टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

आइए, चिट्ठों के इतिहास में झांकें

nirantar hindi blog magazine april 2005

इंटरनेटीय दुनिया एक आभासी दुनिया है, और इसका भी एक इतिहास है. इस आभासी दुनिया की ख़ूबसूरती ये है कि यहाँ पर आप कुछ औजारों की मदद से जाल-स्थलों के पिछले समय की सैर कर सकते हैं.

एक ऐसी ही सेवा है – आर्काइव.ऑर्ग की द वे बैक मशीन नाम की टाइममशीन. आर्काइव.ऑर्ग एक ऐसा जाल-स्थल है जो आमतौर पर सर्वजन के देखे जाने वाले जाल पृष्ठों को अपने सर्वर पर तिथि के अनुसार सहेजता जाता है, और अपने सर्वरों में बनाए रखता है, ताकि भविष्य में कभी काम पड़े तो उससे संदर्भ लिए जा सकें.

कभी कभी ये सेवा बड़े ही काम की होती है. उदाहरण के लिए, निरंतर के कुछ पुराने अंक असावधानी वश मिट गए तो देबाशीष ने उनके बहुत से पृष्ठों को आर्काइव.ऑर्ग के इसी टाइमबैक मशीन की सहायता से निकाल लिया और अब वे एक एक कर निरंतर के पुराने अंकों को फिर से प्रकाशित कर रहे हैं. हाल ही में निरंतर का अप्रैल 2005 का अंक फिर से प्रकाशित हुआ है. आप इस अंक के लेखों का स्तर, उनकी गंभीरता, विषय-वस्तु देखेंगे तो पाएंगे कि हर लेख के लिए कितनी मेहनत की जाती रही है. धन्यवाद आर्काइव.ऑर्ग के टाइममशीन का जिसने इसे संभव बनाया.

जब टाइममशीन की बात हो ही रही है, तो देखें कि (मैं, और,) मेरा ये ब्लॉग मार्च 2005 में कैसा दिखता था. और, इसमें किस किस माह में कैसे कैसे बदलाव आते रहे, ये भी आपको यहाँ पर दिखाई देगा.

archive org way back machine

आप स्वयं आर्काइव.ऑर्ग के वेबैकमशीन में यहाँ जाकर अपने किसी भी पसंदीदा साइट (या ब्लॉग) के पते को भर कर टेक मी बैक बटन पर क्लिक कर उस साइट के पुराने दिनों में जा सकते हैं. यदि जालस्थल की कुछ गुम हुई या मिटाई गई सामग्री ढूंढना चाहते हैं, तो अपने आप को गुडलक बोलिए, और आर्काइव.ऑर्ग में ढूंढिए. बहुत संभव है, वो आपको वहां मिल जाए.

विषय:

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SHUKRIA JANKARI KA.

MAIN PHIR WAPAS AYA HON JANCH KE BAD. WAH KYA KHEENCH KE JUGAD LAYE HO :) DHANYAWAD

बहुत खूब जानकारी,धन्यवाद

रविभैया;
क्या कमाल का परिश्रम करते हैं आप .
नतमस्तक.

अरे वाह! क्या बात है। इसी बहाने तमाम पुराने रंग-रूप देखे। मजा आ गया। शुक्रिया। अब शायद कुछ पुराने लेख जो मिट गये थे उनको दुबारा पोस्ट किया जा सके। आप खोजिये जरा हमारा पुराना लेख http://hindini.com/fursatiya/?p=211 किधर है! :)

वाह, ये खोयी हुयी पोस्ट भी मिल गयी।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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