रविवार, 25 नवंबर 2007

हिन्दी ब्लॉगिंग के 3 आदम

ताज़ातरीन टिप्पणी विवाद से अनायास बापू के तीन बंदर याद नहीं आ जाते? परंतु ब्लॉगिंग में, खासकर हिन्दी ब्लॉगिंग में वे फिट नहीं होंगे.

हिन्दी ब्लॉगिंग को बापू के 3 बंदरों के परिवर्तित रूप - इन 3 आदमों की खासी आवश्यकता होने लगी है...

bura jo dekhan mai gaya

बुरा मत लिखो, बुरा मत पढ़ो, बुरा मत लिंक करो

तो भइए, अब कहीं कुछ बुरा सा होने लगे हिन्दी ब्लॉगिंग में, तो कट ले. आजू से कटले, बाजू से कट ले. ऊपर से निकल ले.

अब तो, हजारों लिखवाल हैं हिन्दी ब्लॉगजगत् में!

12 blogger-facebook:

  1. आप कहना क्या चाहते हैं? ब्लागिंग बन्द कर दें!

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  2. मतलब कि "सानूं की" कहते हुए खिसक लें!!

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  3. जो तठस्थ है समय लिखेगा उनका भी अपराध.

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  4. रवि भाई, इन गांधी जी के बंदरो का हिसाब किताब रखने के लोगों मे अकल भी तो होनी चाहिए ना। अब तो बस भीड़ है, लिखा पड़ा है हर कोई। वो
    कवि जीतू(?) कह गए है ना :

    ब्लागिंग मन की भड़ास है, लिखे रहो बिंदास
    आज लिखा जो छूट गया, मन रहेगा उदास


    किसी सज्जन को तुकबंदी पसन्द ना आए, पतली गली से निकल लें, बदले मे हमें मूढमति टाइप का टाइटिल ना दिया जाए, अन्यथा अपनी बची खुची इज्जत के लुटने की जिम्मेदारी आपकी स्वयं की होगी।

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  5. बहुत खराब असर हुआ इस पोस्ट का। जीतेंद्र जैसे अच्छे भले चरित्र का आदमी तुकबंदी करने लगा। :)

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  6. एक अच्छी दिशा दिखाई आप ने -- शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
    हर महीने कम से कम एक हिन्दी पुस्तक खरीदें !
    मैं और आप नहीं तो क्या विदेशी लोग हिन्दी
    लेखकों को प्रोत्साहन देंगे ??

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  7. कटने की क्या जरूरत है, अब तो नया तरीका पता चल गया, टिप्पणी करो, अगले दिन मुकर जाओ :)
    कोई दिखाता रहे IP बोल दो - तकनीक का खेल कर दिया मेरे साथ।

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  8. ये तो बन्दर नहीं दरियायी घोड़ा है। आलसी जीव। कोई एक काम करा/न करा लो इससे। तीन ज्यादा है।

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  9. चौथा बंदर भी तो है, "बुरा मत टिपियाओ"

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  10. बन्दरों घोड़ों कि क्या जरूरत है? टिप्पणियों से कौन घबड़ाता है? चिट्ठाकार?

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  11. नरेन्द्र मोदी ने सही कह है की काम करना कठीन है, कीचड़ उछाल कर भाग जाना आसान.

    "सटक" लेना एक इलाज हो सकता है फिर भी सच्चाई के साथ जिना ज्यादा सही रहेगा. जिसे जो करना है करे, हम अपना आपा न खोयें, यही सिखा है विवादों से. कोई मा-भेण एक कर और किसी को नेपकिन कह कर सामाजिक क्रांति लाना चाहता है उन्हे वैसा करने दें, (मेरी शुभकामनाएं उनके साथ सदा है.) आप अपना काम करते रहें, समय सबका मुल्यांकन करेगा.

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  12. चिट्ठा श्रेष्ठ श्री जीतू जी के लिए सादर ,
    बड़े बडों के बीच मे है छोटों की नहिं पूंछ
    आभासी इस खेल मे लगता है सब छूंछ

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