October 2008

cg os 1

यह मेरा पसंदीदा ड्रीम प्रोजेक्ट था जो बरसों से यहाँ http://cg-os.blogspot.com/ अटका टंगा हुआ था. इस मर्तबा के सराय परियोजना के तहत इसे भी स्वीकृति मिली है. इसके साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं मसलन गुजराती, मैथिली, कश्मीरी इत्यादि भाषाओं के विभिन्न परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है. विवरण यहाँ दर्ज है.

http://raviratlami1.blogspot.com/2008/10/chhattisgarhi-operating-system-will-now.html

अब तो आगू के छै महीना अऊ फुरसत नईं मिलही गा. चलो सब्बो झन काम-बूता में जुर जाओ.

नई, ताज़ातरीन तकनॉलाज़ी ने आपको भी अकसर आकर्षित किया होगा. पर, तकनॉलाज़ी के अद्यतन होते रहने की यह रफ़्तार कभी रुकेगी भी? आखिर आप कब तक नई लेटेस्ट तकनॉलाज़ी से कदमताल मिलाते रहेंगे?

कोई पंद्रह बरस पहले जब मैंने अपने मुहल्ले का पहला पर्सनल कम्प्यूटर अपने जीपीएफ़ के पैसे से एडवांस लेकर खरीदा था तो उस वक्त की लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के लिहाज से 14 इंची कलर मॉनीटर युक्त, 16 मेबा रैम व 1 जीबी हार्ड डिस्क युक्त, 433 मे.हर्त्ज का कम्प्यूटर था, जो उस वक्त के लिहाज से बहुत बड़ी कीमत में आया था.

मैं अपनी उस लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त कम्प्यूटर की शक्ति से खासा प्रभावित था और चूंकि वो मेरे मुहल्ले का एकमात्र व पहला कम्प्यूटर था, अतः उसकी अच्छी खासी धाक भी थी. लोग-बाग़ सिर्फ उसके दर्शन करने आते – एक दूसरे से चर्चा करते - कलर मॉनीटर वाला कम्प्यूटर है – मल्टीमीडिया वाला, जिसमें गाने भी सुन सकते हैं और फिल्म भी देख सकते हैं. एकदम नेबर्स एन्वी, ओनर्स प्राइड वाला मामला था.

मगर, जल्द ही परिस्थितियाँ बदल गईं. उम्मीद से पहले. पड़ोस का कोई बंदा नया लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाला, 450 मे.हर्त्ज युक्त, एमएमएक्स तकनॉलाज़ी वाला, 32 मेबा रैम युक्त, 2 जीबी हार्डडिस्क सहित, डिजिटल कलर मॉनीटर वाला डेस्कटॉप कम्प्यूटर ले आया. मजे की बात ये कि वो इस नए, ताज़ा, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाले, ज्यादा उच्च शक्ति वाली मशीन को उसने अपेक्षाकृत कम पैसे में खरीदा. अब, जाहिर है, जलने की बारी मेरी थी.

कुछ और समय बीतते न बीतते हुआ ये कि हार्डवेयरों और सॉफ़्टवेयरों में नई, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के लगातार पदार्पण के चलते मेरे कम्प्यूटर ने नए अनुप्रयोगों को चलाने से मना कर दिया और उसका हार्ड डिस्क गले तक भर भर कर मर खप गया. मजबूरी में मुझे पेंटियम 3 श्रेणी का 1.6 गीगा हर्त्ज प्रोसेसर, 256 मेबा रैम व 20 जीबी हार्डडिस्क वाला कम्प्यूटर खरीदना पड़ा. ये भी, उस वक्त के लिहाज से लेटेस्ट था. मैं और मेरा कम्प्यूटर फिर से एकबार लेटेस्ट हो चुके थे. तमाम क्षेत्र में महंगाई के रोने के बावजूद मैंने इसे अपनी पहली मशीन की कीमत से आधे कीमत में खरीदा.

कुछ अरसा बीता ही था कि चहुँओर आईटी और कम्प्यूटरों ने जोर मारा तो पूरे मुहल्ले में पेंटियम 4 की धूम मच गई. अब जो भी कम्प्यूटर लाता, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त पेंटियम 4 की मशीन लाता. रैम 1 जीबी से कम नहीं. हार्डडिस्क तो 120 जीबी तक चली गई. एक बंदा 250 जीबी हार्डडिस्क वाली, 17 इंच एलसीडी मॉनीटर युक्त लेटेस्ट मशीन लाया तो उत्सुकता वश मैं भी उसे देखने गया. उस भारी भरकम लेटेस्ट मशीन को छूकर देखने से कुछ अलग सा अहसास हुआ. और, ये मेरे कुछ महीने पहले खरीदे गए इससे आधी शक्ति और कॉन्फ़िगुरेशन वाले लेटेस्ट मशीन से सस्ता ही था.

इस बीच मुझे एक लैपटॉप की जरूरत पड़ी तो मैंने लेटेस्ट 64 बिट प्रोसेसर युक्त मशीन खरीदा था. ये मशीन इतना लेटेस्ट निकला था कि कंपनी के पास इसमें डालने के लिए 64 बिट ऑपरेटिंग सिस्टम ही कम्पेटिबल नहीं था, लिहाजा कंपनी ने इसमें 32 बिट ऑपरेटिंग सिस्टम डाला हुआ था.

अभी गुजरे धनतेरस पर मैंने सोचा कि कुछ लेटेस्ट गॅजेट या नेटबुक खरीदा जाए. बहुत दिनों से लेटेस्ट तकनॉलाज़ी का कुछ खरीदा नहीं था. वैसे विंडोज विस्ता ने बहुतों को लेटेस्ट तकनॉलाज़ी की मशीन ले लेने के लिए मजबूर कर दिया ही था, परंतु धन्य है कि वो स्वयं ही फेल हो गया बेचारा. मैंने नेटबुक के लिए लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाले मशीन की तलाश की. पता चला कि छः माह पहले सोलह हजार में जो मशीन जितने रुपए में मिल रही थी, उससे कम कीमत में उससे ज्यादा अच्छी मशीन आज मिल रही है. मैंने नेटबुक में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में कुछ अता-पता किया तो पता चला कि अभी जो मशीनें मिल रही हैं, उनमें कोल्ड कैथोड का प्रयोग होता है. नई आने वाली मशीनों में बैक लाइट के लिए कोल्ड कैथोड के बजाए एलईडी का प्रयोग होगा जिससे मशीनें बिजली कम खाएंगी और इनकी बैटरी की उम्र भी ज्यादा होंगी. नई मशीनों में 120 जीबी तक सॉलिड स्टेट डिस्कें होंगी. मैंने लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के आते तक अपनी यह खरीद मुल्तवी रखी है. देखें, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी और क्या-क्या लेटेस्ट लाती है – वो भी सस्ते में! मोबाइल फ़ोनों की बात तो आप पूछिए ही मत. मेरे अब तक के आधे दर्जन, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त मोबाइल फोन दुकान से खरीद कर नीचे उतरते ही लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के कारण पुराने पड़ गए तब से मैंने अपने मोबाइल (को अद्यतन करने) की ओर झांका भी नहीं है.

इस बीच रेखा ने फ़रमाइश की कि अपना 21 इंची सीआरटी टीवी पुराना हो गया है (जबकि वो महज चार साल पहले आया है, और जब आया था, तो लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त फ्लैटस्क्रीन वाला था) उसे बदल कर नया 29 इंची बड़ी स्क्रीन का टीवी ले आते हैं. पड़ोस में 29 इंची, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी का टीवी जो आ चुका था, अत: बच्चों को भी इस छोटी स्क्रीन में टीवी सीरियल देखने में उतना मजा नहीं आ रहा था. इससे भी बड़ी बात ये थी उनके लिहाज से तकनॉलाज़ी में पुराने पड़ चुके 21 इंची टीवी को ड्राइंग रूम में रखना शर्म की बात थी. अलबत्ता घर का सेकंड टीवी हो तो उसे घर में रखा जा सकता है. लिहाजा, मैंने नए, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाले टीवी के बारे में मालूमात किए तो पता चला कि एलसीडी स्क्रीन वाले 27 इंची टीवी लेटेस्ट तों हैं. परंतु इनसे भी अधिक लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के, ओएलईडी, प्लाज़्मा और पेपर थिन तकनॉलाज़ी के उत्पाद आ रहे हैं और आने वाले हैं. मैं किसी बढ़िया कम्पनी का बढ़िया, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी का एलसीडी टीवी पसंद करता इससे पहले ही मेरी नज़र इस खबर पर पड़ी कि सैमसुंग ने कार्बन नैनोट्यूब युक्त रंगीन ई-पेपर नामक डिस्प्ले बनाया है जिससे टीवी देखने का अंदाज ही बदल जाएगा. मैं घर में बीवी-बच्चों को मनाने में लगा हुआ हूं कि भई लेटेस्ट तकनॉलाज़ी की ये टीवी आने दो, ले लेंगे.

परंतु फिर, जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है – लेटेस्ट तकनॉलाज़ी – क्या खाक!

चहुँओर मंदी की मार से त्रस्त जनता अपना ग़म ग़लत करने के लिए आर्थिक मंदी और दीवाला से संबंधित ईमेल फारवर्डकरने में लगी हुई है. वैसे तो मेरे पास भी #५००००० ईमेलों की सूची है, जिनमें से अधिकतर लोग-बागों द्वारा मुझे भेजे गए ईमेल फारवर्ड के जरिए संकलित हुए हैं, परंतु फिर भी मैं इस सूची में  निम्न कचरा भेजने के बजाए अपने ब्लॉग में डालना उचित समझता हूँ. चाहें तो एक मुस्कान मारने के लिए पढ़ लें, नहीं तो दन्न से कट लें...

* मुंबई स्टाक मार्केट के सामने खड़ी मारूति ८०० पर बंपर स्टीकर चिपका मिला - बिकाऊ. मेरी दूसरी गाड़ी ब्रांड न्यू मर्सिडीज बैज एस क्लास भी बिकाऊ है. एकदम सस्ते दामों में. आज के आज. तत्काल संपर्क करें. (गाड़ी अभी भी खड़ी है.)

* बैंक से मेरा चेक वापस आ गया. टीप लिखा था - फंड अपर्याप्त है, जिसके कारण चेक लौटाया जा रहा है. फंड अपर्याप्त? उनका या मेरा?

* ७०० बिलियन से नीचे ३० बिलियन प्राइम नंबर हैं, बाकी के सभी सब-प्राइम हैं.

* मैंने चेक इनकेश करवाने बैंक भेजा ही था कि बैंक ही बाउंस हो गया.

* कल ही मैंने अपने भाई को १० डालर उधार दिए और आज पता चला कि मैं विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उधारी देने वाला व्यक्ति बन गया हूं.

* घोर सकारात्मकता की पराकाष्ठा - इनवेस्टमेंट बैंकर रविवार को अपने पांच ड्रेस इस्तरी करने को देता है.

* वड़ा पाव और इनवेस्टमेंट बैंकर में अंतर - वड़ा पाव से तो फिर भी एक आदमी का एक वक्त का भोजन का जुगाड़ हो गया समझो.

* तालाब में डूबे हुए पांच इनवेस्टमेंट फंड मैनेजरों को आप क्या कहेंगे? एक बढ़िया, शानदार शुरूआत.

* एक कबूतर तथा एक इनवेस्टमेंट बैंकर में अंतर - कबूतर तो फिर भी अपने बीट से किसी ब्रांड न्यू मर्सिडीज बैंज पर नए रंग की नई डिजाइन बना सकता है.

* सभी एमबीए वापस कॉलेज की ओर क्यों दौड़ लगा रहे हैं? अपनी फीस वापस मांगने.

* यह विपदा तो तलाक से भी ज्यादा बड़ी है. मेरा धन एक चौथाई हो गया और मेरी बीवी अभी भी मेरे पास है.

(सामग्री द इंडियन एक्सप्रेस से साभार अनुवादित)

पाठकों की लगातार मांग के चलते अंतत: अमिताभ बच्चन को हिन्दी में ब्लॉग लिखना ही पड़ा. उनकी पहली हिन्दी ब्लॉग-प्रविष्टि यहाँ पढ़ें.

मजेदार बात ये है कि अमिताभ बच्चन के ब्लॉग में आरएसएस फ़ीड सब्स्क्राइब करने की कड़ी पर जाने से वहाँ पंजीकरण बन्द है की सूचना मिलती है. तो क्या उनके पाठक इतने ज्यादा हो गए हैं कि – टू हॉट टू हैंडल?

बहरहाल, यदि आप अमिताभ बच्चने के ब्लॉग को ईमेल या आरएसएस रीडर के जरिए सब्सक्राइब करना चाहते हैं तो विवरण यहाँ दर्ज है.


अद्यतन : # 1 आशीष ने याद दिलाया कि अमिताभ की ये हिन्दी इंकब्लॉगिंग की पहली पोस्ट नहीं है. इस साल जुलाई में वे पहले भी हिन्दी में इंकब्लॉगिंग ब्लॉग पोस्ट कर चुके हैं.

अद्यतन : # 2 मगर, अंतत: अमिताभ ने हिन्दी में लिखना चालू कर ही दिया. अब इसे तो उनकी असली प्रथम प्रविष्टि मान ही लें हिन्दी की.

धन्यवाद आशीष.

cause of women weight gain

फुरसत के किसी क्षण यदि आप अपने आप पर गौर फरमाएँगे कि आज से पाँच या दस साल पहले कैसे थे, तो आप पाएंगे कि कुछ मामलों में आपमें तो आमूल चूल परिवर्तन आ गया है. पाँच साल पहले आप वज़न में कोई दस किलो कम थे, दस साल पहले आप कोई बीस किलो कम थे, और पंद्रह साल पहले तीस किलो.

वज़न के इस चक्रवृद्धि में जाहिर है, और किसका हाथ होगा भला? यदि आप पुरूष हैं, तो इसमें आपकी पत्नी का हाथ है जो आपके गले तक खा लेने के बाद भी आपकी थाली में एक और फुल्का डालते हुए कहती है – एक और ले लो न जी. गरमागरम. कितने प्यार से बनाया है. गोया प्यार में वज़न तभी आएगा जब आपके भोजन में (और नतीजतन आपके शरीर में) वज़न होगा. और यदि आप स्त्री हैं, तो भी, भले ही आपके पतिदेव आपकी थाली में गरमागरम फुल्का न डालें, मगर ऐन-केन-प्रकारेण आपके शारीरिक वज़न-वृद्धि के लिए शत-प्रतिशत वही जिम्मेदार हैं. आपके पतिदेव आपको जितना खुश रखते हैं, उसी अनुपात में आपका वज़न बढ़ता रहता है. अब आप अनुमान लगा लीजिये कि जीरो साइज फ़िगर में प्यार का अनुपात भला कितना होगा.

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व्यंज़ल
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वक्त अब पहले जैसा नहीं रहा
मेरा दोस्त पहले जैसा नहीं रहा

निकले थे दुनिया खरीदने पर
भाव अब पहले जैसा नहीं रहा

रहे होंगे किस्से लैला मजनूं के
प्यार यारों पहले जैसा नहीं रहा

कैसे कहें कि दवा और दारू में
फर्क अब पहले जैसा नहीं रहा

शिकायत फिजूल थी दरअसल
रवि खुद पहले जैसा नहीं रहा

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(समाचार कतरन – साभार टाइम्स ऑफ़ इंडिया)

Rachanakar in Roman

रचनाकार का रोमनीकृत (फ़ॉनेटिक अंग्रेज़ी) सामग्री वाया चिट्ठाजगत फ़ीड स्वचालित तरीके से यहाँ प्रकाशित होता रहा है.

रोमनीकृत रचनाकार के अपने पाठक हैं, और वे आमतौर पर गूगल सर्च से आते हैं. बहुत से हिन्दी के पाठक जो अंग्रेज़ी रोमन लिपि (जो देवनागरी लिपि से अनभिज्ञ रहते हैं, जैसे कि दक्षिण भारतीय – जो थोड़ा-बहुत हिन्दी बोल समझ लेते हैं) को ही समझ पाते हैं, या फिर जिनके कम्प्यूटरों में यूनिकोड हिन्दी दिखाई ही नहीं देती; उनके लिए रोमनीकृत हिन्दी पाठ का कोई विकल्प नहीं है.

परंतु जिस तकनीक के सहारे रोमनीकृत रचनाकार प्रकाशित होता रहा था, उस तरह की तकनीक का बेजा इस्तेमाल भाई लोगों ने चालू कर दिया है. उदाहरण के तौर पर, माना कि अंग्रेज़ी की कोई लोकप्रिय तकनालाजी साइट है, और उसे गूगल के मुफ़्त अनुवादक एपीआई के जरिए हिन्दी समेत अन्य तमाम भाषाओं में अनुवाद (या ट्रांसलिट्रेट कर – यानी लिपि बदल कर) कर उसका फ़ीड जेनरेट कर स्वचालित तरीके से प्रकाशित करने लगें तो? ऐसा प्रकाशक तो बस एक बार थोड़ा सा सेटअप कर ले, बाकी का सारा मसाला अपने आप अपडेट होता रहेगा, घर भरता रहेगा.

यदि ऐसा स्वयं प्रकाशक या सामग्री का मालिक करे (जैसे कि, उदाहरण के रूप में - यहाँ) तब तो ठीक है. परंतु यदि कोई दूसरा व्यक्ति तकनीक का बेजा इस्तेमाल (तकनीक का बेजा इस्तेमाल कुछ इस तरह भी है) कर किसी और के माल को इस तरह से रूपांतरित या अनुवादित कर प्रकाशित करने लगे तब?  ऐसे मसालों की खोज होते रहती है, और इन्हें ढूंढ ढूंढ कर खत्म किया जाता है. प्रायः ऐसी खोजें स्वचालित बॉट द्वारा की जाती हैं. बहुत से मामलों में व्यक्तिगत रूप से शिकायत भी दर्ज की जाती हैं. गूगल-ब्लॉगर भी डंडा लेकर ऐसे फर्जी प्रकाशकों के पीछे निकल पड़ा है.

परंतु रचनाकार का रोमनीकृत रूप तो रचनाकार के पाठकों की सुविधा व सहूलियत के लिए ही बनाया गया था और उसे रचनाकार के प्रकाशक द्वारा ही स्वचालित औजारों के जरिए प्रकाशित किया जा रहा था. इसके बावजूद गूगल ने यह आरोप मढ़ दिया कि रोमनीकृत रचनाकार की चंद चुनिंदा पोस्टें डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट (डीएमसीए) का उल्लंघन कर रही हैं अतः उन्हें हटाया जा रहा है, और यदि भविष्य में इनका उल्लंघन पाया गया तो आपका गूगल खाता बन्द कर दिया जाएगा.

गूगल से प्राप्त नोटिस का मजमून ये है:

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Blogger has been notified, according to the terms of the Digital Millennium Copyright Act (DMCA), that certain content in your blog infringes upon the copyrights of others. The URL(s) of the allegedly infringing post(s) may be found at the end of this message.

The notice that we received, with any personally identifying information removed, will be posted online by a service called Chilling Effects at http://www.chillingeffects.org. We do this in accordance with the Digital Millennium Copyright Act (DMCA).

Please note that it may take Chilling Effects up to several weeks to post the notice online at the link provided. The DMCA is a United States copyright law that provides guidelines for online service provider liability in case of copyright infringement. We are in the process of removing from our servers the links that allegedly infringe upon the copyrights of others. If we did not do so, we would be subject to a claim of copyright infringement, regardless of its merits.

See http://www.educause.edu/Browse/645?PARENT_ID=254 for more information about the DMCA, and see http://www.google.com/dmca.html for the process that Blogger requires in order to make a DMCA complaint. Blogger can reinstate these posts upon receipt of a counter notification pursuant to sections 512(g)(2) and 3) of the DMCA. For more information about the requirements of a counter notification and a link to a sample counter notification, see http://www.google.com/dmca.html#counter .

Please note that repeated violations to our Terms of Service may result in further remedial action taken against your Blogger account. If you have legal questions about this notification, you should retain your own legal counsel. If you have any other questions about this notification, please let us know.

Sincerely,

The Blogger Team

Affected URLs: http://desitoons.blogspot.com/2008/10/posts-of-blog-rachanakar_19.html

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हास्यास्पद? निहायत हास्यास्पद. चोरों को पकड़ो भाई, मगर ईमानदारों को तो बख्श दो! वैसे भी न्यायिक सिद्धांत है – दस अपराधी भले ही छूट जाएं, मगर किसी मासूम को सजा न हो.

गूगल के स्वचालित बॉट पहले भी कुछ जेनुइन हिन्दी चिट्ठों की वाट लगा चुके हैं.

 

रोमनीकृत रचनाकार की निरंतरता, जाहिर है, यहीं समाप्त होती है.

स्क्रीमर रेडियो के मुरीद तो आप हो ही गए होंगे. इसका नया संस्करण जो ज्यादा बढ़िया (स्टेबल) चलता है जारी हो चुका है.

अब आप इसे अपनी मनपसंद भाषा – हिन्दी में भी चला सकते हैं. इसके इंटरफेस का अनुवाद हिन्दी में पूर्ण हो चुका है, और बहुत संभव है कि इसके अगले संस्करण में आधिकारिक तौर पर हिन्दी में भी जारी हो जाए.

परंतु आप अभी ही अपने स्क्रीमर रेडियो को हिन्दीमय कर सकते हैं. यह फ़ाइल (lang.english.xml) डाउनलोड कीजिए और इसे स्क्रीमर रेडियो के इंस्टालेशन फ़ोल्डर (डिफ़ॉल्ट रूप में यहाँ होगा - %Program Files/screamer radio/languages) के लैंग्वेजेस नाम के सब-फ़ोल्डर में नक़ल कर दें. वहाँ पहले से इस नाम की फ़ाइल होगी. आपसे उसे बदलने के लिए पूछा जाएगा. हाँ करें, और बस. स्क्रीमर रेडियो फिर से चालू करें – यह हिन्दी भाषा में चलता दिखेगा – कुछ इस तरह:

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bhasha india in warning page in opera (Small)

क्रैकरों के निशाने पर बड़ी, प्रचलित साइटें हमेशा रहती हैं. ताकि वे उसके जरिए अपना ऑनलाइन फ्रॉग का धंधा जमाए रख सकें. कुछ समय से माइक्रोसॉफ़्ट भाषाइंडिया की डाउनलोड http://bhashaindia.com/ साइट पर जहाँ हम भारतीय भाषाई कम्प्यूटिंग वालों को बहुत-कुछ काम के डाउनलोड मुफ़्त मिलते हैं, वहाँ कुछ अटैक-स्क्रिप्ट्स और मालवेयर किस्म के डाउनलोडर अपना अड्डा जमाए बैठे हैं.

bhasha india in opera (Small)

इस समस्या की रपट माइक्रोसॉफ़्ट को 19 सितम्बर 08 को ही दे दी गई थी, परंतु गूगल सेफ ब्राउजिंग की रपट को मानें तो समस्या अभी भी  याने ताजा ताजा, 7 अक्तूबर 08 तक बरकरार है.

मजेदार बात ये है कि यदि आप इस साइट पर इंटरनेट एक्सप्लोरर से भ्रमण करते हैं तो कहीं कोई चेतावनी नजर नहीं आती. इसका अर्थ ये है कि इंटरनेट एक्सप्लोरर के प्रयोक्ता (जो कि कम नहीं हैं,) हमेशा खतरे पर होंगे. जबकि ऑपेरा और फ़ायरफ़ॉक्स में आपको बाकायदा चेतावनी मिलती है.

bhasha india in IE (Small)

इंटरनेट एक्सप्लोरर पर डाउनलोड पृष्ठ खुल गया, जबकि फ़ायरफ़ॉक्स (ऑपेरा में भी) में (सभी ब्राउज़र डिफ़ॉल्ट सेटिंग में,) निम्न चेतावनी मिली :

 

bhashaindia in firefox (Small)

फ़ायरफ़ॉक्स प्रयोग करने का एक और ठोस कारण?

बहरहाल, जब तक ये समस्या दूर नहीं होती, इस साइट पर न विचरें, और सुरक्षित ब्राउज़िंग का प्रयोग करें.

linus torwalds blog 2

नेट की दुनिया पर अगर आपका वजूद है, तो यकीनन आपका कोई न कोई एक ब्लॉग होगा. लिनुस टॉरवाल्ड्स का भी होगा? अब तक तो नहीं था, मगर, लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के सृजक, लिनुस टॉरवाल्ड्स भी अंतत: पिछले हफ़्ते से ब्लॉग लेखन में कूद पड़े. और वे नक़ली स्टीव जॉब्स की तरह नक़ली नहीं हैं, पूरे असली हैं.

उनका ब्लॉग – लिनुस का ब्लॉग सादा जीवन उच्च विचार को इंगित करता है. ब्लॉगर प्लेटफ़ॉर्म पर एकदम सादे, सरल टैम्प्लेट पर बिना किसी साज सज्जा के है उनका ब्लॉग. और उन्होंने अपने इस पोस्ट में एक सतर्क पिता के रूप में अपने बच्चों को इंटरनेट के उचित उपयोग संबंधी विचार लिखे हैं.

अब आप वहां आई टिप्पणियों का आनंद लें – लोग बाग़ लिनुस को सीख दे रहे हैं पट्टी पढ़ा रहे हैं कुछ इस तरह:

एक ने टिप्पणी लिखी – आपने ब्लॉगर का प्रयोग क्यों किया? वर्डप्रेस क्यों नहीं? वर्डप्रेस तो मुफ़्त उपलब्ध, ओपन सोर्स ब्लॉग अनुप्रयोग है, जबकि ब्लॉगर का प्रयोग सिर्फ गूगल के सर्वरों पर ही किया जा सकता है.

एक का कहना था – आप सादा सरल ब्लॉगर का प्रयोग ब्लॉग के लिए क्यों कर रहे हैं? आपको तो गिट (git) का प्रयोग करना था – वो ज्यादा गीकी होता!

एक दूसरे बंधु लिनुस को सलाह देने लगे – आप अपने फोटो इंटरनेट पर टांगने के लिए फ्लिकर या पिकासा का प्रयोग कर सकते हैं.

अगली टिप्पणी है – आपने ब्लॉगर का प्रयोग ब्लॉग लेखन के लिए क्यों किया? आपको तो अपना स्वयं का डोमेन लेकर वर्डप्रेस इत्यादि (या गिट के प्रयोग से) के जरिए ब्लॉग लिखना चाहिए.

एक और टिप्पणी है – आपने ब्लॉगर का चुनाव रेंडमली कर लिया या देख-परख कर किया? यदि आप इसबारे में बताएंगे तो बढ़िया स्टोरी बनेगी.

संबंधित आलेख:

लिनुस टॉरवाल्ड्स से साक्षात्कार (हिन्दी में)

लिनुस टॉरवाल्ड्स ने ब्लॉग लिखना क्यों शुरू किया (साक्षात्कार अंग्रेज़ी में)

लिनुस टॉरवाल्ड्स फैक्ट शीट (अंग्रेज़ी में)

चित्र : साभार – लिनुस टॉरवाल्ड्स फैक्ट शीट

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saahas ki baat 1

महिलाओं का देर रात घर से बाहर निकलना साहस की बात नहीं है. चलिए, मान लिया. तो, आखिर वे क्या-क्या बातें हो सकती हैं जिन्हें, बकौल शीला दीक्षित, साहस की बात कही जा सकती है? चलिए एक राउंडअप लेते हैं –

  • एक नेता के लिए : 25 करोड़ लेकर भी दल नहीं बदलना या क्रास वोटिंग नहीं करना.
  • एक अफसर के लिए : रिश्वत लेकर भी काम नहीं करना.
  • एक पुलिसिया के लिए : किसी को भी गोली मार कर एनकाउंटर की थ्योरी स्थापित कर देना.
  • एक विद्यार्थी के लिए : नकल की बात कौन करे, उत्तर पुस्तिका किसी विषय विशेषज्ञ से लिखवा कर बदल देना.
  • एक शिक्षक के लिए : आजकल के विद्यार्थी को पढ़ा सकना.
  • एक सर्जन के लिए : एपेण्डिक्स के ऑपरेशन के नाम पर किडनी निकाल लेना.
  • किसी सरकारी बाबू के लिए : कोई फ़ाइल हाथ के हाथ (दैन एंड देअर) सरका देना.

अगर लिखते जाएं तो जाहिर है सूची समाप्त ही नहीं होगी, अंतहीन होगी. साहस के काम दुनिया में सैकड़ों हैं. भारतीयता के तारतम्य में एवरेस्ट पर चढ़ना या एंटार्कटिका पर अकेले जाना या दिल्ली में रात में अकेले घूमना साहस नहीं है. ये सबको समझ में आ जाना चाहिए. ठीक से!

व्यंज़ल

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मैंने की है कभी साहस की बात

जो कहूंगा अभी साहस की बात

 

वक्त ने बेवक्त मार दिया मुझे भी

वरना करता अभी साहस की बात

 

मुर्दों के मेरे शहर में क्या दोस्तों

करेगा कोई कभी साहस की बात

 

करता धरता यहाँ कोई कुछ नहीं

पर करते हैं सभी साहस की बात

 

हो गया एनकाउन्टर रवि का भी

कही उसने कभी साहस की बात

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(समाचार कतरन – साभार डीबी स्टार)

screamer radio

एफ़ एम रेडियो में बारंबार बजते वही गाने, पुराने सड़ियल चुटकुले, फोकट की बकवास और विज्ञापन सुन सुनकर दिमाग पक गया है?

अपने मोबाइल एमपी3 प्लेयर के 8 जीबी संग्रह के गाने पचासों बार शफल कर सुन सुन कर दिमाग सड़ गया है और आपको अपने संग्रह के उन गानों से नफरत होने लगी है?

तो आपके पके और सड़े हुए दिमाग के लिए आ गया है एक शानदार इलाज.

स्क्रीमर रेडियो. 4 मेबा से कम का एक छोटा सा फ्रीवेयर प्रोग्राम. डाउनलोड करिए, और इसके प्रीसेट में से तमाम विश्व के इंटरनेट रेडियो में से छांटकर बस एक क्लिक से गाने सुनिए. चाहें तो एक और क्लिक से सुने जा रहे गीतों को सीधे एमपी3 में रेकॉर्ड भी करें हाँ, इंटरनेट कनेक्शन बढ़िया होना चाहिए.

इस्तेमाल में बेहद आसान. यानी इसके लिए किसी तरह के डमी या ईडियट गाइड की आवश्यकता नहीं.

और यदि किसी चैनल से बोर हो गए तो बस, इसके प्रीसेट इंटरनेट रेडियो की सूची में जाएं और झट से चैनल बदल लें. भारत के लिए ही कोई चालीसेक रेडियो पहले ही संग्रहित हैं. यदि आप अंग्रेज़ी गानों के शौकीन हैं तो, सूची एक तरह से अनंत है.

तो, देर किस बात की? स्क्रीमर रेडियो अभी ही डाउनलोड करिए!

ekya type anywhere in browser1

हिन्दी लिखने की सुविधाओं में दिनोंदिन इजाफ़ा होता जा रहा है. हाल ही में ब्राउज़र टूलबार पिटारा के जरिए हिन्दी लिखने की एक और जुगत जोड़ी गई थी. तमाम और भी नए नए औजार बेहतरीन खासियतों के साथ जुड़ते जा रहे हैं. इस बीच हिन्दी लिखने की सुविधाओं में एक और नाम जुड़ा है ऐक्य का.

ऐक्य (Ekya) क्या है?

आपके लिए यह एक आसान वेब एप (जाल अनुप्रयोग) सुविधा है जिसके जरिए आप ब्राउजर के इनपुट विंडो में हिन्दी (चाहें तो अन्य भारतीय भाषाएं) लिख सकते हैं. यह भी पिटारा हिन्दी औजार की तरह गूगल इंडिक लेखन औजार के एपीआई का प्रयोग करता है. मगर इसके लिए आपको किसी टूलबार को डाउनलोड कर संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है. इसकी कड़ी को आप अपने ब्राउज़र के बुकमार्कलेट में लगा लें और आपका काम एक क्लिक में हो गया समझिए.

यदि आप फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउजर प्रयोग करते हैं तो यह आपके लिए बहुत आसान है. इस कड़ी में जाकर वहाँ हिन्दी वाली कड़ी को अपने ब्राउज़र बुकमार्क पट्टी पर खींच ले जाकर छोड़ दें बस. फिर कहीं भी ब्राउजर के इनपुट विंडो में हिन्दी लिखें. अंग्रेजी हिन्दी में टॉगल के लिए कंट्रोल+g बटन का प्रयोग करें. इंटरनेट एक्सप्लोरर में अपने फेवराइट लिंक में इसे जोड़ें.

विस्तृत विवरण के लिए, और यह कैसे काम करता है, इसके लिए इस कड़ी को देखें.

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tag : how to write hindi anytime anywhere

5 biggest flaws in google android mobile phone

हमारे मोबाइल फोन दिनोंदिन स्मार्ट होते जा रहे हैं. इतने स्मार्ट कि आमतौर पर उपयोक्ता को ही पता नहीं होता कि वो अपने मोबाइल से एसएमएस और वीडियो देखने के अलावा और क्या कुछ नहीं कर सकता. बाजार में गूगल एण्ड्रॉयड युक्त स्मार्ट फ़ोन टीमोबाइल जी1 जबरदस्त स्मार्ट तरीके से बाजार में हाल ही में जारी किया गया.  परंतु इसमें (बल्कि हर स्मार्ट फ़ोन में) निम्नलिखित जबरदस्त खामियाँ हैं-

  1. ये आपको गूगल मैप्स की सहायता से जीपीएस सिस्टम के जरिए आपका लोकेशन बता सकता है, आपका स्थान बता सकता है और आपको रास्ता भी बता सकता है. ठीक है, मुझे तो मेरा स्थान बखूबी पता है. पर क्या ये सामने वाले का लोकेशन बता सकता है कि बंदा वाकई बाथरूम से या फिर बम्बई से बोल रहा है? क्योंकि अकसर होता ये है कि किसी को फोन करो तो बोलेगा – भाई, बाहर हूं, रोमिंग पर हूं, अत: जितनी जल्दी माफ़ कर दें उतना अच्छा...
  2. ये आपको सामने वाले का परिचय बता सकता है – जो कि साधारण फ़ोन भी बता सकता है – कि कॉल किसका आया. परंतु ये सामने वाले का मूड नहीं बता सकता. आप अपनी पत्नी या प्रेमिका के फोन का इंतजार रोमांटिक मूड में करते हैं, बॉस को बढ़िया, खुशनुमा मूड में गुडमॉर्निंग की सोचते हैं तो पता चलता है कि सामने वाला किचकिच करने की पूरी तैयारी से आया है. हुंह, काहे का स्मार्ट!
  3. स्मार्ट फ़ोन? पर क्या ये इतना स्मार्ट है कि वो खुद-ब-खुद बता सके कि भुलक्कड़ भाई, मुझे आपने यहाँ-वहाँ लावारिस छोड़ दिया है!
  4. ठीक है, ये गुम जाने पर अपने अंदर का सेंसिटिव डाटा लॉक कर लेगा. परंतु क्या ये इतना स्मार्ट है कि गलत हाथ में लगने पर या किसी फोरेंसिक वाले के हाथ लगने पर सेंसिटिव डाटा सहित अपने आप को मटियामेट कर ले?
  5. चलो, मान लिया कि ये आपका ढेरों काम कर सकता है – आपका वीडियो-ऑडियो-गेम से मनोरंजन कर सकता है, आपके ऑफ़िस के काम बखूबी कर सकता है, पिज्जा हट को पिज्जा के लिए ऑर्डर दे सकता है, पर क्या ये इतना स्मार्ट है कि आपके लिए आपके अख़बार का पन्ना पलट सकता है? ये तो आपके लिए गर्मागर्म चाय भी नहीं बना सकता.

क्या आप अब भी इसे स्मार्ट कहेंगे? अभी तो ये उतना नहीं है, कौन जाने आने वाले किसी दिन ये सचमुच का स्मार्ट हो जाए!

(चित्र साभार - गिज्मोडो)

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