टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

जब वी मेट एट रतलाम: चवन्नी की बातों में है अठन्नी का दम...

jab we met

 

जब वी मेट फ़िल्म अभी मैंने नहीं देखी है. जब वी मेट पर लिखी गई अपनी समीक्षात्मक ब्लॉग प्रविष्टि में चवन्नी चैप ने फ़िल्म में रतलाम शहर के गंदे प्रस्तुतिकरण को लेकर कुछ वाजिब से सवाल उठाए थे तो मैंने अपनी टिप्पणी में लिखा भी था – रतलाम रेलवे स्टेशन पर रोजी-रोटी की तलाश में रतलाम-झाबुआ-निमाड़ अंचलों से गरीब ग्रामीणों की पलायन करती भीड़ दिखती है, न कि रक्कासाओं की... और तो और, यहाँ पर ज्ञात-अज्ञात क़िस्म के लाल बत्ती क्षेत्र भी नहीं हैं. यह शहर आमतौर पर साफ सुथरा है, और इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़ दें तो छेड़-छाड़ जैसी घटनाएँ भी नहीं होतीं. इसके बावजूद इस फ़िल्म में इन बातों को दिखाया गया है.

जब यह फ़िल्म हाल ही में रतलाम में रिलीज हुई तो जाहिर है, रतलामियों को यह नागवार गुजरा और फ़िल्म में रतलाम के इस गंदे प्रस्तुतिकरण पर विरोध जताया. इस विरोध प्रदर्शन की मजेदार बात यह रही कि विरोध प्रदर्शन करने वालों ने किसी टॉकीज पर जाकर नहीं, बल्कि शहर के एकमात्र महिला महाविद्यालय के सामने प्रदर्शन किया. चर्चे हैं कि इस फ़िल्म पर किसी संगठन की तरफ से कोई मुकदमा ठोंका जाएगा.

jab we met ratlam controversy (Small)

मगर मेरा मानना है कि फ़िल्म एक माध्यम है अपनी अभिव्यक्ति को, अपनी कल्पनाओं को प्रदर्शित करने का- जैसे कि हम सब अपनी सृजनात्मकताओं के जरिए करते हैं. इस फ़िल्म में भी कहीं न कहीं बारीक छापे में लिखा होगा – फ़िल्म के पात्र, घटनाएँ व स्थान काल्पनिक हैं. उम्मीद करें कि फ़िल्म में दिखाया रतलाम भी वास्तव में काल्पनिक ही हो – वास्तव में ऐसा स्थल धरती पर कहीं भी नहीं हो.

संदर्भवश, मनीषा ने भी जब वी मेट फ़िल्म देखने के बाद एक समीक्षात्मक ब्लॉग प्रविष्टि लिखी है. और, उनके अनुसार, उसमें दिखाया गया रतलाम शहर तो क्या, पूरा प्रेम परिदृश्य ही अति-काल्पनिक, अनरीअल है.

और, अभी हाल ही की, पिछले हफ़्ते जारी हुई दोनों फ़िल्में – सांवरिया और ओम शांति ओम – कौन सी जुदा हैं? वे भी घोर काल्पनिक, घोर अनरीअल हैं.

 

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विषय:

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अब ये समझ के बाहर है कि आपलोग ऐसा क्यों चाहते है कि फिल्म मे हमेशा वही दिखाया जाये जो हर जगह मौजूद है. कुछ कल्पना का भी काम है कि नही.

जी

बिलकुल रतलाम की सफाई काबिले तारिफ है।

वैसे में स्टेशन पर कुछ खाना पसंद नहीं करता, मगर रतलाम से गुज़रते हुए पोहा न खाया हो, शायद कभी नहीं हुआ।

'जब वी मेट' देखते हुए मैं यही सोच रहा था कि आपको वाक़ई बुरा लगा होगा। :-)

http://blogvani.com/Default.aspx?mode=blog&blogid=694

chavanni ki post.

http://chavannichap.blogspot.com/2007/10/blog-post_29.html

ise seedhe padh sakte hain.

माना की फ़िल्म कल्पना है, सब कुछ काल्पनिक है.. पर फ़िर शहर का नाम असली लेने की क्या जरूरत थी?? कोई भी काल्पनिक शहर का नाम ले लेते.. जैसे की लगान में "चंपानेर"

ratlam is a city of rajput & their culture. it is very bad thing for us...

ratlam is a city of rajput & their culture. it is very bad thing for us...""""lala"""

Ratlam is well cultured city and famous for NAMKEEN, GOLD, KHOYA, RAILWAY STATION (Due to big junction)ect..... And Jab We Met team show Ratlam like a cheap city........ I thing any social team need to be case on them.....

बेनामी

bilkul sahi dikhaya hai isi ke liye to fams ha rtm

Champaner is also a real village in Madhya Pradesh. Its village of Rajputs....

ANKIT SINGH

don't matter depend on true or false,first attack on mind sometime be confused which watching,hearing you and if by one mistake image copy in your mind then never erase them.....

don't matter that true or false,it be confuse when first time attack any image in your mind and after sometime .....you may accept like imaginary,,,but it 's you can never erase it.

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Ratlam ke Namkeen

Parv Verma

I love ratlam city, the people and food is very awesome there..

Im from delhi but my wish to live in RATLAM for my whole life..

miss you Ratlam

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