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कमरे कमरे में लिखा है रहने वाले का नाम...

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परिवर्तन का नाम ही जीवन है. कोई अठारह बरस पहले रोजी-रोटी की खातिर छत्तीसगढ़ से रतलाम पहुँचा था तो खयाल नहीं था कि “रतलामी सेव” जैसा टैग मेरे नाम के साथ जुड़ जाएगा. इसकी भी मजेदार कहानी है. भले ही रतलाम बहुत छोटा सा शहर हो, मगर कुछ सुविधाओं के मामले में यह मप्र और भारत का अग्रणी शहर रहा है. वर्षों से यह मप्र का सर्वाधिक साक्षर जिला रहा है. इसका रेल्वे स्टेशन भारत का सर्वाधिक स्वच्छ (भारतीय रेलवे स्टेशन और स्वच्छता? ये बात कुछ हजम नहीं हुई?) स्टेशन रहा है. इंदौर में पहले पहल इंटरनेट आया तो एसटीडी के जरिए रतलाम को भी इंटरनेट की सुविधा मिली. एक पृष्ठ को लोड होने में पाँच मिनट लगते. दस दफ़ा इंटरनेट एक्सेस की कोशिश करते और एकाध बार सफल होते. दसियों बार लाइन ड्रॉप होता. उसी दौरान याहू पर अपना आईडी बनाया. जब मनपसंद आईडी याहू ने रिजेक्ट कर दिया तो अचानक सूझा – raviratlami. और फिर बाकी तो इतिहास है.जब आप लंबे अरसे से किसी स्थान पर रह रहे होते हैं तो आसपास के वातावरण, गली कूचे, लोग – सभी से लगाव हो जाता है. यहां तक कि सूखे पेड़ से भी और गली के खाज युक्त कुत्ते से भी जिसे यदा कदा आप रोटी डाल देते…

मेरे कन्ने माइंड रीडर है...

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खांटी चिट्ठाकार के पास माइंड रीडर मशीन आ गई तो उसने सोचा कि क्यों न अपने चिट्ठापोस्टों के टिप्पणीकारों के दिमागों में झांक कर देखा जाए. प्रतिफल ये रहे–टिप्पणी थी – बहुत बढ़िया, लिखते रहें.मशीन ने बताया : एकदम घटिया! क्या बेकार लिखा है. तुम चिट्ठा लिखते आखिर क्यों हो? कोई और काम नहीं है इसका मतलब ये तो नहीं.... टिप्पणी थी – मजा आ गया. बहुत सुंदर लिखते हैं आप. मशीन ने सही किया : मुंह का स्वाद कड़वा हो गया. इतना बेकार क्यों लिखते हैं आप? टिप्पणी थी – क्या बात है, वाह!मशीन ने सुधारा : ये भी कोई बात हुई, धत्. टिप्पणी थी – बहुत बढ़िया कटाक्ष किया है. मशीन ने असल बात बताई : सेंस ऑफ ह्यूमर तो है नहीं और ह्यूमर दिखाने चले. टिप्पणी थी – मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूं. मशीन ने असलियत उजागर की: आपकी किसी भी बात पर किसी को भी इत्तेफाक नहीं हो सकता. टिप्पणी थी – बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी दी है.मशीन ने वस्तुस्थिति स्पष्ट की : क्या बासी जानकारी टीप कर परोस रहे हो टिप्पणी थी - क्या लिखते हैं, हंसते हंसते बुरा हाल हो गया. अगली पोस्ट का इंतजार. मशीनी जानकारी : सचमुच बुरा हाल हो गया हंसते हंसते. लिखने चले महाभा…

हिन्दी / मराठी धपाधप टाइप करना चाहते हैं? यह वीडियो ट्यूटोरियल अवश्य देखें

हिन्दी / मराठी टाइप करने में समस्या है? तेजी से टाइप नहीं कर पाते हैं? फोनेटिक टाइप कर कर उंगली दुख जाती है? आपके लिए कुछ उपाय तो हैं, जिन्हें सीख कर आप हिन्दी / मराठी त्वरित गति  से टाइप कर सकते हैं.और, हिन्दी मराठी फटाफट और धपाधप टाइप करना सीखने के लिए किसी वीडियो ट्यूटोरियल से अच्छा भला और क्या हो सकता है?तो देखिए वीडियो की पहली किश्त:हिन्दी मराठी शीघ्र टाइपिंग सिखाने वाली वीडियो की दूसरी किश्त:इसे बेहद प्रोफ़ेशनल अंदाज में तैयार किया है लीना महेन्दले ने. उन्हें धन्यवाद. Tag : how to type fast in hindi, typing tool in hindi, hindi typing tool, marathi typing tool, how to type fast in marathi, marathi hindi typing video tutorial, hindi typing video tutorial

अभिनव बिंद्रा, ये तूने क्या किया…?

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28 वर्षों का रेकॉर्ड तूने तोड़ दिया. ले देकर, बड़ी मेहनत से, बड़ी मुश्किल से 1 अरब से अधिक भारतीय जनता ने 25 वर्षीय सिल्वर जुबली रेकॉर्ड बनाया था और उसे आगे बढ़ाकर 50 वर्षीय गोल्डन जुबली रेकॉर्ड (28 तो हो ही गया था, बस बाईस ही तो बचे थे,) के सपने देख रहे थे, उसे तूने अपने एक स्वर्ण पदक से, एक क्षण में ढहा दिया. क्या मिला अभिनव, तुझे क्या मिला? तुझे 1 अरब भारतीयों का खयाल नहीं रहा. उनके सपनों का खयाल नहीं रहा. उनके गोल्डन जुबली बनाने के रेकॉर्ड के सपने को तूने अपने एक गोल्डन पदक से टाइड की तरह चकाचक धो कर रख दिया.अभिनव, तेरे इस पदक से हम भारतीयों को और भी ढेरों, भयंकर समस्याएं पैदा हो गई हैं. बच्चों से लेकर बूढ़ों तक. और इन समस्याओं के पीछे तुम्हारा ही हाथ होगा. वैसे भी भारत में समस्याएँ कुछ कम थीं क्या जो तुमने एक और समस्या ला खड़ी की है? तमाम भारतीय और युवा खिलाड़ी अब ओलंपिक पदकों के सपने देखने लगेंगे. सरकारी-गैर सरकारी तंत्र और भारतीय ओलंपिक खेल संघ भी अब इस सच्चाई को स्वीकारेंगे कि सचमुच भारतीय खिलाड़ियों द्वारा कोई पदक जीता भी जा सकता है, और वे इस समस्या का हल जोरों से तलाशने लगें…

… इवन गॉड कान्ट हेल्प साला

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व्यंज़ल


इवन गॉड कान्ट हेल्प साला
फिर चिंता किसको है साला


ये हालत हुई तो किस तरह
क्या और कैसा सवाल साला


होगा ये देश किसी और का
न तो मेरा न तेरा है साला


पता है कुछ हो नहीं सकता
सपना क्यों देखता है साला


पैदा तो रवि भी देशभक्त था
वो भी पूरा बदल गया साला
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Tag – satire, god can’t help india, supreme court ruling, public interest litigation

… और, मैं कुछ ऐसे सफल हुआ…

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व्यंग्य        जीवन के चार दशक गुजार लेने के बाद पीछे मुड़कर जब मैंने देखा तो पाया कि मैं सफल तो कतई नहीं कहलाऊंगा। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के कोई खास झंडे गाड़े हों, जब मुझे दिखाई नहीं दिया तो मैं उदास हो गया। इसी उदासी में मैं टहलने निकल गया। सोचा था इस उदासी को गायों-गोल्लरों, ट्रैफ़िक और धूल भरी सड़कों में उड़ाकर आ जाऊंगा। वैसे भी, ऑटो-टैम्पो और सड़क के दोनों ओर रेहड़ी-खोमचे-ठेलों की भीड़ के बीच यदि आप सकुशल एक दो किलोमीटर की यात्रा बिना ठुके-ठोंके सप्रयत्न कर आएं, तो आपकी उदासी यकीनन कई दिनों के लिए छूमंतर हो जाएगी।सड़क में एक सांड के सींग से बचने की कोशिश में मैं सीधे एक फेरी वाले के ठेले के ऊपर जा गिरा। वो कुछ सज्जन किस्म का आदमी था जिसने मुझे पलट कर गालियाँ नहीं दीं और मुझे तत्परता से उठाया। मेरी भी सज्जनता कुछ जागी और मैं ठेले पर विक्रय के लिए रखी सामग्रियों को उचटती निगाह से देखने लगा। वो किताब की दुकान थी। तमाम तरह की किताबें विक्रय के लिए उपलब्ध थीं। उन सबमें सबसे ऊपर एक किताब का चमकीला शीर्षक चमक रहा था - "उठो महान बनो"। जरूर इस किताब में महान बनने के …

किसी हिन्दी चिट्ठे की विश्व की पहली छपी किताब

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हिन्दी चिट्ठों की पहले-पहल (ठीक है, ठीक है, चलिए मान लिया कि ये सही भी नहीं है और किसी भी कोण से कोई तीर मारने वाली बात भी नहीं है, :)) छपी किताब (चिट्ठे की संकलित सामग्री का पुस्तकाकार रूप) यहाँ उपलब्ध है. और दूसरी यहाँ. इन किताबों को ऑनडिमांड प्रिंट तकनॉलाजी के जरिए छापा जाता है जिसे आप ऑनलाइन खरीद सकते हैं. यानी किताब का छपा संस्करण उपलब्ध नहीं होता है, मगर आपका आदेश प्राप्त होते ही उतनी संख्या में किताब छाप कर आपको भेज दी जाती है.वैसे तो ऑनडिमांड प्रिंटिंग तकनॉलाजी नई नहीं है. ब्लॉग को प्रकाशित कर पुस्तक रूप में प्राप्त करने व बेचने की सुविधा पहले से ही उपलब्ध रही है. ऐसी ही एक सुविधा ब्लॉग2प्रिंट है जहाँ आप किसी भी चिट्ठे का यूआरएल भर कर उसे पुस्तकाकार रूप में छपवा कर पैसा देकर मंगवा सकते हैं. आप अपने ब्लॉग को वहां पंजीकृत करवाकर ब्लॉग (के छपे) पुस्तक के विक्रय होने पर आप रायल्टी भी वसूल कर सकते हैं.कुछ इसी तरह की, नए किस्म की पहल की गई है भारतीय साइट पोथी.कॉम के जरिए. पोथी.कॉम के जरिए आप न सिर्फ अपनी किताबें छपवा सकते हैं, बल्कि उन्हें इस साइट के जरिए विक्रय भी कर सकते हैं. और, …

ब्लॉगवाणी इंडीनेटर फ़ॉन्ट कनवर्टर से बदलिए कृतिदेव, चाणक्य, और आगरा फ़ॉन्टों को यूनिकोड फ़ॉन्ट में

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वैसे तो अब पुराने हिन्दी फ़ॉन्ट जैसे कि कृतिदेव, चाणक्य, आगरा इत्यादि को यूनिकोड में (और इसके ठीक उलटे यानी यूनिकोड हिन्दी फ़ॉन्ट को पुराने हिन्दी फ़ॉन्ट में बदलने के लिए,) बदलने के लिए कई उपाय हैं, मगर ब्लॉगवाणी का नया फ़ॉन्ट कनवर्टर बेहद आसान, बढ़िया, त्वरित परिणाम देने वाला है और परिवर्तन किए पाठों में करीब 99 प्रतिशत शुद्धता प्रदान करता है.इसका दो खिड़कियों वाला इंटरफेस इस्तेमाल में आसान है. ऊपर की खिड़की में जिस पाठ का फ़ॉन्ट बदलना है उसे चिपकाइए, और कनवर्ट बटन दबाइए. नीचे की खिड़की से परिवर्तित पाठ को नक़ल कर अपने वर्ड प्रोसेसर में प्रयोग कीजिए.अभी इस औजार में बेहद लोकप्रिय तीन फ़ॉन्ट – कृतिदेव, चाणक्य और आगरा को परिवर्तित करने की सुविधा है. इसमें शुषा, श्रीलिपि जैसे कुछ अन्य लोकप्रिय फ़ॉन्ट को भी परिवर्तित करने की सुविधा मिलती तो ज्यादा बेहतर होता. उम्मीद है इस औजार के अगले संस्करणों में यह सुविधा मिलेगी.इस औजार की ख़ूबी यह है कि आप इसे ऑनलाइन यहाँ से भी प्रयोग कर सकते हैं और इसे डाउनलोड कर अपने कम्प्यूटर पर ऑफलाइन मोड में सीधे चला सकते हैंडाउनलोड योग्य यह औजार मात्र 114 किबा क…

एक खांटी चिट्ठाकार से लिए गए साक्षात्कार से कुछ उद्धरण:

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प्र.: वास्तविक आनंद क्या है?
उ.: चिट्ठाकारी.प्र.: आपके स्वप्न क्या हैं?
उ.: एक खूबसूरत दिन जब आपकी अपनी शारीरिक आवश्यकताएँ भी बेमानी हो
जाएँ और आप ब्लागिंग के अलावा कुछ नहीं करें.प्र.: जब आप ब्लागिंग नहीं करते हैं तो क्या करते हैं?
उ.: वही काम करता हूं जो मुझे यथासंभव ब्लागिंग में वापस ले जाते हैं.प्र.: यदि दुनिया में चिट्ठाकारी नहीं होती?
उ.: काल्पनिक प्रश्नों के उत्तर नहीं होते – काल्पनिक उत्तर भी नहीं.प्र.: आपने किस उम्र में ब्लागिंग प्रारंभ किया?
उ.: काश मैं और पहले ब्लागिंग प्रारंभ कर सकता.प्र.: अपने एक सम्पूर्ण दिन की व्याख्या करेंगे?
उ.: ब्लागिंग खाना, ब्लागिंग पीना और हां, ब्लागिंग सोना!.प्र.: एक अच्छे ब्लॉगर के क्या सीक्रेट हैं?
उ.: हमेशा दिल लगाकर, तन-मन-धन से ब्लॉग करो!प्र.: क्या आपको किसी से प्यार हुआ है?
उ.: हाँ, जाहिर है, चिट्ठाकारी से, और मैं अपने चिट्ठे से भी बेहद प्यार करता हूँ.प्र.: यदि आप ब्लागिंग की दुनिया में नहीं होते तो किस क्षेत्र में होते?
उ.: ओह! यह प्रश्न हमेशा से मुझे सताता रहा है. मैं इसका उत्तर नहीं दे सकूंगा.
(आंखें डबडबा जाती हैं)प्र.: आपके जीवन का दर्शन…

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