टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

अभिव्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता : बेवर्ड्स


आप ब्लॉगर पर कुछ ऐसा लिख मारते हैं जो किसी अन्य को पसंद नहीं आता है. आपके विचार दूसरे को किसी सूरत नहीं जमते. नतीजतन वो आपके चिट्ठे को फ्लैग करता है. इसमें देरी सिर्फ चंद अन्यों द्वारा ऐसे ही फ्लैग लगाने की होती है और आपका चिट्ठा प्रतिबंधित कर दिया जाता है. मिटा दिया जाता है. बहुत सी जगह सरकारें भी चिट्ठों को प्रतिबंधित कर देती हैं जो उनके कार्यों की आलोचनाएं करते हैं.

परंतु अब आप इस तरह के प्रतिबंधों की चिंता किए बगैर, अपने अनसेंसर्ड विचारों वाले चिट्ठे लिख सकते हैं व उन्हें धड़ल्ले से प्रकाशित कर सकते हैं. आपके चिट्ठे को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी. यह वादा एक नई ब्लॉग सेवा बेवर्ड्स द्वारा किया जा रहा है.

बेवर्ड्स सेवा वही, पुराने द पाइरेट बे वाले ला रहे हैं जो तमाम दुनिया के असली सॉफ़्टवेयर निर्माताओं को अरसे से ठेंगा दिखाते हुए अपने सर्वरों पर तमाम किस्म के पाइरेटेड सॉफ़्टवेयर लोड कर रखे हैं और जिनके नियमित उपयोक्ता लाखों की तादाद में हैं. द पाइरेट बे पर आप बाबा आदम के जमाने के डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर ताजातरीन विस्ता तक प्राप्त कर सकते हैं.

बेवर्ड्स सेवा वर्डप्रेस पर आधारित है, व विज्ञापनों द्वारा समर्थित होगी – जाहिर है, बेवर्ड्स सेवा का उद्देश्य शुद्ध व्यवसायिक है.

हालांकि बेवर्ड्स सेवा यह दावा कर रही है कि स्विस कानून के दायरे को निभाती चिट्ठों की सामग्री पूरी तरह अनसेंसर्ड रहेगी और वे चिट्ठों और चिट्ठाकारों को पूरी संरक्षा प्रदान करेंगे. मगर यदि आप भारत में रह कर कुछ उत्पाती किस्म के चिट्ठे लिखना चाहते हैं, तो इसे भूल जाइए. याद कीजिए बाजी.कॉम के प्रसंग को. बाजी.कॉंम के किसी उपयोक्ता द्वारा प्रतिबंधित सामग्री अपलोड करने के कारण बाजी.कॉम के सीईओ को गिरफ़्तार कर लिया गया था. और, शायद आपको ये भी याद हो कि ब्लॉगस्पॉट पर किसी चिट्ठे पर विवादास्पद धार्मिक विषयक लेख लिखे जाने पर भारत सरकार ने चिट्ठाकारों को ब्लॉगिंग एथिक्स सिखाने के चक्कर में संपूर्ण ब्लॉगस्पॉट पर समूचे भारत में प्रतिबंध लगा दिया था!

हाँ, यदि बेवर्ड्स टोटल एनॉनिमस (परिपूर्ण अनाम) रूप से चिट्ठा प्रकाशन की सुविधा प्रदान करता है, तब बात कुछ दीगर है. तो, देर किस बात की. एक खाता खोल लीजिए, अभी ही. और हमें बताइए कि वे ऐसी कितनी कैसी सुविधा दे रहे हैं.

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

sujhav bahut hi achcha hai.
kyonki imaandari se baat kahne ki hamen buri aadat hai....bahut se topics par socha likha jaaye lekin fir shant ho gaye ----jaisa chalta hai chalne do--jald hi khataa kholte hain..jaankari ke liye dhnywaad.

वैसे यहाँ भी कुछ कम नही हो रहा है. यह अभिव्यक्ति के नाम का नया तमाशा भी देख लेते हैं. आपका नया ब्लॉग तो रजिस्टर हो रहा होगा इस स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मंच पर........है न

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

अन्य रचनाएँ

[random][simplepost]

व्यंग्य

[व्यंग्य][random][column1]

विविध

[विविध][random][column1]

हिन्दी

[हिन्दी][random][column1]
[blogger][facebook]

तकनीकी

[तकनीकी][random][column1]

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

[random][column1]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget