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August, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आपने कभी रतलामी सेव खाया कि नहीं?

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रतलामी सेव के स्वाद, उसकी गुणवत्ता के क्या कहने! क्या आपको पता है कि रतलामी सेव को इंटरनेट पर ढूंढते ढूंढते ज्ञानदत्त ब्लॉगर बन बैठे. रतलाम से प्रतिदिन 10 टन से अधिक रतलामी सेव बाहर भेजा जाता है. यहाँ के लोग अपने रोजाना के खाने में सेव-नमकीन इस्तेमाल करते हैं (जिससे जाहिर है, यहाँ हृदय रोगियों की संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा है). रतलामी सेव से जुड़ी एक और कहानी विष्णु बैरागी अपने ब्लॉग एकोहम पर बता रहे हैं - अपने खास, अलग अंदाज में.बैरागी जी समेत कुछ लोग मुझे गुरू कहते रहे हैं, और इस बात से मैं हमेशा असहज महसूस करता रहता हूँ. आज के जमाने में कोई भी व्यक्ति गुरू कहलाने पर असहज महसूस करेगा. क्यों सही कहा ना गुरू?(कारण? नीचे कार्टून काहे नहीं देखते ध्यान से?)----------Technorati tags: ,

लिनक्स में बारहा कैसे संस्थापित करें

लिनक्स में भी बारहा कुंजीपट आसानी से चलाया जा सकता है. लिनक्स की विशेषता अनुसार, आप इसे कई तरीकों से कर सकते हैं. कुछ तरीकों की चर्चा हम करते हैं – आपको देखना होगा कि आपके लिए कौन सा तरीका उत्तम है. हो सकता है सभी को आजमा कर देखें और जो बेहतर काम करता हो उसे चुनें. पहला तरीका – वाइन के जरिए. वाइन के जरिए विंडोज के लिए जारी बारहा को आप लिनक्स पर भी सेटअप कर चला सकते हैं. अब यदि आप पूछने लगें कि वाइन क्या है, तो फिर आप यह खण्ड छोड़ कर आगे बढ़ सकते हैं. तो, वाइन के जरिए बारहा इंस्टाल करने के लिए बारहा का सेटअप फ़ाइल यहाँ से डाउनलोड करें और उस डिरेक्ट्री में जाकर निम्न कमांड दें - # wine baraha.exeयहाँ, baraha.exe उस फ़ाइल का नाम होगा जो आपने डाउनलोड किया है, जो कि दूसरा भी हो सकता है, और आपको नए या पुराने बारहा में से चलाकर देखना पड़ सकता है कि कौन सा आपके लिए बढ़िया काम करता है. वर्तमान ताजा संस्करण है baraha70.exe. ध्यान रहे कि यदि आपने बारहा को जिप फ़ाइल के रूप में डाउनलोड किया है तो पहले उसे अनजिप कर लें. सेटअप सही चलने पर वाइन मेन्यू में आपको बारहा का प्रतीक मिलेगा. उसे क्लिक करें, …

उबुन्तु लिनक्स में हिन्दी सक्षम कैसे करें

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उबुन्तु लिनक्स सर्वाधिक लोकप्रिय लिनक्स वितरण है. इसमें यदि आपने बूट के समय या संस्थापना के समय हिन्दी विकल्प नहीं चुना हो तो फिर इसके ताजा संस्करण में  हिन्दी इसके ब्राउजर में ठीक से नहीं दिखती तथा हिन्दी कुंजीपट भी डिफ़ॉल्ट से संस्थापित नहीं होता है. जबकि आश्चर्यजनक रूप से गुजराती, पंजाबी इत्यादि भारतीय भाषा के कुंजीपट इसमें मिल जाते हैं. उबुन्तु के पुराने संस्करण 5 में हिन्दी का पूरा समर्थन था.  जो भी हो, थोड़े से प्रयास से उबुन्तु में हिन्दी का पूरा समर्थन लाया जा सकता है. पर इसके लिए आवश्यक है आपके पास आपके कम्प्यूटर में इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए, क्योंकि स्वचालित अपडेट सुविधाजनक होता है. उबुन्तु में हिन्दी समर्थन डालने के लिए निम्न सरल से चरण हैं-: उबुन्तु  Application मेन्यू में क्लिक करें तथा System > Administration > Language Support में जाएं. भाषा समर्थन (लैंगुएज सपोर्ट) डायलाग प्रकट होगा. डायलाग बक्से में Hindi चुनें तथा Click Apply पर क्लिक करें. सुनिश्चित करें कि आपका इंटरनेट कनेक्शन चालू हो.  उबुन्तु का स्मार्ट पैकेज इंस्टालर इंटरनेट पर आपके तंत्र के हिसाब से …

भोपाल में हिन्दी चिट्ठा कार्यशाला

मित्रों, भोपाल में दिनांक 26 अगस्त, रविवार को शाम 4.30 बजे से 7.30 बजे तक हिन्दी चिट्ठाकारी कार्यशाला प्रस्तावित है. कार्यशाला संभवतः दैनिक भास्कर प्रेस स्थल पर आयोजित होगी. तो जो बंधु भोपाल के आसपास के हैं या उस दिन भोपाल आ सकते हैं व अपना स्वयं का हिन्दी चिट्ठा प्रारंभ करना चाहते हैं, या हिन्दी चिट्ठों से संबंधित समस्याएँ सुलझाना चाहते हैं, वे कार्यशाला में सादर आमंत्रित हैं. कार्यशाला में हिन्दी चिट्ठे बनाने की विधि, पुराने हिन्दी फ़ॉन्ट जैसे कृतिदेव इत्यादि से मंगल फ़ॉन्ट में बदलने की विधि व उसे अपने चिट्ठों पर प्रकाशित करने की विधि बताई जाएगी. व इसके लिए आवश्यक मुफ़्त औजार भी उपलब्ध करवाए जाएंगे. अधिक जानकारी के लिए व अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए श्री महेश परिमल, दैनिक भास्कर भोपाल से उनके मोबाइल नं – 99772 76257 से संपर्क करें.-------Technorati tags: , , ,

लिनुस टॉरवाल्ड्स : ‘माइक्रोसॉफ्ट और लिनक्स के बीच डर और नफ़रत के बजाए सम्मान हो’

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लिनुस टॉरवाल्ड्स: “लिनक्स मुझसे बहुत बड़ा है!”
[एशिया की सर्वाधिक लोकप्रिय इलेक्ट्रॉनिक पत्रिका प्रकाशन समूह – (ईएफवाई जो लिनक्स फ़ॉर यू का भी प्रकाशन करती है) के जालस्थल ओपनआइटिस में हाल ही में लिनुस टॉरवाल्ड्स का साक्षात्कार प्रकाशित किया गया है. लिनुस का यह साक्षात्कार इस मामले में उदाहरण योग्य है कि यह किसी भी भारतीय मीडिया को दिया उनका यह बड़ा, वृहद, अब तक का एकमात्र, पहला साक्षात्कार है. साथ ही इसमें पूछे गए प्रश्न ईएफवाई समूह के पाठकों के हैं. ओपनआइटिस से विशेष अनुमति प्राप्त कर इस साक्षात्कार का हिन्दी अनुवाद आपके लिए प्रस्तुत किया जा रहा है. अनुमति प्रदान करने हेतु राहुल चोपड़ा का विशेष धन्यवाद. मूल साक्षात्कार अंग्रेजी में यहाँ देखें. साक्षात्कार को प्रस्तुत किया है – ईएफवाई टाइम्स के सहायक संपादक स्वप्निल भारतीय ने.] ----------- प्र: तमाम विश्व के देशों की तुलना में भारत से सर्वाधिक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर निकलते हैं, फिर भी भारत का योगदान लिनक्स के क्षेत्र में नहीं के बराबर है. उस क्षेत्र में भारतीयों के नहीं जाने के पीछे आपके विचार में क्या कारण हो सकते हैं? भारतीयों को …

साठ साल की ये आजादी आपके लिए क्या मायने रखती है?

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कल एक बढ़िया विज्ञापन (इकानॉमिक टाइम्स का) छपा था. 60 वर्षों की आजादी का अर्थ क्या है? मेरे लिए 60 वर्षों की आजादी कुछ यूँ मायने रखती है – मैं अपना व्यापार व्यवसाय जमाने के लिए आजाद हूँ– ठीक है, लाइसेंस राज कम हुआ है – पर अभी ही किसी चिट्ठे में पढ़ा – एक स्कूल खोलने के लिए आपको 11 लाइसेंस की आवश्यकता अब भी होती है – और उसके लिए आपको आमतौर पर घूंस दिए बिना काम नहीं बनता. लोन लेने के लिए मैं आजाद हूँ – हाँ, ये सही है. कोई पंद्रह साल पहले एक फ्लैट के लिए गृहऋण प्राप्त करने के लिए रतलाम के सभी बैंकों के चक्कर लगाए, किसी ने नहीं दिए तो इंदौर (एचडीएफसी) से फ़ायनेंस करवाया था. आज हालात ये हैं कि एजेंट आपके घर आकर हर संभावित-असंभावित चीजों पर लोन देने को तत्पर रहते हैं. पर, लोन चुकाने के लिए परिस्थितियाँ बदली हैं क्या? आप वहां आजाद हुए क्या? दिवा स्वप्न देखने की आजादी – ये दिवा स्वप्न तो मैं देख ही सकता हूं कि तमाम भ्रष्ट राजनेताओं, गंदी-धर्म-जाति-आधारित राजनीति, छुद्र वोट बैंक को पालती-पोसती राजनीतिक पार्टियों के बावजूद भारत विश्व का नं1 देश बन सकता है.... काम करने की आजादी – ठीक है. नह…

नक़ली मनमोहन सिंह की असली ब्लॉग प्रविष्टि

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नक़ली स्टीव जॉब्स का ब्लॉग बेहद लोकप्रिय हो गया और खबर है कि उसे स्वयं स्टीव जॉब्स और बिल गेट्स भी बड़े चाव से पढ़ते हैं. नक़ली स्टीव का यह ब्लॉग यूं तो एक पैरोडी मात्र है, परंतु पाठकों को कुछ मजेदार-मसालेदार अर्ध-पूर्ण-काल्पनिक-सत्य भी पढ़ने को मिलते हैं. और इसीलिए इसके पाठकों की संख्या लाखों में है. जरा कल्पना कीजिए कि यदि कोई इसी तर्ज पर नक़ली मनमोहन सिंह या नक़ली प्रकाश करात का चिट्ठा लिखने लगे तो? या फिर, कोई नक़ली लालू, मुलायम, मायावती, मोदी का चिट्ठा लिखने लगे तो? और, एक्स्ट्रीम केसेज़ में, शहाबुद्दीन और पप्पू यादव का चिट्ठा लिखने लगे तो? या फिर, कोई नक़ली रविरतलामी का चिट्ठा लिखे तो? वाकई बड़े मजेदार, मसालेदार चीजें पढ़ने को मिलेंगीं. है कि नहीं? **** व्यंज़ल**** अब क्या बताएँ कि क्या नक़ली है आदमी अंदर या बाहर से नक़ली है
चीर के दिखा दिया था जिगर अपना जाने क्यों वो समझते रहे नक़ली है
कर लेंगे इबादतें पहले पता तो चले तेरे ईश मेरे खुदा में कौन नक़ली है
दोस्तों ने चढ़ा लिए हैं मुखौटे फिर पहचानें कैसे असली कौन नक़ली है
जमाना बहुत बदल गया है अब रवि जो असल होता है दिखता नक़ली है
--…

हैवलेट्ट पैकर्ड की तकनीकी अश्रेष्ठता – 2

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अपने इस पोस्ट में मैंने लिखा था कि कैसे मैं एचपी-कॉम्पैक लॅपटॉप मॉडल वी 3225 एयू खरीद कर उल्लू बन गया. आगे अभी समस्या जारी थी. लॅपटॉप कुछ दिन चलाने पर मैंने पाया कि यह लॅपटॉप कुछ ज्यादा ही गर्म हो रहा है. जहाँ प्रोसेसर और हार्डडिस्क की जगह है, वहाँ पर लॅपटॉप का हिस्सा बहुत ही ज्यादा तप रहा था. इतना कि उसे छूना भी मुश्किल हो रहा था. इस बीच मैंने कुछ लाइव लिनक्स x64 संस्करण इस्तेमाल किये तो पाया कि मेरा यह लॅपटॉप अपेक्षाकृत बहुत कम गर्म हो रहा है. जबकि लाइव लिनक्स 32 बिट में लॅपटॉप थोड़ा ज्यादा गर्म हो रहा था. मुझे लगा कि हो न हो यह ज्यादा गर्म होने की समस्या x86 ऑर्किटेक्चर में 32 बिट ऑपरेटिंग सिस्टम चलाने के कारण है. भले ही इसमें बैकवर्ड कम्पेटिबिलिटी हो, परंतु जिस आर्कीटेक्चर के लिए डिजाइन नहीं होने और उसे बल-पूर्वक जबरदस्ती चलाने के कारण संभवतः प्रोसेसिंग पावर ज्यादा लगने के कारण यह ज्यादा गर्म हो रहा है. मैंने इसमें हार्डवेयर के मुताबिक सही सॉफ़्टवेयर डालने का सोचा. यहां पर मेरा एमएसडीएन सब्सक्रिप्शन काम आया और मैंने लॅपटॉप के साथ आए हुए पूर्व संस्थापित विंडो विस्ता होम बेसिक 32 …

निवियो – ऑलवेज़ टर्न्ड ऑन!

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(निवियो में जब आप पहली बार लॉगइन होते हैं तो यह आपके लिए विंडोज पर एक नया उपयोक्ता खाता बनाता है जिसकी सेटिंग आप अपने हिसाब से रख सकते हैं)


ओके, बट यू आर नॉट सो यूजफ़ुल! वैसे तो ब्राउज़र के जरिए ऑलवेज़ टर्न्ड ऑन किस्म के लिनक्स आधारित रिमोट ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास वर्षों पुराना है. ढेरों ऐसे ऑनलाइन वेब अनुप्रयोग (जैसे कि डेस्कटॉप2 , आई ओएस, ग्लाइडडिजिटल, यू ओएस, गूई इत्यादि,) आ चुके हैं और कुछ तो सफल भी हो रहे हैं, परंतु विंडोज़ एक्स-पी आधारित निवियो नाम का इस किस्म का वेब अनुप्रयोग पहला है और अपने किस्म का अनोखा है. इसकी खासियत ये है कि इसे भारतीय प्रमोटरों ने प्रारंभ किया है. अभी यह बीटा संस्करण में है और आम जन के इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया गया है. हाँ, आपको निमंत्रण पाने के लिए इसकी साइट पर पंजीकरण करना होगा. पंजीकरण के पश्चात् कोई महीने भर में आपको इसका निमंत्रण प्राप्त हो जाता है. मुझे इसका निमंत्रण प्राप्त हुआ तो मैंने सोचा कि चलो इसकी थोड़ी सी जांच परख कर ली जाए.निवियो पर आपको एक उपयोक्ता खाता बनाना होता है जो कि विंडोज एक्सपी के रिमोट डेस्कटॉप के रूप में लॉगइन करने देत…

मेरी व्यवसायिक चिट्ठाकारी का एक (सफल?) साल ...

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पिछले वर्ष, आज ही के दिन, मैंने अपने कदम पूर्ण व्यवसायिक चिट्ठाकारी की दुनिया में रखे थे. मैंने चिट्ठाकारी की शुरुआत ब्लॉगर के इसी चिट्ठे से की थी, पर बीच में कुछ अरसा वर्डप्रेस हिंदिनी पर छींटें और बौछारें में लिखता रहा था. परंतु हिंदिनी की प्रतिबद्धता में व्यवसायिकता का स्थान नहीं होने के कारण मैं वापस अपने पुराने चिट्ठे – यानी इसी चिट्ठे पर आ गया था. उस वक्त मेरा प्रेरणा स्रोत रहा था सृजनशिल्पी जीरमण जी के चिट्ठा पोस्ट जिसमें हिन्दी चिट्ठाकारी के व्यवसायिक होने-न-होने पर बड़ी अच्छी बहस की गई थी. हालांकि मेरे उक्त कदम को कई मित्रों ने सहजता से स्वीकार नहीं किया था और, संभवतः वह नाराजगी अभी भी बनी ही हुई है. शुरुआत में मेरे चिट्ठों में विज्ञापनों की बौछार देख कर मेरे कई पाठक बिदक भी गए थे. फ़ुरसतिया जी तो हमेशा मौज लेते रहे और उन्होंने कोई मौका छोड़ा भी नहीं – वे कहते रहे - रतलामी जी के चिट्ठे पर विज्ञापन के बीच पोस्ट है या पोस्ट के बीच विज्ञापन, यह तय करने में किसी बड़े शोधकर्ता को भी पसीना आ जाएगा. परंतु, ये बात भी तय है कि (अंग्रेज़ी के) कुछ महा सफल (व्यवसायिक ही!) ब्लॉगरों …

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