टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

कबाड़ी, भड़ासी और भवानी नामधारी हिन्दी चिट्ठे

 

onlinekachara

बीलेटेड हिन्दी दिवस पर लीजिए पेश है कुछ कबाड़ी, भड़ासी और भवानी टाइप-नामधारी हिन्दी चिट्ठे

 

भीड़ से अलग कुछ करने का, अलग कुछ दिखने का अपना अलग ही मजा है. इसी क्रम में कुछ नेगेटिव आइकन - कुछ ऋणात्मक प्रतीकों जोड़ दिया जाए तो बात और भी बन जाती है.

पिछले कुछ अरसे से हिन्दी चिट्ठों में ऐसे ही, ढेरों की संख्या में कबाड़ी और भड़ासी नामधारी चिट्ठों/चिट्ठाकारों का प्रादुर्भाव हुआ है. इसकी शुरूआत संभवत: पंगेबाज नाम के चिट्ठे/चिट्ठाकार से हुई थी.

अब ये बात जुदा है कि नाम में क्या रखा है और यथा-नाम-विपरीतो-गुणः की तर्ज पर चिट्ठों/चिट्ठाकारों के नाम से उसकी सामग्री का कोई लेना देना भले ही न हो.

आइए, ऐसे ही कुछ चिट्ठों/चिट्ठाकारों पर एक नजर डालते हैं. इनमें से बहुत से चिट्ठे टंबलर के जरिए स्वचालित ढूंढे गए हैं, और हो सकता है कि इनमें से कई अभी चिट्ठा-संकलकों पर दर्ज भी न हों.

  1. बाथरूम सिंगर शो
  2. यूजलेस मी
  3. हिलहिलेरियस.वर्डप्रेस.कॉम
  4. 2वेजिटेरियनिज्म
  5. चिट्ठाचोर (सिर्फ आमंत्रितों के लिए. इसे पढ़ने हेतु आपको इनका निमंत्रण आवश्यक होगा)
  6. शाई-टू-थिंक का डिमाइस-ऑव-लव
  7. नाम में क्या रखा है? तो इस चिट्ठे के नाम MBM 1983 PET 1 का क्या मतलब है?
  8. मेस्त्रोराइटर का माइंड्ज आई
  9. विंडएनर्जीमैन का मेरा दरबार
  10. द प्रिंस ऑफ वर्सिया का वर्जिनियर (मजेदार हास्य कविता की कड़ी – अवश्य पढ़ें)
  11. ब्लास्टटाइम्स
  12. इसेंट्रिक विजन का इन लव विद इंटेलेक्ट
  13. बेवजह
  14. डीमॉन का एटगूगल.ब्लॉगस्पॉट.कॉम
  15. एम्प्टीहेड का गालीनामा
  16. एक जिद्दी धुन
  17. डिसइल्यूजन्ड-मी
  18. नेटगुरू का पोएट्री-ग़ज़ल
  19. ऑनलाइनकचरा
  20. हरकारा का जनज्वार
  21. गत्यात्मकज्योतिष
  22. जानवर/आवारा का तेरेनाम...
  23. मेनइनब्लैक (एमआईबी) का ये क्या हो रहा है
  24. मास्टरक्राफ़्ट्समैन का सेंगुइन विस्ता

--- यूँ तो ऐसे और भी हैं, और इनमें से बहुतेरे हिन्दी के वन-पोस्ट-वंडर ही हैं, पर अभी के लिए सिर्फ इतना ही.

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एक टिप्पणी भेजें

मारक है व्यन्ग्य। कुछ नाम लिए है अलिन्कित । कुछ कहा नही और बहुत कुछ कह भी दिया । बधाई !

संजय बेंगाणी

ताऊ केणा कै चाह रिया है, समझ ना आयी.

क्या ये गर्दिश के तारे हैं?

रवी जी हम तो मस्ती लेने आये थे..वैसे हम से पहले भी यहा बिना नाम के पंगेबाज बहुत थे..जो अब तक उसी मे लगे है ..पहले हम..पहले हम..वाले ..:)

rachna

व्यंग बहुत अच्छा हे

आपको गत्यात्मक ज्योतिष शब्द से चिढ है या ज्योतिष शब्द से या फिर मेरे ब्लोग में प्रकाशित material से .

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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