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आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

बार कैम्प 4 आ रहा है चिट्ठाकारों के लिए जानकारियों का खजाना लेकर

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कैसी जानकारियाँ? नफा नुकसान का विवरण पिछली दफा आयोजित बार कैम्प3  में मौजूद रहे अनिल रघुराज के चिट्ठे पर यहाँ पढ़ें. और यदि आपको लगता है कि वास्तव में बार कैम्प में जानकारियाँ मिलती हैं, वो भी बिलकुल मुफ़्त, तो आईआईटी पवई मुम्बई में 4 और 5 अक्तूबर को होने जा रहे मुम्बई बार कैम्प 4 में अवश्य सम्मिलित हों. पिछला आयोजन एक दिनी था. अब यह दो दिन का आयोजन है – इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपके ब्लॉगीय ज्ञान में कितनी वृद्धि संभावित है.---Technorati tags:    mumbai bar camp संबंधित चिट्ठा – बार कैम्प मुम्बई – क्या आप भी आ रहे हैं? http://ullu.wordpress.com/2008/09/27/barcamp-mumbai-4/

मॉजिल्ला फ़ॉयरफ़ॉक्स 3 का हिन्दी संस्करण जारी…

हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं के फ़ॉयरफ़ॉक्स 3.02 बीटा संस्करण यहाँ से डाउनलोड करें :http://en-us.www.mozilla.com/en-US/firefox/all.html#beta_versionsडाउनलोड विंडोज, मॅक तथा लिनक्स तीनों प्लेटफ़ॉर्म के लिए उपलब्ध है.हिन्दी का डायरेक्ट डाउनलोड लिंक विंडोज के लिए:http://download.mozilla.org/?product=firefox-3.0.2&os=win&lang=hi-INतथा लिनक्स के लिए:http://download.mozilla.org/?product=firefox-3.0.2&os=linux&lang=hi-INफ़ॉयरफ़ॉक्स 3 का संस्करण जब जारी हुआ था तब इसमें हिन्दी नहीं होने पर खूब हल्ला मचा था. इसी वजह से नए संस्करण में हिन्दी को शामिल करने के लिए ताबड़तोड़ कोशिशें की गईं और प्रतिफल सामने है.

कवि हृदय ओसामा...

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आदम और हव्वा...व्यंज़ल : जमाने की दुश्वारियाँ रही होंगी
वरना हम भी तो एक कवि थे जलसे में उस दिन हादसा हुआ
सुना है वहाँ बहुत से कवि थे कोई ये कैसे स्वीकारेगा भला
संगीन लिए लोग कभी कवि थे कुपोषण से मर गया शहर मेरा 
क्योंकि शहर में सभी कवि थे तुम क्या बताओगे हक़ीक़त रवि
सबको मालूम है तुम कवि थे
-----(समाचार कतरन – साभार टाइम्स ऑफ इंडिया)tag  : osama bin laden’s poetry book, poet osama, osama’s book of poems

ऑनलाइन हिन्दी प्रोग्रामिंग औजार हिन्दवी जारी

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ठेठ भारतीय भाषा में प्रोग्रामिंग की सुविधा उपलब्ध करवाने वाले औजार हिन्दवी  का ऑनलाइन, नया संस्करण http://hindawi.in/online/  जारी किया गया है. यानी आप सीधे ही अपने ब्राउजर के जरिए भारतीय भाषाई प्रोग्रामिंग कॉसेप्ट को न सिर्फ सीख सकते हैं, वरन उसमें महारत भी हासिल कर सकते हैं. ऑनलाइन प्रोग्रामिंग औजार की खासियत ये है कि इसमें आपको अपने कम्प्यूटर में संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है, आप किसी भी जावा सक्षम ब्राउजर (चिंता मत कीजिए, सभी आधुनिक ब्राउजर इसमें सक्षम हैं) के जरिए अपने कम्प्यूटर, लैपटॉप पर और कुछ खास मोबाइल उपकरणों पर भी हिन्दी में प्रोग्रामिंग कर सकते हैं.हिन्दवी के ऑनलाइन कमांड टर्मिनल पर मदद टाइप करें व एंटर बटन दबाएं. आप देखेंगे कि आंतरिक कमांड की सूची दिखाई देगी. किसी भी कमांड का प्रयोग कर देखें. जैसे कि दिन कमांड से आपको टर्मिनल दिन व समय प्रदर्शित करेगा. सूची कमांड से सूची दिखेगी, इत्यादि. सारा कुछ मदद व अन्य जानकारी स्क्रीन पर भी दिखाई देती है. हिन्दवी सीखने के लिए ऑनलाइन वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध है, और भविष्य में इसमें और भी विस्तार करने की योजना है.हिन्दवी प्रोग…

हिन्दी पखवाड़ा : हिन्दी पुस्तकालय वि. अंग्रेज़ी लाइब्रेरी

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किसी ने कहा है कि आप मुझे किताबें दे दीजिए और बियाबान जंगल में छोड़ दीजिए. मैं ताजिंदगी तब तक कभी बोर नहीं होउंगा, जब तक कि मेरे पास पढ़ने के लिए किताबें रहेंगी. इंटरनेट युग में आपका पीसी, लेपटॉप और मोबाइल उपकरण इस जरूरत को पूरी करने में कुछ हद तक सक्षम तो है, परंतु वे भौतिक पुस्तकों का स्थान कभी ले पाएंगे अभी इसमें संदेह है.भोपाल आते ही मेरे सबसे पहले के कार्यों में शामिल था पुस्तकालयों को तलाशना. मुझे यहाँ के पुराने, प्रसिद्ध सेंट्रल लाइब्रेरी के बारे में बताया गया. सेंट्रल लाइब्रेरी यहाँ के भीड़ भरे इलाके पुराना भोपाल, इतवारिया के पास है. पूछते पाछते वहाँ पहुँचा तो पाया कि सेंट्रल लाइब्रेरी का सामने का गेट रोड से दिखाई ही नहीं देता. लोहे का गेट जर्जर होकर जमीन में धंस गया है. एक पतली सी पगडंडी इमारत तक जा रही थी. अंदर पहुँचे तो जर्जर होती इमारत में पूरा पुस्तकालय उतने ही जर्जर हालत में मिला. पुस्तकालय के कार्यालयीन समय 3 बजे दोपहर (कार्यालयीन समय सुबह 11 से 5, रविवार एवं अन्य शासकीय अवकाश पर बन्द) के समय वहाँ कोई पाठक नहीं था. वहाँ मौजूद कुल जमा तीन स्टाफ में दो आपस में बातें करते …

सॉफ़्टवेयर मुक्ति दिवस और हिन्दी पखवाड़ा पर हिन्दी की ऑनलाइन पत्रिका का इंटरनेट पर आईआरसी चैनल के जरिए लोकार्पण समारोह का स्नेहिल आमंत्रण

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इससे बेहतर समय हो ही नहीं सकता था. 19 20 सितम्बर सॉफ़्टवेयर मुक्ति दिवस है और साथ ही साथ हिन्दी पखवाड़ा भी चल रहा है. संयोगवश, भारतीय भाषाई लिनक्स पर समर्पित संस्था इंडलिनक्स की आठवीं वर्षगांठ भी इसी हफ़्ते (16 सितम्बर) गुजरा है. इस अवसर पर हिन्दी की एक साहित्यिक-सांस्कृतिक पत्रिका लिटरेचरइंडिया http://literatureindia.com/hindi/ (ये द्विभाषी है यानी अंग्रेज़ी में भी है, इसीलिए नाम अंग्रेज़ी में है, इसीलिए कोई पंगा नहीं;) जो पूरी तरह मुक्त सॉफ़्टवेयर ज़ूमला पर आधारित है, उसका लोकार्पण समारोह आईआरसी चैनल फ्रीनोड (ये भी मुक्त जाल अनुप्रयोग है) पर #sarai चैनल पर होगा, जिसमें तमाम विश्व के पाठक इंटरनेट के जरिए शामिल हो सकते हैं इसका लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक, कवि, अनुवादक ओर संप्रति वाणी प्रकाशन में संपादकीय सलाहकार नीलाभ करेंगे. यदि आपने अस्सी के दशक में बीबीसी हिन्दी सुना होगा तो नीलाभ की खनकदार आवाज उनकी शानदार, दमदार रिपोर्टिंग के साथ आपके कानों में अवश्य गूंजी होगी. लिटरेचरइंडिया का इंटरनेटी लोकार्पण समारोह अपने किस्म का पहला व अनोखा आयोजन होगा जिसमें आप भी सादर आमंत्रित हैं.…

गूगल क्रोम : अभी अद्यतन न करें

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यदि आपको नई-नवेली चीजें ललचाती हैं, और आप चाहते हैं कि आपके कम्प्यूटर पर हर हमेशा गूगल क्रोम का नया नवेला डेवलपर संस्करण (जिसे आम प्रयोग के लिए जारी नहीं किया गया होता है) स्वचालित अद्यतन होता रहे ताकि आप उसकी जांच परख कर सकें व एकदम नया (जो अभी बाजार में उतारा नहीं गया है ) गूगल क्रोम प्रयोग करते रहें तो आप अपने गूगल क्रोम की ऐसी सेटिंग गूगल क्रोम चैनल चूज़र सॉफ़्टवेयर के जरिए कर सकते हैं.मगर, यहाँ पर मजे की बात ये है कि गूगल क्रोम चैनल चूज़र सॉफ़्टवेयर को चलाने पर इसके (क्रोम के हिंदी भाषाई वातावरण में) स्क्रीन में दो बटन नजर आते हैं. पहले बटन में लिखा होता है – अभी अद्यतन न करें (do not update now) तथा ठीक (ok). यदि आप ठीक पर क्लिक करते हैं तो अद्यतन रद्द (cancel) हो जाता है, तथा अभी अद्यतन न करें बटन पर क्लिक करने पर प्रोग्राम अद्यतन हो जाता है.कमांड इन रिवर्स ऑर्डर? शुक्रिया क्रोम. हमने ये भी सीख लिया !---पुनश्च: गूगल क्रोम की एक ख़ासियत आपके काम की हो सकती है – गूगल क्रोम के पता पट्टी में दाएं कोने पर वर्तमान पृष्ठ नियंत्रित करें बटन पर क्लिक कर आप खुले हुए पृष्ठ का डेस्कटॉप जाल…

नहीं, नहीं, मेरे मोटापे का राज कुछ और ही है; भागवान्!

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अगर आप अपनी कमर के घेरे के ऊपर बाल बराबर भी चिंतित हैं कि लाख जतन करने के बाद भी उसमें बाल बराबर भी कमी नहीं होती, उल्टे उसमें समयबद्ध, चक्र-वृद्धि होती जाती है, तो अब आपको चिंतित होने की आवश्यकता नहीं, उसके बारे में सोचने की आवश्यकता नहीं. आपके मोटापे के पीछे आपकी अकर्मण्यता, आपका अनियमित खानपान, आपकी रसीली, चटोरी जिह्वा का कोई हाथ नहीं. ये मैं नहीं कह रहा. ये बात वैज्ञानिक खोजों से सिद्ध हुई हैं. दरअसल आपके मोटापे के पीछे आपके उर्वर दिमाग का हाथ है. आपका दिमाग जितना ज्यादा सोचता है, उतना आपकी भूख बढ़ती है और आप उतना ही अधिक खाते हैं और नतीजतन उतने ही अधिक आप मोटे होते जाते हैं. अब अगर आप स्वस्थ, हृष्ट पुष्ट और तनिक मोटे नजर आते हैं तो इसमें शर्म की, परेशानी की कोई बात नहीं. अपने मोटापे को छुपाने या उसे कम करने की कोई जरूरत नहीं. उलटे आपको अपने आप पर अपने मोटापे पर गर्व होना चाहिए. आप मोटे हैं इससे यह सिद्ध हो जाता है कि आप सोचते हैं. आपके पास एक अदद दिमाग है जो सोचता भी है. यदि आप अधिक मोटे हैं तो यकीनन आप अधिक सोचते हैं. यह तय है कि मोटापा जितना ज्यादा होगा, उतना ज्यादा वो व्यक्ति …

उबुन्टु लिनक्स में अतिरिक्त अनुप्रयोगों को अत्यंत आसानी से कैसे संस्थापित करें?

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उन्मुक्त ने अपने पोस्ट में उबुन्टु लिनक्स की तारीफ की थी कि ये किस तरह से मुक्त स्रोत का ऑपरेटिंग सिस्टम हिन्दी वालों के लिए भी बढ़िया है. परंतु उन्हें उबुन्टु में अतिरिक्त अनुप्रयोगों के संस्थापना में थोड़ी सी दिक्कतें आईं थीं, और उन्होंने कहा था कि इस विषय पर कुछ लिखें.
दरअसल, उबुन्टु लिनक्स में आप बड़ी ही आसानी से अतिरिक्त अनुप्रयोगों को संस्थापित कर सकते हैं. इसके लिए दो प्रमुख तरीके हैं. पहला - कमांड लाइन से, व दूसरा चित्रमय पैकेज संस्थापक – सिनेप्टिक के जरिए.
1 शैल कमांड से उबुन्टु लिनक्स में अनुप्रयोगों को संस्थापित करना :

इसके लिए बहुत ही आसान सा कमांड है. कमांड सिंटेक्स है –
sudo apt-get install <packagename>
उदाहरण के लिए आपको wine पैकेज संस्थापित करना है तो कमांड निम्न होगा –
sudo apt-get install wine
स्पेलिंग व केस का अतिरिक्त ध्यान रखें तथा उबुन्टु में रूट उपयोक्ता का पासवर्ड पहले से सेट नहीं होता और यदि आपने इसे सेट नहीं किया है तो यह कमांड बिना आपसे पासवर्ड पूछे wine अनुप्रयोग को संस्थापित कर देगा.
2 चित्रमय सिनेप्टिक पैकेज मैनेजर के जरिए उबुन्टु में अनुप्रयोगों को …

अंततः महलों के दिन भी फिरते हैं...

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पिछली पोस्ट कमरे कमरे पर... बहुत से पाठकों ने उत्कंठा जताई थी कि आखिर वे क्या वजहें रहीं थीं जिसके कारण एक रतलामी को भोपाली बनने को मजबूर होना पड़ा.दरअसल, मामला जहाँ गुड़ वहां मक्खी का है. रेखा (पत्नी) का तबादला जब भोपाल हो गया तो उसके साथ मुझे भोपाल आना ही था. मैं ठहरा इंटरनेट-जीवी. किसी इंटरनेट जीवी को एक अच्छी गति का इंटरनेट कनेक्शन युक्त एक कम्प्यूटर दे दीजिए, और फिर उसे कहीं भी बिठा दीजिए – उसे नर्क और स्वर्ग में फ़र्क़ ही नजर नहीं आएगा. जिसके लिए तमाम दुनिया एक क्लिक पर हाजिर हो उसके लिए तो बस्तर और न्यूयॉर्क दोनों ही बरोबर! सो इसी उम्मीद में मैंने भी अपना बोरिया बिस्तरा भोपाल के लिए बाँध लिया.पर, शायद नहीं. रतलाम, रतलाम होता है और भोपाल, भोपाल. भोपाल आते ही सबसे पहले यहां के भारी भरकम, तीव्र गति के ट्रैफ़िक, भीड़ भरी तंग गलियों ने स्वागत किया. रतलाम शहर की गड्ढे युक्त सड़कें आपकी रफ़्तार को 20 किमी से अधिक बढ़ने नहीं देतीं और ये अहसास दिलाती फिरती हैं कि जीवन के लिए कतई कहीं कोई जल्दी नहीं. यहाँ भोपाल में उल्टा है. चिकनी चौड़ी सड़कों पर थोड़े धीरे चले कि पीछे से किसी ने ठोंका. …

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