लगातार गुलाब पुष्प प्रतियोगिता में सफलता के नए सोपान रचते आ रहा है. बीएचईएल के गुलाब उद्यान में कोई पांच हजार गुलाब के पौधे हैं.

 

shailendra agrwal

श्री शैलेन्द्र अग्रवाल अपने कार्यालय के सामने. कार्यालय की सज्जा व सख्त चेतावनी संदेश – फूल तोड़ना सख्त मना है – से उनके प्रकृति प्रेम का पता चलता है.

8 blogger-facebook:

  1. बहुत सुंदर! बहुत ब‍ि‍‍‍‍ढ़या! सचमुच, गुलाब उन फूलों में सर्वोपरि है, जिनमें सुंदरता के साथ-साथ सुगंध भी होती है यानि कि रूप के साथ-साथ गुण भी! बधाई!
    फूल ही फूल खिल उठे हैं मेरे मन में…
    पढ़कर मेरे मन में खिले फूलों के साथ कुछ फूल और शामिल हो गए!
    निश्चित रूप से यह फोटो-फीचर पढ़नेवालों को प्रकृति से प्रेम करना सिखाएगा!
    सरस पायस पर एक गुलाब कुछ और फूलों के साथ आपकी प्रतीक्षा कर रहा है!

    उत्तर देंहटाएं
  2. गुरुजी! आधी रात होने को है। थकान से शरीर चूर-चूर है। पलकें झपकती हैं तो उठने से इंकार कर रही हैं। ऐसे में आपके गुलाब देखे। नींद हवा हो गई और थकान कपूर।
    कडकडाती इस सर्द रात में आपने तो रंग और सुवास का मेला लगा दिया। खुद गुलाब होकर ओस में भीग जाने का मन होने लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह वाह रतलामी साहब ! क्या गुलिस्तां की सैर करा दी आपने, दिल बाग़ बाग़ हो गया.

    शायद जगह नसीब हो उस गुल के हार में
    मैं फूल बन के आऊंगा अबके बहार में

    उत्तर देंहटाएं
  4. गुलाब के इतने सुन्दर फ़ूलों के चित्रों के लिये धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  5. चलिए कम से कम इन्टरनेट पर तो देख लिया :-)
    हमारे कॉलेज में भी ऐसा शो होता था, तभी कुछ इतने फूल एक साथ देखे थे.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब....साक्षात तो देख ही आए थे...पर तस्वीरों के गुलाब ज्यादा हसीन नजर आए...:)

    उत्तर देंहटाएं
  7. गुलाबों से गुलजार पोस्ट, वाह !

    उत्तर देंहटाएं

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---------------------------------------------------------

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------