गुरुवार, 19 जुलाई 2007

कॉमबूस्ट और ऑर्ट-अटैक

 

फ़ालतू की पैकिंग सामग्री की सहायता से रेखा ने जब एक बढ़िया सा गुलदान बनाया और फिर उसे घर की छत पर रखे असंख्य गमलों में उगे नन्हे-नन्हे पौधों के सुन्दर-सुन्दर फूलों से सजाया तो मुझे लगा कि इस गुलदान की सर्जनात्मकता व सुंदरता को आप सभी से बांटा जाए.

इस गुलदान का एकाध फोटो यहाँ लगाकर इतिश्री करने का विचार था, मगर इसी बीच एक नए, नायाब किस्म के फोटो-अपलोड-फोटो-स्लाइड-शो सेवा – कॉमबूस्ट के बारे में पता चला तो सोचा कि चलो इसे क्यों न आजमाया जाए. गुलदान का निम्न स्लाइड शो इसी सेवा से बनाया गया है.

Album powered by ComBoost zooms: 1 2

आप देखेंगे कि स्लाइड शो में गति को कम ज्यादा करने व ट्रांजीशन प्रभाव को बदलने के लिए ठीक यहीं पर ही पाँच विकल्प दिए गए हैं. यदि आप एक्टिव एक्स और जावा प्रोग्राम अपने कम्प्यूटर में चलने की इजाजत देते हैं तो कॉमबूस्ट में आप पचास फोटो (अधिकतम एक बार में 100 मेबा) को एक साथ, और बड़ी ही तीव्रता से – जैसा कि आप फ़ाइल मैनेजर से फ़ाइल ट्रांसफर करते हैं - अपलोड कर सकते हैं. व चाहे कितने ही फोटो अपलोड कर सकते हैं. व पारंपरिक रूप से भी एक-एक कर फोटो अपलोड कर सकते हैं.

कॉमबूस्ट प्रीमियम सेवा में और भी सेवाएँ अंतर्निमित हैं – आप एजेंडा बना सकते हैं, गैलरी बनाकर टाँग सकते हैं.

कॉमबूस्ट फोटो अपलोड व ऑनलाइन फोटो भंडारण सेवा इस्तेमाल में आसान है पंजीकरण दो-चरण युक्त है – आपको ईमेल के जरिए पुष्टि करना होगी. पंजीकृत होने के पश्चात् आप सीधे ही अपने फोटो कॉमबूस्ट में अपलोड कर सकते हैं. फिर उसे किसी एलबम में व्यवस्थित कर उसका स्लाइड शो बना सकते हैं और उसका कोड प्राप्त कर अपने चिट्ठे में लगा सकते हैं. हाँ, इसके इंटरफेस में कुछ बटन संभवतः फ्रांसीसी भाषा में आते हैं – पता नहीं क्यों!

अपने डिजिटल कैमरे से खींचे गए असंख्य, अनगिनत फोटो को इंटरनेट पर टांगने और उसे दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का मुफ़्त और आसान तरीका. आपको और क्या चाहिए?

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चिट्ठाजगत् चिप्पियाँ: कॉमबूस्ट , ऑर्टअटैक , comboost , artattack

3 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. अब बताईये अगर हम आपको गुरू कहते हैं तो क्‍या ग़लत कहते हैं । सच है ना दोस्‍तो

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  2. बहुत सुन्दर कलाकृतियाँ बनी हैं, बेकार कचरे में से भी इतनी सुन्दर चीजें बनाई जा सकती है, जानकर अच्छा लगता है। रेखाजी (भाभीजी) तो कलाकार हैं यह शायद उनके बस की ही बात है।
    ऐसी ही कलाकृतियाँ रत्नाजी ने भी बना कर एक बार अपनी पोस्ट पर बताई थी।
    http://soniratna.wordpress.com

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  3. think of the devil and--. लीजिए हम आ गए. आपका और भाबी जी का प्रयास दोनों ही सुपरब। हालाकि आपकी बात ज्यादा पल्ले नहीं पड़ी पर आपकी है तो दी बेस्ट होगी ही।

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