व्यंग्यविविध | तकनीकीहिन्दीछींटें और बौछारें

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Sunday, June 22, 2008

नियंत्रित स्वप्न

now you can control your dream - sapane

यदि आप अपने सपने नियंत्रित कर सकें तो? बात दिवा स्वप्न की नहीं हो रही. दिवा स्वप्न में तो आप शेख चिल्ली की तरह नियंत्रित स्वप्न देख सकने के लिए स्वतंत्र होते हैं. यहां बात असली स्वप्न की हो रही है जो हम-आप सोते समय, अपनी गहरी निद्रा में देखते हैं.

वैसे भी स्वप्नों के बारे में बहुत सी मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि सुबह सुबह ब्रह्ममुहूर्त में देखा गया स्वप्न साकार हो जाता है. अपने स्वप्नों में किसी का वैसे तो कोई नियंत्रण नहीं रहता मगर आमतौर पर व्यक्ति वही सपने देखते हैं जो वे अपने आसपास के परिदृश्य में देख-सुन चुके होते हैं – भुगत चुके होते हैं. सपने देखने का हर एक का अपना अलग अनुभव होता है. कभी रंगीन, त्रिआयामी सुहावने सपने दिखते हैं तो कभी डरावने. यूं तो आमतौर पर बेतरतीब, बेसिरपैर के सपने आते रहते हैं परंतु कभी कोई सपना इस तरह सिलसिलेवार आता है कि चंद्रकांता संतति की तरह कहानी-उपन्यास लिख मारें. सपनों की खूबसूरती ही यही है कि वो बेतरतीब आएं, हर किस्म के आएं – खुशी के , गम के, अपनी हीरोगिरी के...

अब यदि आपको ये सुविधा दी जाए कि आप अपने सपनों को नियंत्रित कर सकते हैं तो? सपनों की प्रकृति यूँ तो इस लिहाज से समाप्त प्रायः ही हो जाएगी, मगर फिर भी मैं कुछ नियंत्रित किस्म के सपने, वो भी ब्रह्म मुहूर्त में, कुछ यूँ देखना चाहूंगा –

  • मार्क्सवादियों ने मनमोहन सरकार को अमरीकी एटमी करार के लिए पूर्ण सहयोग का वादा किया. और इस बात पर खुशी जताई कि इससे भारत की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति जल्द ही हो सकेगी.
  • साबामा अमरीकी राष्ट्रपति बन चुके हैं और ओबासामा को पकड़ चुके हैं. 
  • मुलायम, मायावती, लालू ये सब महिला आरक्षण बिल जल्द से जल्द लागू करने के लिए दबाव बना रहे हैं – इनका मानना है कि इससे लोकतंत्र मजबूत होगा.
  • भारत के तमाम भ्रष्टाचारियों ने अपनी सम्पत्ति सरकार को वापस कर दी है – नतीजतन आने वाले एक हजार वर्षों तक किसी भारतीय को कोई काम नहीं करना पड़ेगा – सरकार इस पैसे से उनके खाने पीने का बंदोबस्त आराम से करती रहेगी – बढ़ती महंगाई के बावजूद.
  • ठाकरे ने अपना राज्य परिवर्तन कर लिया है और उन्होंने पटना में एक फ़ॉर्महाउस खरीद लिया है. अब वे बिहार से मराठियों को खदेड़ने का बेहद महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं.
  • क्रिकेट की तरह ओलंपिक खेलों में भी सट्टा चलने लगा है नतीजतन भारत-पाकिस्तान की सम्मिलित झोली में चीन में हुए ओलंपिक में सर्वाधिक पदक टपके.
  • रामगोपाल वर्मा फ़िल्में बनाने के बजाए अब सिर्फ फिल्में देखने का अपना पुराना काम करने लगे हैं.
  • हिन्दी चिट्ठाकारों के चिट्ठों में एडसेंस की धमाकेदार वापसी – वो भी हिन्दी में हो गई है और अब उनमें से हर एक को अंग्रेज़ी चिट्ठों से ज्यादा एडसेंसी कमाई होने लगी है.

--- यह सूची अनंत है – अंतहीन सपनों की तरह...

यदि आपको कहा जाए कि आप भी नियंत्रित सपने देख सकते हैं तो आप क्या देखना चाहेंगे? कृपया अपनी सूची हमसे साझा करें.

विश्वास नहीं होता कि नियंत्रित सपने भी देखे जा सकते हैं? आपको विश्वास करना ही होगा. सोते समय मुखौटे की तरह पहना जा सकने वाला ऐसा ही एक उपकरण  तैयार कर लिया गया है जो आपको आपके मनपसंद सपने दिखा सकता है. तो फिर देखिए आप भी मनपसंद, रंगीन सपने. बस, अपने लिए एक खरीद लाने भर की देरी है....

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व्यंज़ल

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सब कुछ ले लीजिए

सपने तो मत छीनिए

 

कुछ करने की खातिर

चलिए कुछ तो कीजिए

 

बदले तो हैं, भले ही

वक्त को श्रेय दीजिए

 

शैम्पेन नहीं मिले तो

कटिंग चाय ही पीजिए

 

बेच दिए सपने रवि

अब आप क्या कीजिए

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7 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

P. C. Rampuria said...

भाई साहब , आपने अच्छा सपना दिखाया... काश ऐसा हो तो...मैं चाहूंगा कि..महंगाई दर ५ हो गई है ... सेन्सेक्स २५००० हो गया है....
मनमोहन जी का कामरेडों से पीछा छूट गया है....
और इन्सानों को सिवाय फ़ुरसत के कोइ काम नही है...
प्रणाम है आपको ऐसी मधुर कल्पना के लिये ।
बधाई.. स्वीकार करे‍.. आज रविवार की शाम इस खुशफ़हमी मे‍ बितेगी कि आज रात ही ये सपने पुरे हो जायेंगे ।

Gyandutt Pandey said...

स्वप्न - भारत के तमाम भ्रष्टाचारियों ने अपनी सम्पत्ति सरकार को वापस कर दी है....
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उन्होंने भविष्य में भ्रष्टाचार से तोबा करली है और आगे नस्ल न बढ़ाने का फैसला किया है? नहीं, तो दो साल में सारी सम्पत्ति फिर उनके पास आ जायेगी! :)

anitakumar said...

बेच दिए सपने रवि

अब आप क्या कीजिए

कुछ नहीं , जाके नये सपने खरीद लाएगे, बेच दिए सपने तो किसी ने तो खरीदे होंगे। हम भी खरीद लाएगें और सपने है क्या बेचने के लिए? …:)

दीपक भारतदीप said...

आपका आलेख बहुत अच्छा लगा। इस पर मेरे में सपने को लेकर यह काव्यात्मक पंक्तियां आयीं। आपके लिखे से प्रेरणा मिली अच्छा लगा। बहुत बढि़या लिखते हैं
दीपक भारतदीप

सपने तो सपने हैं
कभी अपने नहीं होते
जो दिन में कभी सच नहीं हो सकता
उसी का नींद में दिखा रहे होते
आधी रात को देखा हो या ब्रह्ममुहूर्त में
कभी उसे अपना नहीं समझना
वरना पड़ेगा रोज कलपना
बेसिर पैर के ख्यालात ही
रात के सपने मे बदल रहे होते

दिन को जागता है जो दिमाग
उसमे सोने पर
रात वाला जागता है
सच से नहीं होता उसका कोई रास्ता
जिंदगी के संघर्षों से नहीं जिसका वास्ता
वही दिमाग नींद में भी सपने लादता
जिन पर जागने पर भी हम
विचरण कर रहे होते
अगर रात का सपना
सुबह भी याद रहे तो
समझो सोये नहीं
अपनी तकलीफें साथ लिये ही
जागते हुए चल रहे हो
भले ही रोये नहीं
रात के सपने पर खुश होने का मतलब
हम अपनी जिंदगी से हार रहे होते

सुलाने के लिये उनको
सपनो की जरूरत होती
जिनकी नीयत अपने में ही मगरूर होती
सपने कोई अलग से
चुनकर फूल नहीं लाते
कभी देखे दिन में अपनी आंखों से
लोग और जगहों को ही
चुनकर नींद में उल्टे सीधे ढंग से सजाते
जिन्हें दिन के दिमाग से हम भुला जाते
रात के सपनों का ख्याल कर हम
दिन में भी बैचेनी के बीज बोते

मन है गहरा समंदर
इसकी लहरों की कोई थाह नहीं
भटकाता है रात हो या दिन
गुलामों की तरह भटकते उसके साथ
भर सकते कभी आह नहीं
अपने सच की जगह पराये सच में
खोकर अपना मानसिक संतुलन खो रहे होते
बना देता है सपना एक गधा
जिसका बोझ हम ढो रहे होते

आसक्ति और विरक्ति के बीच फंसा मन
आता है ध्यान से काबू
निकल जाते हैं जब विकार
तब नहीं होते उस पर
दुनियां के नियम लागू
रात का सपना दिन में याद रहे
समझो तुमने नींद में भी दिन के दर्द सहे
ब्रह्ममूहुर्त सपने देखने का नहीं
योग साधना, प्राणायम और प्रार्थना का है
उसी राह पर चल सकते हो निश्चिंत होकर
जिसे सच समझकर डर रहे होते
रास्ते में पड़े कांटे भी फूल दृष्टिगोचर होते
जिन्हें देख सकते हो सपने में
सच में वही तुम्हारे कदमों मे बिछे होते
..............................

संजय बेंगाणी said...

भारतीय दम्पतियों में सहमति है की एक से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करने.


कॉंग्रेस - भाजपा ने साँझा सरकार बनाई.

सार्क देशो ने संघ बनाया.


लादेन गाँधी भाक्त हुआ :)

pallavi trivedi said...

waah...badhiya laga aapka swapn aalekh..aur vyanjal bhi khoob hai.

BrijmohanShrivastava said...

ब्रिज मोहन श्रीवास्तव -मैंने अखवार में पढ़ा की रतलामी जी के ब्लॉग आजकल बहुत पढे जारहे हैं तो पढ़ने बैठ गया व्यंग्य पढने का शौक है तो देखा १८४ व्यंग्य है मुझे तो मनो खजाना मिल गया -आपका सपना पढ़ कर लगा की वाकई व्यंग्य क्या होता है -मुझे कम्पुटर पर केवल पढ़ना ही आता है