शनिवार, 25 अगस्त 2007

आपने कभी रतलामी सेव खाया कि नहीं?



रतलामी सेव के स्वाद, उसकी गुणवत्ता के क्या कहने! क्या आपको पता है कि रतलामी सेव को इंटरनेट पर ढूंढते ढूंढते ज्ञानदत्त ब्लॉगर बन बैठे. रतलाम से प्रतिदिन 10 टन से अधिक रतलामी सेव बाहर भेजा जाता है. यहाँ के लोग अपने रोजाना के खाने में सेव-नमकीन इस्तेमाल करते हैं (जिससे जाहिर है, यहाँ हृदय रोगियों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा है). रतलामी सेव से जुड़ी एक और कहानी विष्णु बैरागी अपने ब्लॉग एकोहम पर बता रहे हैं - अपने खास, अलग अंदाज में.

बैरागी जी समेत कुछ लोग मुझे गुरू कहते रहे हैं, और इस बात से मैं हमेशा असहज महसूस करता रहता हूँ. आज के जमाने में कोई भी व्यक्ति गुरू कहलाने पर असहज महसूस करेगा. क्यों सही कहा ना गुरू?

(कारण? नीचे कार्टून काहे नहीं देखते ध्यान से?)

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13 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. "यहाँ के लोग अपने रोजाना के खाने में सेव-नमकीन इस्तेमाल करते हैं जिससे जाहिर है, यहाँ हृदय रोगियों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा है."

    जिनके पास दिल ही न होगा वो क्या खाक बीमार पड़ेंगे. (आपके ऊपर उधारी में एक डिब्बा और शामिल कर लिया है हमने)

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  2. हम तो इस चक्कर में आये कि इलाहाबाद में रतलामी सेव सप्लाई का कोई तरीका मिल जायेगा. अपनी जरूरत २-३ किलो प्रति माह गेलड़ा या जलाराम वाले की है! :)
    चलो सेव नहीं ब्लॉगिन्ग सही!

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  3. रवि जी, क्या याद दिलाई आपने सेंव की। यहाँ हैदराबाद में भी क दुकान ढूंढी हैं (इन्दौर का पेकिंग आता है)

    और हाँ, ’सेव’ की जगह ’सेंव’ होना चाहिये?

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  4. सही है गुरू ।
    मान गये गुरू
    छा गये गुरू

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  5. ना जी नहीं खाया है, आ रहे है रतलाम. मिठाई व नमकिन तैयार रखिये, बहुत उधार हो गई है मिठाई.

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  6. बिलकुल खाया है जी!!

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  7. मुझे सबसे ज्यादा पसंद नमकीन यही है, परन्तु रतलाम में बना हुआ नहीं, बाहर बना हुआ रतलामी सेव। सुना है रतलाम में बनी सेव का जायका कुछ अलग ही होता है।
    सोचता हूँ आपको मेल से पता भेज ही दूँ ताकि....

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  8. जगदीश भाटिया7:15 pm

    जिस दिन आपको आईबिएन पर देख लेंगे समझिये उस दिन हम भी रतलामी सेव खा लेंगे।
    कार्यक्रम का इंतजार रहेगा।

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  9. सेब् बढि़या नमकीन् हैं!

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  10. बिलकुल खाया है!! रोज उस स्वाद को तरसते हैं, लेकिन कमी आप पूरी कर देते है बेहतरीन पोस्ट के जरिये।

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  11. Arpit Seth3:07 pm

    सेंव तो बहुत तरह की खायी है लेकिन रतलाम की खा के दिल खुश हो गया. बहुत सारी अलग-अलग तरह की यहाँ दिल्ली ले कर आया हूँ, और सब घर वालों को भी ख़ूब पसंद आई. आपसे मिलने के बहाने सेंव खाने का भी मौका मिल गया. धन्यवाद आपका.

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  12. हम तो आपको 'गुरू' याने केवल 'गुरू' ही मानते हैं । आप 'ऐसा-वैसा' सोच कर हमें पाप में न डालें ।

    हां, अगली पोस्‍ट रतलामी सेव पर विस्‍तार से दे रहा हूं - जैसा कि आपने निर्देशित किया है ।

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  13. रवि जी आपका ब्लॉग वाकई शानदार हैं. आप हमारे ग्रुप के चैनल पर आने वाले हैं. इसके लिए शुभकामनाये

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