मंगलवार, 13 मई 2008

इन्फ़ोसिस में एक साक्षात्कार

यह साक्षात्कार इतना प्रसिद्ध है कि अंग्रेज़ी में इसकी कोई दस कड़ियाँ (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10) कॉपीस्केप के जरिए हासिल हो चुकी हैं. वैसे, मूल लेखक (कौन हैं?) को साधुवाद सहित इसका हिन्दी तर्जुमा प्रस्तुत है:

इन्फ़ोसिस में एक साक्षात्कार

परीक्षक : अपने बारे में कुछ बताएं.
परीक्षार्थी: मेरा नाम कोनदेश कुलकर्णी है. मैंने बबनराव ढोले-पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलाजी से टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बीई किया है.

परीक्षक: बबनराव ढोले-पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलाजी? आज से पहले इसका नाम मैंने नहीं सुना था!
परीक्षार्थी: बढ़िया! मैंने भी इसका नाम तब तक नहीं सुना था जब तक मैंने इसमें दाखिला नहीं लिया था. हुआ ये था कि क्रिकेट मैचों के कारण मेरी 12वीं का ग्रेड बिगड़ गया और इंजीनियरिंग एंट्रेंस सड़ गया. मुझे अच्छे कॉलेज में पेड सीट मिल रही थी. परंतु मेरे पिताश्री -मैं उन्हें ‘बाप’ कहना ज्यादा पसंद करता हूं- ने कहा “मेरे पास इतना ज्यादा पैसा तुम्हारी पढ़ाई में लगाने के लिए नहीं है”. दरअसल वे सही में ये कहना चाह रहे थे और मैं जानता था – “मैं कभी भी इतना सारा पैसा तुम पर लगा नहीं सकता”. तो मेरे पास इस कॉलेज में दाखिला लेने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था. वैसे, बबनराव ढोले पाटिल को आप शेतकरी महाविद्यालय समझ सकते हैं...

परीक्षक: ठीक है, ठीक है. पर आपने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई छः साल में पूरी की है...
परीक्षार्थी : मैं तो सचमुच में चाहता था कि मेरी पढ़ाई 4 साल में पूरी हो जाए, और मैंने अपनी पूरी ताक़त लगा दी थी, ताकि पढ़ाई की बोरियत का समय कम से कम रहे. परंतु आपको पता ही है ... ऐन परीक्षाओं के समय क्रिकेट टूर्नामेंट, फ़ुटबाल विश्वकप, विम्बलडन और यूएस ओपन टेनिस... इन सबके बीच पढ़ाई में ध्यान किसी अमानव का ही लग सकता होगा. जाहिर है, मैं दूसरे और तीसरे साल में रुक गया. और कुल मिलाकर 4 + 2 = 7 साल लग गए.

परीक्षक: परंतु 4+2 तो 6 होता है.
परीक्षार्थी: ओह, क्या सचमुच? अब मेरा गणित थोड़ा सा कमजोर है. परंतु मैं अब ध्यान रखूंगा. 4+2 होते हैं 6. ठीक है, अब याद रहेगा. धन्यवाद. क्रिकेट के खेल ने परीक्षाओं में सचमुच गहरा असर डाला है. मुझे तो लगता है कि इस पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए.

परीक्षक : यह जानकर अच्छा लगा कि आप चाहते हैं कि क्रिकेट मैचों में प्रतिबंध लगा दिया जाए.
परीक्षार्थी: नहीं नहीं, मैं तो परीक्षाओं की बात कर रहा था. पढ़ाई में परीक्षाएं क्या जरूरी हैं?

परीक्षक: ठीक है. अच्छा ये बताइए, जीवन में अब तक की आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही है?
परीक्षार्थी: जाहिर है, मेरी इंजीनियरिंग की डिग्री. मेरी माताश्री को कभी भरोसा ही नहीं रहा था कि इस जन्म में यह कार्य मैं पूरा कर भी पाऊंगा. जब मैं तीसरे वर्ष फेल हो गया था तो उन्होंने अपने रिश्तेदार के जरिए मेरे लिए एक लड़की और जॉब दोनों ही ढूंढ लिया था... वो तो उस लड़की का प्रोफ़ाइल था जो मेरी डिग्री प्राप्त करने की राह में मददगार हो गया वरना...

परीक्षक: क्या आपके भविष्य के कोई प्लान हैं आगे की उच्च शिक्षा के लिए?
परीक्षार्थी: हे हे हे... आप क्या मजाक करते हैं... निम्न शिक्षा पूरा करना ही इतना दर्दीला था..!!

परीक्षक: चलिए, कुछ तकनीकी बातें करते हैं. आप किस प्लेटफ़ॉर्म पर कार्य करते हैं?
परीक्षार्थी: मैंने प्लेटफ़ॉर्म पर कार्य तो नहीं किया है, परंतु मेरा घर अंधेरी प्लेटफ़ॉर्म के करीब है. और वाशी के पास में मेरा दोस्त रहता है. हम अकसर एक दूसरे के यहाँ जाते रहते हैं तो हमें विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म का पूरा आइडिया है. हम किसी में भी काम कर सकते हैं

परीक्षक: ओह, हाँ. अच्छा आपने किस लैंगुएज में महारत हासिल की है?
परीक्षार्थी: मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी. वैसे, मैं जर्मनी, फ्रांसीसी, रूसी और ऐसी ही अन्य अनेक भाषाओं में मौन रहकर अपनी बात बख़ूबी कह सकता हूं.

परीक्षक: ये बताइए, वीसी (VC), वीबी(VB) से बेहतर क्यों है?
परीक्षार्थी: अब हमारे पास क्या इत्ता कामन सेंस नहीं रहेगा. सी तो बी के बाद ही आता है ना. तो वीसी वीबी से बड़ा हुआ ना. कोई बता रहा था कि नई भाषा वीडी भी आ रहा है!

परीक्षक : असेंबली लैंगुएज के बारे में कुछ बताइए?
परीक्षार्थी : झूठ क्यों बोलूं, मैंने इसके बारे में कुछ सुना नहीं है. हां, परंतु मेरा विचार है कि ये नेता और मंत्री लोग जो असंसदीय भाषा असेंबली में बोलते हैं, शायद उससे कुछ रिश्ता होगा.

परीक्षक: आपकी परियोजनाओं के बारे में सामान्य अनुभव क्या रहे हैं?
परीक्षार्थी: मेरे सामान्य अनुभव तो ये रहे हैं कि परियोजनाएँ अधिकांश समय पाइपलाइन में रहती हैं!

परीक्षक: क्या आप बता सकते हैं कि अभी आप वर्तमान में क्या कर रहे हैं?
परीक्षार्थी: जी हाँ, जरूर. मैं अभी बाटा इन्फ़ोटेक में काम कर रहा हूं. जबसे मैंने बाटा इन्फ़ोटेक में काम करना शुरू किया है, तब से मैं बेंच पर हूँ. बीआईएल में काम करने से पहले लोग जब बोलते थे कि वे बेंच पर हैं, तो मुझे लगता था कि इतने लोग बेंच पर हैं तो यह विंडोज से भी बड़ा सॉफ़्टवेयर होगा जो बनाया जा रहा है..

परीक्षक: क्या आपके पास किसी तरह का परियोजना प्रबंधन का अनुभव है?
परीक्षार्थी: नहीं, परंतु यह इतना कठिन भी नहीं होना चाहिए. मुझे वर्ड और एक्सेल पता है. मैं बातें बहुत कर सकता हूं. मुझे पता है कि कैसे कम्प्यूटरों से इंटरनेशनल काल किया जा सकता है और मुझे पीसी स्पीकर का प्रयोग भी आता है. और, जरूरी बात ये कि मुझे बहुत से अंग्रेजी के तकनीकी शब्द जैसे कि 'शोस्टापर्स', 'हॉटफ़िक्सेस', 'सीएमएम', 'क्वालिटी',
'वर्जन कंट्रोल', 'डेडलाइन्स', 'कस्टमर सेटिस्फैक्शन' इत्यादि आते हैं. तथा मैं अपनी गलतियों के लिए दूसरों पर आरोप लगा कर उसे सिद्ध कर सकता हूं!

परीक्षक: आपको हमारी कंपनी से क्या आशाएं है?
परीक्षार्थी: ज्यादा तो नहीं, पर ..
1. मेरे हाथ में कम से कम महीने के 40,000 तो आना ही चाहिए.
2. मैं किसी जीवंत परियोजना में काम करना चाहूंगा. परंतु इसमें कोई डेडलाइन होना नहीं चाहिए. मेरा मानना है कि डेडलाइन से व्यक्ति के प्राकृतिक बुद्धिमत्ता और कौशल पर आघात पहुंचता है.
3. मैं फ्लैक्सी टाइमिंग पर विश्वास करता हूं. यानी कोई तय कार्य घंटे नहीं.
4. मूल भूत अधिकारों के विरूद्ध है ड्रेस कोड. बरमूडा और गमछा में भी, मूड के हिसाब से कार्य स्थल पर आने की इजाजत होनी चाहिए.
5. पाँच कार्य दिवस का सप्ताह हो. शनि, रवि की छुट्टी हो. बुध की छुट्टी भी हो तो और अच्छा. इससे दिमाग फ्रेश रहेगा और आउटपुट ज्यादा मिलेगा.
6. मैं साल में 3 बार विदेश जाना चाहूंगा – असाइनमेंट हो या न हो. मैं यूएस, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप पसंद करता हूं, परंतु यदि क्रिकेट का सीजन हो तो वेस्टइंडीज और अफ्रीका भी जाना चाहूंगा. तो आपने देखा है कि मेरी ज्यादा प्रत्याशाएं नहीं है आपकी कंपनी से. तो क्या मैं अपने आप को चयनित समझूं?

परीक्षक: हे हे हे हा हा हा... हमारे संगठन में आने का शुक्रिया. दरअसल आज से ज्यादा मनोरंजन हमारा कभी भी नहीं हुआ था. हम आपके साथ अवश्य काम करना चाहेंगे. इन्फ़ोसिस में आपका स्वागत है.:-)

6 blogger-facebook:

  1. मजेदार है रवि जी !!

    धन्यवाद
    i will try this on next interview

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  2. पहले ये साक्षात्कार आपने डाल दिया होता तो, मैं भी इंफोसिस में नौकरी कर रहा होता। :)

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  3. badhiya hai ji..
    mujhe bhi kisi ne ye mail me bheja tha.. angreji me padhne me jyada maja aaya tha kyonki sare interview angreji me hi hoti hai, so technical terms ka utilization majedar tha..
    maine bhi infy me apply kar rakha hai, dekhiye kab bulava aata hai.. agar interview ka mauka mila to main iska fayda jaroor uthaaunga.. :D

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  4. बहुत अच्छे, अनुवाद मे हास्य का पूरा पूरा ध्यान रखा गया है। बह्त ही शानदार।

    रवि भाई, बाकी के हिस्सों का भी अनुवाद करो, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लाभान्वित(???) हो सकें।

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  5. मजेदार ! आगे के अंको का भी बेसब्री से इंतजार रहेगा ।

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  6. pahale bhi pdha hai..achchhi tarah anuwad kiya aapne.par english wale ki bat hi kuchh aur thi.

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