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Monday, September 08, 2008

उबुन्टु लिनक्स में अतिरिक्त अनुप्रयोगों को अत्यंत आसानी से कैसे संस्थापित करें?

  उन्मुक्त ने अपने पोस्ट में उबुन्टु लिनक्स की तारीफ की थी कि ये किस तरह से मुक्त स्रोत का ऑपरेटिंग सिस्टम हिन्दी वालों के लिए भी बढ़िया है. परंतु उन्हें उबुन्टु में अतिरिक्त अनुप्रयोगों के संस्थापना में थोड़ी सी दिक्कतें आईं थीं, और उन्होंने कहा था कि इस विषय पर कुछ लिखें.
दरअसल, उबुन्टु लिनक्स में आप बड़ी ही आसानी से अतिरिक्त अनुप्रयोगों को संस्थापित कर सकते हैं. इसके लिए दो प्रमुख तरीके हैं. पहला - कमांड लाइन से, व दूसरा चित्रमय पैकेज संस्थापक – सिनेप्टिक के जरिए.
1 शैल कमांड से उबुन्टु लिनक्स में अनुप्रयोगों को संस्थापित करना :
package installation in Ubuntu by command
इसके लिए बहुत ही आसान सा कमांड है. कमांड सिंटेक्स है –
sudo apt-get install <packagename>
उदाहरण के लिए आपको wine पैकेज संस्थापित करना है तो कमांड निम्न होगा –
sudo apt-get install wine
स्पेलिंग व केस का अतिरिक्त ध्यान रखें तथा उबुन्टु में रूट उपयोक्ता का पासवर्ड पहले से सेट नहीं होता और यदि आपने इसे सेट नहीं किया है तो यह कमांड बिना आपसे पासवर्ड पूछे wine अनुप्रयोग को संस्थापित कर देगा.
2 चित्रमय सिनेप्टिक पैकेज मैनेजर के जरिए उबुन्टु में अनुप्रयोगों को संस्थापित करना :
package installation in Ubuntu by graphical package manager synaptic2 (Small)
इसके लिए आप मेन्यू में जाकर तंत्र > प्रशासन > सिनेप्टिक पैकेज प्रबंधक (system > administration > syneptic package manager) पर क्लिक करें. सिनेप्टिक पैकेज प्रबंधक का विंडो खुलेगा जिसमें आप बाईं विंडो में सभी (all) पर क्लिक करेंगे तो दाएं विंडो में आपको उबुन्टु में स्थापित करने योग्य सैकड़ों नए अनुप्रयोगों की सूची दिखाई देगी. जिन अनुप्रयोगों को संस्थापित करना है, उन्हें क्लिक करें, और ठीक (ok) पर क्लिक करें.
package installation in Ubuntu by graphical package manager synaptic (Small)
आपके द्वारा चयनित अनुप्रयोग इंटरनेट से स्वचालित डाउनलोड होंगे व स्वचालित संस्थापित हो जाएंगे. चूंकि अनुप्रयोगों को संस्थापित करने की फ़ाइलें इंटरनेट से डाउनलोड होती हैं, अतः जाहिर सी बात है कि आपको संस्थापना से पहले अपने कम्प्यूटर को इंटरनेट से जोड़ लेवें. और कनेक्शन उच्च गति का, ब्रॉडबैण्ड हो नहीं तो पैकेजों को डाउनलोड करने में अच्छा खासा समय लगेगा.
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हिन्दी लिनक्स पर हिन्दी में कुछ जानकारी : http://raviratlami.blogspot.com/2006/12/blog-post_26.html
उबुन्टु लिनक्स (लाइनक्स?) के बारे में हिन्दी में अन्य जानकारियाँ –
उबुन्टु 8.04
http://ankurthoughts.blogspot.com/2008/04/blog-post_4734.html
http://ankurthoughts.blogspot.com/2008/02/blog-post_24.html
http://ankurthoughts.blogspot.com/2007/11/blog-post_04.html
उबुन्टु के लिए कुछ सॉफ़्टवेयर:
http://ankurthoughts.blogspot.com/2007/10/3.html
http://ankurthoughts.blogspot.com/2007/10/blog-post_3869.html
http://ankurthoughts.blogspot.com/2007/09/rar.html
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6 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

amit said...

अपने को तो उबुन्टू से अधिक कुबुन्टू भाता है, कदाचित्‌ इसलिए कि मुझे शुरु से ही ग्नोम बेकार लगा और केडीई बढ़िया लगा! :)

प्रकाश said...

रवि जी,
Google Chrome नामक ब्राउज़र की चर्चा जोरों पर है। इसमें कुछ हिन्‍दी की वेबसाईट्स में फोन्‍ट्स की दिक्‍कतें आ रही है।
जैसे www.mpinfo.org वेबसाईट खोलते है, तो फोन्‍ट्स सम्‍बंधि प्रमुख समस्‍या सामने होती है, क्‍या इसका कोई निराकरण किया जा सकता है।

प्रकाश said...

रवि जी
Google Chrome नामक ब्राउज़र की बड़ी चर्चा है। मैने भी उपयोग करके देखा, लेकिन कुछ हिन्‍दी वेबसाईट्स में फोन्‍ट्स संबंधी समस्‍याएं आ रही है। जैसे www.mpinfo.org यह वेबसाईट खोलने पर फोन्‍ट्स की प्रमुख समस्‍या है, क्‍या इसका कोई समाधान आपके पास उपलब्‍ध है, अगर हो तो कृपया मुझे लिखे।
मेरा ई-मेल आईडी है, mahale.pm@gmail.com

Raviratlami said...

प्रकाश जी,
इसके लिए उपयोक्ता द्वारा कुछ भी नहीं किया जा सकता. ये साइट खासतौर पर इंटरनेट एक्सप्लोरर को ध्यान में रखते हुए डायनामिक फ़ॉन्टो से बनाई गई लगती है, जो दूसरे ब्राउजरों में समस्या पैदा करती है. आप गूगल क्रोम में बग रपट डाल सकते है और उम्मीद कर सकते है कि इसके अगले संस्करण में यह खामी दूर कर ली जाएगी.

कुन्नू सिंह said...

ये उबंटॄ और कूबंटू क्या होता है। या क्या कोई एसा लींक पता है आपको जीसपर दीया हो "उबंटू कूबंटू क्या होता है"
मै भी ईसका सिडी लेने वाला था पर रूक गया।